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गौ तस्करों में खौफ है जाहिद मंसूरी का ...
गुजरात में 7/8 गाड़ी पकड़ा चुके है सभी गाड़ी का खुलासा किया कि इन्हें कथित संगठन वाले लोग रोकते है नाम जब हिंदू आता है तो वो उन्हें खर्चा पानी लेकर छोड़ देते है ...!!
गौ तस्करी में सबसे ज्यादा भागीदारी कथित संगठनों की है जो १/२ केस मुस्लिम को पकड़ कर उनकी मोब्लिंचिंग कर देते है ओर फेमस होकर गो तस्करी में खूब पैसा कमाते है उनका इलाज अब गुजरात के कुछ युवा मुस्लिम कर रहे है वो गौ तस्करी होने ही नहीं दे रहे है ।
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साँप की आँख बहुत तेज़ है 😬
सांप की आँख@SaanpKiAankh
भाजपा नेत्री और लोकगायिका मैथिली ठाकुर की मधुर आवाज़ में सुनिए “महँगाई डायन खाए जात है…”
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दिस बास्टrd किल्ड राजीव गांधी
इस बा** ने राजीव को मारा। इस बा** ने विजय कुमारतुंगे को मारा। इस बा** ने रंजन विजयरत्ने को मारा।ये गामिनी दिशानायके को मरवा देगा।
इसने मुझे मरवाने की कोशिश की, मैं बच गया, लेकिन ये मुझे अंततः मार ही डालेगा। और ये खुद भी मारा जाएगा।
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ललित अतुलामुदली, 1985-87 में श्रीलंका के गृह और रक्षामंत्री हुआ करते थे। यह राष्ट्रपति जयवर्धने का दौर था। ललित उनके दाएं हाथ माने जाते थे।
ऑक्सफोर्ड से पढ़े, जहीन और कड़क। UNP में चढ़ता हुआ चेहरा थे। जयवर्धने के बाद, लंका का राष्ट्रपति बनने के लिए रणसिंघे प्रेमदासा के सामने चुनौती थे।
1987 में एक दिन उन पर एक तमिल आतंकी ने उन पर हथगोला फेंक दिया। इसके बाद अपाहिज जीवन गुजारते रहे।
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प्रेमदास जयवर्धने के पद छोड़ देने पर, 1989 में राष्ट्रपति बन गए। जल्द ही तानाशाही तरीको से पार्टी, शासन में कब्जा जमा लिया। विरोधी किनारे लगा दिए।
चुनाव होने थे। विजय कुमारतुंगे (इनकी पत्नी चन्द्रिका कुमारतुंगे आगे राष्ट्रपति बनी) विपक्ष से एक मजबूत चुनौती थे। उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी। वे चुनाव जीत सकते थे।
तो एक तमिल आतंकी में उन्हें मार दिया।
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रणसिंघे फिर जीत गए। लेकिन पार्टी में विरोध बढ़ता गया। 1993 मे उन पर महाभियोग लाया गया। यह महाभियोग लाने वाले थे ललित अतुलमुदली, और दिशानायके...
जो गिर गया।
कुछ दिनों बाद एक गनमैन ने अपाहिज ललित अतुलमुदली को मार दिया। इसके बाद दिशानायके भी मारे गए।
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रणसिंघे प्रेमदास भी। ये 1993 की बात है। इस तरह ललित की सारी भविष्यवाणी पूरी हुई।
ये भविष्यवाणियां, जो ललित ने 1991 मे भारतीय पत्रकार शेखर गुप्ता को की थी।
शेखर ने अपने शो, द प्रिंट में अपने पुराने लेख, और राजीव गांधी की हत्या के 10 दिन बाद, जून 1991 में श्रीलंका में, ललित अतुलमुदली से मुलाकात, उनके द्वारा कहीं गयी बाते याद की। शो यूट्यूब पर उपलब्ध है।
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शेखर बताते है-
बिस्तर पर निर्जीव से पड़े ललित अतुलमुदली ने कहा- राजीव गांधी को लिट्टे ने ही मारा है। लेकिन इसमें "हैंड इन ग्लव" उस व्यक्ति का है, जिसने विजय कुमारतुंगे को मरवाया।
कुमारतुंगे की हत्या में प्रेमदासा का हाथ होने की खबरे, चलती थी। ( जो बाद में चंद्रिका कुमारतुंगे के दौर में एक जांच कमीशन ने पुष्टि की)।
लेकिन 1991 में इस इंटरव्यू के वक्त, प्रेमदासा राष्ट्रपति थे। यह बात, गुप्ता को पची नही। उन्होंने असहमति जताई
ललित ने कहा-
दिस बास्ट$erd किल्ड राजीव गांधी। इस बा** ने विजय कुमारतुंगे को मारा। इस बा** ने रंजन विजयरत्ने को मारा।ये गामिनी दिशानायके को मरवा देगा।
इसने मुझे मरवाने की कोशिश की, मैं बच गया, लेकिन ये मुझे अंततः मार ही डालेगा।
और ये खुद भी मारा जाएगा।
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प्रेमदासा, भारत की शांति सेना श्रीलंका में होने के विरुद्ध थे। जयवर्धने के बाद जब उनके हाथ कमान आई, तो 1990 में प्रधानमंत्री वीपी सिंह से बात करके, उन्होंने शांति सेना वापसी शुरू करवा दी।
