भूपेंद्र,जय माँ गंगे 🚩जीवन एक प्रयोग है✍️

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भूपेंद्र,जय माँ गंगे 🚩जीवन एक प्रयोग है✍️

@BhupendraMaa

🕉Jai Maa Gange एक कोशिश और कर, बैठ न तू हार कर, तू है पुजारी कर्म का, थोड़ा तो इंतज़ार कर विश्वास को दृढ़ बना, संकल्प को कृत बना; एक कोशिश और कर, बैठ न तू हार कर।

Haridwar, India Katılım Kasım 2019
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
पवन जोशी की कहानी उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।आर्थिक संघर्ष और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रोजगार की तलाश में पलायन करने के बजाय उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना। स्वरोजगार योजना से मिली सहायता ने उनके जीवन को नई दिशा दी। इस योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से पवन जोशी ने “बालाजी फ्लोर मिल” की शुरुआत की। आटा चक्की के साथ-साथ उन्होंने धान प्रोसेसिंग का कार्य भी शुरू किया। शुरुआत छोटी थी, लेकिन मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर उनका काम धीरे-धीरे स्थानीय क्षेत्र में पहचान बनाने लगा। आज उनका व्यवसाय सफल स्वरोजगार का उदाहरण बन चुका है। पवन जोशी आज हर महीने लगभग 35 से 40 हजार रुपये की स्थिर आय अर्जित कर रहे हैं। सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनने तक ही नहीं, उन्होंने दो अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही सोच, मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहयोग से गांव में रहकर भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। पवन जोशी की यह यात्रा उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है।
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Chandray Shekhar Tiwari 🇮🇳
पावन पर्व गंगा दशहरा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। माँ गंगा की दिव्य कृपा से आपके जीवन एवं परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का सदैव वास बना रहे। माँ गंगा आप सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा, सफलता एवं मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करें। 🙏 जय गंगा माँ 🙏
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
उत्तराखंड की “कीवी क्वीन” सीता देवी आज पहाड़ की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। टिहरी जिले की रहने वाली सीता देवी ने पारंपरिक खेती छोड़कर कीवी उत्पादन की नई शुरुआत की। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन उन्होंने मेहनत और सीखने का रास्ता नहीं छोड़ा। हिमाचल से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने खेतों में कीवी के पौधे लगाए।धीरे-धीरे उनकी फसल सफल हुई और उन्हें लाखों रुपये का मुनाफा मिलने लगा। आज वे हर साल कीवी खेती से अच्छी कमाई कर रही हैं।उनके खेत पूरे इलाके में पहचान बना चुके हैं। उनकी सफलता देखकर कई किसान अब कीवी खेती की ओर बढ़ रहे हैं। सीता देवी ने साबित किया कि पहाड़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता और मेहनत से नई मिसाल कायम कर सकती हैं।उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद हार नहीं मानी।कड़ी मेहनत और धैर्य ने उन्हें नई पहचान दिलाई। आज वे दूसरे किसानों को भी नई खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है। सीता देवी की कहानी उत्तराखंड की बेटियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश है।
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं पौड़ी गढ़वाल के नवीन पटवाल और उनकी पत्नी पूनम शर्मा। एक तरफ नवीन कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं, तो दूसरी तरफ पूनम एक IITian- लेकिन उन्होंने नौकरी की सुरक्षित राह छोड़ खेती में नई क्रांति लाने का फैसला किया। 2020 के लॉकडाउन में जब 3,000 किलो मशरूम खराब होने से उन्हें लगभग ₹2 करोड़ का नुकसान हुआ, तब उन्होंने हार नहीं मानी। बल्कि उसी संकट को अवसर बनाकर उन्होंने “Planet Mushroom” की शुरुआत की और पहाड़ों में Shiitake, Lion’s Mane, Cordyceps जैसे विदेशी मशरूम उगाने शुरू किए। सबसे बड़ी उपलब्धि तब मिली जब उन्होंने दुनिया के सबसे महंगे मशरूम “गुच्छी” की इंडोर खेती में सफलता हासिल की। आज उनका कारोबार करोड़ों में है और वे साबित कर चुके हैं कि पहाड़ का युवा अगर विज्ञान, मेहनत और नवाचार को साथ लेकर चले, तो उत्तराखंड में रहकर भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है। यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और पहाड़ के युवाओं के सपनों की जीत की कहानी है। नवीन और पूनम ने यह दिखा दिया कि सफलता के लिए बड़े शहर नहीं, बड़ा सोच जरूरी होता है। उनकी मेहनत आज पहाड़ के हजारों युवाओं को स्वरोजगार और आधुनिक खेती की ओर प्रेरित कर रही है। जहां लोग पहाड़ छोड़ने की बात करते हैं, वहीं इस दंपति ने पहाड़ में रहकर रोजगार और पहचान दोनों बनाई। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उत्तराखंड की मिट्टी में भी करोड़ों सपने उगाए जा सकते हैं।
