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@POOJA_VOF

विश्व के प्रथम शिक्षक श्रीकृष्ण की अनन्य उपासक, धार्मिक आडंबरों और पाखंडों की गांधीवादी एवं अम्बेडकर वादी तरीक़ों से निर्मम हत्यारी ।

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Pooja@POOJA_VOF·
✍️समाज के दो चेहरों को देखना है तो कुमार विश्वास में देखिए और ख़ुद पर हंसिये ✍️अनैतिकताओं से बनी तुलसी तेरे आंगन की जिसकी छांव में कुमार विश्वास नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। ✍️कुमार विश्वास लोगों को जीवन के दो बेहतरीन नियम सिखा रहे हैं जो भोग में भी हैं और मठ में भी। ✍️कुमार विश्वास देखें तो एक योगी पुरूष हैं क्योंकि वो कर्मों की व्याख्या उसके फल को चखकर लोगों को बता रहे हैं। ✍️पता नहीं क्यों अब लगता है कि वो अगर इस व्यक्तित्व के साथ भी राजनीति में पिछड़े हैं तो इसका एक बड़ा कारण उनके मित्र का उनसे भी बड़ा कर्म-साधक और फल पिपासु होना है। ✍️अनेकों अनेक नौजवानों की मेहनत के निचोड़ को निष्फल करने के बाद बने खाद्य से फलित उनके आंगन की तुलसी कुमार विश्वास की कथाओं के अर्थ का सशरीर प्रमाण है। ✍️उसको तुलसी को निहारिये और अपने सपनों को बलिवेदी पर चढ़ते देख ज़ोर से गाइये ……….. ——————-कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ।😂😂😂 @DrKumarVishwas @Rajendra4BJP @BJP4Rajasthan @INCRajasthan @GovindDotasra @DrKirodilalBJP @VasundharaBJP @OfficeofGSD @8PMnoCM @8pm6cm @ajitanjum @ravishndtv @AnilYadavmedia1 @SupriyaShrinate @AamAadmiParty @Ramraajya @Khalbaali @Satveer___ @DrAshokJat @Dr_MonikaSingh_ @Saroj302 @AditiRajasthan @HansrajMeena @MukeshYadavIN @manphoolsaran7 @IPS_Prahlad
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Pooja@POOJA_VOF·
@anandsh04294243 बदलते परिदृश्य की सच्चाई !
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Adv.Anand Sharma
Adv.Anand Sharma@anandsh04294243·
@POOJA_VOF छात्र राजनीति का उद्देश्य कभी विचार संघर्ष और नेतृत्व निर्माण हुआ करता था लेकिन आज कई जगह यह धनबल और बाहुबल का खेल बनती जा रही है
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
छात्र राजनीति-माफ़िया गठजोड़-धन वर्षा !!!! (यूं ही नहीं रीलबाज कहा था) यह महज़ शब्द नहीं हैं बल्कि एक दूसरे की पूरक व्यवस्थाएं हैं जो समानांतर चलती रहती हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव जब 2010 में पुनः प्रारम्भ हुआ तब से यह व्यवस्था है एक दूसरे से क़दम मिलाकर चल रही हैं। यह चुनाव मूल में किसी भी तरह की वैचारिक मौलिकता या फिर संघर्षों की सरपरस्ती नहीं लिए है। चुनाव से पहले या शुरुआती दौर में ही चंदा एकत्रण की जो व्यवस्था है वहीं से माफ़ियाओं का गठजोड़ इस चुनाव को प्रभावित करने लग जाता है। अगर बात राजधानी के माफ़ीयाई भामाशाहों की की जाये तो यह जातीय महासभा वाले भाई साहब उसके प्रमुख हैं इस उम्र में उनका विश्वविद्यालय चुनाव को ख़ुद की मैली कमाई से गंदा करने का औचित्य आप समझ सकते हैं ! अब कमोबेश अगर इसे छात्र नेताओं के रूप में गुंडे पनपाने की नर्सरी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी जो चुनाव पूर्व लिए चंदे का मूल्य माफ़ियाओं के क़ब्ज़े में सहायता कर चुकाते हैं। विश्वविद्यालय का अध्यक्ष अपनी संगत चुन रहा है तो उसके मस्तिष्क में अपनी वैचारिकी निश्चित ही भविष्य-उन्मुखता लिए ज़रूर होगी। जहाँ पूर्व के छात्र नेता अपनी नींव सत्ता की कमियों का विरोध करके जनता के बीच रखते थे वहाँ निर्मल चौधरी भजनलाल शर्मा सरकार से किसी भी तरह का विरोध लेने का रिस्क नहीं ले सकते क्योंकि इतनी कम उम्र में फ़ाइल बनवा लेना राजनीति की सबसे बड़ी ब्लैकमेलिंग होती है वह भी तब जब हर फ़ाइल का चश्मदीद और हस्ताक्षर करने वाला आपका दोस्त और आपके विरोधी का रिश्तेदार हो तब केवल सामंजस्य ही व्यापार और शौक़ बचाए रख सकता है। वर्तमान अध्यक्ष अगर निर्मल चौधरी की बात करें तो प्रमोद शर्मा को देखकर आप उनके व्यक्तित्व का अंदाज़ा लगा सकते हैं। जैसी संगत वैसी ही रंगत यह एक देहाती मूल भाव है जो निर्मल चौधरी जैसे, अल्प वैचारिकी नौजवानों की उस चादर को हटाकर उन्हें नंगा करता है जिसे वे हर कार्यक्रम और मंचों पर किसान का बेटा ग़रीब का बेटा बोलकर ओढ़े बैठे रहते हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय