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कानन कुमार त्रिवेदी 🇮🇳
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कानन कुमार त्रिवेदी 🇮🇳
@KananHTrivedi
...and miles to go before i sleep. (RT सहमती नहीं)
BHARAT 가입일 Aralık 2019
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कानन कुमार त्रिवेदी 🇮🇳 리트윗함

हर-हर महादेव!🚩
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi ने आज बनारस में काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन एवं पूजन किया।
उन्होंने भगवान भोलेनाथ से समस्त देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि और आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना की।




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कौन कहता है कि बड़ी गाड़ियों में सफर अच्छा होता है..!!
सच्चे रिश्ते और अच्छे मित्र साथ हो तो जिंदगी पैदल भी मजेदार होती है...!!
#GodMorningWednesday
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ગુજરાત રાજ્ય ની મહાનગરપાલિકા, નગરપાલિકા તેમજ પંચાયત ચુંટણી જીતવા બદલ @BJP4Gujarat ને હાર્દિક શુભકામનાઓ
@narendramodi @AmitShah @Bhupendrapbjp @sanghaviharsh
@BJP4India

GU
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@KananHTrivedi @JaiSir1131591 @SuvenduWB @Amitava_BJP @tathagata2 @DilipGhoshBJP @paulagnimitra1 @BjpBiplab @tjt4002 @keyakahe @MamataOfficial BJP is coming ✌️
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एक्सप्रेस-वे की रफ्तार में फर्क साफ दिखता है! 🚀
जहां पहले की सरकारों में कुल मिलाकर कुछ सौ किलोमीटर तक ही काम सिमटा रहा, वहीं आज विकास ने नई ऊंचाई छू ली है।
योगी सरकार में 7 एक्सप्रेस-वे पूरे हो चुके हैं, गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट के साथ प्रदेश में 3000 किमी से ज्यादा का नेटवर्क तैयार हो रहा है।
ये सिर्फ सड़कें नहीं हैं, ये उत्तर प्रदेश की तरक्की की लाइफलाइन हैं—रोजगार, निवेश और कनेक्टिविटी का मजबूत आधार।
अब सवाल साफ है-
रफ्तार किसकी ज्यादा है, ये जनता खुद देख रही है!
#ExpresswayPradeshUP

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जागो सरकार🙋
झूठेकेस निर्दोष सजा क्यों भुगते⁉️
झूठेआरोप लगाने वालों की💯संपत्ति जप्त,आजीवन कारावास कब⁉️
आखिर कबतक बहुविधान चलेगा⁉️
एक देश एक विधान समानता का शिकार कब⁉️
@AshwiniUpadhyay @PMOIndia @myogiadityanath @BhajanlalBjp @pushkardhami @gupta_rekha @Dev_Fadnavis @himantabiswa
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Adani Expands National Road Network with Ganga Expressway Integration
With over 5,300 lane km under development, #Adani is building a large-scale road infrastructure base.
The Ganga Expressway enhances this network by connecting critical regions and enabling faster logistics movement.

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Remember Before U Vote Today😳
🔥RG Kar
🔥Kamduni
🔥ParkStreet
🔥Sandeshkhali/Hanskhali
🔥URDU Imposition
🔥Broken Roads/Flyovers
🔥Stalled Metro
🔥Attack on Tulsi Manch & Maa Kali idols
🔥26k SSC jobs lost
Ur Safety/Security is 1 vote away💪
Make Bengal Gr8 Agn
#BJPKeVoteDin



