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Pushpen Mishra
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Pushpen Mishra
@AnkurPushkar1
I am an Economics teacher helping all to prepare for Civil Services apart from K12 category
New Delhi India Katılım Ekim 2020
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PM की अपील का भी असर नहीं, बीजेपी नेता ने 500 गाड़ियों के साथ काफिला निकाला
#Ujjain #MadhyaPradesh #PMModi #ZeeNews
@RajLaveena
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ट्रेन की फर्श पर लेटे एक पिता और उसके छोटे मासूम बच्चे को देख कर आपको रोना आ जाएगा।😢
पैसे की कमी की वजह से उन्होंने जनरल टिकट लिया, लेकिन भीड़ इतनी थी कि बैठने तक की जगह नहीं मिली।ल,
आखिरकार पिता अपने बच्चे को लेकर ट्रेन की फर्श पर ही सो गया,
ये तस्वीर देखकर समझ आता है कि जिंदगी में पैसा कमाना क्यों जरूरी है, क्योंकि गरीबी इंसान से उसका आराम तक छीन लेती है,
यही है भारत की वो असली तस्वीर, जो सोशल मीडिया की चमक-दमक से बहुत अलग है।
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जाधव नाम का यह शख्स 10वीं की परीक्षा देने के बाद अपने गांव में ब्रह्मपुत्र नदी के बारिश से भीगे रेतीले किनारे पर घूम रहा था क्योंकि बाढ़ का पानी कम हो गया था।
तभी उसकी नजर करीब 100 मरे हुए सांपों के एक विशाल झुंड पर पड़ी। इसके बाद उसने आगे बढ़कर देखा कि नदी का पूरा किनारा मरे हुए जानवरों से भरा हुआ था और एक श्मशान जैसा लग रहा था।
मृत प्राणियों के शवों के कारण खड़े होने की जगह नहीं थी। इस दर्दनाक सामूहिक निर्दोष मौत के दृश्य ने किशोर जाधव के मन को झकझोर कर रख दिया।
हजारों बेजान जानवरों की बेजान, चौड़ी खुली आंखों ने जाधव को कई रातों तक सोने नहीं दिया। एक चर्चा के दौरान गांव के एक शख्स ने व्याकुल जाधव से कहा कि जब पेड़-पौधे नहीं उग रहे हैं तो बाढ़ से बचने के लिए नदी के रेतीले किनारे जानवरों को शरण कहां मिलेगी?
जंगल के बिना उन्हें भोजन कैसे मिलेगा? यह बात जाधव के दिल को छू गई और उन्होंने जानवरों को बचाने के लिए पेड़ लगाने की कसम खाई।
16 साल के जाधव 50 बीज और 25 बांस के पेड़ लेकर नदी के रेतीले किनारे पर पौधे लगाने पहुंचे।
यह घटना आज से 35 साल पुरानी है।
वह दिन था और आज भी दिन है। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि इन 35 वर्षों में जाधव ने बिना किसी सरकारी मदद के 1360 एकड़ भूमि पर घना जंगल बना दिया है।
क्या हम विश्वास कर सकते हैं कि एक अकेले आदमी ने उस जंगल को लगाया
5 बंगाल टाइगर, 100 से अधिक हिरण, जंगली सूअर, 150 जंगली हाथियों का झुंड, गैंडा और कई अन्य जंगली जानवर सांपों सहित शांति से घूम रहे हैं, जिन्हें इस अद्भुत कर्मयोगी ने इस जंगल का गौरव बनाया है।
जंगल का रकबा बढ़ाने के लिए मैं सुबह 9 बजे से 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर नदी पार करती, दूसरी तरफ एक पेड़ लगाती और फिर शाम को फिर से नदी पार करती और फिर साइकिल चलाती थी।
5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद घर लौटेंगे।
उनके द्वारा लगाए गए इस जंगल में कटहल, गुलमोहर, अनानास, बांस, साल, सागौन, सीताफल, आम, बरगद, शहतूत, जामुन, आड़ू और कई औषधीय पौधे हैं।
आश्चर्य और दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस असंभव कार्य को पूरा करने वाले इस साधक को पांच साल पहले तक देश में अज्ञात था।
एक्शन का ये योद्धा अपने बनाए जंगल में पौधों से भरा बैग लेकर अपनी साइकिल पर असम के जंगल में अकेले अपनी धुन पर काम कर रहा था। वो पहली बार साल 2010 में देश की नजरों में तब आए थे जब एक वाइल्ड फोटोग्राफर
"जीतू कलिता" ने उन पर एक वृत्तचित्र फिल्म "द मोलाई फॉरेस्ट" बनाई
इस फिल्म को देश के नामी विश्वविद्यालयों में दिखाया गया था। दूसरी फिल्म आरती श्रीवास्तव की "फॉरेस्टिंग लाइफ" थी जिसमें जाधव के जीवन के अछूते पहलुओं और समस्याओं को दिखाया गया था।
तीसरी फिल्म "फॉरेस्ट मैन" को भी विदेशी फिल्म समारोहों में काफी सराहा गया था।