का अध्यक्ष या फिर कोई भी नेता अपने दोस्त और दुश्मन बहुत सोच समझकर चुनता है उसमें हित एवं अहित की एक लंबी फ़हरिस्त बेहद गहन विश्लेषण के बाद मुकम्मल की जाती है। प्रमोद शर्मा को अपना बिज़निस पार्टनर और दोस्त इस उम्र में चुनना आप निर्मल चौधरी के विचारों की शुद्धता और मलीनता को जांच सकते हैं। उन रीलों और काले सीसों का पर्दा अगर प्रमोद शर्मा की करतूतों को देखकर भी आप की पटल पर पड़ा हुआ है और इस अतरंगी किसान की ढाल बन रहे हो तो माफ़ कीजिए ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आप अपने उस पिता का अपमान कर रहे हैं जिसने आपको ऐसे अनेक छात्र नेताओं को वोट देने के क़ाबिल बनाया जो अभी भी उसी खेत का मालिक है जिसे आप गाँव छोड़ आये थे। एक सजग युवा होने के नाते आपको यह तय करना चाहिए की उम्र के इस पड़ाव में उनका उठना बैठना राजस्थान के वर्तमान टॉप मोस्ट वॉन्टेडों, भूमाफियाओं और क़ब्ज़ा धारि गुंडों के साथ है उनमें आप किसान का बेटा तलाश रहे हैं यह आपकी समझ को विचलित नहीं करता ? क्या अभी भी आपको यह नहीं समझ आ रहा कि उनकी साथ घूम रही गाड़ियों का ख़र्चा और उस वानर सेना का पेट पूजन कौन सी कमाई से हो रहा। अब यह कोई नासमझ ही कह सकता है कि प्रमोद शर्मा के बिज़नेस पार्टनर निर्मल चौधरी बहुत ही ईमानदार व्यवसाय की दम पर राजस्थान में भौकाल मचाये घूम रहे हैं। प्रमोद शर्मा से अगर ठीक से पूछताछ कभी हुई तो यह दोस्ताना उसी दिन तार तार हो जाएगा !!!!! @INCRajasthan @IYC @VinodJakharIN @GovindDotasra @kanhaiyakumar @8PMnoCM @crosschat_wala @Khalbaali @seemabadiyasar @manphoolsaran7 @MukeshYadavIN
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
ट्रैफ़िक जाम से परेशान होकर मैं एक बार हाइकोर्ट में पीआईएल दाख़िल करने के लिए निकल पड़ा। अंबेडकर सर्किल, जहाँ हाईकोर्ट है, उससे पहले बहुत लंबा जाम लगा था और मेरी कार उसमें फंस गई। बहुत देर बाद जब जाम में थोड़ी सी जगह बनी तो पास से निकल रहे ट्रफिक अधिकारी से मैंने कारण जानना चाहा तो बोले, सीजे साहब आ रहे हैं तो निकलते ही खुल जाएगा! मैंने मौक़ा मिलते ही यूटर्न लिया और वापस चाय-सा चला गया!
Kadambini Sharma@SharmaKadambini

आम आदमी कितना पका हुआ है ये नेताओं को समझ नहीं आ रहा….छोटी- छोटी चीजों के लिए लड़ना पड़ रहा है…सुचारू रूप से ट्रैफ़िक चले ये तो बेहद सामान्य समझने वाली बात है…फिर सड़क पर सभा/ भाषण क्यों? ये मुंबई का वीडियो है लेकिन दिल्ली में भी आए दिन कभी किसी VIP के गुज़रने के लिए तो बस बेवक़ूफ़ाना बंदोबस्त के कारण आम लोग घंटों ट्रैफ़िक में फँसे रहते हैं…

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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
कभी कभी शिक्षा प्रणाली पर संदेह होता है !!! कभी कभी होता है संदेह संस्कृति पर जिस पर कपोलित दंभ भरा जाता है !!!! मैं सोचती हूँ कि संदेह तो इनके स्त्री होने पर भी किया जा सकता है तो क्यूँ ना भारतीय शिक्षा और संस्कृति को देश भक्त होने के नाते बचा लेती हूँ। बस कहना इतना सा है कि अपमान तो तुमने नारी जगत में पैदा हो कर किया है ताई !!! @Yashpalyadav336 @Rinku9621 @Ankitydv92 @riskyyadav41
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अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
बांटकर कैसे राज किया जाता है और वंचित वर्गों के हकों को मारा जाता है:– बंद कमरों की मीटिंग, अखबारों की प्लांटेड खबरों से लेकर तमाम तरह के एजेंडे जो दलित को आदिवासी से, किसान को दलित से लड़ाने वाले आपने देखे समझे होंगे, उसके बाद सोशल मीडिया से कैसे वंचित वर्गों को बांटा जाता है इसका प्रमाण– १. लॉकडाउन के बाद ट्विटर पर एक भेड़ा राम बेरोजगारों की भावनाओं से खेल कर फेमस हुआ था जिसकी भड़विंद चोटिया से लगातार उठक बैठक होती रही थी और उसी के बताए मार्ग पर चलकर दलित vs किसान करने की पुरजोर कोशिश हुई, वो लगातार भीमराव अंबेडकर जी से लेकर तमाम दलित विरोधी ट्वीट कर वंचित वर्गों को बांटने की कोशिश कर रहा था, किसान दलित नेताओं के समर्थकों को आपस में लड़ा रहा था जिसके चलते संघ और पाखंडी वर्ग के सारे मंसूबे सफल हो रहे थे। फिर सोशल मीडिया पर भेड़ा और भड़विंद की जुगलबंदी को एक्सपोज किया गया और दलित, किसान के बच्चों को समझाया गया कि एक कुंठित जातिवादी है दूसरा दलाली खाने वाला संघी एजेंट