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@Akshara75u

नर तैं जनम पाइ कहा कीनौ?

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अक्षरा@Akshara75u·
जो कुछ भी जानने योग्य है, वह मन का ही स्वरूप है। वास्तव में मन ही जानने योग्य या विजिज्ञास्य है। -बृहदारण्यक उपनिषद
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अक्षरा@Akshara75u·
@purohit_vidit आप जो कह रहे हैं वह अलग मसला है। हम राजनेताओं की बात कर रहे हैं, स्वतंत्रता के बाद से केवल गलत लोगों को ही आदर्श बनाया गया है और थोपा गया है। सबकी पोल दशकों के बाद खुलती है तबतक कुछ पीढ़ियां उन्हीं को आदर्श जानकार व्यवहार करती हैं।
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વિદિત પુરોહિત (Vidit Purohit)
@Akshara75u दबा रह बेचारा बनना चाहता है, ताकि यदि कोई उसे उसकी करुण हालत पर प्रश्न उठाए तो वे दमनकारियों का दोष निकालकर किंकर्तव्यविमूढ़ रह सकता है। वे दबा रहने का इतना आदि हो चुका है कि अब उठना नहीं चाहता परंतु उठने का नाटक भी नहीं छोड़ रहा है। जीवनयापन करने जितना स्वमान ही बचा है।
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अक्षरा@Akshara75u·
Why every wrong person is made our Idol/Hero/Icon in this country?
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अक्षरा@Akshara75u·
@DasIshika73100 Yes. किसी भी प्रयोजन से व्रत का आरम्भ न करे, और कभी भी न देखे हुए देव का निरीक्षण और कभी न गए हुए नए तीर्थों में न जाए। बाकी यह मास पुरुषोत्तम मास (श्रीकृष्ण का प्रिय) इसीलिए कहा जाता है कि भगवान की अधिक से अधिक पूजा, जप, दान आदि करे।
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अक्षरा@Akshara75u·
अधिकमास में फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी कार्य वर्जित हैं और फल की आशा से रहित होकर करने के आवश्यक सभी कार्य किए जा सकते हैं। इस मास में केवल ईश्वर के उद्देश्य से जो व्रत, उपवास, स्नान, दान, पूजन आदि पुण्यकार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल होता है।
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अक्षरा@Akshara75u·
@purohit_vidit वेदों में तिल में तेल की भांति वेदान्त निहित है और वेदान्त वाक्यों के अर्थ का विचार करने से भी मुक्ति प्राप्त होती है। यदि कोई भाषा उन वाक्यों के अर्थ को प्रकाशित करने में अक्षम हो तो ज्ञान कैसे प्राप्त होगा।
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વિદિત પુરોહિત (Vidit Purohit)
@Akshara75u सदैव मान रहेगा। अंग्रेजी से कलुषित ही होता है। विष्ठा रगड़ सुंदर बनने जैसी बात है, धार्मिक व आध्यात्मिक विषय में। वेदांत में भाषा का कोई महत्व नहीं होता, ज्ञान ज्ञान होता है, यह केवल कुछ लोगों की कहने ही हैसियत है बाकी बकवास ही है। गड़बड़ यह है कि आज धर्म के नाम पर IKS चल रहा है
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अक्षरा@Akshara75u·
अपनी मातृभाषा, लोकभाषा में शास्त्रों को पढ़ने वाले व धार्मिक विषयों पर लिखने वाले लोगों के लिए हमारे हृदय में विशेष स्थान है। और अंग्रेजी में लिखने वालों को दूर से ही राम राम। आपके God-Lord आपका भला करें।🙏
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अक्षरा@Akshara75u·
यही हैं। उनके माहात्म्ययोग से तथा आत्मस्वरुपयोग से समस्त पाण्डव सुरक्षित हैं। जहाँ श्रीकृष्ण हैं, वहाँ धर्म है और जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। धर्म के कारण कुन्तीपुत्र विजयी हो रहे हैं जबकि दुरात्मा कौरव अपने पापों का अत्यन्त भयंकर फल पा रहे हैं। महाभारत
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अक्षरा@Akshara75u·
धृतराष्ट्र - क्यों पाण्डव अवध्य हैं और क्यों मेरे पुत्र मारे जा रहे हैं? संजय द्वारा भीष्म-दुर्योधन संवाद से उत्तर देना, यतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जयः। श्रीहरि तीनों लोकों को धारण करते हैं, ये ही योद्धा हैं, ये ही विजय हैं और ये ही विजयी हैं। सबके कारणभूत परमेश्वर +
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अक्षरा@Akshara75u·
@scribe9104 साला ख़्वाब बुनने की बात करता है, बनने की नहीं। इमरोज़
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ANUPAM MISHRA
ANUPAM MISHRA@scribe9104·
मुहब्बत कर तो लें लेकिन, मुहब्बत रास आये भी दिलों को बोझ लगते हैं, कभी ज़ुल्फ़ों के साये भी ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें…🎼 फ़िल्म इज़्ज़त (1968) तनूजा, धर्मेंद्र लता, रफ़ी, लक्ष्मी-प्यारे और साहिर इस गीत की ये लाइनें “हज़ारों ग़म हैं इस दुनिया में अपने भी पराये भी मुहब्बत ही का ग़म तनहा नहीं, हम क्या करें” साहिर लुधियानवी के ये जज़्बात अपने कई नग़मों में नज़र आये हैं जैसे, “तुम मुझे भूल भी जाते तो ये हक़ है तुमको” फ़िल्म “दीदी” (1959) या फिर “तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं” फ़िल्म “दिल ही तो है” (1963) #बाइस्कोप
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अक्षरा@Akshara75u·
1898, Vincent Smith; "Dhar pillar is the tallest iron pillar in the world (43.7 feet) weighing 7000 kg." Dhar or Dhara was the capital of medieval Malwa founded by Raja Bhoja. Bhojashala was a learning centre of Sanskrit, hence the place of Vagdevi Ma Saraswati.
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अक्षरा@Akshara75u

