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@your_lost_love

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लाल कोठी Katılım Eylül 2020
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जो शख़्स तुझको चाहता था वो अश्क बहाकर चला गया मैं तो ख़िंज़ा का एक शजर हूँ वक़्त ने सुखाकर चला गया अब कभी नहीं आएगी बहार मेरे अक्स ने बताकर चला गया मेरे जिस्म में अब जान नहीं है ये ज़ख़्म में नहाकर चला गया एक चाँद से है मेरा ताल्लुक जो रश्क में जलाकर चला गया #बज़्म
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🦋forever chahat🦋
🦋forever chahat🦋@Chahak__soni_pc·
मैं एक दिन घर से अकेले भाग जाऊंगी . और लास्ट कॉल बाबू को लगा जाऊंगी . अब बाबू जाने और मेरे घरवाले 🤣🤣
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ईरान को 100अरब डॉलर देना चाहिए या उस पैसे से ईरान के खिलाफ़ लड़ना चाहिए?यदि ईरान परमाणु निरस्त्रीकरण पर हस्ताक्षर करना चाहता है किन्तु परमाणु कार्यक्रम चालू रखना चाहता है इससे अमेरिका को क्या आपत्ति है? यदि परमाणु कार्यक्रम के बहाने परमाणु हथियार बनाया तो ऐसे ही युद्ध निश्चित है।
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#बज्म ®️
#बज्म ®️@Officeofbazm·
बज़्म काव्यमंच दैनिक प्रतियोगता 🗓️ दिनांक 5/5/2026 ✍️ विषय – #आँखों_आँखों_में चाहे कविता हो, ग़ज़ल हो, लघुकथा हो या मुक्तक दिल की धरकनों को कागज़ पर उतरने दीजिए। 🔗 हमारी कम्युनिटी से जुड़ें x.com/i/communities/
#बज़्मकाव्यमंच@BazmKavyamanch

#बज़्म_काव्य_मंच में आज 5/5/2026 का दैनिक विषय - #आँखों_आँखों_में कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।

