Deepak Sarin – Poet | Author | PAPA NGO Founder

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@Deepak_sarinji

● Poet & Author | Social Reformer Founder – Progressive Association of Parents Awareness (PAPA NGO) Words for healing • Activism ● Founder All India Sarin Club

Agra, India Katılım Ocak 2015
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Deepak Sarin – Poet | Author | PAPA NGO Founder
रिश्तों का सबसे कड़वा सच यही है कि हर मुस्कुराहट अपनापन नहीं होती. बहुत से लोग आपके साथ इसलिए नहीं चलते कि उन्हें आपसे मोहब्बत है, बल्कि इसलिए चलते हैं कि आपकी मुट्ठी में क्या है... अवसर, पहचान, लाभ या पहुँच. जब तक हाथ भरा होता है, भीड़ साथ चलती है. जिस दिन मुट्ठी खाली हो जाए, वही लोग नजरें चुरा लेते हैं जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की बातें किया करते थे. इसलिए अब लोगों की बातों से नहीं, उनकी ख़ामोशी से पहचान करना सीख रहा हूँ. दीपक सरीन (Poet/Author) #LifeTruth #BitterReality #HumanNature #DeepThoughts #SufiThoughts
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PAPA- Progressive Association of Parents Awareness
जो भी शिक्षण संस्थान बिना मान्यता के बेइमानी से स्कूल चला रहा हो उसमें आप अपने बच्चे भेज रहें हैं जीवन में ईमानदारी और संस्कार की शिक्षा लेने के लिए ....क्या वो दे पाएगा...? #आगरा में लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल की कथित फर्जी मान्यता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती केवल एक स्कूल का मामला नहीं, पूरे नियामक ढांचे की परीक्षा है. मान्यता, ट्रस्ट, भूमि और संचालन से जुड़े गंभीर सवालों पर न्यायालय द्वारा सीबीएसई से स्पष्टीकरण माँगना शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह मामला केवल कानूनी विवाद नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य और अभिभावकों के विश्वास से जुड़ा प्रश्न है. यदि मान्यता पर संदेह है, तो यह सिर्फ दस्तावेज़ों की त्रुटि नहीं, बच्चों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है. न्यायालय की सक्रियता इसीलिए महत्वपूर्ण है. प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) शुरू से मानता रहा है कि स्कूल मान्यता, संबद्धता और प्रशासनिक वैधता पर पारदर्शी सार्वजनिक निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए. अभिभावकों को प्रवेश से पहले मान्यता की वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार मिलना चाहिए. यह प्रकरण उन तमाम शिकायतों को भी आवाज देता है जिन्हें अक्सर ‘निजी विवाद’ कहकर टाल दिया जाता है. जब सवाल जनहित से जुड़ता है, तब न्यायिक हस्तक्षेप लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व बन जाता है. अब अपेक्षा है कि तथ्य सामने आएँ और जिम्मेदारी स्पष्ट हो. PAPA NGO का स्पष्ट मत है, शिक्षा मंदिर है, इसे कागजी भ्रम, फर्जीवाड़े और संस्थागत अपारदर्शिता से मुक्त रखना होगा. बच्चों के भविष्य के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं. दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) @mygovindia @cbseindia29 @UPGovt @allahabadhc @CMOfficeUP #Agra @UPBasicShiksha @Basicedunews @CommissionerAgr @OfficeOfDMAgra @Deepak_sarinji #SchoolRecognition #EducationJustice #StudentRights #papango
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
“साहिब दूरदर्शन की सादगी में भी क्या रंग था, रिमोट के झगड़े न थे, बस परिवार एक संग था!” 🔷 📺 भारतीय दूरदर्शन का रंगीन प्रसारण टेस्ट 📺 🔷 एक दौर था… जब टीवी सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, परिवार को जोड़ने वाला एक पवित्र माध्यम हुआ करता था। 🔷आज जब हर हाथ में मोबाइल है, हर कमरे में अलग स्क्रीन है, तो कभी-कभी दिल उस दौर को याद करता है— जब एक ही टीवी के सामने पूरा परिवार बैठता था, और हर कार्यक्रम एक उत्सव बन जाता था। 🔷📡 याद है वो ऐतिहासिक पल… जब भारत में दूरदर्शन ने रंगीन प्रसारण की शुरुआत की— भारत में रंगीन टीवी प्रसारण की शुरुआत आधिकारिक रूप से 25 अप्रैल 1982 को मानी जाती है। इसी दिन 1982 Asian Games के प्रसारण की तैयारियों के तहत दूरदर्शन ने रंगीन प्रसारण का परीक्षण (Test Transmission) शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 1982 में एशियाई खेलों के दौरान भारत ने पूरी दुनिया को पहली बार रंगीन टीवी प्रसारण का अनुभव कराया। 