बना हुआ है इस से ज्यादा इनका वंचित वर्ग से कुछ भी लेना देना नहीं है, इनके नाम पर लड़ने से अच्छा है, आपस में अच्छे इश्यू पर बात कर के समझदारी बढ़ाई जाए, अपने वर्ग की आवाज उठाई जाए। २. जब तक भेड़ा को एक्सपोज किया तब भड़विंद ने एक सोशल मीडिया के दलित एक्टिविस्ट से मीटिंग कर उसको राह दिखाई कि कैसे दलित vs किसान किया जा सकता है, कैसे फालतू के मुद्दों पर आपस में लड़ा कर वंचित वर्गों की ऊर्जा खत्म की जा सकती है। भड़विंद के साथ मीटिंग होते ही अगले ही दिन वो लड़का सोशल मीडिया पर जाट vs मेघवाल तो कभी दलित vs अन्य करने लग गया, वंचित वर्गों को भड़काने की भरसक कोशिश करने लगा और उनके एजेंडों के बीच वंचित वर्ग के लोग अपने हकों को छोड़ कर, आपसी बहस से सोशल मीडिया पर लड़ाई लड़ने लगे। उधर विप्र सेना वाले जब जैसी मर्जी हो, आदिवासी, दलित, किसान वर्ग के अधिकारियों, नेताओं को टारगेट पर रखकर कार्यवाही कराने लगे, अपनी जाति की सरकार की धौंस खुलेआम दिखाने लगे जिसके विरोध में बंटे हुए वंचित वर्गों की आवाज दबकर गुम होने लगी, धर्म की आड़ में दलित स्कूल अध्यापिकाओं को सस्पेंड कराने तो कभी स्टूडेंट्स पर केस करा के जेल भेजने, जनता की आवाज बनते किसान दलित आदिवासी विधायकों को सस्पेंड कराने से लेकर, दलित किसान वर्ग के अधिकारियों को अपनी ड्यूटी निभाने मात्र के लिए ही सस्पेंड, लाइन हाजिर करने लगे। ये तो एक अकेला चोटिया ही सोशल मीडिया पर बांट रहा है, खुले आम जहर फैला रहा है, ऐसे कितने चोटिया होंगे जो छुप छुप कर वंचित वर्गों को आपस में बांटने के लिए लगे हुए हैं और उनके हकों को खाने की जमीन मजबूत कर रहे हैं और वंचित वर्ग एक दुसरे से जलन, कुंठा में अपने हक, संसाधन पाखंड के हाथों में सौंपे जा रहे हैं, लाचार से मुंह ताक रहे हैं, अपनी आंखों से सब देखते, जानते समझते हुए भी एक हो कर लड़ने की जगह एक दुसरे की टांग खींचने लगे हुए हैं।
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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
एक रोचक जानकारी बता रहा हूँ। वो यह कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पोंगा पंडितों और तांत्रिकों से घिर चुके हैं। मुख्यमंत्री जी के दाएं हाथ में तीन रत्न की अंगूठियां इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं। जब भजनलाल जी मुख्यमंत्री नहीं थे तब वे इस तरह के ज्योतिषीय और तांत्रिक प्रभावों में नहीं थे। जिस दिन वे मुख्यमंत्री बने उस दिन उनके दाएं हाथ की सिर्फ एक उंगली में सोने की अंगूठी थी। भारतीय पुरुषों में सोने की एक अंगूठी होना एक आम सी बात है। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद अंगूठी की संख्या एक से दो हुई और अब तीन हो चुकी है। कल चार और फिर पांच भी हो जाएगी। मैंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मुख्यमंत्री जी की उंगलियों में पहनी गई अंगूठी के राज को समझने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री जी पन्ना, नीलम और सफेद हीरा रत्न एक साथ पहनते हैं। वैसे पन्ना रत्न की अंगूठी देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पहनते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री जी बुद्ध, शुक्र और शनि ग्रह की दशा को ठीक रखने के लिए ये तीनों रत्न पहनते हैं। बुद्ध आत्मविश्वास बढ़ाता है, संचार कौशल में वृद्धि करता है। शुक्र ग्रह समृद्धि, ऐश्वर्य, विलासिता और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। शनि की दशा जब ठीक होती है तो जीवन में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता के साथ शत्रुओं का नाश होता है। ये सब कुछ प्राप्त करने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री इन तीन रत्नों को धारण करते हैं। मुख्यमंत्री संविधान की शपथ लेता है और संविधान की भावना अंधविशास, पाखंड को छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की पैरवी करती है। तिस पर भी एक मुख्यमंत्री को तो होना ही कर्म प्रधान चाहिए। मेरी रुचि ये बात समझने में है कि मुख्यमंत्री जी को ये तीन रत्न पहनने की सलाह किसने दी है ? धीरेन्द्र शास्त्री ने, स्वामी रामभद्राचार्य ने या फिर प्रदीप मिश्रा ने ? प्रदेश का मुखिया क्या पहनेगा यह तय करने वाले हम कोई नहीं होते लेकिन जब आप राजस्थान की 9 करोड़ जनता की तकदीर लिखने के लिए बैठे हो ऐसी मान्यताएं और धारणाएं जनता के हितों को