Amrendra Pandey

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@Amrendrap91

Bureau Chief,Amar Ujala News Paper

Varanasi, India Katılım Eylül 2018
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
बीएचयू में पूछा सवाल.. ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में कैसे बाधा डाली… #BHU #Banaras #controversial @EduMinOfIndia @VCofficeBHU @bhupro
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
आज से अगले 25 दिन तक पढ़िए काशी के बदलने की 25 कहानियां… #AmarUjala25yrs #Varanasi
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
ये तमिलनाडु का एक स्ट्रीट फूड है। नारियल के तने को छीलकर उसे स्लाइस कर केले के पत्ते पर गुड़ के साथ दिया जाता है। स्वाद अद्भुतास है। एक दम चौचक। लगभग ताजे नारियल जैसा, या फिर उससे भी काफी अच्छा। ये कोई fancy सुपरफूड नहीं है, लेकिन अपने raw, natural रूप में ये body को वही देता है जो आजकल हम expensive health foods में ढूंढते हैं। जब मदुरै के पास मैंने ये देखा तो काफी देर ये डीकोड करने में गुजर गया कि ये है क्या? इसका नाम है - Thennakuruthu or Thennai Kuruthi जिंदगी के कुछ स्वाद अचानक आपके हिस्से आ जाते हैं। वैसे मेरी कोशिश होती है जहां जाऊं वहां का लोकल जो सब है, वो ट्राय करूं। बस वो वेज होना चाहिए। #Tamilnadu #Food #Traveler
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
प्रधानमंत्री दो दिन के दौरे पर काशी में थे। ये शायद पहला मौका था जब पीएम ने श्रृंगार गौरी का जिक्र किया। ये पहला मौका था जब काशी में 25 हजार महिलाओं का जुटान हुआ था। #PM #Modi #Varanasi @AU_VaranasiNews
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
दोपहर चार बजे, काशी में अंधेरा #Kashi #Mausam
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
तमिलनाडु की राजनीति की दो तस्वीरें हैं। इसमें एमजीआर और थलापति विजय हैं। फिल्मों से राजनीति में एंट्री करने वाले दो सुपर स्टार। एमजीआर ने 1972 में पार्टी बनाई, सिर्फ 5 साल में 1977 में पहली बार सीऐम बने और फिर तीन बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके हिस्से आया। विजय के फैंस आज भी सोशल वर्क और कैंपेनिंग में एक्टिव दिखते हैं।वहीं एमजीआर के फैन क्लब ही बाद में मजबूत राजनीतिक कैडर में बदल गए थे। #tamilnadulegislativeassemblyelection2026 #VijayWave @TVKVijayHQ #MGR
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
ये बनारस के मंत्री, विधायक और मेयर हैं। कचौड़ी का लुत्फ उठा रहे हैं। #Banaras #politician #kashi
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Amrendra Pandey
Amrendra Pandey@Amrendrap91·
#पीडीडीयू नगर में सड़क पर होती है 11 लॉन की पार्किंग, हाईवे तक कर देते हैं जाम, बस नोटिस-नोटिस खेल रहा प्रशासन😡 क्या करे नोटिस के बाद जो माननीयों की पैरवी आने लगती है चन्दौली पुलिस @chandaulipolice @Uppolice @myogiadityanath #Chandauli #pddunagar #CrimeNews #TrafficePolice
