Dr Prashant Purohit

509 posts

Dr Prashant Purohit

Dr Prashant Purohit

@PrashantProhit

MBBS, MD, FRCPath, a clinical microbiologist Dr, diagnosing & treating infectious diseases. Caste is only for identification, it’s not my identity.

Mansfield, England شامل ہوئے Mart 2026
276 فالونگ47 فالوورز
Amit Behere
Amit Behere@_amitbehere·
Yeh kaun ch***ya hain jo bolte hain Indian cities mein 24*7 electricity hain. Milna toh jara. Kaan kay neeche 4 bajane hai. Fatherchod, itna fekoge toh ek din India kay PM banoge.
Indonesia
3
5
37
545
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@AnumaVidisha अमर चित्र कथा टाइप की कॉमिक्स ने मांस, मधु और कंद-मूल में से सिर्फ कंद-मूल रखा, बाक़ी डिलीट कर दिया।
हिन्दी
0
0
1
64
Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)
बच्चों से सेलेक्टिव उदाहरण दिलवा कर समाज को झूठ या अर्धसत्य परोसना ग़लत है. आइये तथ्य समझें कि क्या श्रीराम शाकाहारी थे? वाल्मीकि रामायण के श्लोक क्या कहते हैं? 📖 प्रमाण 1 — अयोध्याकाण्ड, सर्ग 20, श्लोक 29 राम स्वयं वनवास की तैयारी करते हुए कहते हैं कि वे वन में मांस, मधु और कंदमूल से जीवन निर्वाह करेंगे. यानि मांस उनके सामान्य आहार का हिस्सा था. 📖 प्रमाण 2 — अयोध्याकाण्ड, सर्ग 55, श्लोक 33 (Verified: IIT Kanpur Valmiki Ramayana Portal) क्रोशमात्रं ततो गत्वा भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ। बहून्मेध्यान्मृगान्हत्वा चेरतुर्यमुनावने।।2.55.33।। अर्थ — यमुना के वन में एक कोस चलने के बाद राम और लक्ष्मण ने अनेक शुद्ध हिरण मारे और खाए. स्पष्ट है कि यह कोई अपवाद नहीं, यह उनकी सामान्य दिनचर्या थी. 📖 प्रमाण 3 — अरण्यकाण्ड, सर्ग 44, श्लोक 27 (Verified: IIT Kanpur Valmiki Ramayana Portal) निहत्य पृषतं चान्यं मांसमादाय राघवः। त्वरमाणो जनस्थानं ससाराभिमुखस्तदा।।3.44.27।। अर्थ — मारीच वध के बाद राघव ने एक और spotted deer को मारा, उसका मांस लिया और जनस्थान की ओर शीघ्रता से चले. ⚠️ फिर मांस न खाने का उल्लेख कहाँ से आया? सुन्दरकाण्ड, सर्ग 36, श्लोक 41 में हनुमान सीता को बताते हैं कि राम सीता-वियोग के शोक में मांस और मदिरा का त्याग किए हुए हैं. यह स्पष्टतः सीता को वापस पाने तक का एक व्रत था — न कि उनका जीवनभर का नियम. 🏹 क्षत्रिय धर्म और शिकार राम एक पूर्ण क्षत्रिय राजा थे. मनुस्मृति और महाभारत दोनों में मृगया (शिकार) क्षत्रियों का धर्मसम्मत कर्तव्य माना गया है — युद्धाभ्यास और आहार दोनों के लिए. 🕰️ फिर “राम शाकाहारी थे” यह कहाँ से आया? यह narrative मूल वाल्मीकि रामायण (~500 BCE) में नहीं है. यह मध्यकाल में भक्ति आंदोलन और वैष्णव परंपरा के प्रभाव से गढ़ा गया. तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस (16वीं सदी) में राम की छवि को एक शाकाहारी, सात्विक देवता के रूप में ढाला गया — जो उस युग की सामाजिक और धार्मिक ज़रूरत थी. मूल वाल्मीकि रामायण के राम एक मर्यादा पुरुषोत्तम क्षत्रिय राजा हैं — जो अपने धर्म के अनुसार शिकार करते थे, मांस खाते थे. पौराणिक परंपराओं, मान्यताओं और इतिहास को तथ्यात्मक तरीक़े से पढ़िए. 📚 Double Verified Source: IIT Kanpur Valmiki Ramayana Portal Ayodhya Kanda 2.55.33 | Aranya Kanda 3.44.27 | Sundara Kanda 36.41
Chota Don@choga_don

