SP Mishra

342.7K posts

SP Mishra banner
SP Mishra

SP Mishra

@spm694

Air Veteran

प्रयागराज Joined Haziran 2016
18.6K Following50K Followers
Pinned Tweet
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
मां ब्रह्मचारिणी की कथा : दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय व अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमण्डल। पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा कि हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौली शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। #जय_मां_ब्रह्मचारिणी
SP Mishra tweet media
हिन्दी
25
40
55
253
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
🙏 सभी मित्रों को जय श्री राम 🙏 🙏 ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः 🙏
SP Mishra tweet media
हिन्दी
80
82
156
541
SP Mishra retweeted
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
मां ब्रह्मचारिणी की कथा : दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय व अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमण्डल। पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा कि हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौली शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। #जय_मां_ब्रह्मचारिणी
SP Mishra tweet media
हिन्दी
25
40
55
253
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
@Ashish_J2 🙏 हर हर महादेव 🙏
हिन्दी
0
0
0
1
SP Mishra retweeted
Ashish Jaiswal
Ashish Jaiswal@Ashish_J2·
Mahadev is Universal truth 🔱
Ashish Jaiswal tweet media
English
11
29
62
243
SP Mishra retweeted
प्रिया पुरोहित
ब्रह्म मुहूर्त में स्वयंभू श्री महाकाल के अद्भुत अलौकिक भस्म आरती श्रृंगार दर्शन जय श्री महाकाल
प्रिया पुरोहित tweet media
हिन्दी
33
56
160
459
SP Mishra retweeted
NIRANJAN JI
NIRANJAN JI@Niranjan_CLG·
अगर हम स्वस्थ हैं,तो भाग्यशाली हैं...! संतुष्ट हैं तो अमीर हैं,शांत हैं तो सुखी हैं। दया करुणा परोपकार के भाव रखते हैं तो श्रेष्ठ हैं। हे महामाई अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखना। #जय_माता_दी 🚩🚩 #ॐ_दुं_दुर्गायै_नमः 🙏 #ॐ_आदिशक्ति_नमो_नमः ❣️ #GoodMorning 💐
NIRANJAN JI tweet media
हिन्दी
15
19
32
146
SP Mishra retweeted
Munesh Meena मुनेश मीणा
With the warmth of the rising sun and the calm of an empty path, this morning reminds us that every day is a fresh chance to move forward with grace and gratitude. Good Morning 🌅🌄
Munesh Meena मुनेश मीणा tweet media
English
19
15
21
104
SP Mishra retweeted
Komal Pandey
Komal Pandey@Komalpandey1408·
✨ माँ लक्ष्मी जी की कृपा सदा बनी रहे ✨🌺🌿 धन, वैभव और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी हमें सिखाती हैं कि सच्ची संपत्ति केवल धन नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, मेहनत और संतोष भी है। जहाँ स्वच्छता, सत्य और सदाचार होता है, वहीं माँ लक्ष्मी का वास होता है। 🙏 माँ लक्ष्मी से प्रार्थना है कि वह हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश भर दें। #माँलक्ष्मी #समृद्धि 🚩🌿🌺
Komal Pandey tweet media
हिन्दी
81
79
129
638
SP Mishra retweeted
रासबिहारी
रासबिहारी@Rashbih57142901·
व्रजदेवि राधे! आप श्रीकृष्ण की प्रिय हैं। आपकी और श्रीकृष्ण की भक्ति से ही भक्तों के जीवन में मंगल और कल्याण होता है। जय श्री राधे कृष्ण 🌹🙏
रासबिहारी tweet media
हिन्दी
5
7
10
53
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
@BNMishraji 🙏 जय मां लक्ष्मी जी 🙏
हिन्दी
0
0
1
3
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
@VedaRicha कर्म का फल त्यागकर कर्तव्य निभाना ही सच्चा संन्यास है, और पूर्ण शरणागति से ही मोक्ष प्राप्त होता है।
हिन्दी
0
0
1
2
SP Mishra retweeted
मधु शर्मा
श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार अष्टादश अध्याय: मोक्षसंन्यासयोग (सिद्धि और शरणागति का शिखर) पूछा अर्जुन ने, "हे महाबाहु! संन्यास क्या है? त्याग और संन्यास का, गहरा यह भेद क्या है? किस विधि से कर्म बंधन, कट जाते हैं सखा! सत्य कहिए मुझे, जो ज्ञान का है अनूप सखा!" बोले केशव, "पार्थ! सुन, कामनाओं का जो त्याग, विद्वान उसे ही कहते, सच्चा संन्यास और राग। पर सब कर्मों के फल का, जो कर दे अर्पण त्याग, वही त्यागी श्रेष्ठ है, जिसमें न मोह न राग।" कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन। सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः॥ (१८.९) कर्तव्य मान जो कर्म करे, तज फल की सब आस। सात्त्विक त्याग वही सखा, काटे जो भव-पाश॥ "अपने-अपने कर्मों में, जो तत्पर होकर रमता, ईश्वर को अर्पित कर कर्म, वही सिद्धि को वरता। स्वधर्म चाहे दोषपूर्ण हो, परधर्म से श्रेष्ठ महान, सहज कर्म को न तजे, जो है ईश्वर का वरदान।" सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ (१८.६६) सब धर्मों को छोड़ कर, आ मेरी ही शरण। पाप मुक्त मैं करूँगा, तज दे शोक और भरण॥ "भक्ति केवल भाव नहीं, वाणी का सम्मान भी है, कृष्ण तक पहुँचने का, गीता ही प्रमाण भी है। ज्ञान बिना जो भक्ति करे, वह मार्ग अधूरा जान, वाणी के उस दर्पण में ही, होते प्रभु के दर्शन दान।" कृष्ण भक्ति ही पूर्ण नहीं, वाणी पढ़ना सार। गीता पथ पर चल मधु, होगा बेड़ा पार॥ समापन सूत्र (मधु की कलम से): "भक्ति का द्वार ज्ञान से खुलता है।" कृष्ण से प्रेम करना सरल है, परंतु उन्हें समझना महान है। श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, स्वयं भगवान की वाणी है। जब तक हम उनकी इस वाणी का अध्ययन और मनन नहीं करते, तब तक हमारी भक्ति अधूरी है। गीता के माध्यम से ही हम कृष्ण के हृदय तक पहुँच सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #मोक्षसंन्यास_योग #गीता_सार_काव्यरूप
मधु शर्मा tweet media
मधु शर्मा@VedaRicha