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
बच्चों की आंख में कैंसर.. खौफनाक #BHU #Eyes
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
तमिलनाडु सरकार की कुर्सी सचिवालय में, लेकिन ज़मीन कोलाथुर में होगी तय ग्रेजुएट एम स्टालिन के सामने आठवीं पास वीएस बाबू चुनावी परीक्षा देंगे बीजेपी-एआईएडीएमके और टीवीके जीतने के लिए नहीं लेकिन जीत को छोटा बनाने के लिए मेहनत कर रही है उपमिता वाजपेयी, कोलाथुर (चेन्नई)। ये तमिलनाडु के चुनावी रण का सबसे अहम मैदान है। इसलिए नहीं क्यों कि यहां कड़ा मुकाबला है। बल्कि इसलिए क्योंकि ये मौजूदा सीएम एम स्टालिन की सीट है। सरकार की कुर्सी भले सचिवालय में धरी हो लेकिन जमीन कोलाथुर से तैयार होती है।  पिछले चार चुनावों से तमिलनाडु की राजनीति के धुरंधर बनकर बैठे स्टालिन कोलाथुर से चुनाव लड़ रहे हैं। पहली बार 2011 में चुनाव लड़े तो सिर्फ 2500 वोट से जीते, 2016 में ये अंतर 36 हजार पहुंच गया और 2021 में 76 हजार। कोलाथुर सीट पर उनका चुनावी बंदोबस्त संभालने वाले डीएम के सेक्रेटरी पीटीसी रवि का दावा है इस बार जीत का अंतर एक लाख पार जाएगा। छोटी गलियों, स्लम, सोसायटी और बड़े मोहल्लों से मिलकर बनी कोलाथुर विधानसभा में दो लाख सात हजार वोटर्स हैं। सबसे ज्यादा वोटर लगभग 45 प्रतिशत ओबीसी हैं। जबकि 6 प्रतिशत ईसाइ वोटर और 11 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। डीएमके के नेता मुरलीधरन कहते हैं सीएम जब कोलाथुर आते हैं तो मंदिर-मस्जिद-चर्च तीनों जगह जाते हैं। रमजान, पोंगल और क्रिसमस तीनों त्यौहारों का हिस्सा बनते हैं। पिछले पांच साल में 87 बार अपने इलाके में आए हैं। इसके अलावा 300 से ज्यादा घरों तक शादी-ब्याह या फिर दुख सुख में उन्होंने अपने दफ्तर से चिट्ठियां भेजी हैं।  अपोलो को टक्कर देता 1069 बेड का सरकारी अस्पताल एक साल पहले ही सीएम की विधानसभा में बनकर तैयार हुआ है। चुनाव के तीन महीने पहले आर्ट एंड साइंस कॉलेज की बिल्डिंग भी बन चुकी है। सरकार ने 6000 बच्चों को यूपीएससी से लेकर टेलरिंग तक की कोचिंग-ट्रेनिंग दिलाई है। और मुफ्त लैपटॉप और सिलाई मशीन बांटी हैं।  लेकिन 40 साल से बाढ़ ऐसा संकट है जिसका डर पीढ़ियों में बह रहा है। एमटी राव कोलाथुर में अपने पुश्तैनी घर में रहने वाली चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं। वो कहते हैं बारिश आने से पहले हम इलाके वाले बस यही सवाल सोचते और पूछते हैं - इस बार बारिश का पानी घरों में घुसेगा या नहीं…। उन्हें आज भी वो दिन याद हैं जब हफ्तेभर उनके घरों में बिजली नहीं थी। यहां तक की एमएलए ऑफिस वाली सड़क पर भी नावें चलीं थीं। ये तब जब डीएमके बारिश के पानी से निपटने के लिए 450 किमी की ड्रेनेज लाइन डलवाने का दावा करता है। हर गली में उनका बूथ कार्यालय बना है। बाकी पार्टियों के इक्का दुक्का पंडाल हैं। डीएमके कार्यकर्ता डोर यू डोर प्रचार कर रहे हैं। उनकी शिफ्ट भी तय है सुबह 7.30 से 9.30 और शाम 4.30 से 7.30। 