What a brilliant expose of Dhruv Rathee's claims that Bhagwan Ram ate meat with authentic proofs from the Ramayan by this young boy! He looks like a factory-reset version of Dhruv Rathee, making him taste his own medicines🔥 More power to him, he should create more content like this! 🙌

हिन्दी
16
28
148
7.7K
Himanshu
Himanshu@himanshukr2841·
@shatakshij7 I think we should start from parliament and courts.
English
2
0
2
81
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
They have been teaching Science since time immemorial. How much scientific temperament they could inculcate into the Indian minds? Same will happen with the sex education. It should normally taught as a part of Biology instead of being taught as a separate subject.
शताक्षी J@shatakshij7

Should S@x education be taught in Indian schools ?

English
0
0
0
19
Easy Rider
Easy Rider@Koushik_laribee·
I wonder where the photographer was sitting 🤔
Easy Rider tweet media
English
13
6
52
1.3K
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@TheTribhuvan यह देश की ज़ियोनिस्ट अवधारणा है, जिसमें देश लोगों से नहीं भूभाग से परिभाषित किया जाता है।
हिन्दी
0
0
0
20
Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
वह सुबह-सुबह बोले, तुम तो “पाकिस्तान चले जाओ”! एक बंगाली भाई काम कर रहा था। उसे उन्होंने बांग्लादेशी कहा और बोले, "घुसपैठिये बाँग्लादेशियों को वापस भेजो"! मैंने कहा : सच बताइए! यह आपके तर्क का शिखर है या दिमाग़ का शॉर्टकट? क्योंकि आप हर दूसरी ही साँस में “अखंड भारत” का शंख भी फूँकते हैं। अब ज़रा इस महान् दर्शन को समझाइए कि जिन्हें आप हर रोज़ वहाँ भेज रहे हैं, वे कल आपके अखंड मानचित्र में वापस नहीं आ जाएंगे? और फिर वे बार-बार की मेहनत किसलिए? जब एक बार भेजे जाएंगे तो फिर वापस तो आप ले ही आएंगे न? जब वापस आ जाएंगे तो फिर बैठेंगे कहाँ? ड्रॉइंगरूम में, बरामदे में या सीधे आपकी छाती पर?
हिन्दी
1
0
11
512
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@Ashok_Kashmir बहुत बधाई आप सबको। रंग-रूप के मानक वही बनाते हैं जिन्हें मालूम होता है कि वे पालतू हैं और दिमाग़ी तौर पर बीमार भी, सो उनके पास content नहीं है। इसीलिए वे रंग-रूप जैसी थोथी बातों से जनता को content करने की असफल कोशिश करते हैं।
हिन्दी
0
0
4
386
Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک
आज 3 साल हो गए TCH Channel को प्रोफेशनल तरीक़े से चलाने की कोशिश शुरू किए। एक छोटे से ऑफिस, एक पर्सनल लैपटॉप और एक कंप्यूटर से शुरू हुआ था काम। Irshad भाई अपना कैमरा लेकर आते थे और एडिटिंग घर से करके भेजते थे। इन तीन सालों में धीरे-धीरे हमने खुद को एक चैनल के रूप में खड़ा किया। अब 9 लोगों की टीम है। इनहाउस एडिटर्स हैं। रास्ते में, एयरपोर्ट पर, रेलवे स्टेशन पर लोग कई बार पहचान लेते हैं। लेखक के अलावा पत्रकार जुड़ गया है परिचय में। एक और चैनल TCN भी आठ लाख से ज़्यादा लोगों तक पहुँच गया है। सबसे बड़ा संतोष कि यह सब किसी कॉर्पोरेट वगैरह की मदद के बिना कर पाए हैं। कई बार सोचता हूँ कि अगर टीवी के ज़माने में एंकर बनने का सोचा होता तो शायद कहीं जगह न मिलती, कुछ अपने रंग की वजह से कुछ अपने अक्खड़ मिजाज की वजह से। यूट्यूब ने साबित किया है वे मानक बेकार थे। एकदम युवा टीम के साथ काम करते हुए मैंने भी बहुत कुछ सीखा है, बदला हूँ बहुत कुछ। हँसते-खेलते-लड़ते हम लगातार काम कर रहे हैं और आप सब का समर्थन हमें ताक़त दे रहा है। आप साथ बने रहिए, हम एक वैकल्पिक मीडिया की तरह काम करने की पुरज़ोर कोशिश करते रहेंगे। शुक्रिया टीम TCH और @TCNLive2025 (फ़ोटो जनवरी की है)
Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک tweet media
हिन्दी
111
147
1.2K
17.4K
𝓝𝓱 𝓒𝓲𝓷𝓰
New India! उनके कपड़ों से पहचानें।
𝓝𝓱 𝓒𝓲𝓷𝓰 tweet media
हिन्दी
17
114
238
3.5K
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@avidandiya इससे जिनका दिल टूटा उन्हें बनाने की ज़रूरत नहीं थी। तीन बार बन चुके हैं, 2047 तक बनते रहने के लिए कमर कसकर बैठे हैं।
हिन्दी
0
0
0
4
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@VinodSharmaView ये लोग बीच में ‘यदि’ लगाए बिना माफ़ी नहीं माँगते।
हिन्दी
0
0
0
105
Dr Prashant Purohit ری ٹویٹ کیا
Sujata
Sujata@Sujata1978·
Dear sisters, your struggle is complex, layered, and deeply rooted in your own context. It cannot be reduced to simplistic binaries or appropriated for geopolitical agendas. My latest article today in The Wire- m.thewire.in/article/livewi… via @thewire_In
English
1
9
19
1.1K
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@TheTribhuvan आपने इतना लंबा लिख दिया, बजाय रील बनाने के, वह भी हिंदी में, पंडित पढ़ नहीं पाएगा। ये लोग निष्ठा के चक्कर में ख़ुद विष्ठा हो चुके हजन।
हिन्दी
1
0
2
35
Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
अरे पंडित जी, प्रणाम! आप तो अद्भुत निकले। एक हाथ में “हिन्दू राष्ट्र” का झंडा, दूसरे हाथ में ईरानियों से उठा लाया हुआ “हिन्दू” शब्द और माथे पर ऐसा आत्मविश्वास मानो शब्दकोश भी आपकी जाति पूछकर ही खुलता हो। अपने घर की भाषा, अपने देश का इतिहास, अपने संविधान की आत्मा आदि-आदि सबको धूप में सुखाकर आप नारा बना लाए और फिर उसी को संस्कृति समझ बैठे। यह प्रतिभा साधारण नहीं होती; यह वही विरल वज्र मेधा है, जिसमें आदमी अपनी ही थाली में छेद करके पूछता है, “देखा, मैंने दुश्मन को कैसे हराया?” आप कहते हैं, देश “फलाँ” के हिसाब से चलेगा। वाह! यानी 140 करोड़ लोगों का देश कोई रिमोट कंट्रोल वाली खिलौना-गाड़ी है, जिसे गली के नुक्कड़ पर बैठा एक क्रोधित उद्घोषक अपनी तर्जनी से घुमाएगा? देश हिसाब से नहीं चलता, पंडित जी; देश उस समझ से चलता है, जिसमें बहुलता को बोझ नहीं, बुनियाद माना जाता है। लेकिन आप तो हर बार नागरिकता को नापने बैठ जाते हैं कि किसकी नाक कैसी, किसकी टोपी कैसी, किसकी थाली कैसी, किसकी चमड़ी पर कौन-सा संस्कार लिखा है। और तो और, ये भी देखते फिरते हैं कि किसकी नुन्नी कैसी? छि:-छि:, कैसे ब्राह्मण हो? सुबह-सुबह कैसे-कैसे अंगों का स्मरण करते हो, प्रभु को याद करने के समय। पंडित जी, आप समझते हैं, मानो राष्ट्र कोई सभ्यता नहीं, आपकी निजी हाउसिंग सोसाइटी हो, जहाँ एंट्री गेट पर आप चौकीदार भी हों, सचिव भी और न्यायाधीश भी।