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अक्षरा
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@purohit_vidit आप जो कह रहे हैं वह अलग मसला है।
हम राजनेताओं की बात कर रहे हैं, स्वतंत्रता के बाद से केवल गलत लोगों को ही आदर्श बनाया गया है और थोपा गया है।
सबकी पोल दशकों के बाद खुलती है तबतक कुछ पीढ़ियां उन्हीं को आदर्श जानकार व्यवहार करती हैं।
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@Akshara75u दबा रह बेचारा बनना चाहता है, ताकि यदि कोई उसे उसकी करुण हालत पर प्रश्न उठाए तो वे दमनकारियों का दोष निकालकर किंकर्तव्यविमूढ़ रह सकता है। वे दबा रहने का इतना आदि हो चुका है कि अब उठना नहीं चाहता परंतु उठने का नाटक भी नहीं छोड़ रहा है। जीवनयापन करने जितना स्वमान ही बचा है।
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@DasIshika73100 Yes.
किसी भी प्रयोजन से व्रत का आरम्भ न करे, और कभी भी न देखे हुए देव का निरीक्षण और कभी न गए हुए नए तीर्थों में न जाए।
बाकी यह मास पुरुषोत्तम मास (श्रीकृष्ण का प्रिय) इसीलिए कहा जाता है कि भगवान की अधिक से अधिक पूजा, जप, दान आदि करे।
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@Akshara75u Can I bring any new idol into house during adhik Mass?
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@arvind_now Hmm.
I thought they were showing us corrupt examples to make us more corrupt.
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@purohit_vidit वेदों में तिल में तेल की भांति वेदान्त निहित है और वेदान्त वाक्यों के अर्थ का विचार करने से भी मुक्ति प्राप्त होती है।
यदि कोई भाषा उन वाक्यों के अर्थ को प्रकाशित करने में अक्षम हो तो ज्ञान कैसे प्राप्त होगा।
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@Akshara75u सदैव मान रहेगा।
अंग्रेजी से कलुषित ही होता है। विष्ठा रगड़ सुंदर बनने जैसी बात है, धार्मिक व आध्यात्मिक विषय में।
वेदांत में भाषा का कोई महत्व नहीं होता, ज्ञान ज्ञान होता है, यह केवल कुछ लोगों की कहने ही हैसियत है बाकी बकवास ही है। गड़बड़ यह है कि आज धर्म के नाम पर IKS चल रहा है
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मुहब्बत कर तो लें लेकिन, मुहब्बत रास आये भी
दिलों को बोझ लगते हैं, कभी ज़ुल्फ़ों के साये भी
ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें…🎼
फ़िल्म इज़्ज़त (1968)
तनूजा, धर्मेंद्र
लता, रफ़ी, लक्ष्मी-प्यारे और साहिर
इस गीत की ये लाइनें
“हज़ारों ग़म हैं इस दुनिया में अपने भी पराये भी
मुहब्बत ही का ग़म तनहा नहीं, हम क्या करें”
साहिर लुधियानवी के ये जज़्बात अपने कई नग़मों में नज़र आये हैं
जैसे, “तुम मुझे भूल भी जाते तो ये हक़ है तुमको”
फ़िल्म “दीदी” (1959)
या फिर “तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं”
फ़िल्म “दिल ही तो है” (1963)
#बाइस्कोप
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1898, Vincent Smith;
"Dhar pillar is the tallest iron pillar in the world (43.7 feet) weighing 7000 kg."
Dhar or Dhara was the capital of medieval Malwa founded by Raja Bhoja. Bhojashala was a learning centre of Sanskrit, hence the place of Vagdevi Ma Saraswati.

अक्षरा@Akshara75u
Dhar pillar (twice the size of Vishnurodhvaja) lying at Lat masjid (MP) is said to be originally erected by King Bhoja but it’s original location is said to be unknown (probably a Shiva temple).
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ऋग्वेदीय श्रीराधोपनिषद:
भगवान श्रीकृष्ण इनकी आराधना करते हैं, इसलिए ये राधा हैं। ये सर्वदा श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं, इसलिए राधिका हैं। श्रीराधा को गान्धर्वा भी कहते हैं। ये श्रीहरि की सर्वेश्वरी, सम्पूर्ण सनातनी विद्या हैं और श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं।

अक्षरा@Akshara75u
अथर्ववेदीय गोपालोत्तरतापनीयोपनिषद: श्रीराधा और गोपियों का दुर्वासा ऋषि से प्रश्न - हमारे साथ नित्य विहार करने वाले श्रीकृष्ण ब्रह्मचारी कैसे हैं? अभी इतना पकवान खाने वाले महर्षि दुर्वासा किस प्रकार केवल दूर्वा (दूर्वा खाने के कारण नाम दुर्वासा) ग्रहण करते हैं?
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@RadharamanChan1 अंग्रेजों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या ब्राह्मणों का प्रभाव, जाति व्यवस्था, हिन्दू धर्म की लोचशीलता और हिन्दुओं का अंधविश्वास (उनके अनुसार, यानि हमारी श्रद्धा) था।
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@RadharamanChan1 जैन, बौद्ध के बाद मुगल आक्रांताओं को बार-बार झेलने के बाद भी जिसने अपना धर्म नहीं छोड़ा वह गोरों से क्या प्रभावित होता। जिसने मंदिर, मूर्तियों के टूटने पर निर्गुण अपना लिया लेकिन आस्था नहीं छोड़ी, मारकाट से भी नहीं डरा वह कुछ विदेशी बोलने वालों की चैरिटी के झांसे में कैसे आता।
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