ทวีตที่ปักหมุด

•महाराष्ट के Gen Z देवव्रत महेश रेखे जी ने वो काम कर दिखाया है जो भारत के इतिहास में आज के पहले केवल दो बार हुआ था।
•उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के दंडक्रम पारायण को मात्र 50 दिन में कर दिखाया वो भी बिना किसी त्रुटि के।
लेकिन इससे देश को क्या फायदा ये प्रश्न बहुत उठ रहा है।??
यह प्रश्न बहुत उठ रहा है 🤔
तो सबसे पहले "दंडक्रम पारायण" को समझते हैं।👇
साथियों वेद दुनिया के इकलोते धार्मिक ग्रंथ है जिनमें स्वरों का विज्ञान निहित है , इसलिए एक भी स्वर में कोई त्रुटि ना हो , इसके लिए हमारे ऋषि मुनियों ने आठ प्रकार के विकृति पाठों की व्यवस्था की थी जिसमें से दंडक्रम सबसे कठीन होता है
मान लीजिए एक मंत्र में पांच शब्द है 1 , 2 , 3 , 4 , 5 अब इसको पढ़ा कैसे जाएगा इसको चार चरणों में पढ़ा जाएगा
पहले चरण में
1-2 , 2-1 , 1-2
दूसरे चरण में
1-2-3 ,3-2-1 , 1-2-3
तीसरे चरण में
1-2-3-4, 4-3-2-1, 1-2-3-4
और फिर
चौथे चरण में
1-2-3-4-5 , 5-4-3-2-1, 1-2-3-4-5
और इसी क्रम में एक-एक मंत्र को करते हुए 2000 मंत्रों को देवव्रत जी ने 50 दिन के भीतर -भीतर बिना किसी त्रुटि के कर दिखाया।
•अब ये बड़ी बात क्यों है, मैंने CHAT GPT से यजुर्वेद के एक मंत्र का दंडकरम बनवाया।
और ये पता करने का प्रयास किया कि एक मंत्र के दंडकरम को बोलने में कितना समय लगेगा।
और निकल के आया कि लगभग 20 से 25 मिनट लगेंगे।
•और अगर 2000 मंत्रों में एक मंत्र पर अगर हम 20 मिनट भी ले लें, तो कम से कम आपको 55 दिन लगेंगे।
•अगर आप प्रत्येक दिन 12 घंटे बिना रुके इन मंत्रों का दंड क्रम में परायण करें और देवरत जी ने मात्र 50 दिन में कर दिया |
आज से 200 साल पहले महराष्ट के ही श्री नारायन शास्री देव जी ने इसे 100 दिन में किया था




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