
रिश्तों का सबसे कड़वा सच यही है कि हर मुस्कुराहट अपनापन नहीं होती. बहुत से लोग आपके साथ इसलिए नहीं चलते कि उन्हें आपसे मोहब्बत है, बल्कि इसलिए चलते हैं कि आपकी मुट्ठी में क्या है... अवसर, पहचान, लाभ या पहुँच.
जब तक हाथ भरा होता है, भीड़ साथ चलती है. जिस दिन मुट्ठी खाली हो जाए, वही लोग नजरें चुरा लेते हैं जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की बातें किया करते थे.
इसलिए अब लोगों की बातों से नहीं, उनकी ख़ामोशी से पहचान करना सीख रहा हूँ.
दीपक सरीन
(Poet/Author)
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