14 डिवीजन में इलाके को बांटा है और ये 100 कार्यकर्ताओं के हवाले है। ये तब जब उनके नेताओं की समझ में ये चुनाव आसान है।  डीएमके को लगता है चुनाव आसान है। बीजेपी-एआईएडीएमके और विजय की पार्टी टीवीके भले जीतने के लिए नहीं लेकिन जीत को छोटा बनाने के लिए मेहनत कर रही है। टीवीके से वीएस बाबू स्टालिन से मुकाबला कर रहे हैं। वो कांग्रेस, डीएमके और एआईएडीएमके तीनों पार्टी में रह चुके हैं। ग्रेजुएट स्टालिन के सामने आठवीं पास बाबू चुनावी परीक्षा देंगे। 70 प्रतिशत तक पढ़े लिखे लोगों वाली विधानसभा है ये। 3 प्रतिशत फर्स्ट टाइम वोटर्स और पुरुषों के मुकाबले 6000 महिला वोटर ज्यादा हैं।  वरिष्ठ पत्रकार टी रामकृष्णन कहते हैं चुनाव के ठीक पहले चर्चा थी कि स्टालिन अपने पिता करुणानिधि की सीट तिरुवरुर से चुनाव लड़ सकते हैं। करुणानिधि ने 91 साल की उम्र में 2016 में यहीं से चुनाव लड़ा और जीता था। इस बार  स्टालिन ने चुनाव प्रचार की शुरुआत यहीं से की थी। वरना 30 मार्च को अपना पर्चा भरने के बाद से तो वो इलाके की तरफ मुंह कर के भी नहीं सोए हैं। हालांकि उनके इलेक्शन शेड्यूल की मानें तो वो प्रचार खत्म होने से पहले 21 तारीख को कोलाथुर आ सकते हैं।   लोग कहते हैं स्टालिन साहब इलाके की गली-गली पहचानते हैं। वो चुनाव से पहले मैन रोड़ से निकल भर जाएंगे तब भी जीतेंगे। गणित भले गलियों की समझ का हो लेकिन बाढ़ और बोरियत (एंटी इंकंबैंसी) दो ऐसी चीजें हैं जो स्टालिन के लिए आजमाइश साबित हो सकते हैं। @mkstalin @arivalayam @AmarUjalaNews
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
छोटा प्रदेश, बड़ी राजनीति: राज्य बनने के लिए राजनीति की परीक्षा को तैयार केंद्र शासित प्रदेश   इकलौता इलाका जहां पक्ष-विपक्ष दोनों का मुद्दा राज्य का दर्जा, धर्म, जाति की राजनीति से ज्यादा चुनावी रेवड़ियां बांटने वाला पुडुचेरी का चुनावी रणधुम्मस   उपमिता वाजपेयी,  पुडुचेरी ।   पुडुचेरी शायद देश का इकलौता इलाका है जहां पक्ष और विपक्ष दोनों पार्टियों के लिए सबसे अहम चुनावी मुद्दा एक है - स्टेटहुड यानी राज्य का दर्जा। जहां एक ओर एनडीए इसे अपना सामर्थ्य गिनाता है तो डीएमके-कांग्रेस इसे अपनी सबसे मजबूत लड़ाई। सीएम रंगास्वामी कहते हैं स्टेट हुड मिलने तक पुदुचेरी का विकास सिर्फ केंद्र के साथ सरकार में रहकर है। वहीं राज्य से इकलौते सासंद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वैथिलिंगम के मुताबिक लोगों की जरूरत और सरकार के काम में सुलह जरूरी है, जो सिर्फ राज्य बनने से मुमकिन है। पुदुचेरी वो इलाका है जिसे बीजेपी और कांग्रेस केंद्र में अपनी सीट जुगाड़ने के यंत्र की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।    30 सीटों हर सीट पर 25 से 45 हजार वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में धर्म, जाति की राजनीति से ज्यादा चुनावी रेवड़ियां ज्यादा असर करती हैं। शायद यही वजह है कि पार्टी के वादों में दो सिलिंडर, पांच हजार रुपए, ई स्कूटर से लेकर चावल तक शामिल है। और इन वादों से सबसे ज्यादा फायदा पुडुचेरी की महिलाओं का होता है। वजह ये कि, यहां सरकार महिलाओं के लिए मुफ्त के लुभावने वादों और महिलाओं के वोट से ही तय होती है। 