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India Katılım Mart 2012
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं, वो मुझ से रूठे तो थे लेकिन इस क़दर भी नहीं !! निगाह-ए-शौक़ सर-ए-बज़्म बे-हिजाब न हो, वो बे-ख़बर ही सही इतने बे-ख़बर भी नहीं !! ये अहद-ए-तर्क-ए-मोहब्बत है किस लिए आख़िर, सुकून-ए-क़ल्ब उधर भी नहीं इधर भी नहीं !! ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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Chhotu
Chhotu@viv2it·
@TataMotors @Tataev @TataMotors_Cars It’s been over 2 months since I booked my EV, and I still haven’t received any update on the expected delivery date. The dealership is unable to provide any clear timeline either. Kindly provide a clear update on my expected delivery timeline.
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
अजीब शख़्स था बारिश का रंग देख के भी , खुले दरीचे पे इक फूल-दान छोड़ गया !! जो बादलों से भी मुझ को छुपाए रखता था , बढ़ी है धूप तो बे-साएबान छोड़ गया !! न जाने कौन सा आसेब दिल में बस्ता है, कि जो भी ठहरा वो आख़िर मकान छोड़ गया !! अक़ब में गहरा समुंदर है सामने जंगल , किस इंतिहा पे मिरा मेहरबान छोड़ गया !! ~ परवीन शाकिर
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Saba
Saba@_Baad_e_Saba·
मिरी कहानी तिरी कहानी से मुख़्तलिफ़ है कि जैसे आँखों का पानी, पानी से मुख़्तलिफ़ है ये झील आँखें हमें जो पैग़ाम दे रही हैं वो तेरे होंटों की तर्जुमानी से मुख़्तलिफ़ है तिरी जुदाई का हादसा ऐसा हादसा है जो हर हक़ीक़त से हर कहानी से मुख़्तलिफ़ है - अज़हर अब्बास मुख़्तलिफ़ - अलग
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
याद होता है सबक़ ख़ूब ये दोहराने से, एक दिन झूट को सच मान लिया जाएगा !! ~ मुरलीधर तालिब #jhoot #ek_ek_boond_samundar
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साहित्य अड्डा
मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँ मैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ अभी न कर मिरी तश्कील मुझ को नाम न दे तिरे वजूद से बाहर में किस शुमार में हूँ मैं एक ज़र्रा मिरी हैसियत ही क्या है मगर हवा के साथ हूँ उड़ते हुए ग़ुबार में हूँ बस आस-पास ये सूरज है और कुछ भी नहीं महक रहा तो हूँ लेकिन मैं रेगज़ार में हूँ ~ आदिल मंसूरी / मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
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Shakeel Azmi
Shakeel Azmi@PoetShakeelAzmi·
आंखें खुलते ही मैं पलकों से गिरा टूट गया मैं भी इक ख़्वाब हूं ताबीर से पहले वाला मेरे मलबे में दबे हैं कई रुहों के बदन मैं हूं इक घर नई तामीर से पहले वाला - शकील आज़मी
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
उजाला कैसा उजाले का ख़्वाब ला न सके, सहर से माँग के हम आफ़्ताब ला न सके !! हम अपने चेहरा-ए-बे-दाग़ के लिए ऐ अक़्ल, तिरी दुकान से कोई नक़ाब ला न सके !! ज़मीं की बात ज़मीं की ज़बाँ में कहना थी, हम आसमान से कोई किताब ला न सके !! ~ एज़ाज़ अफ़ज़ल
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Shakeel Azmi
Shakeel Azmi@PoetShakeelAzmi·
किसी काग़ज़ किसी तहरीर से पहले वाला गुमशुदा शेर हूं मैं मीर से पहले वाला मुझको इक दिन बड़ा फनकार कहेगी दुनिया मैं अमिताभ हूं ज़नजीर से पहले वाला कैमरे खा गए पहचान भी अब उसकी शकील वो जो इक शख़्स था तस्वीर से पहले वाला - शकील आज़मी
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
Murlidhar (مرلی دھر طالب)@MurlidharTaalib·
मिरी दास्तान-ए-हसरत वो सुना सुना के रोए, मिरे आज़माने वाले मुझे आज़मा के रोए !! तिरी बेवफ़ाइयों पर तिरी कज-अदाइयों पर, कभी सर झुका के रोए कभी मुँह छुपा के रोए !! जो सुनाई अंजुमन में शब-ए-ग़म की आप-बीती कई रो के मुस्कुराए कई मुस्कुरा के रोए !! ~सैफ़ुद्दीन सैफ़
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