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अद्वैत में स्त्री और पुरुष जैसा कोई भेद नहीं होता........
अद्वैत का अर्थ है एक ही सत्य या एक ही सत्ता, "पुरुष"। अद्वैत में स्त्री और पुरुष जैसा कोई भेद नहीं होता। यहाँ “पुरुष” शब्द का अर्थ मर्द नहीं है, बल्कि चेतना है। यानी अद्वैत में केवल चेतना का अस्तित्व है, शरीर का नहीं। इसलिए कहा गया है कि अद्वैत में स्त्री है ही नहीं, केवल पुरुष है, क्योंकि वहाँ केवल शुद्ध चेतना है।
जिस अवस्था में हम संसार को देखते और जीते हैं, उसे द्वैत या काल कहा गया है। द्वैत में ही मर्द और स्त्री होते हैं, क्योंकि यहाँ शरीर का अस्तित्व होता है। स्त्री और मर्द दोनों ही शरीर हैं और शरीर केवल द्वैत या संसार में ही संभव है। इसलिए स्त्री-पुरुष का भेद काल और संसार से जुड़ा हुआ है।
अद्वैत या अकाल की अवस्था में न समय होता है, न मन, न विचार। वहाँ केवल एक अखंड और असीम चेतना होती है। इसी कारण कहा गया है कि स्त्री और मर्द दोनों ही पुरुष हैं, अर्थात दोनों उसी एक चेतना की अभिव्यक्ति हैं। वहाँ किसी प्रकार का भेद नहीं रहता।
मन, बुद्धि, ज्ञान, तर्क और मनोविज्ञान ये सभी द्वैत में उत्पन्न होते हैं। मानव बुद्धि के कारण ही ज्ञान और सिद्धांत दिखाई देते हैं। अद्वैत में मन ही नहीं होता, इसलिए वहाँ न मनोविज्ञान होता है और न ज्ञान। वहाँ केवल निराकार और निर्गुण सत्ता होती है।
अद्वैत में चेतना पूर्ण होते हुए भी निष्क्रिय रहती है। इसलिए उसे चेतन होते हुए भी अचेतन या “शव” स्वरूप कहा गया है। शिव का अर्थ शुद्ध चेतना है, लेकिन जब उसमें कोई क्रिया या गति नहीं होती, तो वही शिव शव की तरह प्रतीत होता है।
मनुष्य का अस्तित्व शरीर, मन और बुद्धि के कारण द्वैत में ही संभव है। इसलिए जीवन में अच्छा-बुरा, प्रेम-घृणा, लाभ-हानि, जीवन-मरण, ज्ञान-विज्ञान और मोक्ष की चाह ये सब द्वैत में रहते हुए अनिवार्य हो जाते हैं। जहाँ द्वैत है, वहीं जीवन है।
परम चेतना या परमात्मा स्वयंभू है। उसे किसी सिद्धांत, ज्ञान या दर्शन की आवश्यकता नहीं है। सिद्धांत और ज्ञान केवल मनुष्य के लिए होते हैं, परमात्मा के लिए नहीं।
इस ज्ञान को केवल सुनकर या पढ़कर समझ लेना कठिन है। यदि समझ आ जाए तो ठीक है, अन्यथा गुरु आधारित उपासना और साधना के द्वारा यह अनुभूति धीरे-धीरे आती है। यही इस विचार का सार ह
अद्वैत में स्त्री–पुरुष का भेद नहीं
अद्वैत का अर्थ है — एक ही सत्ता।
इस अवस्था में स्त्री और पुरुष जैसे भेद अस्तित्व में ही नहीं होते।
यहाँ जिस “पुरुष” की बात की गई है, वह
👉 मर्द नहीं है
👉 शरीर नहीं है
👉 बल्कि शुद्ध चेतना है
यानी “पुरुष” = चेतन तत्व, परम चेतना, साक्षी भाव
इसलिए कहा गया —
> अद्वैत में स्त्री नहीं है, केवल पुरुष है
क्योंकि वहाँ केवल चेतना का अस्तित्व है।
---
2️⃣ द्वैत / काल / संसार में ही स्त्री–पुरुष हैं
जिस संसार में हम जी रहे हैं,
जहाँ जन्म–मृत्यु, सुख–दुख, अच्छा–बुरा दिखाई देता है —
वही द्वैत है।
द्वैत में ही —
स्त्री और मर्द होते हैं
शरीर होता है
समय (काल) होता ह
अनुभवों का भेद होता है
👉 स्त्री और मर्द दोनों शरीर हैं,
और शरीर द्वैत में ही संभव है।
3️⃣ अद्वैत / अकाल में केवल पुरुष (चेतना) है
जब काल (समय) नहीं होता,
मन नहीं होता,
विचार नहीं होता —
तब उसे कहा गया अकाल / अद्वैत।
वहाँ —
न स्त्री
न पुरुष (शरीर रूप में
न मन
न विचार
न ज्ञान
केवल अखंड, असीम चेतना होती है।
इसलिए कहा गया —
> स्त्री और मर्द दोनों ही पुरुष हैं
अर्थात दोनों ही उसी एक चेतना की अभिव्यक्ति हैं।
4️⃣ मन, मनोविज्ञान और ज्ञान कहाँ से आते हैं?
मन, सोच, विश्लेषण, तर्क, ज्ञान —
यह सब मानव बुद्धि से आता है।
और बुद्धि — 👉 केवल द्वैत में काम करती है।
इसलिए —
मनोविज्ञान
ज्ञान
दर्शन
सिद्धांत
सब काल / द्वैत में हैं।
अद्वैत में नहीं।
5️⃣ अद्वैत में शिव “शव” क्यों कहलाते हैं?
अद्वैत में चेतना पूरी तरह निराकार और निर्गुण होती है।
वहाँ —
न इच्छा
न क्रिया
न विचार
इसलिए उसे कहा गया —
> चेतन होते हुए भी अचेतन सा
शिव होते हुए भी “शव” स्वरूप
अर्थात — चेतना है,
लेकिन उसमें कोई गति या पहचान नहीं।
6️⃣ मनुष्य का अस्तित्व द्वैत में ही संभव है
मनुष्य —
शरीर है
मन है
विचार है
इसलिए मनुष्य का अस्तित्व काल / द्वैत में ही संभव है।
इसी कारण द्वैत में अनिवार्य हो जाते हैं —
ज्ञान–विज्ञान
अच्छा–बुरा
प्रेम–घृणा
लाभ–हानि
जीवन–मरण
मोक्ष की चाह
जहाँ द्वैत है, वही
परमात्मा को किसी सिद्धांत की आवश्यकता नहीं परम चेतना परमात्मा स्वयंभू है पूर्ण है अखंड है
उसे न दर्शन चाहिए न सिद्धांत न ज्ञान
सिद्धांत केवल मनुष्य के लिए होते हैं,
परमात्मा के लिए नहीं।समझ शब्दों से नहीं, साधना से आती है