30 में से 30 सीटों पर महिला वोटर ज्यादा हैं। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 9.45 लाख वोटर हैं इनमें से 5 लाख महिलाएं हैं। लेकिन जब महिला उम्मीदवारों की बात आती है तो एआईएनआरसी और टीवीके से 2, वीसीके और कांग्रेस से 1 और बीजेपी से 0 महिलाओं को टिकट मिला है। वहीं अब तक एक भी सीट नहीं जीतने वाली पुरानी पार्टी एनटीके ने 14 सीटों पर महिलाओं को खड़ा किया है। हालांकि पुडुचेरी के अब तक के 10 सीएम में एक भी औरत नहीं है।    पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पनीरसेल्वम के मुताबिक हर बार चुनाव में सिर्फ 2-3 पार्टियां होती थीं। इस बार तीन बड़े गठबंधन के अलावा कई सारे निर्दलीय और पहली बार चुनाव लड़ने वाली पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। यही नहीं इतने सारे उम्मीदवार होने से मार्जिन कम होगा और अच्छा उम्मीदवार नहीं चुना जा सकेगा। पुदुचेरी वो राजनीतिक युद्धक्षेत्र है जहां सीटों पर उम्मीदवार 20, 87 और 216 वोटों से भी जीते हैं। शायद यही वजह है कि गठबंधन में रहकर भी 5 सीटों पर डीएमके और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी खड़े होना इस चुनाव का सबसे बड़ा रणधुम्मस बन गया है। कालपीट, राजभवन, थिरुभुवनम, करेकल साउथ और मंगलम वो पांच सीटें हैं।    पुदुचेरी वो केंद्र शासित प्रदेश है जिसका पहला मुख्यमंत्री फ्रांस मूल का था। जहां आज भी पांच हजार फ्रांस के लोग रहते हैं। इस केंद्र शासित प्रदेश में चार एन्क्लेव भी हैं। जहां चार अलग अलग राज्यों के लोग अपनी भाषा और संस्कृति के साथ बसते हैं। पहला आंध्र प्रदेश का यनम, केरल का माहे, तमिलनाडु का कराइकल और पुदुचेरी खुद। तमिल, तेलगु, मलयालम और फ्रेंच के अलावा यहां अंग्रेजी और बहुत थोड़ी हिंदी बोली जाती है।    कांग्रेस के राज्य प्रमुख, दो बार के सीएम, सांसद  वैथिलिंगम और 4 बार के सीएम एन रंगास्वामी के अलावा इस बार चर्चित उम्मीदवारों में लॉटरी किंग जोस मार्टिन भी मैदान में हैं। ये वो उम्मीदवार हैं जो बीजेपी, डीएमके और टीएमसी को 1368 करोड़ की इलेक्टोरल बॉन्ड फंडिंग को लेकर चर्चा में आए थे।   पुदुचेरी में इस चुनाव में 40 प्रतिशत करोड़पति उम्मीदवार हैं। 23 प्रतिशत ऐसे हैं जिनपर आपराधिक केस दर्ज हैं और उनमें भी 1 प्रतिशत पर मर्डर जैसे अपराध दर्ज हैं। इस बार वोटर की लिस्ट में लगभग 27 हजार फर्स्ट टाइम वोटर्स भी हैं। जिनका झुकाव एक्टर विजय की पार्टी टीवीके और श्रीलंका के तमिल मुद्दे की समर्थक एनटीके पार्टी की ओर है। राज्य के 1.5 लाख युवा हैं जो यहां से बाहर के देशों और राज्यों में नौकरी करते हैं। चुनाव आयोग ने इनके लिए घर आकर वोट डालने में सहुलियत देने पेड लीव यानी छुट्टी का आदेश जारी किया है। पुदुचेरी में 80-85 प्रतिशत वोट तक पड़ते हैं।    बमुश्किल 9.45 लाख वोटर वाले इस केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता के लिए सभी पार्टियों ने हरसंभव जोर लगाया है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और डीएमके के तमिलनाडु में मुख्यमंत्री स्टालिन ने यहां चुनावी सभाएं की हैं। 9 अप्रैल को समंदर किनारे बसा ये कुरुक्षेत्र नारियल के पत्तों से सजे पोलिंग बूथ में अपनी सरकार तय करने वोटर्स का इंतजार करेगा। #Puducherry #Groundreport