ये अश्क और ये दर्द-ओ-अलम कहाँ जाएँ हमारे दिल में न ठहरें तो ग़म कहाँ जाएँ ॥ ख़ुदा बनाके हमें कह दिया ख़ुदा हाफ़िज़ अब इस मक़ाम से हम एक-दम कहाँ जाएँ ॥ जहाँ को छोड़के हम ख़ुद की ओर आए थे अब इस बदन में भी घुटता है दम, कहाँ जाएँ॥ उदास रहते हैं अब शे'र भी नहीं कहते सवाल करते हैं काग़ज़-क़लम, कहाँ जाएँ ॥ ~ जगजीत काफ़िर
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Saba
Saba@_Baad_e_Saba·
आँखों से मिरी इस लिए लाली नहीं जाती यादों से कोई रात जो ख़ाली नहीं जाती अब उम्र न मौसम न वो रस्ते कि वो पलटे इस दिल की मगर ख़ाम-ख़याली नहीं जाती हमराह तिरे फूल खिलाती थी जो दिल में अब शाम वही दर्द से ख़ाली नहीं जाती - वसी शाह
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
वो जो इक शर्त थी वहशत की उठा दी गई क्या, मेरी बस्ती किसी सहरा में बसा दी गई क्या !! वही लहजा है मगर यार तिरे लफ़्ज़ों में, पहले इक आग सी जलती थी बुझा दी गई क्या !! पाँव में ख़ाक की ज़ंजीर भली लगने लगी, फिर मिरी क़ैद की मीआद बढ़ा दी गई क्या !! ~ इरफ़ान सिद्दीक़ी
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
तामीर-ए-ज़िंदगी में यूँ दिन रात कट गए, गर्दन तो बच गई प’ मिरे हाथ कट गए !! ख़ुश होते हैं वो गमले में खिलने पे एक फूल, जिनके मकानों के लिए बाग़ात कट गए !! तन्हाई हमकलाम मिरे थी सो इस तरह तन्हाई से भरे हुए लम्हात कट गए !! ~ मुरलीधर तालिब
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शब्द शक्ति 😊
चलते रहिये ये हमे लेकर जिधर जाते है , ख्वाब अगर आंखों ही में रहे तो मर जाते है .. दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं , ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं ..!! ~ जावेद अख्तर 🌻
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
Murlidhar (مرلی دھر طالب)@MurlidharTaalib·
या तो क़ुबूल कर मेरी कमज़ोरियों के साथ या छोड़ दे मुझे मेरी तनहाइयों के साथ !! लाज़िम नहीं कि हर कोई हो कामयाब ही जीना भी सीख लीजिए नाकामियों के साथ !! जद्दो-जहद में जोश था जीने का लुत्फ़ था मुश्किल में पड़ गया हूँ मैं आसानियों के साथ !! ~ दी़क्षित दनकौरी
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Saba
Saba@_Baad_e_Saba·
थक गए हो तो थकन छोड़ के जा सकते हो तुम मुझे वाक़ि'अतन छोड़ के जा सकते हो हम दरख़्तों को कहाँ आता है हिजरत करना तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो तुम से बातों में कुछ इस दर्जा मगन होता हूँ मुझ को बातों में मगन छोड़ के जा सकते हो - अम्मार इक़बाल
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
Murlidhar (مرلی دھر طالب)@MurlidharTaalib·
लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे, महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे !! देखो तुम आज मुझ को बुझाते तो हो मगर, कल ढूँढती फिरेगी बहुत रौशनी मुझे !! क्यूँ कर रही है मुझ से सवालात ज़िंदगी, कह दो जवाब की नहीं फ़ुर्सत अभी मुझे !! ~ अली अहमद जलीली
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
Murlidhar (مرلی دھر طالب)@MurlidharTaalib·
साँसें ख़ुश्बू यार समंदर बाँहों के उस पार समंदर !! पानी पानी हो जाऊँगा ट, कर न दें इंकार समंदर !! इक पत्थर को ले डूबेगा, आख़िर तेरा प्यार समंदर !! साक़ी तेरे जैसा हो तो, पी जाएँ मय-ख़्वार समंदर !! इतने गहरे क्यूँ होते हैं ग़म ,धोके, अश्आर,समंदर !! ~ नदीम राजा
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Murlidhar (مرلی دھر طالب)
Murlidhar (مرلی دھر طالب)@MurlidharTaalib·
मसनद-ए-ख़ाक पे बैठे हैं बिठाने वाले क्या 'अजब लोग हैं दरबार सजाने वाले !! क्या मिरे साथ अभी और भी कुछ होना है आए बैठे हैं मुझे अपना बनाने वाले !! तिरी निय्यत पे भरोसा नहीं कर सकता मैं सामने सब के यूँही अश्क बहाने वाले !! ख़ाल-ओ-ख़द कुछ हैं अदा कुछ है तकल्लुम कुछ है ऐसे होते हैं कहाँ लोग ज़माने वाले !! ~ शहज़ाद बेग
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