Professor Dr.Vikram

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@ProfvikramAU

Assitant Prof. University Of Allahabad F.Assam Central University,Nagaland Univ. MA M.Phil PhD From JNU,Former Fellow Indian Institute Of Advanced Study Shimla

University of Allahabad, India انضم Şubat 2021
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
Josh Talks चैनल पर मेरा इंटरव्यू देखिए और अगर पसंद आए तो मेरे बारे में अपने विचार बताने की कृपया करें. youtu.be/tgt3SNo5OlI?si…
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मूकनायक का आभार
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
भारत के कितने पत्रकार समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर करने में जान गंवाई है? बहुजन पत्रकारों को छोड़कर शायद एक भी नहीं?डॉ अम्बेडकर कहते थे कि भारत की मीडिया एक व्यवसाय बनकर रह गईं है जबकि उनकी जिम्मेदारी ज़्यादा है? इसलिए भारत की मीडिया मनुवादी है जो सही मुद्दों के लिए जान देने में डरती है.@EditorRajan @ScienceJourney2 @BasavanIndia @DastakDainik
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
हमें वंचनाओं के इतिहास को समझना पड़ेगा. हर राज्य में एससी एसटी ओबीसी बहुमत में रहने के बाद भी वो बहुजन विचार धारा के आधार पर सरकार नहीं बना पाते. बाबा साहेब भी इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में ब्राह्मणवादी विचार धारा से हार गए थे.जब तक इलेक्टोरल पॉलिटिक्स से आप एक नहीं होगे आप ऐसे ही मनुवादियों की सरकार बनाते रहेंगे. @EditorRajan @BasavanIndia @DalitDastak @DastakDainik @Anjalisaini_ @Avinash_Barala
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The Dalit Voice
The Dalit Voice@ambedkariteIND·
#Horrific In Chhatarpur, Madhya Pradesh, a Dalit family was brutally beaten in public for not giving enough “donation.” A priest had demanded 100Kg of wheat, but the family said they could only afford 50 kg. Enraged by this, a group of Hindus mercilessly assaulted them.
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पवन
पवन@Voiceofpavan·
मोहन यादव की मध्यप्रदेश सरकार में दलितों-आदिवासियों पर अन्याय चरम पर है।
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Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
श्री राम की कृपा से, सब काम हो रहा है... मेरिटधारी छात्रों के मेरिटधारी शिक्षक। बेशर्मी का आलम यह है कि GC के नाम पर नाचने वाले सवर्ण हिंदू इस न्यूज पेपर में "जय श्री राम" को "जय भीम" एडिट करके वायरल कर रहे हैं ताकि दलितों के खिलाफ हेट एवं हिंसा फैलाई जा सके।
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Nand@n
Nand@n@nandantwts·
She was rap#d when she was 17 years old. 3 men forced her into a temple and rap#d her. After the incident, her parents claimed she had gone with someone willingly. They treated her badly and locked her in a room for 6 months. Parents should be emotionally supportive in this situation, not make unnecessary allegations. I really appreciate her courage and respect her because she didn't make any wrong decisions.
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Dr. Om Sudha
Dr. Om Sudha@dromsudhaa·
किसने कहा कि बंगाल में जातिवादी भेदभाव नहीं है। मैं आपके लिए एक रिपोर्ट लाया हूं। पश्चिम बंगाल का जातिवादी चरित्र आपको बाहर से नहीं दिखता है। पर, यहां की धमनियों में रक्त शुद्धता का दंभ बहता है । यहां दलितों का दर्द चीत्कार नहीं करता है , बल्कि अंदर ही अंदर हड्डियों को गला देता है। युवा पत्रकार शिवानी Shivani Agrawal की बीते साल यह रिपोर्ट आपका दिल दहला देगी ।
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Prof. VIVEK KUMAR ( A World ranking Sociologist )
विश्व रैंकिंग 2025 में मेरा नाम --------- मैं JNU में नंबर 1, भारत में 11वें और एशिया में 134वें स्थान पर हूँ यह रैंकिंग मुझे समाज विज्ञानियों /वैज्ञानिकों की AD वर्ल्ड रैंकिंग 2025 द्वारा प्रदान की गयी है है. इसे साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।समाज का बहुत बहुत साभार.
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
लखनऊ में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर अम्बेडकर हॉस्टल के बच्चों के साथ गुफ़्तगू करते हुए
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
1 मई को लखनऊ के बसपा ऑफिस में
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
30 अप्रैल 2026 को बहुजन हिस्ट्री मंथ को संबोधित करते हुए.
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को ना प्रवेश देने को सुप्रीम कोर्ट ने जायज़ ठहराया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं में हमे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. प्रथा यह कि माहवारी खून अशुद्ध खून है.सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ग़लत है क्यू की सुप्रीम कोर्ट ब्राह्मणवादी व्यवस्था का शिकार है.@EditorRajan @ScienceJourney2 @BasavanIndia @Anjalisaini_ @Avinash_Barala @SPMCRT1480
