Ashutosh Kumar Singh أُعيد تغريده
Ashutosh Kumar Singh
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गाजीपुर में एक बच्ची की दुखद मृत्यु पर आपने अखिलेश यादव को सुना, सपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल की राजनीति और ग्रामीणों द्वारा उनकी पिटाई का वीडियो देखा, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के ट्वीट को देखा। अब पीड़िता के पिता को सुनिए। पिता साफ कह रहे हैं कि मेरी तो बेटी चली गई, और उस पर ये राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
पिता साफ कह रहे हैं कि आरोपी को पुलिस पकड़ चुकी है, वो जेल में है और पुलिस और कानून अपना काम ठीक से कर रहे हैं।
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पूरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा (@Pawankhera)के साथ पूरी मजबूती से एकजुट खड़ी है। गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है। हमें विश्वास है कि धमकी, डराने-धमकाने, और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की जीत होगी।
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@RahulGandhi इन चूतियों का काम ही हैं भ्रम फैलाकर राजनीति करना।
@RahulGandhi
@yadavakhilesh
@samajwadiparty
@INCIndia
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उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार और निर्मम हत्या - और फिर परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियाँ, हिंसा।
हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज ग़ाज़ीपुर - यह एक पैटर्न है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया।
हर बार वही चेहरा - पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, ग़रीब।
हर बार वही सच्चाई - अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना।
हर बार वही चुप्पी - सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था।
जिस देश और प्रदेश में माँ-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख माँगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
दोषी पुलिस अफ़सरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले - उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले।
मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए - आपके राज में बेटियाँ इतनी असुरक्षित क्यों हैं?
ऐसे हालात में न्याय माँगा नहीं, छीना जाता है - और हम छीनकर लाएँगे।
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गजब गुंडई है यार...गैस एजेंसी वाले सरकारी आदेश नहीं मान रहे..कल बहन की शादी है..10 सिलेंडर का लिखित आदेश है...!
लेकिन सिलेंडर नहीं दिए जा रहे...इसके बावजूद अभद्रता की जा रही है...क्या यह उचित है...?
शिवम कुमार पाल का आरोप है यह सब दिन भर ब्लैक में सिलेंडर बेचकर अपनी जेबें भर रहे हैं..गैस होते हुए भी जरूरतमंदों को नहीं दे रहे है..!
इस एजेंसी पर कार्यवाही होनी चाहिए...!
चंद्रा गैस एजेंसी...!
बक्शी का तालाब (लखनऊ)
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जिसका दाना, उसका गाना..
अखिलेश यादव,
पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
umang misra@umangmisra
राघव चड्ढा के मुखारबिंद से...
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@msisodia सर अब तो हमे आप पर भी भरोसा नहीं है कि कब तक आप आप में रहेंगे 😂😂😂😂
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तीन दिन से गुजरात में हूँ… जिस समय गुजरात में हज़ारों कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर, सारे ख़तरे और बीजेपी की धमकियाँ झेलकर पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए खून पसीना बहा रहे है, उसी समय कुछ गद्दारों ने पंजाब के कार्यकर्ताओं के ख़ून पसीने की कमाई का सौदा कर लिया।
जो राज्यसभा सदस्य आज बीजेपी के सामने झुक गए, अपनी निजी मजबूरियों, डर और लालच के कारण जिन्होंने पंजाब के लोगों के साथ ग़द्दारी की है, उन्हें पता होना चाहिए कि पंजाब गद्दारों को कभी माफ नहीं करता है।
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@ArvindKejriwal धक्का? सदमा ऐसा लगा है की घुंघरू सेठ को की वो हिंदी लिखना भी भूल गया है!