एक अकेले व्यक्ति ने पर्यावरण की रक्षा के लिए वन विभाग की मदद के बिना, बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के ऐसा किया।
इतने पिछड़े इलाके से आने के कारण उनके पास पहचान पत्र के रूप में "राशन कार्ड" भी नहीं था, उन्होंने हजारों एकड़ में फैला एक पूरा जंगल बना दिया।
जो लोग उन्हें जानते थे उन्होंने उनके काम का सम्मान किया और उनके नाम पर इस जंगल का नाम रखा।
असम का यह जंगल
इसे "मिशिंग जंगल" कहा जाता है।
(जाधव असम की मिशिंग जनजाति से हैं)। उन्होंने जीविकोपार्जन के लिए गायों को पाला है। शेरों द्वारा उनके घरेलू जानवरों को खाने के बाद भी, जो उनकी आजीविका का साधन थे, जंगली जानवरों के प्रति उनकी करुणा कम नहीं हुई। उनका मानना है और वे कहते हैं कि शेरों ने मुझे नुकसान पहुंचाया क्योंकि वे नहीं जानते कि अपनी भूख मिटाने के लिए खेती कैसे करें।
तुम जंगलों को नष्ट कर दो, वे तुम्हें नष्ट कर देंगे।
जाधव को एक साल पहले देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था, जो अभी भी असम में एक कमरे की बांस की झोपड़ी में रहते हैं और अपनी पुरानी दिनचर्या में तल्लीन हैं।
सरकार के तमाम प्रयासों और वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपए के पौधे खरीदने के बावजूद पर्यावरण और वन विभाग उस मुकाम को हासिल नहीं कर सका जो किसी एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति से हासिल किया गया था। वह पौधों से भरे बैग और कुदाल के साथ जंगल की पगडंडियों पर साइकिल चलाकर एक निस्वार्थ उपासक के रूप में अपनी साधना में लीन है।
तो यह कहा जा सकता है कि कभी-कभी "एक ग्राम न केवल भट्टी को तोड़ सकता है बल्कि उसे चकनाचूर भी कर सकता है।
हजारों सलामी और सलाम।
सादर। #viralreelsシ #viralreels #foryouシ #treding #post #viral #

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@thebiharoffice ज्यादा हमदर्दी हो रही है तुम्हे? ये सब नेता मिलकर बिहार का मजाक बना दिया, उसका नहीं दुख हो रहा है.. विधवा विलाप वाले रुदाली मत बनो.. पूरी बिहार सरकार ने जनता के जनादेश का कबाड़ा कर दिया.. फिर भी, नपुंसक बिहारी, अभी महिमा गाये जा रहे हैं इन मानसिक विक्षिप्त मंत्रियो का..
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अभिव्यक्ति के आज़ादी का यह मतलब नही कि आप किसी के शरीर का मज़ाक़ बनाये। यूट्यूवर हर्ष राजपूत बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के कमज़ोर और दुबले पतले शरीर का मज़ाक़ उड़ा रहा है। यह कितना ग़लत बात। किसी व्यक्ति के रंग रूप और शरीर का मज़ाक़ उड़ाना अपराध है। फिर भी व्यू के लिए यह ऐसा कर रहा है। कल इस पर करवाई हो जाए तो लोग कहेंगे यह तानाशाही की सरकार है। आपको विरोध करना है तो उसके काम और योग्यता का करो।
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इस स्टोरी को ही गोदी चैनल दस दिन रिपोर्ट कर दें। सारी एजेंसियाँ हरकत में आ जाए। ऐसा होगा नहीं । प्रधानमंत्री आम जनता से पैसा बचाने की अपील कर रहे हैं और पचास अफ़सर 3200 करोड़ ज़मीन के धंधे से बना रहे हैं। बाद में इसी टाइप के अफ़सर लोकतंत्र की हत्या की सुपारी लेकर सरकार के काम आते हैं। अगर देश में राष्ट्रवाद और धर्म की लहर चल रही है तो इन अफ़सरों के आँगन में नैतिकता की बूंदा बांदी भी नहीं हुई क्या ?

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भिवानी स्टेशन पर #TTE और #Guard, एक-दूसरे से भिड़े
ये हैं भारतीय रेल के जिम्मेदार कर्मचारी, यानि फ्रंटलाइन एम्बेसडर—इस तरह बना रहे हैं रेलवे की शानदार छवि!
@AshwiniVaishnaw @RailMinIndia @PMOIndia @RailSamachar @RailVisionTV @yatrisangh @SurendraSh59059 @DrAshokTripath
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सरेआम लड़की का अपरहण करके ले जा रहे हैं,
इन सूअरों की हिम्मत देखिए 🤬
इन सभी मनचलों की लंगड़ाते हुए वीडियो आनी चाहिए , शिवपुरी , मध्य प्रदेश
तत्काल संज्ञान लें @MPPoliceDeptt
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