Dhar pillar (twice the size of Vishnurodhvaja) lying at Lat masjid (MP) is said to be originally erected by King Bhoja but it’s original location is said to be unknown (probably a Shiva temple).

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अक्षरा@Akshara75u·
@mi82305 भवत् अर्थात आदर सूचक सर्वनाम (आदरणीय) + अंघ्रि अर्थात चरण।
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शब्द@mi82305·
@Akshara75u भवदंघ्रि - इस शब्द का अर्थ क्या है?
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अक्षरा@Akshara75u·
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए।। लोग बहुत से रोगों और वियोगों (दुःखों) से मारे हुए हैं, यह सब आपके चरणकमलों के निरादर के फल हैं।
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अक्षरा@Akshara75u·
जिस तरह लकड़ी और आरे के संघर्ष से लकड़ी के दो हिस्से हो जाते हैं उसी तरह प्राण और अपानवायु के संघर्ष से जठराग्नि स्वभावतः उत्पन्न हो जाती है। -महारामायण
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अक्षरा@Akshara75u·
ऋग्वेदीय श्रीराधोपनिषद: भगवान श्रीकृष्ण इनकी आराधना करते हैं, इसलिए ये राधा हैं। ये सर्वदा श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं, इसलिए राधिका हैं। श्रीराधा को गान्धर्वा भी कहते हैं। ये श्रीहरि की सर्वेश्वरी, सम्पूर्ण सनातनी विद्या हैं और श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं।
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अक्षरा@Akshara75u

अथर्ववेदीय गोपालोत्तरतापनीयोपनिषद: श्रीराधा और गोपियों का दुर्वासा ऋषि से प्रश्न - हमारे साथ नित्य विहार करने वाले श्रीकृष्ण ब्रह्मचारी कैसे हैं? अभी इतना पकवान खाने वाले महर्षि दुर्वासा किस प्रकार केवल दूर्वा (दूर्वा खाने के कारण नाम दुर्वासा) ग्रहण करते हैं?

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अक्षरा@Akshara75u·
@RadharamanChan1 अंग्रेजों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या ब्राह्मणों का प्रभाव, जाति व्यवस्था, हिन्दू धर्म की लोचशीलता और हिन्दुओं का अंधविश्वास (उनके अनुसार, यानि हमारी श्रद्धा) था।
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अक्षरा@Akshara75u·
@RadharamanChan1 जैन, बौद्ध के बाद मुगल आक्रांताओं को बार-बार झेलने के बाद भी जिसने अपना धर्म नहीं छोड़ा वह गोरों से क्या प्रभावित होता। जिसने मंदिर, मूर्तियों के टूटने पर निर्गुण अपना लिया लेकिन आस्था नहीं छोड़ी, मारकाट से भी नहीं डरा वह कुछ विदेशी बोलने वालों की चैरिटी के झांसे में कैसे आता।
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अक्षरा@Akshara75u·
North was always a difficult region for missionaries while south was an easy one. I know people won't agree, but missionaries accounts confirm it. They sent their best to the North but failed miserably, they could only convert some orphans and beggars.
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