alpesh dhakta
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1. ChatGPT = कोई भी प्रॉब्लम सॉल्व करें
2. PicWish = बैकग्राउंड हटाएं
3. Descript = पॉडकास्ट एडिट करें
4. Perplexity = किसी भी चीज़ पर रिसर्च करें
5. ElevenLabs = आवाज़ों को क्लोन करें
6. Gama = डॉक्यूमेंट डिज़ाइन करें
7. Suno = म्यूज़िक बनाएं
8. Runway = वीडियो एडिट करें
9. Canva = ग्राफ़िक्स डिज़ाइन करें
10. RecCloud = YouTube को समराइज़ करें
11. Grammarly = परफेक्ट राइटिंग
इसे सेव कर लें, यह काम आ सकता है...see more
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@tejasmajithiya5 એમને વિરોધ કર્યો એટલે છૂટી ગયા...પણ ગુરુજનો તો બાપડા બિચારા બીકણ એટલે કશું બોલ્યા વગર એ ભી કરી લે છે...
GU
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स्त्रियाँ भाँप लेती हैं
पुरुष जो भी कहते या करते हैं,
उनके पीछे की कहानीयाँ स्त्रियाँ
भाँप लेती हैं।
जब मुखर हो कर पुरुष करते हैं
तारीफ़, या लगाते हैं मक्खन
या करते हैं मनाने की भरसक कोशिश
उनके पीछे की मनमानियाँ,
स्त्रियाँ भाँप लेती हैं।
वो भाँप लेती हैं, हर अनकहा सच
जब भीतर सैलाब लिए फिरने
लगते हैं पुरूष।
वो भाँप लेती
हर कहा गया झूठ,
जिसे कहते समय
गला सूखता है उनका
और बेफ़िक्री वाली हँसी से
वे ढाँपते हैं भीतर की विकलता।
स्त्रियाँ पुरुषों के चेहरे पढ़ लेती हैं।
वो पढ़ लेती हैं-
माथे की लकीरों में आई सिलवटें,
चढ़ी हुई त्योरियाँ, अतीत की
झाइयाँ,
भविष्य की परछाइयाँ,
आँखों की तेज़ी या नमी,
होंठों पर रखी गई तरह-तरह की मुस्कानें
और उन मुस्कानों में छिपे ख़्याल,
स्त्रियाँ भाँप लेती हैं।
वो बिना भाव के सपाट चेहरों पर
थर्राती आवाज़ें।
सपाट चेहरों
और सधी हुई आवाज़ों में
लरजती हुई तेज़ या मद्धम धड़कनें,
प्रवाह जैविक है या अजैविक?
जो धार चली आ रही है,
उस बहाव का ताप लेती हैं।
हाँ! स्त्रियाँ भाँप लेती हैं।
सुन लेती हैं पेट की गुड़गुड़,
और थाली सजा देतीं हैं।
वक़्त और स्थिति समझ,
चाय पहले ही चढ़ा देतीं हैं।
पुरुषों की तत्काल ज़रूरतों का ही नहीं,
उनकी संभावित ज़रूरतों का भान लगा लेती है।
निभातीं है
अपने साथी के संग भूमिकाएँ
अनगिनत।
मित्र, पत्नी या माँ कब होना है?
स्त्रियाँ भाँप लेती हैं।
रहें चुपचाप तो ठगी जाती हैं,
और बोल दें मन का सच,
तो कटघरे में लाई जाती हैं।
चाहे जो भी हो,
स्त्रियाँ जब प्रेम में होतीं हैं भाँप लेती है।
स्त्रियाँ जब प्रेम में नहीं होतीं,
तब भी भाँप लेती है।
चढ़ती-उतरती प्रतिक्रियाएँ, आचार-विचार, संचार
और रिश्ते में पनपता हर नवाचार, वो हमेशा भाँप ही लेतीं हैं।
फिर भी चुनती हैं अपने लिए वही पुरुष जिसे सौंपा मन,
किया आत्मसमर्पण, दिया सर्वस्व।
बार-बार हर बार भाँपती हैं सब कुछ
फिर भी चुनती हैं।
इसलिए नहीं कि विकल्प नहीं,
बल्कि इसलिए कि वे थक चुकी होतीं हैं,
ठगे जाने से,
कटघरे में आने से,
झूठ बोले जाने से;
वे थक चुकी होती हैं विकल्प खोजते-खोजते,
वे थक चुकी होती हैं,
भाँपते-भाँपते।
और जब
भाँपने के मायने भी झुठलाए जाने
लगते हैं,
तब वो समय भाँप लेती है जाने का,
काटने लगतीं हैं धागे,
समेटने लगतीं हैं ऊर्जा।
स्त्रियाँ सामान बहुत बाद में समेटतीं है।
स्त्रियाँ सबसे पहले भाँपती हैं, तापती हैं, मापती हैं।
स्त्रियाँ जाने से बहुत पहले जा
चुकी होतीं है
मगर स्त्रियाँ फिर भी ठहरतीं हैं,
एक आस के सहारे।
जिस रोज़ वो आस आखिरी साँस लेती है,
उससे कहीं पहले स्त्रियाँ भाँप लेती हैं।
क्योंकि स्त्रियाँ भाँप लेती है ....
