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पिछले 5 दिन से राजस्थान में हर विभाग के ट्रांसफर की लिस्ट आ रही हैं, जिनमें मुख्यतः शिक्षा विभाग से जुड़ी हैं,,, जिसका ट्रांसफर गलत हो गया है या जिसका नहीं हुआ है , सब एक ही बात बोल रहे हैं कि शिक्षा मंत्री के बेटे से बात हो गयी हैं अगली लिस्ट में हो जाएगा ! बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है तबादलों के नाम पर 🤬 ?




Meet Haaland, ‘Jaat of Norway’—the World Cup Viking who loves butter chicken & goals Manisha Mondal @manishamondal25 reports Illustration: Shruti Naithani @Shrru_art #ThePrintSports #FIFAWorldCup #ThePrintProfile theprint.in/theprint-profi…














@POOJA_VOF @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @ashokgehlot51 @INCRajasthan @INCIndia @priyankagandhi भजनलाल–डोटासरा के कथित आंतरिक गठबंधन का अध्याय जोड़ दीजिए, फिर विश्लेषण थोड़ा संतुलित लगेगा।

भाजपा सरकार ने बड़े-बड़े विज्ञापनों और प्रचार के साथ 12 जून से 15 जुलाई तक शहरी सेवा शिविर-2026 शुरु किए। लेकिन बिना तैयारी और कमजोर पैरवी के कारण ये शिविर सरकार की नाकामी बनकर रह गए। इन शिविरों को जन राहत का माध्यम बताया गया, लेकिन सरकार की प्रशासनिक विफलता की वजह से हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसके महत्वपूर्ण प्रावधानों पर अब रोक लगा दी गई है। यानी शिविरों में पट्टे, कॉलोनी नियमन और भूमि संबंधी राहत वाले प्रावधानों पर रोक लग गई है। विभाग द्वारा जारी आदेश के बिंदु-3 कब्जा भूमि नियमन (राजकीय भूमि पर बसी कॉलोनियों का नियमन) बिंदु-5 डिनोटिफाइड कच्ची बस्तियों के नियमन के प्रावधान बिंदु-6 कच्ची बस्ती नियमन की दरें बिंदु-14 कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के 90A के तहत ले-आउट प्लान अनुमोदन में शिथिलता बिंदु-16 खांचा भूमि का निकायों को अधिकार एवं आवंटन बिंदु-20 अपंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी करने में शिथिलता वाले प्रावधानों पर अब सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर सकेगी। भाजपा सरकार बताए.. जब पट्टों और नियमन से जुड़े सबसे अहम प्रावधानों पर ही रोक लग गई, तो ये शहरी सेवा शिविर आखिर किस काम के हैं? सच्चाई ये है कि इन शिविरों के नाम पर राहत का भ्रम फैलाकर जनता को केवल भटकाया जा रहा है। सरकारी धन की बर्बादी से भाजपा सरकार सिर्फ झूठे प्रचार में लगी है।

❗दतिया में बवाल डॉ नरोत्तम मिश्रा का टिकिट कटने पर दतिया में भारी बवाल छिड़ा हुआ है। उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। भाजपा के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफ़े दे दिए हैं।