और यह “पाकिस्तान चले जाओ” या " घुसपैठिया बाँग्लादेशियों को वापस भेजो" वाला रियाज़! सच बताइए, यह आपके तर्क का शिखर है या दिमाग़ का शॉर्टकट? क्योंकि दूसरी ही साँस में आप “अखंड भारत” का शंख भी फूँकते हैं। अब ज़रा इस महान् दर्शन को समझाइए: जिन्हें आप रोज़ वहाँ भेज रहे हैं, वे कल आपके अखंड मानचित्र में वापस नहीं बैठेंगे? ड्रॉइंगरूम में, बरामदे में या सीधे आपकी छाती पर? यह कैसी भूगोलशास्त्रीय भक्ति है, जिसमें नक्शा भी आपका है, निर्वासन भी आपका है और तर्क हर बार बेचारगी से दरवाज़े पर खड़ा रह जाता है?और पंडित जी, आप “कटवा देश” कहकर जिस ज़हर को चुटकुला समझते हैं, वही इस उपमहाद्वीप की सबसे महँगी मूर्खताओं में से एक रहा है। इसी सोच ने इस धरती को बार-बार लहूलुहान किया, रिश्तों को सरहदों में बदला, मोहल्लों को शक में, और आदमी को आदमी से कमतर चीज़ में। जो लोग इतिहास से कुछ नहीं सीखते, वे अंततः इतिहास की फटी हुई कॉपी लेकर ही भविष्य लिखने बैठते हैं और फिर हैरान होते हैं कि हर पन्ने पर धुआँ क्यों उठ रहा है। आपको दूसरों की निष्ठा पर शक बहुत जल्दी हो जाता है, पर अपनी स्वतंत्रता की चाभी किसके पास गिरवी है, इस पर मौन साध लेते हैं। दुनिया की बड़ी ताक़तें जब किसी देश को धूल में मिलाती हैं, तब आपकी वाणी में अचानक संस्कारों का उपवास क्यों लग जाता है? जब दूसरे मुल्क़ों पर अन्याय होता है, तब आपकी छाती में राष्ट्रवाद की ज्वाला नहीं, भू-राजनीतिक हिचकी क्यों उठती है? बड़े मुल्क़ों की बदतमीज़ी पर आपकी आवाज़ इतनी धीमी क्यों हो जाती है कि सुनाई ही नहीं देती, लेकिन अपने ही देशवासियों पर आते-आते वही आवाज़ ढोल-नगाड़ा बन जाती है? और हाँ, एक छोटा-सा प्रश्न, पंडित जी। आप तो “थिंक टैंक” हैं न? फिर यह “थिंक टैंक” किस मैकॉले-प्रेम की यादगार है? ज़रा इस पर भी प्रवचन दीजिए। या फिर यह नियम भी वही है, जो अपने लिए सुविधा, वही संस्कृति; जो दूसरों के लिए अपमान, वही राष्ट्रवाद? सच तो यह है कि आप परंपरा के नहीं, परंपरा के नाम पर चलने वाले बाज़ार के पूरे कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर लगते हैं; जहाँ क्रोध बिकता है, अश्लीलता बिकती है और मूर्खता को मर्दानगी की पैकिंग में बेचा जाता है। भारत माता, पंडित जी, किसी एक गुस्सैल गले की निजी संपत्ति नहीं है। वह इतनी छोटी नहीं कि आपकी गाली में समा जाए, न इतनी कमज़ोर कि आपकी नफ़रत से परिभाषित हो जाए। वह तो उनसे बनी है, जो साथ रहते हैं, साथ झेलते हैं, साथ हँसते हैं, साथ मरते हैं और बीच-बीच में आप जैसे घोषणापत्रधारी वीरों को भी झेल लेते हैं। वरना सच पूछिए तो आपकी भाषा सुनकर कालिदास भी पेड़ की डाल छोड़कर और विद्योत्तमा की आशाएँ तिरोहित कर नीचे उतर आते और कहते, “भाई, मूर्खता तो मैंने भी की थी, पर तुमने तो उसे विचारधारा बना दिया।” तो पंडित जी, थोड़ा विराम लीजिए। देश को आपकी धमकियों से कम, आपकी समझ से ज़्यादा ज़रूरत है। और अगर समझ अभी अवकाश पर है तो कम-से-कम इतनी शालीनता रखिए कि भारत की विविधता पर उपानवायु का प्रसार करते हुए उसे संस्कृति का नाम न दें। क्योंकि सभ्यता गाली से नहीं बनती और राष्ट्र किसी की देह, खान-पान या नाम पर खड़े किए गए अपमान से नहीं; न्याय, गरिमा, बराबरी और बुद्धि से बनती है। वही चार चीज़ें हैं, जिनसे आपकी लड़ाई कुछ ज़्यादा ही पुरानी लगती है। @Shukla_Suniil
🚩 पं.सुनील शुक्ल 🇮🇳@Shukla_Suniil

