Chhotu retweetledi
Chhotu
12.6K posts


@TataMotors @Tataev @TataMotors_Cars It’s been over 2 months since I booked my EV, and I still haven’t received any update on the expected delivery date. The dealership is unable to provide any clear timeline either. Kindly provide a clear update on my expected delivery timeline.
English
Chhotu retweetledi

अजीब शख़्स था बारिश का रंग देख के भी ,
खुले दरीचे पे इक फूल-दान छोड़ गया !!
जो बादलों से भी मुझ को छुपाए रखता था ,
बढ़ी है धूप तो बे-साएबान छोड़ गया !!
न जाने कौन सा आसेब दिल में बस्ता है,
कि जो भी ठहरा वो आख़िर मकान छोड़ गया !!
अक़ब में गहरा समुंदर है सामने जंगल ,
किस इंतिहा पे मिरा मेहरबान छोड़ गया !!
~ परवीन शाकिर
हिन्दी
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi

याद होता है सबक़ ख़ूब ये दोहराने से,
एक दिन झूट को सच मान लिया जाएगा !!
~ मुरलीधर तालिब
#jhoot #ek_ek_boond_samundar
हिन्दी
Chhotu retweetledi

मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँ
मैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ
अभी न कर मिरी तश्कील मुझ को नाम न दे
तिरे वजूद से बाहर में किस शुमार में हूँ
मैं एक ज़र्रा मिरी हैसियत ही क्या है मगर
हवा के साथ हूँ उड़ते हुए ग़ुबार में हूँ
बस आस-पास ये सूरज है और कुछ भी नहीं
महक रहा तो हूँ लेकिन मैं रेगज़ार में हूँ
~ आदिल मंसूरी / मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
हिन्दी
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi

ये अश्क और ये दर्द-ओ-अलम कहाँ जाएँ
हमारे दिल में न ठहरें तो ग़म कहाँ जाएँ ॥
ख़ुदा बनाके हमें कह दिया ख़ुदा हाफ़िज़
अब इस मक़ाम से हम एक-दम कहाँ जाएँ ॥
जहाँ को छोड़के हम ख़ुद की ओर आए थे
अब इस बदन में भी घुटता है दम, कहाँ जाएँ॥
उदास रहते हैं अब शे'र भी नहीं कहते
सवाल करते हैं काग़ज़-क़लम, कहाँ जाएँ ॥
~ जगजीत काफ़िर
हिन्दी
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi
Chhotu retweetledi

मसनद-ए-ख़ाक पे बैठे हैं बिठाने वाले
क्या 'अजब लोग हैं दरबार सजाने वाले !!
क्या मिरे साथ अभी और भी कुछ होना है
आए बैठे हैं मुझे अपना बनाने वाले !!
तिरी निय्यत पे भरोसा नहीं कर सकता मैं
सामने सब के यूँही अश्क बहाने वाले !!
ख़ाल-ओ-ख़द कुछ हैं अदा कुछ है तकल्लुम कुछ है
ऐसे होते हैं कहाँ लोग ज़माने वाले !!
~ शहज़ाद बेग
हिन्दी