प्रभावित करती हैं। जब SI भर्ती को लेकर पूरे प्रदेश के युवा उद्वेलित थे तब कैबिनेट कमेटी की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री को तुरंत फैसला लेना था। लेकिन सीएम साहब जल्दी निर्णय नहीं ले पाए और लेट - लतीफी में सारा काम खराब हो गया। उस वक्त मुझे मेरे गोपनीय सूत्रों ने बताया था कि अगले एक महीने और दस दिन तक किसी ज्योतिषी की सलाह पर मुख्यमंत्री कोई भी राजनीतिक फैसला नहीं लेंगे। मैंने इस बात की गंभीरता को जानने के लिए मुख्यमंत्री जी को लगातार वॉच किया और बात सटीक निकली कि मुख्यमंत्री जी ने उस दौरान कोई भी फैसला नहीं लिया। अगर मुख्यमंत्री जी के बारे में ऐसी बातें बाहर आएंगी तो थोड़ा सोचने की बात है कि हम कैसे प्रगतिशील विचारों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे पाएंगे।
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
अखिलेश यादव अब विमर्श के मध्य में हैं।।। हर बौद्धिक संवर्ग की बातचीत का वे हिस्सा हैं।।। बडे बुडबकों की आलोचना में हैं।। पत्रकारिता की TRP में हैं।।। यही तो संकेत है एक राष्ट्रीय पटल के चेहरे का।। यह भी याद रखने वाली बात है अखिलेश यादव UP से हैं!!!!!
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
ये तो गैंग ऑफ वासेपुर हो गया ! बातचीत में ही क्या किये हैं …..कूट दिये हैं टाईप !😂😂 x.com/1K_Nazar/statu…
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खुरपेंची
खुरपेंची@Khurpenchi_·
क्या खूब लिखा है। 🙋🏼‍♀️👌 #Women_pride_mamta @AITCofficial @MamataOfficial @sayani06 @abhishekaitc
Pooja@POOJA_VOF

राहें गुलशन तो फूल खिलेंगे और तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे,तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे .... नर मुंडों से भरी सभा को देखती हूँ तो कहीं जाकर यह महिला एहसास कराती है सही मायने में महिला सशक्तिकरण का। ममता बनर्जी जो सही मायने में पुरुष प्रधान राजनीति और समाज में महिलाओं की वह आवाज़ है जिससे लाख कोशिशों के बावजूद भी यह समाज कुचल नहीं पा रहा। ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ जब सस्ती एंकर उस षड्यंत्र में शामिल होकर अपनी ज़ुबान गिरवी रखती हैं तब उन्हें देखकर यह लगता है कि वे ख़ुद अभी महिला सशक्तिकरण के दरवाज़े पर दस्तक नहीं दे पाई हैं भले ही डाइट कपड़ों और लिपि पुते चेहरों से ख़ुद को आधुनिक दिखाने की रेस में दौड़ने की कोशिश कर रही हों। ममता बैनर्जी वह चेहरा है जिसे देखकर कम से कम हर महिला को एक बार पुरुष प्रधान समाज की आँखों की फैलती पुतली में इस तस्वीर का भय महसूस करना चाहिए जो उसे जीवन की कठिन डगर में केवल चूड़ियाँ खनकाने और पायल बजाने तक की दासता से मुक्ति के रास्ते पर प्रशस्त होने का साहस देता है। व्यक्तिगत तौर पर मैं जब भी बड़े बड़े पुरुष राजनीतिज्ञों और चाणक्यों में ममता बैनर्जी को लेकर जो दहशत महसूस करती हूँ वह मुझे गर्व से भरने का एहसास कराता है। ममता बनर्जी वह विश्वास का नाम है जो वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में महिलाओं के प्रति समाज की सोच को हवाई चप्पलों की नोक पर रखता है। तरस तो मुझे उस अबला पर आता है जो उसका शोषण कर रहे पुरुषों की दासी बन कर अपनी मुक्ति के मार्ग ममता बनर्जी का विरोध करने उतर जाती है। तरस उस स्त्री पर आता है जो रात के अंधेरे और घर की चारदीवारी में पिटकर सुबह सड़कों पर उसी शोषण की ढाल बनकर ममता बनर्जी जैसी महिला का विरोध करती है। तरस उस स्त्री पर आता है जो किसी कॉरपोरेट और पुरुष वर्चस्व से लबरेज़ कंपनी में चंद पैसों के लिए ममता बनर्जी को महिला विरोधी बताती है और ख़ुद शोषण का शिकार बंद दरवाज़ों में होती रहती है। तुम्हारी हार में और जीत में मुझे हमेशा तुम में वह स्त्री नज़र आएगी जो किसी भी युद्ध के नगाडे़ से अधिक मेरे अंदर सनसनी पैदा करने की ताक़त रखती है। #Women_pride_mamta @sayani06 @abhishekaitc @TMC_Supporters @AITCofficial @MamataOfficial

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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