@TheTribhuvan @HansrajMeena बिल्कुल , ये हिंदू राष्ट्र है कोई कटवा देश नहीं ये हिंदुओं के हिसाब से ही चलेगा जिसे तकलीफ हो वो पाकिस्तान जाकर अपनी नुनी कटवा ले 😡

हिन्दी
2
5
23
1K
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@Lap_surgeon The reporter went unprepared. Asking why he resigned, then the father clarified that he has not resigned!
English
0
0
1
203
Dr. B L Bairwa MS, FACS
Dr. B L Bairwa MS, FACS@Lap_surgeon·
IAS रिंकू सिंह का घर देखिए! उनके पिता जी का दर्द देखिए! रिंकू सिंह की हिम्मत, संघर्ष और ईमानदारी देखिए! सरकार और सिस्टम की बेईमानी और नीचता देखिए!👎 #IAS
हिन्दी
79
2.3K
6K
45.6K
Dr Prashant Purohit
Dr Prashant Purohit@PrashantProhit·
@TheVishalKay @DocPriyamMD That’s not normal. That’s ignorance because you don’t have data. Without data you can’t make policies that’s why such cases happen. In India we don’t give a shit to data and public health laws.
English
0
0
0
6
Dr. Priyam Bordoloi
Dr. Priyam Bordoloi@DocPriyamMD·
When one person gets diarrhea (infection) and another gets facial swelling-angioedema (allergy) from the same meal, it indicates a massive failure in both hygiene and allergen labeling. This level of swelling is a precursor to anaphylaxis. Serious accountability is needed here.
Ghar Ke Kalesh@gharkekalesh

This woman claims that she was traveling on the Vande Bharat train from Varanasi to Deoghar on March 27. After eating the food provided on the train, she developed an allergy. Her son also suffered from diarrhea. She has submitted medical documents as evidence.

English
30
317
1.5K
58.1K