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गुरुदेव सियाग सिद्धयोग निःशुल्क दिव्य संजीवनी मंत्र "क्लीं कृष्ण क्लीं" "क्लिंग कृष्ण क्लिंग" जय गुरुदेव जी
इसलिए अंत में कहा गया —
> भाषण सुनकर समझ सको तो समझ लो
वरना गुरु आधारित उपासना से
धीरे–धीरे अनुभूति आएगी
क्योंकि — अद्वैत समझने का विषय नहीं,
हो जाने की अवस्था है।
✨ द्वैत में शरीर, मन और भेद है — अद्वैत में केवल अखंड चेतना।
गुरु सियाग योग का मूल भी इसी अद्वैत सत्य पर आधारित है। यहाँ साधक को न स्त्री–पुरुष, न शरीर–अशरीर, न योग्य–अयोग्य होने की शर्त दी जाती है। केवल गुरु कृपा से चेतना स्वयं अपनी मूल अवस्था की ओर लौटने लगती है। मंत्र और ध्यान के माध्यम से मन धीरे–धीरे शांत होता है, द्वैत की पकड़ ढीली पड़ती है और साधक अनुभव करता है कि वह शरीर या मन नहीं, बल्कि वही अखंड चेतना है। गुरु सियाग योग में यही यात्रा है — द्वैत से अद्वैत की ओर, ज्ञान से परे अनुभूति की ओर।
🎶 सियाग गुरुदेव भजन 🎶
(लंबा, कीर्तन शैली में)
(ध्रुवपद)
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी,
हम पर अपनी दृष्टि कर दो दयालु रामनी।
तुम बिन कौन निभाए जग में,
तुमसे ही है राह हमारी।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
१️⃣
अंधियारे मन में दीप जलाया,
भटके पथिक को मार्ग बताया,
कुंडलिनी जागृत करके स्वामी,
जीवन का अर्थ समझाया।
जप-ध्यान से मन निर्मल होता,
दुःख का सागर पल में छोटा,
तुम बिन और न कोई सहारा,
गुरुदेव तुम ही हो मोक्ष का द्वार।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
2️⃣
शक्ति-पात की अनोखी विधा से,
जागे आत्मा भीतर गगन में,
सहस्त्रार की ज्योति दमकती,
स्वर बसता है तुम्हारे चरण में।
जो भी तुमको शरण में आता,
दुःख-पाप सब पीछे छूटे,
तुम हो वह ध्रुव तारा जग का,
जो पथिक को सच्चा प्रकाश दिखाए।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
3️⃣
ध्यान में होती यौगिक क्रिया,
रोग शरीर के दूर हो जाते,
मन को मिलता शांति असीम,
दिव्य प्रकाश के दर्शन आते।
तुमने हमें यह योग दिया जो,
युगों से था रहस्य छिपा,
मानव की सारी दुःख कहानी,
तुमने ही पल में मिटा दी।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
4️⃣
कलियुग के अंधकार में स्वामी,
तुमने प्रेम की जोत जलाई,
दुनिया को यह संदेश दिया कि,
ईश्वर न हमसे दूर पराई।
हर हृदय में तुम ही विराजो,
हर श्वास में तुम्हारा नाम,
तुम्हारी वाणी ही तो जीवन,
तुम्हारी कृपा अमृत समान।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
अंतिम प्रार्थना
दास तुम्हारा हाथ पसारे,
चरणों में अपनी जगह दिलाओ,
शक्ति, भक्ति, मुक्ति के दाता,
जीवन पथ पर संग चलाओ।
हम सबको तुम ऐसा वर दो,
सत्य का पथ न छूटे कभी,
गुरुदेव सियाग बस करुणा करना,
हर पल तुम ही बसो हृदय में।
हे सियाग गुरुदेव, कृपा के स्वामी…
हम पर अपनी दृष्टि कर दो दयालु रामनी…
जय गुरुदेव
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