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@Sudhir_mish @myogiadityanath @myogioffice @myogiadityanath @myogioffice @CMOfficeUP @sanjaychapps1 @BJP4India mamle ka sangyan lijiye
HT

@ArvindKejriwal हम राजनीति बदलने आए हैं जी, हम गाड़ी बंगला नहीं लेंगे जी।
हम सीधा पंजाब सरकार का प्राइवेट जेट, शीशमहल और लुटियंस में महल लेंगे जी।
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@BasantBaheti3 इनसाइडर है ई साला ट्रम्पवा।
खूब कमाया है उस के लोगो ने,
मार्केट शुरू होने से पहले वो कुछ ऐसा बोलता है जिससे मार्केट ऊपर जा रहा है
और उसके लोग पैसे बनाते हैं
हो सकता है ट्रंप खुद पैसा कमा रहे हों इनसाइडर ट्रेंडिंग से
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मुझे जान से मारने की धमकी देने वाली गैंग
सभी के पास अवैध हथियार है @HMOIndia
सभी दिल्ली के ही है @AmitShah
@dcpouter @CPDelhi @DelhiPolice
@KanoongoPriyank @SanjeevSanskrit




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ये वायरल वीडियो देहरादून की चंद्रलोक कॉलोनी का बताया जा रहा है। मोहल्ले वालों की “हाउस अरेस्ट” जैसी स्थिति हो गई है। वास्तव में ये कोई दबंग है जिसने पूरी सड़क पर निर्माण सामग्री डालकर घरों से निकलने के रास्ते बंद कर दिए हैं।
थोड़ा सा माल सड़क पर रखते ही नगर निगम वाले जुर्माना लगाने आ जाते है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं और लोग घरों में क़ैद है। @dmdehradun मामले की पड़ताल हो जाय तो बेहतर है। @DehradunPolice @DdnNagarnigam
@Namami_IAS
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@Abhinav_Pan मत कर भाई बिहार में तुमको देख चुके हैं।
सिर्फ बकचोदी, और कुछ नहीं।
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कोई और समझे या न समझे, लिफाफा पत्रकार ने सब कुछ समझ लिया।
निशाना सही जगह लगा है ! 😂😂😂
कुछ लोग पूछ रहे हैं कि यह "लिफाफा पत्रकारिता" क्या होती है ? इंतजार कीजिए वह भी बताऊंगा।
Ashok Shrivastav@AshokShrivasta6
कभी नवभारत टाइम्स में काम करने वाले एक लिफाफा पत्रकार को कांग्रेस ने एक पद दे दिया। फिर कांग्रेस का नेतृत्व बदला, नया नेतृत्व आया तो पद छीन कर उसे पैदल कर दिया गया। अब आजकल दोबारा पद पाने और शीर्ष नेतृत्व को रिझाने के लिए ट्रोलर बन गया है। 😂😂 बूझो तो कौन ?
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@Pankaj___Sharma दलाली में तो आपने सबको पीछे छोड़ दिया है
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अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी। लालकृष्ण आडवाणी जी उपप्रधानमंत्री थे। उन के पास गृह मंत्रालय के अलावा कार्मिक मंत्रालय भी था। उन के एक लिपिक के पुत्र को तब दूरदर्शन में हाशिए के समाचार बुलेटिन पढ़ने का काम दे दिया गया। तब अरुण जेटली जी सूचना-प्रसारण मंत्री थे। वे आडवाणी जी के बहुत क़रीब थे। तीन महीने बाद जेटली जी की जगह सुषमा स्वराज जी सूचना-प्रसारण मंत्री बन गईं। वे भी आडवाणी जी की राजनीतिक शिष्या थीं। उन के बाद रविशंकर प्रसाद जी सूचना-प्रसारण मंत्री बने। वे तो आडवाणी जी के और भी ज़्यादा क़रीब थे। रथ यात्रा के दौरान आडवाणी जी की गिरफ़्तारी हुई तो उन के वकील रहे। बाद में हवाला मामले में भी रविशंकर जी ही आडवाणी के वकील थे। सो, लिपिक के पुत्र ने जेटली जी से ले कर सुषमा जी और रविशंकर जी की प्रभातफेरी लगा-लगा कर अच्छी रफ़्तार से सीढ़ियां चढ़ीं। मगर फिर दो साल बाद डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार आ गई। घबराया हुआ लिपिक-पुत्र तब किस-किस राजनीतिक और किस-किस पत्रकार के घरों की प्रभातफेरी लगाया करता था, उन से क्या-क्या कहा करता था - इस के लंबे किस्से हैं। कांग्रेसी-सरकारों का स्वभाव प्रतिशोधी कभी वैसे भी नहीं रहा है और बाल-बच्चों को निशाना बनाने की क्षुद्रता पर पर तो वह कभी भी नहीं उतरा करती थी। हालांकि लिपिक-पुत्र उस ज़माने में दूरदर्शन का कोई महत्वपूर्ण चेहरा नहीं था, मगर फिर भी आरएसएस-पृष्ठभूमि की वज़ह से उसे विदा करने की बातें जब-जब उठीं, ऐसे-ऐसे लोगों ने ऐसा न करने की सलाह दी कि पूछिए मत। लिपिक-पुत्र और उस के पिता निजी तौर पर उन सभी से अपनी कृतज्ञता व्यक्त किया करते थे। पिछले 12 साल की अंधेर नगरी ने लिपिक-पुत्र को थोड़ा महाकाय बना दिया। अब उस का अहंकार आसमान पर है। दूरदर्शन के कार्यक्रमों में उस की भाषा सारी मर्यादाएं पार कर चुकी है। सोशल मीडिया के मंचों पर व्यक्तियों को ले कर उस की निजी टिप्पणियां फूहड़ता के चरम पर हैं। बेचारा भूल गया है कि ‘मनुज बली नहीं होत है, होत समय बलवान’ और समय है कि परिवर्तनशील है। प्रभु उसे सन्मति दें!
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