
इलाहाबाद में 27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आज़ाद पुलिस मुठभेड़ में शहीद हुए. इसके कुछ ही हफ्तों बाद, 23 मार्च 1931 को लाहौर में भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को फाँसी दी गई. इन घटनाओं के बाद देशभर में अंग्रेज़ों के खिलाफ बहुत नाराज़गी थी. उसी दौरान कई जगहों दंगा शुरू हुआ. कानपुर भी इससे अछूता नहीं रहा. ऐसे समय में निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए मशहूर गणेश शंकर विद्यार्थी दंगे को रोकने के लिए मैदान में उतर पड़े. उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई हिंदू और मुस्लिम परिवारों को बचाया. 25 मार्च 1931 को सांप्रदायिक हिंसा को रोकने की कोशिश करते हुए उन्होंने अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी. आज, जब टीवी चैनलों पर अक्सर हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को उछाला जाता है, ऐसे में Ganesh Shankar Vidyarthi जी के आदर्शों को याद करना बेहद ज़रूरी है. यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. 🙏 #HinduMuslim #ChandrashekharAzad #BhagatSingh #Rajguru #Sukhdev #Kanpur

