#सरलसरिता

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@Storytellerrr_ बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि ईमानदारी सच्चाई की सिर्फ किताबों में अच्छी लगती है बाकी जमाना झूठ फरेब रिश्वत लूट का ही है।।।पिसता बस आम इंसान है
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आज Republic Day की तारीख में भी मन उदास हो जाता है जब सोचता हूँ कि हमारा देश कितना आगे बढ़ा है, लेकिन corruption ने हमें कितना पीछे खींच रखा है। ये कोई नई बात नहीं, लेकिन आज ये peak पर पहुँच चुका लगता है – हर गली, हर दफ्तर, हर अस्पताल, हर स्कूल में।
कल्पना करो, एक गरीब आदमी को सरकारी अस्पताल में दवा चाहिए, लेकिन डॉक्टर कहता है 'private clinic आओ, वहाँ मिलेगी। वजह? कमीशन। स्कूल एडमिशन के लिए donation मांगते हैं, सरकारी स्कूल में भी under table पैसा। RTO में license बनवाने जाओ, बिना 'speed money' के फाइल नहीं हिलती। पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करानी हो, पहले 'chai pani'। Land registry करवाओ, mutation के नाम पर लाखों का cut...
और ऊपर? Politics में चुनाव लड़ने के लिए सैकड़ों करोड़ लगते हैं, वो पैसा कहाँ से आता है? विकास के नाम पर फंड्स से commission, freebies के नाम पर taxpayer का पैसा vote bank में बंटता है। Judiciary में cases सालों दशकों लटकते हैं, अमीरों को आसानी से bail, गरीब इंतजार में मर जाते हैं। Bureaucracy में file move कराने के लिए bribe routine है , IAS से लेकर clerk तक।
Infrastructure देखो, सड़कें inauguration के बाद 6 महीने में गड्ढों से भर जाती हैं। Bridges collapse हो जाते हैं। क्यों? क्योंकि contract में 30-50% cut common है, बाकी substandard material से काम होता है। Healthcare में COVID जैसी महामारी में oxygen black marketing हुआ था, आज भी schemes के नाम पर loot मचती है। Business करने वालों को inspectors 'inspection' के बहाने hafta मांगते हैं। Big level पर scams, electoral bonds से anonymous donations, NPAs में बैंकों की लूट, unexplained assets।
Transparency International के Corruption Perceptions Index 2024 में भारत 180 देशों में 96वें नंबर पर है, score सिर्फ 38/100। मतलब दुनिया भर में perceived corruption बहुत high। लेकिन ground reality इससे भी ज्यादा bitter है , हम सब रोज इसका सामना करते हैं।
हम जानते हैं ये सब, फिर भी चुप क्यों? क्योंकि 'system' ऐसा बन गया है कि बिना bribe के survive मुश्किल। लेकिन सोचो, अगर हम चुप रहे, तो हमारे बच्चे भी यही system में जीएंगे, bribe दो, चुप रहो, बस गुजारा करो।
क्या वक्त नहीं आ गया change का?
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@tejasmajithiya5 પછી એ વખતે ફરી થી વકીલ હાજર રહેશે એટલે ફરી નવી તારીખ આવી જશે...2012 થી આવું જ ચાલે છે....ખુશ થવાનું થતું જ નથી
GU

@nidhirpatel6 મોબાઈલ અને સોશ્યલ મીડિયા નો બેફામ ઉપયોગ ને લીધે ...સ્ટેટસ મૂકવા સ્ટોરી મૂકવા માટે અડધો કલાક ચગાવશે
GU


