राहें गुलशन तो फूल खिलेंगे और तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे,तृणमूल रहा तो फिर मिलेंगे .... नर मुंडों से भरी सभा को देखती हूँ तो कहीं जाकर यह महिला एहसास कराती है सही मायने में महिला सशक्तिकरण का। ममता बनर्जी जो सही मायने में पुरुष प्रधान राजनीति और समाज में महिलाओं की वह आवाज़ है जिससे लाख कोशिशों के बावजूद भी यह समाज कुचल नहीं पा रहा। ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ जब सस्ती एंकर उस षड्यंत्र में शामिल होकर अपनी ज़ुबान गिरवी रखती हैं तब उन्हें देखकर यह लगता है कि वे ख़ुद अभी महिला सशक्तिकरण के दरवाज़े पर दस्तक नहीं दे पाई हैं भले ही डाइट कपड़ों और लिपि पुते चेहरों से ख़ुद को आधुनिक दिखाने की रेस में दौड़ने की कोशिश कर रही हों। ममता बैनर्जी वह चेहरा है जिसे देखकर कम से कम हर महिला को एक बार पुरुष प्रधान समाज की आँखों की फैलती पुतली में इस तस्वीर का भय महसूस करना चाहिए जो उसे जीवन की कठिन डगर में केवल चूड़ियाँ खनकाने और पायल बजाने तक की दासता से मुक्ति के रास्ते पर प्रशस्त होने का साहस देता है। व्यक्तिगत तौर पर मैं जब भी बड़े बड़े पुरुष राजनीतिज्ञों और चाणक्यों में ममता बैनर्जी को लेकर जो दहशत महसूस करती हूँ वह मुझे गर्व से भरने का एहसास कराता है। ममता बनर्जी वह विश्वास का नाम है जो वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में महिलाओं के प्रति समाज की सोच को हवाई चप्पलों की नोक पर रखता है। तरस तो मुझे उस अबला पर आता है जो उसका शोषण कर रहे पुरुषों की दासी बन कर अपनी मुक्ति के मार्ग ममता बनर्जी का विरोध करने उतर जाती है। तरस उस स्त्री पर आता है जो रात के अंधेरे और घर की चारदीवारी में पिटकर सुबह सड़कों पर उसी शोषण की ढाल बनकर ममता बनर्जी जैसी महिला का विरोध करती है। तरस उस स्त्री पर आता है जो किसी कॉरपोरेट और पुरुष वर्चस्व से लबरेज़ कंपनी में चंद पैसों के लिए ममता बनर्जी को महिला विरोधी बताती है और ख़ुद शोषण का शिकार बंद दरवाज़ों में होती रहती है। तुम्हारी हार में और जीत में मुझे हमेशा तुम में वह स्त्री नज़र आएगी जो किसी भी युद्ध के नगाडे़ से अधिक मेरे अंदर सनसनी पैदा करने की ताक़त रखती है। #Women_pride_mamta @sayani06 @abhishekaitc @TMC_Supporters @AITCofficial @MamataOfficial
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
@VipinINC This is fake, you dumb Don’t spread the fake news.
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
तुम भारत नहीं हो तुम भारत की सेना नहीं हो !!! तुम राजनीतिक दल हो हम तुम पर अटैक कर रहे हैं !!! कायरों की तरह सेना और देश के पीछे छिपना बंद करो !!! यह शब्द राहुल गांधी ने संसद में BJP के लिए बोले हैं !!!!!
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
वरिष्ठ छात्र अध्येता और पूर्व शोध छात्र संघ अध्यक्ष रामसिंह सामोता को सुना जाना चाहिए। राजस्थान विश्वविद्यालय में RSS जिस तरह से अपनी धाक और पकड़ बना रहा है उसके विरोध में मुखर यह आवाज़ #RSS के मंसूबों की पोल खोल रही है। राजस्थान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में जिस तरह राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाकर RSS अपनी विचारधारा को SC/ST/OBC के बच्चों को पिला रहा है उसके विरोध में खड़ी यह एक मज़बूत आवाज़ है। वरना विश्वविद्यालय ने तो कई निकम्मे छात्र संघ अध्यक्ष और विधायक भी दिए हैं जो वैचारिक रूप से आज भी प्यासे ही घूम रहे हैं। @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @INCRajasthan @Khalbaali @kodaratnoo @YogeshYadav_1 @VinodJakharIN @IYC @DrRamSinghSamot @Barmer_Harish
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“पंचायती”
“पंचायती”@Gov_To_public·
मैं सोच ही रहा था कि अविनाश डोटासरा अपना रुप क्यों नहीं दिखा रहा ! इतने दिनों से सचिन पायलेट को याद क्यों नहीं कर रहा ?😂😂 @RSoopa @JeetuBesla @VipinINC
Pooja@POOJA_VOF

धूप जिनके शरीर की दुश्मन है जनता के मुद्दों पर चुप रहने वाले दिल्ली दरबारी मानेसर वाले भैया .. कांग्रेस - राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? सचिन पायलट - 👇🏿 @SachinPilot

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Pooja@POOJA_VOF·
धूप जिनके शरीर की दुश्मन है जनता के मुद्दों पर चुप रहने वाले दिल्ली दरबारी मानेसर वाले भैया .. कांग्रेस - राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? सचिन पायलट - 👇🏿 @SachinPilot
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@VipinINC उसी का जिसके वहां आप पहले थोक लगाया करते थे। कपा…..
