शब्द
499 posts

शब्द
@mi82305
'शब्द' को 'ब्रह्म' कहा है क्योंकि ईश्वर और जीव को एक श्रृंखला में बाँधने का काम शब्द द्वारा ही होता है। सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारम्भ भी शब्द से हुआ है।






पुरी के शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती श्रीचैतन्य महाप्रभु का बारम्बार अपमान बन्द करें "चैतन्य महाप्रभु कीर्तन करते रहे और बंगाल हाथ से निकल गया" बोलकर बंगाल की अव्यवस्था का कारण चैतन्य महाप्रभु के कीर्तन को बताने वाले पुरी के शङ्कराचार्य यह स्पष्ट करें बंगाल तो पुरी पीठ के ही अधिकार में आता है फिर पुरी के शंकराचार्यों ने बंगाल को हाथ से निकलने क्यों दिया ? चैतन्य महाप्रभु को पुरी के शंकराचार्य ने शांकर संन्यासी बताया है तो बंगाल की अव्यवस्था का कारण शांकर परम्परा को मानना क्या उचित होगा ? ईसा मसीह पुरी पीठ में पढ़े थे और जेल में बन्द मुसलमानों का सहयोग लेकर हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे, जैसे दुर्भाग्यपूर्ण कथन करने वाले पुरी के शंकराचार्य स्वयं को तो त्रिनेत्रधारी पाशुपतास्त्रवेत्ता शिवस्वरूप बताते हैं जिनकी परिक्रमा इन्द्रादि भी करते हैं किन्तु बंगाल की अव्यवस्था का कारण अपने ही कथनानुसार शांकर संन्यासी (वस्तुतः भगवद्रूप) श्रीमहाप्रभुजी के कीर्तन को मानते हैं। जिनकी कृपा और मार्गदर्शन के कारण बंगाल में थोड़ा बहुत जो सात्त्विक आहार एवं सनातनी उपासना दिखती है, उन्हें "बंगाल हाथ से निकल गया" बोलकर पुरी पीठ का सम्बन्ध ईसा मसीह से दिखाने वाले पुरी के शङ्कराचार्य ने तो बाकी सभी शाङ्करपीठों को अराजक, आतङ्कवादी और गोहत्यारी तक घोषित कर रखा है। इसके बाद भी किस मुख से सवा घण्टे भजन का उपदेश करेंगे ? स्वधर्मनिष्ठा और कीर्तन + कर्तन के सामयिक महत्त्व को बताना अवश्य सराहनीय है किन्तु चैतन्य महाप्रभु के कीर्तन को बंगाल की अव्यवस्था का उत्तरदायी बताना निन्दनीय अदूरदर्शिता का परिचायक है। हम तो श्रीचैतन्य महाप्रभु का योगदान सनातन धर्म में आदिशङ्कराचार्य जी के योगदान से कम नहीं समझते। हमारे परमगुरु ने शङ्कराचार्य के ज्ञान और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति के समन्वय से ब्रह्मचिन्तन का उपदेश किया है। ― हंसवंशावतंस श्रीमन्महामहिम विद्यामार्त्तण्ड श्रीमज्जगद्गुरु निग्रहाचार्य स्वामिश्री श्रीभागवतानन्द गुरु #निग्रहाचार्य #Nigrahacharya #शंकराचार्य

मोदी के आने के बाद न जाने क्यों भारत के लोगों को , साधु संतों को राजतंत्र याद आने लगा हैं और ना सिर्फ याद आने लगा हैं बल्कि साधु संत तो खुलकर राजतंत्र स्थापित करने के पक्ष में भी बोल रहे हैं..... जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने भी इस विषय में राय रखी हैं सबको सुननी चाहिए....! @rajput_of_india

@PunchTantrum अगर वो खूद दिखाये। तो?


एक ऐसी ब्रीड इस देश में आ गई है जो भाजपा और संघ से अपनी घृणा के कारण राम जन्मभूमि मंदिर जैसे पवित्र कार्य में भी मीन-मेख ढूँढते रहते हैं। पहले अतिक्रमण मिटाने पर, फिर गर्भगृह की नक्काशी पर, फिर प्राण प्रतिष्ठा पर, फिर प्लिंथ में बनी कलाकृतियों पर, उसके बाद ध्वजारोहण पर और अब इस ज्योति पर - केवल छाती पीटना ही ध्येय रह गया है। मंदिर में १००० अच्छे और भव्य कार्य हुए हैं। यह स्थान कोई पौराणिक या ऐतिहासिक स्थान नहीं है। केवल ३.५ साल के लिए एक स्थानापन्न मंदिर यहाँ रहा जिसको बाद में हटा दिया गया। किसी ने न्यास को नहीं बोला था यहाँ कुछ बनाने के लिए, न्यास ने स्वयं तय किया और जो उनको उचित लगा, वो बनाया। पर जिन्होंने जीवन भर देश, समाज, धर्म के लिए कुछ भी नहीं किया और केवल मुफ्त के इंटरनेट के बल पर नेता बनने का ढोंग कर रहे हैं, वे उनको सिखाने का दुस्साहस कर रहे हैं जिनका जीवन देश धर्म की रक्षा में निकल गया, जिन्होंने घर छोड़ दिया, परिवार नहीं बनाया इस देश के लिए


Missing Him Badly,


संघ को समझना…



@Gannu_j कुछ भी ना लिखा कर भाई........ इस समय सबसे ज्यादा वर्णसंकर ब्राह्मण मे ही है.........