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
पौड़ी की रेशमा देवी ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वरोज़गार को अपना संबल बनाया। मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से उन्होंने अपने उद्यम को सफलतापूर्वक खड़ा किया। आज उनके कार्य से उन्हें नियमित और सम्मानजनक आर्थिक लाभ (मुनाफ़ा) प्राप्त हो रहा है। उनका स्वरोज़गार न केवल आजीविका का साधन बना, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की पहचान भी। स्थानीय संसाधनों और कौशल का सही उपयोग उनकी सफलता की कुंजी रहा। रेशमा देवी ने साबित किया कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ा परिणाम दे सकता है। उनकी पहल से अन्य महिलाओं को भी रोज़गार और आत्मविश्वास मिला है। महिला उद्यमिता के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय और प्रेरणादायी है। इसी उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें राज्य स्तरीय तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उत्तराखंड की हर संघर्षशील महिला का उत्साह बढ़ाता है। रेशमा देवी आज पहाड़ की महिलाओं के लिए आशा और प्रेरणा का प्रतीक हैं। उनकी कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता ही सच्चा सशक्तिकरण है। नारी शक्ति, स्वरोज़गार और स्वाभिमान - यही रेशमा देवी की पहचान है।
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Minakshi Khati
Minakshi Khati@aipangirl·
जय हो महाराज जी 🚩🙏
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Bhaskar Joshi
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ABHISHEK SEMWAL
ABHISHEK SEMWAL@abhiisshhek·
Predict the exact number of seats, BJP will win in Bengal... Lucky winner will get 5000 cash prize
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Anil Baluni
Anil Baluni@anil_baluni·
मित्रों, आप सभी के साथ उत्तराखंड की रेल सेवाओं में एक और उपलब्धि साझा कर रहा हूं । मुझे माननीय केंद्रीय रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने मेरे द्वारा निवेदित रामनगर से देहरादून के मध्य नई रेलगाड़ी के परिचालन की स्वीकृति की जानकारी दी है। मंत्री जी का कोटि - कोटि आभार, जिन्होंने निरंतर उत्तराखंड की जनता के रेल सुविधा से जुड़े मेरे निवेदनों पर सदैव उदारता दिखाई है और हमें अनेक रेल सेवाओं के परिचालन और स्टॉपेज की स्वीकृतियां प्रदान की हैं । हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी का कार्यकाल देश के साथ-साथ उत्तराखंड के लिए उपलब्धियों से भरा रहा है। रामनगर-देहरादून रेल सेवा से पूर्व काठगोदाम-देहरादून के बीच 'नैनी दून एक्सप्रेस', कोटद्वार से नई दिल्ली के लिए रेल सेवा, देहरादून से लखनऊ हेतु 'वंदे भारत एक्सप्रेस' जैसी सौगातें हमे प्रदान की हैं। रामनगर-देहरादून रेल सेवा प्रारंभ होने से उस क्षेत्र के नागरिकों को देहरादून के आवागमन में सुविधा प्राप्त होगी तथा उनका धन और समय बचेगा।
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Anil Baluni
Anil Baluni@anil_baluni·
विगत जनवरी माह में मैंने माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी से भेंट कर रामनगर से देहरादून के बीच सीधी ट्रेन सेवा प्रारंभ करने का अनुरोध किया था, जिससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिले और उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके। मुझे अत्यंत हर्ष के साथ सूचित करना है कि इस महत्वपूर्ण ट्रेन सेवा के संचालन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। शीघ्र ही इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही, रामनगर के तिरुमदारा में संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का ठहराव भी कल से प्रारंभ हो गया है, जिससे स्थानीय यात्रियों को बड़ी राहत मिली है और वे इसका लाभ भी लेने लगे हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह कदम निश्चित रूप से क्षेत्र के विकास और सुविधाओं को नई गति देगा। @AshwiniVaishnaw
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ABHISHEK SEMWAL
ABHISHEK SEMWAL@abhiisshhek·
नव दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने पर बड़े भाई @Swarup_Semwal जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 🙏बाबा केदार का आशीर्वाद सदा बना रहे।
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