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Dr. Vipin Yadav@VipinINC·
राजस्थान सब इंस्पेक्टर पेपर भर्ती घोटाला किसका कुकर्म था ??
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Pooja@POOJA_VOF·
@anurag_firoda अब कोई सैटलाइट के नीचे बैठकर बम बनाए और वो कहें कि हम तो जी ऊपर से निकल गए देखा नहीं …. वो वाली बात गहलोत साहब कर रहे हैं।
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Anurag Choudhary
Anurag Choudhary@anurag_firoda·
बिल्कुल सही गृह मंत्रालय गहलोत साब के पास ही था चाहते तो अच्छे से जाँच करवाते. गहलोत साहब का डायलॉग राजनीति मे जो दिखता है वो होता नहीं. पेपर लीक के तार CMO तक जुड़े हूए थे ये बात भजनलाल ज़ी ने सार्वजनिक मंच से कही क्यूंकि गहलोत का PSO जाँच एजेंसियों के रडार पर आ गया.
Pooja@POOJA_VOF

“पेपर’लीक शास्त्र” ! चैप्टर -१ 👉🏿💰राजस्थान में पेपर लीक के बारे में बात की जाती है तो एक का नाम है जो हमेशा किसी की ओट ले लेता है या फिर छिपा रहना चाहता है वह नाम है अशोक गहलोत का। 👉🏿💰ऐसा नहीं है कि अशोक गहलोत सरकार से पहले पेपर लीक नहीं हुई थी लेकिन उनका कार्यकाल इस गहरी जुर्म को चरम पर ले गया था। 👉🏿💰उन्होंने जितनी बड़ी भर्तियां दी उतने ही बड़े पेपर लीक के आंकड़े भी दर्ज कराये उनके कार्यकाल में हुई रीट भर्ती परीक्षा के पेपर लीक की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। 👉🏿💰रीट भर्ती परीक्षा मैं सुभाष गर्ग और राजीव गांधी स्टडी सेंटर का दख़ल सीधा सीधा मीडिया में छाया रहा था जो पूरी तरह से अशोक गहलोत के कंट्रोल में था। 👉🏿💰अशोक गहलोत के कार्यकाल की सबसे भ्रष्ट भर्ती परीक्षा स्कूल लेक्चरर को माना जाता है जिसमें तमाम आंदोलनों के बावजूद उसकी परीक्षा तिथि को आगे नहीं बढ़ा सीटें बेचने का काम किया गया था। 👉🏿💰कहा यह भी जाता है कि उस समय पंजाब छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस सरकार थी जिनके ऊपर पार्टी चलाने के लिए फंड का ज़िम्मा था अमरिंदर सिंह ने हाथ खड़े कर दिए थे और अशोक गहलोत ने यहाँ पूरी जान लगा दी थी गरीबों के बच्चों के सपनों को बेचने में क्योंकि छत्तीसगढ़ यह मोटा भार पूरा कर पाने में सक्षम नहीं था। 👉🏿💰#si_भर्ती_2021 में पेपर लीक पर्दाफ़ाश तत्काल ही हो गया था लेकिन उसकी प्रक्रिया को जिस तत्परता के साथ पूरा करने में अशोक गहलोत सरकार ने दिलचस्पी दिखाई थी उसने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों के भविष्य को आज इस मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। 👉🏿💰RPSC में जिस तरह पैसों की बंदरबांट और उसमें हिस्सेदारी का खेल खेला गया वह अब बाबूलाल कटारा के बयानों से हर रोज़ सामने आ रहा है इस प्रतिष्ठित संस्थान की साख अगर किसी ने मटियामेट की है तो उसके सबसे बड़े गुनेहगार अशोक गहलोत हैं। 👉🏿💰अशोक गहलोत के सबसे नज़दीकी अधिकारियों में भूपेंद्र यादव संजय श्रोत्रिय शिव सिंह राठौड़ बाबूलाल कटारा हरि प्रसाद शर्मा और राठी जैसे अनेक नाम है जिनका प्रत्यक्ष तौर पर लेन देन से संबंध प्रमाणित तौर पर साबित हो चुका है। 👉🏿💰अशोक गहलोत की दो चहेती सदस्य BJP के चेले कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा और कांग्रेस के सक्रिय सदस्य पूर्व मुख्य सचिव की पत्नी संगीता आर्या का नाम हाई कोर्ट की SOG रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा हुआ है। 👉🏿💰हर विभाग में घोटाले दोनों ही सरकारों में हुए हैं लेकिन नौजवानों के सपनों और उस समय को जिस तरह से बर्बाद अशोक गहलोत ने किया है और आंखें बंद करके उसको देखते रहे या फिर उसमें सहभागी बने रहे इससे बड़ा पाप कुछ और हो नहीं सकता। 👉🏿💰अशोक गहलोत जी आपने सरकार बचायी लेकिन साख और प्रतिष्ठा चाहे वह राजस्थान की हो या #RPSC संस्था की आपसे ज़्यादा किसी ने नहीं गिरायी। @ashokgehlot51 @BhajanlalBjp @SachinPilot @BJP4Rajasthan @GovindDotasra @INCRajasthan @8PMnoCM @TheTribhuvan @VoiceOfTribals_ @Khalbaali

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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