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
पुडुचेरी से ग्राउंड रिपोर्ट… कौओं को दाने से लेकर टेनिस तक पुडुचेरी के सीएम की सादगी से सत्ता की कहानी थट्टनचावड़ी सीट - यहां से तय होगी पुडुचेरी की सरकार, रंगास्वामी बचाएंगे गढ़ या वैतिलिंगम करेंगे वापसी? उपमिता वाजपेयी, पुडुचेरी। पुडुचेरी के पुराने मोहल्लों से फ्रेंच कॉलोनी, व्हाईट टाउन और समुद्र को छूते शहर के आखिरी छोर तक लाउडस्पीकर से जमकर प्रचार हो रहा है। तमिल गाने उम्मीदवारों की तारीफों की धुन गा रहे हैं। इन गानों के बीच से आती पटाखों की आवाज ये बताती है कि वहां कोई बड़ा नेता मौजूद है। देश के आखिरी कोने पर बसे पुडुचेरी में चुनाव अपने आखिरी मुहाने पर है। पुडुचेरी का थट्टनचावड़ी वो सीट है जहां से एनडीए के टिकट पर सीएम एन रंगास्वामी और कांग्रेस की सीट पर पूर्व सीएम और मौजूदा सांसद वैतिलिंगम दोनों चुनाव लड़ रहे हैं। इलाके की प्रमुख सड़कर पर एक लोडिंग रिक्शा पर हाथी जितना बड़ा जग का चुनाव चिह्म लेकर सबसे आगे चल रहा है। ये पुडुचेरी के सीएम एन रंगास्वामी की पार्टी एआईएनआरसी का चुनाव चिह्न है। चार पांच गाड़ियां है, साधारण मॉडल वालीं। काफिला बीच चौराहे पर रुकता है। कार्यकर्ताओं की भीड़ कार को घेर लेती है। सीएम गाड़ी से बाहर आते हैं। इलाके के उम्मीदवार से मिलते हैं। उन्हें कई किलो वजनी ताजे फूलों का हार पहनाया जाता है। उम्मीदवार साष्टांग प्रणाम करते हैं। महिलाएं मुस्कुराकर उन पर ताजे फूल फेंकती हैं। कई बार वो माइक लेकर अपने हासिल और चुनावी वादों को गिनाते हैं। पैदल संकरी गली के आखिरी छोर तक जाते हैं। इलाके के बड़े मंदिर को देखकर हाथ भी जोड़ते हैं। बमुश्किल 10-12 मिनट बाद वो दोबारा कार में आकर बैठ जाते हैं। काफिला अगले इलाके को कूच करता है। सीएम एम रंगास्वामी दिन में दो सीटों पर प्रचार के लिए जाते है। उनकी पार्टी ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। लगभग हर सीट पर वो प्रचार के लिए जा चुके हैं। 75 साल के सीएम खुद दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। थट्टनचावड़ी और मंगलम। थट्टाचावड़ी जहां उनकी पारंपरिक सीट है वहीं मंगलम इसलिए अहम है क्यों वहां गठबंधन के बावजूद डीएमके और कांग्रेस दोनों ने अपने सहयोगी खड़े कर दिए हैं। एक बड़े से हॉल और दो कमरों के जिस घर में सीएम रहते हैं वहां की दीवारों को पलस्तर और रंगरोगन की जरूरत है। बैचलर हैं और मां के निधन के बाद से वो अकेले ही यहां रहते हैं। जिन दो कमरों में उनका बसेरा है उनमें से एक में उनका सिंगल बेड, अलमारी रखी है। दूसरे को स्टोररूम नुमा बनाया है। जिसमें ट्रॉफी, फ्रैम से लेकर चुनाव प्रचार का तमाम सामान और बिसलेरी को बोतलें रखी