



Pooja
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@POOJA_VOF
विश्व के प्रथम शिक्षक श्रीकृष्ण की अनन्य उपासक, धार्मिक आडंबरों और पाखंडों की गांधीवादी एवं अम्बेडकर वादी तरीक़ों से निर्मम हत्यारी ।







‘हवा में उड़ते हुए’ सड़क परिवहन मंत्री का इंटरव्यू सवाल : आपने जो आम दिए हैं वे खट्टा है। जवाब : आप इमली की बात मत कीजिए। इथेनॉल के मुद्दे पर नितिन गडकरी के इस इंटरव्यू का एक पंक्ति में सा सार यही है। पूरा इंटरव्यू सुन लीजिए। अगर आप अपना माथा नहीं पकड़ लेंगे तो फिर कहिएगा! मेघा ने माइलेज के मुद्दे पर पहले सवाल से ही घेरा। अपनी गाड़ी की माइलेज का भी उदाहरण दिया। पर गडकर ने कहा, माइलेज मापने की मशीन घर में नहीं होती, डीलर से जांच कराइए! दिक़्क़त हो तो कंज़्यूमर कोर्ट जाइए! मतलब कुछ भी! माइलेज बताने का मीटर घर में नहीं होता पर हर गाड़ी में तो होता ही है। इसको नकार दिया गडकरी ने! कार कंपनियों के लिए ये बहुत ही आपत्तिजनक बात है कि दशकों से हर कार के साथ बनाए गए उनके माइल-मीटर पर गडकरी ने सवाल उठा दिया है! पर शायद कार कंपनियाँ गडकरी की इस बात के ख़िलाफ़ फिर भी ना बोलें! संभवतः कोई डर या दबाव होगा! नहीं तो कार कंपनियों को सामने आकर स्वीकारने चाहिए कि कार में फिट माइल-मीटर धोखा है! बात इतनी भर नहीं है। क़रीब आधे घंटे के इस इंटरव्यू में गडकरी ने किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया है। गोल गोल घुमाया है। ज़्यादा कुरेदने पर अपरोक्ष रूप से FIR और परोक्ष रूप से Defamation केस तक की धमकी दी है! सवाल पूछा जा रहा है E10 वाली गाड़ियों में E20 डाले जाने की और जवाब दे रहे हैं 100% इथेनॉल या पेट्रोल से चलने वाले फ़्लेक्सी फ़्यूल इंजन की! इथेनॉल के बाद भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ? जवाब : आयं बाएँ साएं जब एक सवाल का जवाब न सूझा तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री पर बात टाल दी! इस पूरे इंटरव्यू पर एर रिसर्च पेपर लिखा जा सकता है। रिसर्च पेपर इस बात पर कि जब तर्क और तथ्य न पेश कर पा रहे हों तो अपनी ज़िद को सही साबित करने के लिए इंटरव्यू नहीं देना चाहिए। बहुत लंबा लिखा जा सकता है। लेकिन निचोड़ ये कि अगर प्रधानमंत्री @narendramodi अपने मंत्री @nitin_gadkari की इन तमाम बातों को सुनने के बाद भी इन पर समुचित ‘नीतिगत’ कार्रवाई नहीं करते हैं तो फिर समझ लीजिए कि ईश्वर नहीं, अब इथेनॉल ही सबका मालिक है 🙏 और अंत में @MeghaSPrasad के लिए एक शब्द Superb 🙌 Video Credit @ABPNews YT



उत्तर प्रदेश की राजनीति कुछ इस कदर है कि यहां लोगों को सबसे ज्यादा प्यारी अपनी जाति है, विकास का क्या करना है? सबके अपने पसंदीदा नेता हैं, हम तो ठहरे आलोचक अगर किसी की आलोचना कर दे तो लोग बुरा मान जाते हैं। चंद्रशेखर आजाद की आलोचना करो तो उनके चाहने वाले गुस्सा होते हैं। मायावती की कमी निकालो तो उनके चाहने वाले भी गुस्सा हो जाते हैं और बहुत बज्र गाली देते हैं। अखिलेश यादव जी की आलोचना करो तो उनके लोग बुरा मान जाते हैं। योगी आदित्यनाथ जी की आलोचना करो तो उनके चाहने वाले बुरा मानते हैं। कुल मिलाकर नेता गलत करे या ठीक ये उसे पसंद करेंगे लेकिन आलोचना वाले को नहीं।😀