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Professor Dr.Vikram@ProfvikramAU·
साथियों आज मासिक धर्म पर साइंस जर्नी पर लाइव रहूंगा. सभी साथियों से अनुरोध है कि शाम 7 बजे मेरे साथ लाइव रहें. साइंस जर्नी का आभार
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Thanks for inviting me.I request my students and friends be there at 5 PM in evening at mentioned venue.
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बसावन इंडिया
ED की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कुल 1206 कर्मचारियों और अधिकारियों में लगभग 925 सवर्ण वर्ग से हैं। सबसे अधिक असमानता ग्रुप-A यानी बड़े अफ़सर पदों पर दिखाई देती है, जहाँ निर्णय लेने वाली कुर्सियों पर लगभग पूरी पकड़ सवर्ण वर्ग की बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश की केंद्रीय जांच एजेंसियाँ Enforcement Directorate (ED) और Central Bureau of Investigation (CBI) अब सिर्फ जांच एजेंसियों के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में भी देखी जाने लगी हैं। विश्लेषकों के अनुसार भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि विपक्षी नेताओं पर ED और CBI की कार्रवाई का दबाव बनाकर उन्हें या तो चुप कराया जाता है, या फिर सत्ता पक्ष में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जिन नेताओं पर विपक्ष में रहते हुए गंभीर आरोप लगते हैं, वही नेता भाजपा में शामिल होते ही शासन और प्रशासन की नजर में 'ईमानदार' दिखाई देने लगते हैं और कई मामलों में जांच की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। जांच एजेंसियों की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संतुलन के लिए सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व बेहद ज़रूरी है। प्रतिनिधित्व नहीं होगा तो व्यवस्था पर सवाल उठेंगे ही। सोर्स:- @nethrapal द्वारा साझा आँकड़े ED की सालाना रिपोर्ट पर आधारित हैं।
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बसावन इंडिया
गाज़ीपुर के करण्डा थाना क्षेत्र के ग्राम कटरिया का प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह ऊर्फ आशु इन दिनों पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति और सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। निशा विश्वकर्मा हत्याकाण्ड के बाद गांव में जिस तरह भय, दबंगई और सामंती वर्चस्व का माहौल देखने को मिला, उसने प्रशासन और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि आशुतोष सिंह ऊर्फ आंशु एक सामंती और आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जो आरोपियों को संरक्षण देने का काम कर रहा है। आरोप है कि भाजपा समर्थित लोगों को छोड़कर किसी भी सामाजिक, राजनीतिक या बहुजन संगठन के लोगों को पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया। चाहे विश्वकर्मा समाज के संगठन हों, भीम आर्मी के कार्यकर्ता, समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल या अब कांग्रेस पार्टी के नेता व प्रतिनिधि मण्डल सभी को गांव में प्रवेश करने और पीड़ित परिवार तक पहुँचने से रोक दिया गया है। सपा प्रतिनिधिमंडल को रोकने और पूरे घटनाक्रम में बवाल खड़ा करने में भी आशुतोष सिंह ऊर्फ आंशु की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। इस घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें कथित तौर पर यह दबंग प्रतिनिधिमंडल पर ईंट-पत्थर चलाते हुए दिखाई दे रहा है। बावजूद इसके, आरोप है कि भाजपा के बड़े नेताओं के संरक्षण के चलते इस पूरे प्रकरण में उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सामंतवादी दबंग के सामने गाज़ीपुर पुलिस प्रशासन पूरी तरह बेबस और नतमस्तक दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार आशुतोष सिंह ऊर्फ आंशु पुत्र विनोद सिंह, निवासी ग्राम कटरिया थाना करण्डा, भाजपा के प्रभावशाली नेताओं का करीबी माना जाता है। यही कारण है कि पुलिस और प्रशासन उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बच रहे हैं लोगों का यह भी कहना है कि गाज़ीपुर पुलिस इसी प्रधान प्रतिनिधि के भय और दबाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं देना चाहती, क्योंकि प्रशासन को आशंका है कि यह दबंग किसी भी समय बड़ी घटना या टकराव की स्थिति पैदा करवा सकता है। आशुतोष सिंह ऊर्फ आंशु के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं- 1. मुकदमा संख्या 323/2017, थाना जमानियां धारा 147, 308, 336, 504, 323 भादवि 2. मुकदमा संख्या 137/2018, थाना करण्डा धारा 147, 323, 504, 506 भादवि एवं 3(1)(घ), 3(1)(द) SC/ST एक्ट 3. मुकदमा संख्या 244/2019, थाना कोतवाली धारा 504, 506, 427, 353, 352 भादवि 4. मुकदमा संख्या 129/2023, थाना करण्डा धारा 323, 504, 506 भादवि इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी और कथित राजनीतिक संरक्षण ने आम जनता के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उत्तर प्रदेश में कानून का शासन चलेगा या सत्ता संरक्षित दबंगों का? क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या फिर राजनीतिक प्रभाव के आगे न्याय व्यवस्था भी नतमस्तक हो जाएगी? #Ghazipur #nishavishwakarma #Pradhan
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