हैं। घर के आंगन में एक टेनिस कोर्ट बना है। हर दिन कम से कम एक घंटा वो यहां टेनिस खेलते हैं। योपुर सुरेश उनके साथ रोज खेलने आते हैं। कहते हैं टेनिस स्पीड का गेम है। हमारे सीएम किसी 16 साल, 25 साल के प्लेयर से जमकर मुकाबला कर लेते हैं। टेनिस कोर्ट से थोड़ी ही दूर पर एक मुरुगन भगवान का मंदिर है। वो हर सुबह वहां पूजा करने के बाद ही काम पर निकलते हैं। सीएम पूजा करने के बाद कौओं को दाना-पानी देते हैं और फिर प्रसाद भी खुद बांटते हैं। इन दिनों चुनावी बयार है इसलिए जो उम्मीदवार उनसे मिलने आते हैं उन्हें इस मंदिर में विशेष पूजा करवाई जाती है। सीएम उन्हें भगवान मुरुगन के सामने रखा चुनावी घोषणा पत्र उठाकर देते हैं। उसपर कुछ फूल और नींबू रखे होते हैं। रंगास्वामी चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। दो बार कांग्रेस और दो बार अपनी बनाई ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस से। पुडुचेरी के सबसे ज्यादा वक्त के लिए सीएम रहने का रिकॉर्ड उनके हिस्से है। पहली बार जब अपनी पार्टी से सीएम बने तो उनकी पार्टी सिर्फ 45 दिन पुरानी थी। नई पार्टी क्यों बनाई ये समझाने के लिए चुनाव लड़ने से पहले कार्यकर्ताओं को उन्होंने साढ़े तीन घंटे खड़े होकर भाषण दिया था। पेशे से किसान,पढ़ाई से वकील रंगास्वामी एक्टर शिवाजी गणेशन के बूजम फैन थे। युवाओं को शिवाजी गणेशन की फिल्मों के टिकट बांटते थे। वकालत और किसानी करते वो राजनीति में आ गए। पुदुचेरी में लोग कहते हैं कि कोई भी कभी भी कहीं भी सीएम रंगास्वामी से मिल सकता है। ये उनकी सबसे सबसे बड़ी ताकत है। इस बार लोग इस ताकत को वोट में बदलते हैं या कांग्रेस डीएमके को मौका देते हैं इसका फैसला 9 अप्रेल को होगा। #Puducherry #Elections @AmarUjalaNews
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अफसोस… अपराध की ये कैसी किस्म है, वक्त से कहो रहम करे…। #Crime #UttarPradesh
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Upmita Vajpai@upmita·
काशी में 90 साल पहले महिलाओं के लिए होती थी गंगा में स्विमिंग क्लास   तंबू लगाकर गंगा को घेरा जाता था, सुरक्षा के लिए बैठाए जाते थे दो लठैत    चद्दर ओढ़कर दहलीज पार करने वाली औरतों से वर्चुअल मीटिंग करने वाली बनारस की महिलाओं की पहली संस्था की कहानी    उपमिता वाजपेयी, वाराणसी।    महिला मंडल काशी की स्थापना 90 साल पहले रत्नेश्वरी देवी ने एक औषधालय के रूप में की थी। 1937 में बनी ये संस्था काशी की पहली महिला संस्था थी। चौखंबा के प्रतिष्ठित परिवार की महिलाएं इसका हिस्सा थीं। और नंदन साहू लेन इसका पता।    1930 का दशक था। देश में स्वतंत्रता संग्राम छिड़ चुका था। काशी के संभ्रांत परिवारों की महिलाओं ने घर की दहलीज पार कर समाज सेवा की पहली शुरुआत की थी। लेकिन ये महिलाएं परिवार की प्रतिष्ठा और मर्यादाएं दुशाला में ओढ़कर निकलतीं थीं। काशी के मशहूर मोती झील परिवार, आज प्रेस परिवार, शाह, कन्हैया अलंकार, भारतेंदु जैसे और भी प्रतिष्ठित परिवार की महिलाओं ने इसे शुरू किया और आज भी इन सभी परिवारों की बहुएं और बेटियां इसे परंपरा और संस्कार बतौर निभा रही हैं।    