🔷📺 वो रंगीन टीवी… सिर्फ एक मशीन नहीं, एक एहसास था! एक छोटा सा डिब्बा… जिसमें पूरा परिवार समा जाता था। काले-सफेद स्क्रीन से निकलकर जब रंगों ने घरों में दस्तक दी, तो जैसे खुशियाँ भी रंगीन हो गईं। जब पहली बार घर में रंगीन टीवी आया था, तो जैसे खुशियों ने भी रंग पहन लिए थे। 🔸 एंटीना ठीक करने के लिए छत पर भागना 🔸 “आ गया… आ गया!” की आवाज़ लगाना 🔸 और फिर सबका एक साथ बैठकर देखना 🔷📺 रामायण, महाभारत, हम लोग, बुनियाद— ये सिर्फ धारावाहिक नहीं थे, ये हमारी संस्कृति, हमारी भावनाएँ और हमारी सामूहिक यादों का हिस्सा बन गए। 🔸 न कोई रिमोट की खींचतान, 🔸 न चैनलों की भरमार, 🔸 बस इंतज़ार, उत्साह और साथ बैठने का आनंद। आज तकनीक ने हमें तेज़ और आधुनिक बना दिया है, लेकिन उस सादगी में जो अपनापन था, वो शायद कहीं पीछे छूट गया है… 🔷🙏 आओ आज के इस दिन पर एक संकल्प लें:— कि हम तकनीक के बीच भी अपने रिश्तों के रंग फीके न पड़ने दें। क्योंकि… असल “रंगीन जीवन” वही है, जहाँ परिवार साथ हो, दिल पास हों और यादें साझा हों। ❤️ #Doordarshan #Nostalgia #IndianTelevision #FamilyTime
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Hakik Alam
Hakik Alam@hakik7alam·
अगर कोई इंसान गलती करे तो उसको सजा देने का हक अदालत को है, लेकिन पुलिस थाने में ले जाकर, पुलिस द्वारा किसी को इस तरह से मारना कहां तक सही है, आखिर इस पुलिस वाले को किसने अधिकार दिया,किसी को इस तरह पिटने का,
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Arvind Sharma
Arvind Sharma@sarviind·
"विशेष सम्मानित युवा" राजस्थान की सड़कों पर अपनी योग्यता दिखाते इन युवाओं का वीडियो वायरल है। पुलिस को थाने में बुलाकर सम्मान देना चाहिए। ताकि बाकी बिगड़ैल युवाओं को भी सबक मिल सकें।
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Ranvijay Singh
Ranvijay Singh@ranvijaylive·
भयानक वीडियो है ⚠️ यूपी के अलीगढ़ में पाइप लाइन का काम चल रहा था. एक मजदूर गड्ढे में उतरा. तभी मिट्टी का बड़ा हिस्सा मजदूर पर गिर गया, मजदूर की मौत हो गई.
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Rahul Saini
Rahul Saini@JtrahulSaini·
गजब गुंडई है यार...गैस एजेंसी वाले सरकारी आदेश नहीं मान रहे..कल बहन की शादी है..10 सिलेंडर का लिखित आदेश है...! लेकिन सिलेंडर नहीं दिए जा रहे...इसके बावजूद अभद्रता की जा रही है...क्या यह उचित है...? शिवम कुमार पाल का आरोप है यह सब दिन भर ब्लैक में सिलेंडर बेचकर अपनी जेबें भर रहे हैं..गैस होते हुए भी जरूरतमंदों को नहीं दे रहे है..! इस एजेंसी पर कार्यवाही होनी चाहिए...! चंद्रा गैस एजेंसी...! बक्शी का तालाब (लखनऊ)
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Vivek Sharma
Vivek Sharma@Lko_VivekSharma·
'कागजी' आदेश और..⚡️'असली' करंट.. 🤔 एक तरफ ऊर्जा मंत्री @aksharmaBharat जी के जनहितैषी निर्देश हैं कि.. 1kW लोड वालों का कनेक्शन नहीं कटेगा और डिस्कनेक्ट से पूर्व 5 SMS अनिवार्य होंगे..@UPPCLLKO वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के इंदिरा नगर में कुमुद लता जी जैसे उपभोक्ता हैं...जिनकी बिजली सुबह 8:40 से है..गुल..@Gomtinagarzone @setechnicalgn_ ...लगता है 1912 और स्मार्ट मीटर वालों ने अव्यवस्थित 'वर्टिकल' व्यवस्था को 'हॉरिजॉन्टल' (सुला देने वाला) वाला ही मान लिया..🤔 मंत्री जी के आदेश शायद स्मार्ट मीटर के सिग्नल तक पहुँचते-पूँचते हो ही गए.. 'डिस्चार्ज' । भीषण गर्मी में जनता बेहाल है और सिस्टम अपनी ही मस्ती में 'शॉर्ट सर्किट' का शिकार है..🥵 क्या ये "उपभोक्ता हित सर्वोपरि" है या फिर "सिस्टम की मनमानी सर्वोपरि"? ..@EMofficeUP @mduppcl @MVVNLmd जनहित में केवल अब स्थाई समाधान (पोस्टपेड मीटर का ही) करिए श्रीमान.. @myogiadityanath #UPPCL #SmartMeter #ElectricityCrisis
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Pushpraj sharma
Pushpraj sharma@ThePushprajX·
एक बुजुर्ग व्यक्ति को एम्बुलेंस न मिलने पर वो अपनी बीमार पत्नी को बाइक पर चारपाई बांधकर ढोता रहा... कहने को कुछ भी कहते रहो कि 50 ट्रिलियन इकोनॉमी है फलानी इकॉनमी है... लेकिन जब ऐसी तस्वीरें सामने आती है तो लगता b कि क्या करे ऐसी इकोनॉमी का....