उत्तराखंड के रानीखेत में रहने वाली किरन भगत आज साबित कर रही हैं कि अगर हौसले मज़बूत हों तो सीमित संसाधन भी रास्ता नहीं रोक सकते। मूल रूप से अमोली (विनायक), भिकियासैंण की रहने वाली किरन रोज़गार के लिए कपड़ों की दुकान में काम करती हैं, लेकिन उनके हाथों में बसती है पहाड़ की अनमोल विरासत -ऐपण लोक कला। परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी कला को कभी पीछे नहीं छोड़ा। नौकरी और घरेलू ज़िम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपने हुनर को लगातार निखारा। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का सही उपयोग कर उन्होंने अपनी कला को नए बाज़ार से जोड़ा। आज उनके बनाए ऐपण देहरादून से लेकर देश के कई शहरों और विदेशों तक पहुँच रहे हैं। उनकी कला अमेरिका जैसे देशों में भी उत्तराखंड की पहचान बन रही है। ऐपण उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिला अमूल्य संस्कार है। पशुपालन और दूध बेचकर परिवार चलाने वाले माता-पिता की मेहनत ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही है। किरन ने साबित किया कि लोक कला सिर्फ़ परंपरा नहीं, आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन सकती है। उनका सपना है कि ऐपण युवाओं के लिए रोज़गार का स्थायी साधन बने। वे चाहती हैं कि पहाड़ी संस्कृति आधुनिक समय में भी जीवित और सम्मानित रहे। किरन भगत जैसी बेटियाँ उत्तराखंड की आत्मा और भविष्य दोनों हैं। ऐसी प्रेरणादायक बेटियों पर पूरा प्रदेश गर्व करता है 🙏
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले के पलाशाट गाँव की प्रभा देवी आज पूरे प्रदेश के लिए गर्व और प्रेरणा हैं। 76 वर्ष की उम्र में भी वे प्रकृति की सच्ची सेविका बनकर हर दिन पेड़-पौधों की देखभाल करती हैं। जहाँ लोगों को बंजर ज़मीन दिखती थी, वहाँ प्रभा देवी को हरियाली का भविष्य नज़र आता था। उन्होंने अपने घर के पास की सूखी भूमि को 500 से अधिक पेड़ों का घना जंगल बना दिया। इस जंगल में बाँज, बुरांश, दालचीनी, रीठा जैसे अनेक स्थानीय और उपयोगी वृक्ष हैं। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के उन्होंने अनुभव और प्रकृति से ही सीखकर पौधरोपण किया। 16 वर्ष की उम्र में विवाह के बाद भी उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। ऋतुओं, मिट्टी और पानी को समझते हुए वे हर पौधे की ज़रूरत पहचानती हैं। उनके बच्चे शहरों में बस गए, लेकिन प्रभा देवी ने गाँव और जंगल को कभी नहीं छोड़ा। वे कहती हैं "मेरा सपना है कि हर बंजर ज़मीन फिर से हरी हो जाए।" आज वे “पेड़ों की सखी” और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी हैं। उनका जीवन सिखाता है कि बदलाव डिग्री से नहीं, दृढ़ निश्चय से आता है। प्रभा देवी जैसी महिलाएँ ही उत्तराखंड की असली शक्ति हैं।वे साबित करती हैं कि एक व्यक्ति भी धरती का भविष्य बदल सकता है। उनकी कहानी हर युवा और हर महिला को प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देती है।
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Manjeet Negi
Manjeet Negi@manjeetnegilive·
स्वरोजगार की प्रेरक कहानी: रुद्रप्रयाग की बबीता रावत ने दिखा दिया कि उम्र कभी सफलता की सीमा नहीं होती।जहाँ अधिकांश युवा अपने भविष्य को लेकर उलझे रहते हैं, वहीं बबीता ने पढ़ाई के साथ-साथ खेती, दूध विक्रय और मशरूम उत्पादन जैसे कामों में कदम रखकर अपनी राह खुद बनाई। एक एकड़ जमीन से शुरू हुई उनकी यात्रा आज कई गांवों की उम्मीद बन चुकी है। मशरूम खेती को लेकर फैली गलत धारणाओं को तोड़ते हुए उन्होंने न सिर्फ खुद तरक्की की बल्कि 500 महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाया,यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। जैविक खेती, पॉलीहाउस तकनीक और निरंतर मेहनत से बबीता आज एक युवा, सशक्त उद्यमी का चेहरा हैं। अगर सरकार और समाज इसी तरह पॉलीहाउस, मछली पालन, मशरूम उत्पादन और अन्य स्वरोजगार योजनाओं पर सब्सिडी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराए, तो हजारों बबीताएँ तैयार होंगी और उत्तराखंड के गांवों में असली विकास की रोशनी फैल जाएगी।
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Himani Vaishnav
Himani Vaishnav@drhimaniuk·
भिटोली – उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ी अनमोल परंपरा भिटोली उत्तराखंड की एक सुंदर और भावनात्मक परंपरा है, जो मायके और ससुराल के रिश्तों को प्रेम और अपनत्व से जोड़ती है। इस परंपरा के तहत भाई या मायके वाले अपनी बेटी/बहन के ससुराल में भेंट (भिटोली) भेजते हैं, खासकर चैत्र मास में।
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Arjun Rawat
Arjun Rawat@teerandajarjun·
#अतुल्य_उत्तराखंड के जरिये हमारी कोशिश कुछ अहम मुद्दों को उठाने की होती है। इस बार के अंक में फॉरेस्ट फायर पर बात। इस स्टोरी को प्रकाशित करने का उद्देश्य उस दीर्घकालिक खतरे को समझाना है, जो हर साल हमारे सामने खड़ा होता है और जिसके लिए हम अक्सर तैयार नहीं होते। जंगल रोते हैं...पर हम क्यों नहीं सुनते?
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