इनके जरिए महिलाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई, चित्रकला के अलावा, पुस्तकालय, पत्रिका प्रकाशन के साथ साथ काशी की पहली तैराकी की क्लास भी शुरू की गई। महिलाएं पढ़ पाएं इसके लिए किताबें घर पर पहुंचाई जातीं थीं। पर्दा प्रथा का एक प्रकार, घर से बाहर चद्दर ओढ़कर निकलना नियम था। ऐसे में जब देश में चद्दर छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ तो इस मंडल की महिलाओं ने भी उसमें भाग लिया। गंगा घाट पर रहने वाली काशी महिलाएं तैरना नहीं जानती थीं। इसलिए उन्हें तैराकी सिखाने कालिंदी तैराकी शिविर की स्थापना की गई। स्विमिंग सीखने के इस शिविर का नाम भारतेंदु हरिश्चंद्र के अनुज बाबू गोकुल चंद्र की पौत्री और भारतरत्न डॉ भगवान दास की नतिन कालिंदी के नाम पर रखा गया। इसके पीछे भी कहानी है। बेटी कालिंदी बहुत बीमार रहती थीं और कम उम्र में उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्हीं की याद में बेटियों-बहुओं को सिखाने का ये शिविर शुरू किया गया। इस शिविर के लिए सुबह बकायदा गंगा किनारे तंबू गाड़ा जाता। फिर पानी में मोटे रस्सों का घेरा बनाया जाता। जब शुरुआत हुई तो लोगों ने इसका विरोध किया। ऐसा वक्त भी आया कि दो लठैत को स्विमिंग क्लास के बाहर तैनात करना पड़ा। हालांकि फिर विरोध खत्म हो गया और हर साल गर्मी के एक महीने ये शिविर कई साल चला।      1978 में संस्था ने अपना पहला तीज मेला आयोजित किया था। इसमें महिलाएं साड़ी से लेकर पापड़ तक बेचने और खरीदने आई। आज भी हर साल सावन में ये मेला लगता है। फिलहाल 100 से ज्यादा महिलाएं इस मंडल की सदस्याएं हैं। इनकी धरोहर में 4000 किताबों वाली एक लाइब्रेरी है। इनके कार्यक्रमों का हिस्सा काशी नरेश विभूति नारायण, प्रसिद्ध लेखिका शिवानी, भानु शंकर मेहता और ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी भी बन चुकी हैं। चद्दर ओढ़कर दहलीज पार करने वाली औरतों शुरू हुए इस मंडल की महिलाएं ऑनलाइन जूम मीटिंग भी करने लगी हैं। कोविड के समय वर्चुअल कजरी, कविता, कुकरी शो भी कर चुके हैं। परंपरा के मुताबिक मंडल की महिलाएं जो सास बन जाती हैं वो इसकी कमान बहुओं को सौंप देती हैं। शायद यही वजह है कि 90 साल से ये मंडल सक्रिय है। #Kashi #Womenhood #Ganga
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Rahul Dubey
Rahul Dubey@RahulDu12·
बनारस में दो महादेव गंगा किनारे घटवा पर आपस में भिड़ गए 😂 बड़े महादेव ने छोटे महादेव के 60 रुपए लिए थे लेकिन अभी तक लौटाए नहीं🥲 #mahadev 😂😂 @upmita
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
मोहब्बत को लेकर क्या सोचते हैं काशी वाले… #Kashi #ValentinesDay
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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
काशी में महाशिवरात्री और बाबा का आंगन ❤️ #Kashi #Mahashivratri2026
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