राजस्थान के दो सबसे बड़े नेताओं का एम्पायर दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों से बड़ा राजस्थान में इसलिए हो गया था कि उन्होंने अपने अपने धंधे को चरम रूप तक पहुँचा दिया था और उससे जुड़े हुए लोगों को इतना मज़बूत कर दिया था कि चुनावी माहौल मैं उन दोनों नेताओं को यह माना जाता था कि वे हर सीट पर प्रभाव डाल सकते हैं लेकिन यह नहीं बताया जाता था कि वह प्रभाव आर्थिक तौर पर है। उस सब को बनाने में अपना समय तो लगेगा जहाँ से आप शुरुआत कर रहे हैं। दूसरे वाले की कहानी तो उनसे भी बड़ी हैं उनके गृह ज़िले मैं हर उस मल्टीनेशनल ब्रांड की शराब कॉपी की जाती है और उससे जुड़े हुए लोग उन्हें फंडिंग करता है। इसलिए ही दोनों चाहें तो रातोरात पार्टी खड़ी कर सकते हैं वह भी बिना किसी जनाधार के।
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अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
@POOJA_VOF मुझे एक जादूगर जी के खास आदमी( उसको साइडलाइन करने की नाराजगी) का ही मैसेज आया था कि अगर पेपर लीक की जड़ें खोदने के लिए बैठें तो जोधपुर की गलियों में 2000s के शुरुआत में जाना पड़ेगा, जहां से पेपर लीक रैकेट की शुरुआत हुई थी
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
“पेपर’लीक शास्त्र” ! चैप्टर -१ 👉🏿💰राजस्थान में पेपर लीक के बारे में बात की जाती है तो एक का नाम है जो हमेशा किसी की ओट ले लेता है या फिर छिपा रहना चाहता है वह नाम है अशोक गहलोत का। 👉🏿💰ऐसा नहीं है कि अशोक गहलोत सरकार से पहले पेपर लीक नहीं हुई थी लेकिन उनका कार्यकाल इस गहरी जुर्म को चरम पर ले गया था। 👉🏿💰उन्होंने जितनी बड़ी भर्तियां दी उतने ही बड़े पेपर लीक के आंकड़े भी दर्ज कराये उनके कार्यकाल में हुई रीट भर्ती परीक्षा के पेपर लीक की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। 👉🏿💰रीट भर्ती परीक्षा मैं सुभाष गर्ग और राजीव गांधी स्टडी सेंटर का दख़ल सीधा सीधा मीडिया में छाया रहा था जो पूरी तरह से अशोक गहलोत के कंट्रोल में था। 👉🏿💰अशोक गहलोत के कार्यकाल की सबसे भ्रष्ट भर्ती परीक्षा स्कूल लेक्चरर को माना जाता है जिसमें तमाम आंदोलनों के बावजूद उसकी परीक्षा तिथि को आगे नहीं बढ़ा सीटें बेचने का काम किया गया था। 👉🏿💰कहा यह भी जाता है कि उस समय पंजाब छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस सरकार थी जिनके ऊपर पार्टी चलाने के लिए फंड का ज़िम्मा था अमरिंदर सिंह ने हाथ खड़े कर दिए थे और अशोक गहलोत ने यहाँ पूरी जान लगा दी थी गरीबों के बच्चों के सपनों को बेचने में क्योंकि छत्तीसगढ़ यह मोटा भार पूरा कर पाने में सक्षम नहीं था। 👉🏿💰#si_भर्ती_2021 में पेपर लीक पर्दाफ़ाश तत्काल ही हो गया था लेकिन उसकी प्रक्रिया को जिस तत्परता के साथ पूरा करने में अशोक गहलोत सरकार ने दिलचस्पी दिखाई थी उसने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों के भविष्य को आज इस मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। 👉🏿💰RPSC में जिस तरह पैसों की बंदरबांट और उसमें हिस्सेदारी का खेल खेला गया वह अब बाबूलाल कटारा के बयानों से हर रोज़ सामने आ रहा है इस प्रतिष्ठित संस्थान की साख अगर किसी ने मटियामेट की है तो उसके सबसे बड़े गुनेहगार अशोक गहलोत हैं। 👉🏿💰अशोक गहलोत के सबसे नज़दीकी अधिकारियों में भूपेंद्र यादव संजय श्रोत्रिय शिव सिंह राठौड़ बाबूलाल कटारा हरि प्रसाद शर्मा और राठी जैसे अनेक नाम है जिनका प्रत्यक्ष तौर पर लेन देन से संबंध प्रमाणित तौर पर साबित हो चुका है। 👉🏿💰अशोक गहलोत की दो चहेती सदस्य BJP के चेले कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा और कांग्रेस के सक्रिय सदस्य पूर्व मुख्य सचिव की पत्नी संगीता आर्या का नाम हाई कोर्ट की SOG रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा हुआ है। 👉🏿💰हर विभाग में घोटाले दोनों ही सरकारों में हुए हैं लेकिन नौजवानों के सपनों और उस समय को जिस तरह से बर्बाद अशोक गहलोत ने किया है और आंखें बंद करके उसको देखते रहे या फिर उसमें सहभागी बने रहे इससे बड़ा पाप कुछ और हो नहीं सकता। 👉🏿💰अशोक गहलोत जी आपने सरकार बचायी लेकिन साख और प्रतिष्ठा चाहे वह राजस्थान की हो या #RPSC संस्था की आपसे ज़्यादा किसी ने नहीं गिरायी। @ashokgehlot51 @BhajanlalBjp @SachinPilot @BJP4Rajasthan @GovindDotasra @INCRajasthan @8PMnoCM @TheTribhuvan @VoiceOfTribals_ @Khalbaali
