
Pradeep Jain
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Pradeep Jain
@7376JP
I do believe in good memory and a good adventure. I am just sunshine mixed with a little hurricane.


Rajasthan bore the brunt of conversions of Shwetambar Jain temples. Chisels and grinders moved over the Shwetambar idols to erase its history. This #Thread on the Godhikan Jain Temple, Sanganer, Jaipur tries to share the evidences of its real history. 1/n









क्या आप जानते हैं एक ऐसा चमत्कार जो एक स्तोत्र के रचना से हुई थी!! श्री अजित शांति सुत्र ✨ सच्ची श्रद्धा और उत्तम भक्ति से चमत्कार अजित शांति स्तवननी रचना शंत्रुजय गिरिराज पर हुई थी। नेमिनाथ भगवान के शासन में नंदिषेण मुनि शत्रुंजय यात्रा करने आते थे , उस समय अजितनाथ भगवान और शांतिनाथ भगवान की दोनो देरीया आमने सामने थी। अजितनाथ भगवान के दर्शन करते समय , पिछे शांतिनाथ भगवान की देरी पड़ती थी , इसलिये दर्शन करते समय पिछे पीठ पड़ती थी। इसलिये नंदिषेण मुनि दोनो देरी के बीच में बैठ गये। उन्होंने भाववाही अजित शांति स्तवन की रचना की , रचना होने के बाद दोनो देरी जो आमने सामने थी वो देरी बाजु - बाजु में आ गई। अब अजितनाथ और शांतिनाथ भगवान की देरी मे बने हुए पगलाजी के दर्शन करते समय पिछे पीठ नहीं पड़ती है । यह अजित शांति स्तवन बहुत प्रभावक स्तवन है।अजित शांति स्तोत्र की गाथा मे इस प्रकार से लिखा हुआ है कि *"जो पढई जो निसुणइ, उभओ कालंपि अजिअ संति थयं,न हु हुंती तस्स रोगा पूववुप्पन्ना वि नासंति"* इस गाथा का अर्थ इस प्रकार से है - *श्री अजितशांति स्तवन को दो बार जो पढता है अथवा श्रवण करता है उसे रोग होते नही है और पहले के उत्पन्न हुए सभी रोग भी नाश हो जाते है । यह सुत्र बहुत ही प्रभावशाळी है और मंत्र गर्भित है .... इस सुत्र मे कुल ४० गाथा है । श्री अजितनाथ - शांतिनाथ भगवान की देरी शत्रुंजय तीर्थ में छ:गाउ की यात्रा करते समय चंदन तलावड़ी के पास है। अजितनाथ भगवान और शांतिनाथ भगवान ने यहाँ गिरिराज पर चातुर्मास किया था। इसलिये यह दोनो भगवान की देरी बनाई गई है।


🧵 श्री कांगड़ा जैन तीर्थ ✨ हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा भारत का एकमात्र अतिप्राचीन श्वेतांबर जैन तीर्थस्थल है। इसका इतिहास इतना प्राचीन है कि इसे बाईसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के युग से जोड़ा गया है। इस स्थल की पवित्रता और प्राचीनता दोनों ही अद्भुत हैं। 1/n










Why is *Lord Kesariyanathji* referred to as *Lord Vishnu?* Why are there *no other shrines built for Lord Kesariyanathji?* How can *bureaucrats* decide who will serve as *pujari in our tirth?* The *Jain community* is asking these questions today. @RajGovOfficial @RajCMO @AmitShah @sanghaviharsh @AbhayShah11 @Vishnu_Jain1 @sumtijain26 @NitinkolanJain @kppedhisirohi @arpitsinger @JainR_ @MehulAJain9 Watch the full Podcast with *Shri @RushabRB Bhai Bhandari* to know the *reality of #Kesariyanathji* Tirth youtu.be/LIvQqA2MtLc Jainik - +91 72020 07079