लेकिन 1991 के चुनाव में राजीव की वापसी दिखने लगी। इसके पहले की वे फिर जीतकर पीएम बने, उन्हें रास्ते से हटाना जरूरी था। इसलिए, लिट्टे का सहारा लिया गया।
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लिट्टे भी राजीव की वापसी नही चाहता था। रॉ के कुछ लोग, लिट्टे की मदद कर रहे थे। वे लिट्टे को सरेंडर कराने की भारत सरकार की रणनीति से खुश नही थे।
भारतीय सेना द्वारा, श्रीलंकन सेना को दिये हथियार, गोला बारूद भी लिट्टे तक पहुच रहे थे। जो भारतीय सेना के विरुद्ध ही इस्तेमाल हो रहा था। इसमे प्रेमदासा के इंवॉलमेन्ट के दस्तावेज मौजूद हैं।
लिट्टे मे, प्रभाकरण के विरुद्ध हो रही बगावत, जो महात्या नाम के व्यक्ति द्वारा रची जा रही थी, इसका खुलासा रॉ और प्रेमदासा ने प्रभाकरण से कर दिया था। महात्या को 200 साथियो के साथ प्रभाकरण ने भून दिया।
यह शेखर गुप्ता बताते हैं।
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बाद के दौर में और भी एविडेंस आये, जिन्होंने प्रेमदासा और लिट्टे के इस छिपे सहयोग को रेखांकित किया।
इस किस्म की राजनीति का नतीजा रहा कि प्रेमदासा की सत्ता की भूख और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने श्रीलंका को न सिर्फ अंदरूनी कलह, बल्कि खतरनाक साजिशों के चंगुल में झोंक दिया।
ललित अतुलमुदली, जो 1991 में बिस्तर पर अपाहिज पड़े-पड़े जो कहा, अपनी भविष्यवाणी में लगभग पूरी तरह सही साबित हुए।
ललित की हत्या हुई, गामिनी दिसानायके की हत्या हुई, और अंत में प्रेमदासा खुद उसी LTTE के शिकार हुए, जिसका उन्होंने अपनी खूनी राजनीति में इस्तेमाल किया।
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सत्ता के लिए आतंक से समझौता करने वाले, अंत में उसी आतंकवाद का शिकार बनते हैं ।
लेकिन उसके पहले राजीव औऱ ललित जैसी प्रतिभाओ को खत्म कर, समूची पीढियो का मुस्तकबिल गड्ढे में डाल देते हैं।

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सौ साल लगे गाय पर राजनीति का सही जवाब आने में:
आरएसएस सौ साल से गाय की राजनीति करता आया है. उद्देश्य गाय को बचाना नहीं था बल्कि इसके सहारे मनुवाद को स्थापित करना था और टार्गेट मुसलमान को बनाया गया.
गाय की राजनीति ने सबको डिफेंसिव कर दिया था, गांधी तक को. गाय भारत के संविधान तक में आ गई आर्टिकल 48 में.
इस पूरी शताब्दी में एक बात स्थापित कर दी गई कि मुसलमान गाय काटता है लेकिन एक दूसरा सच छुपाया गया कि गाय कटवाता कौन है, काटने के लिए बेचता कौन है और पैसा कौन कमाता है.
बंगाल के मुसलमानों ने इस छुपे हुए सच से पर्दा हटा दिया.
बकरीद पर बंगाल के मुसलमानों ने तय कर लिया कि वो गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे. हाहाकार मचा हुआ है क्योंकि गाय बेचने का काम हिंदू करते हैं जिनमें घोष समाज का बड़ा कब्जा है. बकरीद पर कुर्बानी के लिए मुंह मांगी कीमत मिलती है जो साल भर का खर्चा निकलती है व्यापारियों का. करोड़ों का कर्ज़ा लिया जानवार खरीदने और उसके रख रखाव में कि बकरीद में माल काटेंगे. मुसलमानों के फैसले ने सब किए धरे पर पानी फेर दिया. अब वहां मुसलमान हिंदू व्यापारियों से कह रहा कि अपनी मां को मत बेचो, ले जाओ और सेवा करो.
अब इस आंदोलन को बंगाल के बाहर भी निकलना चाहिये.
पहली बार गाय की राजनीति पर सही जवाब मिला है.
लोकतंत्र में कौन क्या खाता है ये उसका चुनाव है लेकिन अगर इस पर बीजेपी राजनीति करती है और बेकसूर लोग मारे जाते हैं तो रणनीतिक फैसले समय की मांग है.
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गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ घोषित करने से सरकार आखिर क्यों बच रही है? गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग, बेगुनाह इंसानों की हत्या और नफ़रत की राजनीति अब बंद होनी चाहिए!
जमीयत उलमा-ए-हिंद की केवल इतनी मांग है कि गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा देकर इस विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए, ताकि न्याय, समानता और इंसानियत की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
[Old Video - Posted By Admin]
#CowAsNationalAnimal | #JusticeForAll | #MobLynching | #ArshadMadani
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