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Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
@itsrealritu यह कुछ ऐसा है बैठे बैठे क्या करें कर लेते हैं कुछ काम शुरू करो अंताक्षरी लेके प्रभु का नाम !😂😂
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Ritu Shaw
Ritu Shaw@itsrealritu·
कौन अधिकारी या मंत्री दसवीं क्लास में जाने वाली अपनी बच्ची का नाम 'महीना', 'अर्धांगिनी' या 'सजनी' रखेगा? लेकिन गरीब की बेटी को ये नाम चलेंगे? जिस राजस्थान में बच्चे स्कूल की छत के नीचे दबकर मर जाएं... वहां संसाधनों के ऐसा बेजा इस्तेमाल, नीचता की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है... सरकार और ब्यूरोक्रेसी जितने बेहूदे मजाक कर सकती है, उतना शायद ही कोई कर सके... हाल ही में ढोल पीट-पीटकर राजस्थान सरकार ने बच्चों के नाम बदलने के नाम पर जोर-शोर से एक अभियान शुरू किया. 'सार्थक नाम अभियान'. इसकी वजह बताई गई कि अनजाने में माता-पिता बच्चों के ऐसे नाम रख देते हैं, जो आगे चलकर बच्चों के लिए शर्मिंदगी या असहजता का कारण बनते हैं. तब लगा था कि सड़क से लेकर शहर तक के नाम बदल देने की सनक पहली बार सार्थक होने जा रही है. लेकिन अपनी तरफ से बेहतरीन नामों की जो लिस्ट शिक्षा विभाग ने कल जारी की है, उन्हें पढ़कर किसी के भी होश उड़ जाएं... बेशर्मी की हद ये कि नामों की सूची में ऊपर ही ऊपर दावा किया गया है कि ये नाम अद्वितीय और राजस्थान की संस्कृति एवं परंपरा के अनुरूप हैं... आप ये नाम पढ़िए, आपको पता चलेगा कि A.C. कमरों में बैठने वाले अफसर किस तरह के काम कर अपनी टैक्सपेयर्स के पैसे से अपनी तनख्वाहें पकाते हैं. और इन अफसरों के सुझाए हुए ऊट-पटांग सुझावों पर नेता किस तरह अपनी ही पीठ थपथपाने में मस्त रहते हैं. पहली से नौवीं कक्षा तक पढ़ने वाली मासूम बच्चियों के लिए शिक्षा विभाग ने ये नाम सुझाए हैं- भयंकर, भिक्षा, गुलकंद, मक्खी, महीना, चाणक्य, अर्धांगिनी, जामिनी, मनोरंजनी, बाल्मीकि, एकपादा, कालमाता, कल्लोलिनी, कारा, लम्बोदरी, मिलिंद, राजहंस, साजनी साँवरी, तूतिकारी कौनसा अफसर या मंत्री पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची का नाम मक्खी, कल्लोलिनी या कालमाता रख देगा? कौन अधिकारी दसवीं क्लास में जाने वाली अपनी बच्ची का नाम 'महीना', 'अर्धांगिनी' या 'सजनी' रख देगा? पता नहीं कितनी टीमों ने मिलकर पता नहीं कितने दिन इन नामों को छांटने के नाम पर खपा दिए होंगे. कितने के बिल उठे होंगे. कितनों ने दिन-दिन भर दफ्तर में इस काम के नाम पर मजे मारे होंगे और नतीजा ये? लड़कों को भी नहीं बख्शा है। उनके लिए नाम सुझाए हैं- देवदास, आवारा सिंह, आविष्कार, बेचारादास, बीकानेर, दहीभाई, फकीराम, गंगोत्री, गोदावरी, अहंकार, अहित, अंतरद्वीप और बासकरन जैसे नाम हे महानुभावों अगर वो मां-बाप इतने ही पढ़े लिखे होते तो क्यों अपने बच्चे का नाम रोडूलाल रखते? देश-प्रदेश की कथित सबसे बड़ी परीक्षाओं को पास करके बैठे अधिकारियों को जिन नामों पर आपत्ति नहीं हुई, स्कूल में बैठे मास्टर जी को तो क्या ही होगी? राजस्थान में बच्चों के पास किताबें नहीं है. ड्रॉप आउट रेट का ठिकाना नहीं है... बच्चियां और शिक्षिकाएं खुले में टॉयलेट जाने के लिए मजबूर हैं... या फिर पथरी और इन्फेक्शन की बीमारी लिए फिर रही हैं... बच्चे छतों के नीचे दबकर मर जा रहे हैं... वहां संसाधनों का ऐसा प्रयोग? कुछ तो शर्म करो जिम्मेदारों... गिनती बढ़ाने के लिए एक ही नाम को बस उपनाम बदलकर पांच-पांच बार रिपीट कर दिया है. मंगलराम, मंगलसिंह, मंगलदास... ये दिखाता है कि दफ्तरों में कैसे-कैसे दुर्बुद्धि, कुबुद्धि, जड़बुद्धि, कुटिलबुद्धि, अतिबुद्धि अफसरान काम कर रहे हैं... उनसे भी महान मंत्री हैं, जो इनके झांसे में आ जाते हैं और अपनी किरकिरी करवाते हैं.
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