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@CivicConscious_ माता पृथ्वी पर ही का लंका भी थी पर राम अयोध्या क्यों आए? कुतर्क कर सही साबित नहीं हो जाओगी


इसलिए की राम ने भी यही कहा है अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥ चूँकि स्वर्ग देवताओं का निवास स्थान है, इसलिए जन्मभूमि को "स्वर्गादपि गरीयसी" कहना प्रत्यक्ष रूप से इसे दिव्य सुखों और देव-लोक से ऊपर स्थापित करता है। कभी सनातन दर्शन पढ़ा है? शंकराचार्य को जवाब देंगी ये, अरे पहले पढ़ तो लो। अब राम से पूछना कि उन्होंने देवताओं के स्थान स्वर्ग से ऊपर इसे क्यों रखा। ये सनातन की कोर वैल्यू है, देवताओं के स्थान से बड़ा जन्मभूमि है । पर राजनीति करने वाले नहीं समझेंगे।







ये जितने नकली ब्राह्मण बन कर बीजेपी विरोध की आग लगा रहे ये असल में ब्राह्मण हैं ही नहीं, क्यों कि ब्राह्मण को शास्त्र का ज्ञाता होना अतिआवश्यक है। ये बस कास्ट वाले हैं, "जन्मना" जिन्हें ब्राह्मण शब्द का तात्पर्य भी नहीं पता। त्यागी जी, अगली बार इस तरह का अनर्गल प्रलाप करने से पहले या तो सनातन शास्त्र को चूल्हे में फेंक दो, या खुद को ब्राह्मण नेतृत्व कहना बंद कर दो। ततः कलौ संप्रवृत्ते संमोहाय सुरद्विषाम् । बुद्धो नाम्नाञ्जनसुतः कीकटेषु भविष्यति ॥ (श्रीमद्भागवतम्, 1.3.24) अर्थ: उसके बाद कलयुग आने पर, देवताओं के शत्रुओं (असुरों) को मोहित करने के लिए, कीकट देश (वर्तमान गया, बिहार) में 'अंजन' के पुत्र के रूप में 'बुद्ध' अवतार होगा। मत्स्यं कूर्मं वराहं च नारसिंहं च वामनम् । रामो रामश्च कृष्णश्च बुद्धः कल्किस्तथैव च ॥ (श्रीमद्भागवतम्, 10.40.22) संदर्भ: यहाँ अक्रूर जी द्वारा की गई स्तुति में विष्णु के दस अवतारों की सूची में बुद्ध का नाम कृष्ण के बाद और कल्कि से पहले आता है। अग्नि और नारद पुराण के भी रेफरेंस दु???? आप की समस्या है कि आप बीजेपी विरोध की बीमारी से ग्रस्त हो, सनातन का ज्ञान आपको रत्तीभर नहीं है। अगली बार कुतर्क करने से पहले शास्त्र पढ़ लेना। ये बनेंगे सनातनी। इन जैसे कुछ मुट्ठी भर लोगों ने अपनी जातीय श्रेष्ठता के घमंड में दूसरों को शोषण किया, और बदनाम पूरा सवर्ण समाज हुआ। इन जैसे लोग असली वजह हैं इस देश में आरक्षण, sc st act और यूजीसी की।






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