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#बज़्मकाव्यमंच
#बज़्म_काव्य_मंच में आज 5/5/2026 का दैनिक विषय - #आँखों_आँखों_में कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।
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Dinesh Kumar
Dinesh Kumar@DineshRedBull·
नर्तकी और सांड के बीच का रिश्ता एक ऐसे जीवन का प्रतीक है, जो तीव्र भावनाओं से भरा होता है, जहाँ जुनून और खतरा साथ-साथ चलते हैं… और कभी-कभी एक एहसास ही सब पर भारी पड़ जाता है।
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Ashok Mushroof
Ashok Mushroof@AMushroof·
ग़ज़ल -- रदीफ़: “ला सकते हैं” पानी आँख में भर कर मुस्कान ला सकते हैं, टूटे लम्हों में भी थोड़ी सी जान ला सकते हैं। ख़ाक़ होते हुए दिल में अरमान ला सकते हैं, हम अंधेरे में उजाले का गुमान ला सकते हैं। ज़ख़्म गहरे सही, उनका मरहम ला सकते हैं, खुद को समझा नया इक जहान ला सकते हैं। शहर सूखा है,पानी आसमान से ला सकते हैं, प्यासे लबों पर उम्मीद की तान ला सकते हैं। हार मानें नहीं तो,तरीक़ा आसान ला सकते हैं, अपने हालात में थोड़ा तो इम्कान ला सकते हैं। दिल बिखर जाय हिम्मत से जान ला सकते हैं, अपनी ख़ामोशियों में भी बयान ला सकते हैं। दर्द चाहे जो मिले,उसमें भी शान ला सकते हैं, हम तो वीरां सफ़र में भी कारवाँ ला सकते हैं। कोशिश करें तो, फ़िर से पहचान ला सकते हैं, ख़ुद को खोकर नया एक इंसान ला सकते हैं। #अशोक_मसरूफ़ Pic credit Pinterest
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ER Manoj
ER Manoj@enggmanoj1979·
कोई ये कहे कि मै किसी पे निर्भर नहीं हूं शायद गलतफहमी में है यकीन न हो आप खुद विश्लेषण कर सकते है निर्भर हर इंसान , पशु, पंछी, चर, अचर सब है .. 🤔
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आप वैज्ञानिक, नेता, अभिनेता, अभिनेत्री, संगीतकार, गीतकार,कवि,लेखक, मंत्री, दार्शनिक, अभियंता, अधिकारी हो सकते हैं किन्तु गारंटी नहीं है कि आप एक सफल प्रेमी/प्रेमिका हो जाएं।
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#बज़्मकाव्यमंच
#बज़्म_काव्य_मंच में आज 4/5/2026 का दैनिक विषय - #सफ़र कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।
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Ashok Mushroof
Ashok Mushroof@AMushroof·
ग़ज़ल -- किसी भी बात में पहले सा मज़ा रहा नहीं है, तुम्हारे बाद दिल ये अच्छा भला रहा नहीं है। ये सारा शहर शोर से भर तो गया हरसू मग़र, जज़्बा प्यार का दिल में किसी के रहा नहीं है। वे जो वादों की किताबें हुआ करती थीं कभी, उनमें अब एक का भी पता कहीं रहा नहीं है। हंस कर मैं अपने दर्द को छुपा लेता हूँ ज़रूर मग़र सच ये कि दिल अंदर से हँसता नहीं है। तेरी यादों का मौसम भी अब बदल गया है यूँ, आसरा पहले सा दिल में मेरे अब रहा नहीं है। जो साथ चलते थे हर मोड़ पर बन हमदम मेरे, उनमें से तो अब नज़र में भी कोई रहा नहीं है। ये दिल भी थक के अब ख़ामोश हो गया जैसे, किसी को हाल सुनाने का हौसला रहा नहीं है। हरसू -- हर तरफ़ जज़्बा -- भाव #अशोक_मसरूफ़ pic credit Pinterest
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चल ग़ालिब बनने की कोशिश न कर वो गुज़रे ज़माने की बात है #बज़्म
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ग़ालिब भी गया था दूसरी मोहब्बत से मिलने दिवानी को यक़ीन न हुआ कब रूख़सत हुई #बज़्म
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दो कदम चलते हैं बेमक़सद इश्क़ में कदम फिसल जाते हैं जब बहने लगते हैं ज़ज्बात में तब क़दम ख़ुद मचल जाते हैं कहते हैं दुनिया रंग बदलती है सच में हम ख़ुद ही बदल जाते हैं #बज़्म
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Rao...
Rao...@Rao_book·
@your_lost_love मेरी आवारगी है तू ये अच्छा है वाह 👏🏼
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मेरी ज़िन्दगी है तू साथी मेरी बंदगी है तू बेशुमार मोहब्बत की मेरी दिवानगी है तू इश्क़ की ताज़गी है तू मगर सादगी है तू मेरा बाबू सोना और मेरी आवारगी है तू #बज़्म
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Rao...
Rao...@Rao_book·
वो सारे एब शामिल तुझमें हैं , जो खुबसूरती से जुड़े होते हैं।। ✍🏻 राव #ऋः
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Ashok Mushroof
Ashok Mushroof@AMushroof·
हक़ीक़त की जमीं से बज़्म ए अंजुम पर निशाने वाले, छोड़ के सहरा में मुझे तन्हा घर ऊफ़क़ पे बनाने वाले, किस भरोसे लाया था तू मुझे इस रंगों बू की दुनिया में, दिल के ख़्याबानशीं पर गुलों को हर रोज़ सुखाने वाले। ऊफ़क़-- क्षितिज ख़्याबानशीं -- फूलों की सेज #अशोक_मसरूफ़ #गीतमाला
गीतमाला‏گیتمالا@mK2yKgwbGz2R2Aq

यारों सब दुआ करो 💕 Singer #रामशंकर जी हैं जिनके पिता #शंकर व चाचा #शंभू एक प्रसिद्ध सूफ़ी गायक थे जिनका संबंध U.P. के जिला #Aligarh से था, दोस्तों जो भी पसंदीदा #song #shayri लिखें उसके #singer या #writer का एक छोटा सा परिचय अवश्य दें,#स्वरचित होतो अपना? #चित्रपट 🎧#गीतमाला

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