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बिहार असिस्टेंट प्रोफेसर की vacancy आई हुई है
लेकिन मंजूर शुदा सब्जेक्ट में उर्दू को जगह नहीं मिली
एक ऐसी जुबान जो खुद बिहार की सबसे बड़ी दूसरी जबान है
जो हिंदुस्तानी होने के साथ मुल्क की तहजीब की जुबान है
मुल्क की आजादी , धार्मिक , आर्थिक , राजनैतिक, सामाजिक, और जीवन के हर छेत्र में उर्दू भाषा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है, फिर यह नाइंसाफी क्यों ?
बिहार सरकार से मांग करते हैं कि उर्दू जबान को भी मंजूर शुदा सब्जेक्ट में शामिल करना चाहिए
@BiharEducation_

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