श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार सत्रहवां अध्याय: श्रद्धात्रयविभाग योग (तीन प्रकार की श्रद्धा) पूछा अर्जुन ने, "हे माधव! संशय एक सताता है, शास्त्र-विधि बिन जो भजें, उनका क्या हो जाता है? उनकी निष्ठा कैसी केशव, सात्त्विक या राजस जानूँ? या तामस गुण के वश में, मैं उनको ही पहचानूँ?" बोले केशव, "पार्थ! सुनो, श्रद्धा त्रिविध (तीन) विधाता, देहधारियों के स्वभाव से, उपजे यह सब नाता। सात्त्विक, राजस और तामस, तीनों के गुण भारी, जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, यह रीति है जग सारी।" त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु॥ (१७.२) जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, जानो कुन्ती-लाल। तीन गुणों से बंधा है, यह जग का सारा हाल॥ "सात्त्विक भोजन सुख-आयु दे, रसदार और स्निग्ध महान, राजस भोजन दुख-रोग दे, तीखा-कटु अज्ञान। तामस भोजन दुर्गंधमय, बासी और उच्छिष्ट (जूठा) जान, इन तीनों के लक्षण से, पहचानो अन्न का दान।" "विधि-विधान से यज्ञ करे, फल की चाह न होय, वह सात्त्विक यज्ञ कहाता है, जिससे जग सुख सोय। दम्भ और मान के लिए जो, राजस यज्ञ रचाये, और तमस यज्ञ विधि-हीन, श्रद्धा-दान बिन जाय।" देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ (१७.१४) देव, गुरु और ज्ञानी की, पूजा, शुद्धि, सरलता धर। अहिंसा, ब्रह्मचर्य ये, शारीरिक तप जान, तू डर॥ "मन की शांति, सौम्यता और, मौन-आत्म-विनिग्रह (संयम), भाव-संशुद्धि ये सात्त्विक तप, काटे सब भव-जखम। सत्कार-मान के लिए जो, राजस तप किया जाय, और तमस तप मूढ़ता से, पीड़ा सह कर लाय।" "देश-काल-पात्र समझ, जो दान दिया जाता, फल की चाह रहित वह, सात्त्विक दान कहाता। प्रत्युपकार की चाह में, राजस दान है भारी, और तमस दान अपमानित, अश्रद्धा से दीखारी।" श्रद्धा-तप-भोजन-दान में, मधु सात्त्विक गुण धार। कृष्ण नाम का जप सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "आप जो हैं, आपकी श्रद्धा वैसी ही है।" हमारा स्वभाव ही हमारी श्रद्धा, हमारे भोजन और हमारे कर्मों को निर्धारित करता है। गीता हमें सिखाती है कि हमें तामस और राजस प्रवृत्तियों को त्याग कर, अपने जीवन के हर पहलू (श्रद्धा, भोजन, तप, दान) में 'सत्त्व' गुण को बढ़ाना चाहिए, तभी हम सच्चे अर्थों में उन्नति कर सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #श्रद्धात्रयविभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप

हिन्दी
43
50
66
350
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
@HiNdU05019434 माता ब्रह्मचारिणी जी की कृपा हमेशा आप पर बनी रहे 🙏
हिन्दी
0
0
1
4
SP Mishra retweeted
राष्ट्रवादी 🚩सनातनी🚩 HiNdU
✡️🐅⛳#नवरात्रि_द्वितीय_शक्ति ⛳🐅 ✡️ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्।। 🔥माँ ब्रह्मचारिणी सभी को आरोग्य , सुख-समृद्धि व वैभव प्रदान करें 🔥 🙏👣#ॐ_देवी_ब्रह्मचारिण्यै_नमः👣🙏     🚩🌞#मंगलमय_सुप्रभात🌞🚩
राष्ट्रवादी 🚩सनातनी🚩 HiNdU tweet media
हिन्दी
42
55
97
521
SP Mishra
SP Mishra@spm694·
@rastrvadi_4 सही सोच और समझ से मुश्किल काम भी आसान हो जाते हैं, बस दिमाग का सही उपयोग जरूरी है।
हिन्दी
0
0
1
6
छत्रपाल सिंह सोलंकी
इंसान के पास दिमाग हो तो मुश्किल काम भी अकेले ही कर सकता है दिमाग का सही इस्तमाल करे।।
हिन्दी
56
83
199
25.5K