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Damini
Damini@Daminihere·
प्रेम आत्मा से ही हो सकता है
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
🏏 क्रिकेट के भगवान को नमन — जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎂 आज हम उस महानायक का जन्मदिन मना रहे हैं, जिसने सिर्फ क्रिकेट नहीं खेला, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों में एक सपना जिया — Sachin Tendulkar। 🔷24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक भावना हैं… एक प्रेरणा हैं… एक युग हैं। 🔷उनकी उपलब्धियाँ खुद एक इतिहास हैं:— • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक – आज भी अटूट रिकॉर्ड • 34,000+ रन – क्रिकेट की दुनिया में सर्वोच्च • 200 टेस्ट मैच – अद्वितीय समर्पण का प्रतीक • 2011 में भारत को वर्ल्ड कप जीतने का सपना पूरा • देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्राप्त करने वाले पहले खिलाड़ी 🔷लेकिन सचिन की असली महानता सिर्फ रिकॉर्ड्स में नहीं, बल्कि उनके संस्कार, विनम्रता और देशभक्ति में है। जब-जब भारत मुश्किल में होता था, एक नाम उम्मीद बनकर सामने आता था — “सचिन है ना!” 🔷उनकी बैटिंग सिर्फ रन नहीं बनाती थी, बल्कि हर दिल में गर्व और खुशी भर देती थी। उनका स्ट्रेट ड्राइव आज भी क्रिकेट की सबसे खूबसूरत तस्वीरों में से एक माना जाता है। 🔷🙏 प्रेरणा:— सचिन हमें सिखाते हैं कि “कड़ी मेहनत, अनुशासन और विनम्रता — यही असली सफलता का रास्ता है।” 🎉 जन्मदिन पर नमन और शुभकामनाएँ! आपने हमें सिर्फ मैच नहीं, बल्कि यादें दी हैं… आपने हमें सिर्फ जीत नहीं, बल्कि गर्व दिया है… Happy Birthday, Master Blaster! आप यूँ ही करोड़ों दिलों की धड़कन बने रहें। ❤️🇮🇳 #SachinTendulkar #MasterBlaster #CricketLegend #HappyBirthdaySachin
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Ranvijay Singh
Ranvijay Singh@ranvijaylive·
भारतीय जनता पार्टी एक वॉशिंग मशीन है 👇 • एक तरफ से भ्रष्टाचारी डालो, दूसरी तरफ से क्लीनचिट निकलती है.
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Vivek Sharma
Vivek Sharma@Lko_VivekSharma·
लगता है #LDA के कुछ अधिकारियों ने 'सूचना के अधिकार' को 'सूचना छुपाने का अधिकार' समझ लिया है...📑...@rtiindia वैसे साफ-सुथरी कार्यशैली वाले उपाध्यक्ष के नीचे आखिर ये 'टालमटोल' वाली यूनिट कैसे फल-फूल रही..🤔 जनसूचना के नाम पर अधूरा जवाब देना अधिकारियों की कोई मजबूरी है या..दबंग बिल्डरों के प्रति कोई अतिविशिष्ट 'वफादारी ' ? #RTI पर (जोन 5) के जोनल अफसर व नक्शा विभाग के अभियंताओं का 'ऊल-जुलूल' रवैया उपाध्यक्ष महोदय के साथ विभाग की छवि को ही धूमिल कर रहा है..वैसे सीधी जानकारी देने में इतनी घबराहट क्यों ? क्या जब तक मामला अखबार की सुर्खियां न बने...तब तक सच फाइलों में ही दबा रहे..🤔 या क्या कहीं..ग्रीन बेल्ट 🌿 व सेटबैक मानकों में कोई 'बड़ा खेल' तो नहीं हुआ ? ..उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच 🔍 का विषय..🙄..@NGTribunal जनता को जवाब चाहिए..बहाने नहीं..श्रीमान..@LkoDevAuthority @InfoDeptUP संज्ञानार्थ @CMOfficeUP @ChiefSecyUP @LucknowDivision #RTIAct #Corruption
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Vivek Sharma
Vivek Sharma@Lko_VivekSharma·
सावधान! यह किसी खंडहर की नहीं..@LkoDevAuthority की अर्धनिर्मित योजना 'सृष्टि अपार्टमेंट' के बेसमेंट की छत है। घटिया निर्माण के कारण सीमेंट कंक्रीट उखड़ रहा..जिससे बिल्डिंग स्ट्रक्चर और आवंटियों की सुरक्षा खतरे में ही है। वर्षों से की जा रही शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अभियंता टालू नीति अपनाते हुए बने हैं..लापरवाह। किसी बड़े हादसे से पहले सुधार किया जाना ही हितकारी होगा श्रीमान...@LucknowDivision @AdminLKO संज्ञानार्थ @CMOfficeUP @InfoDeptUP #LDA #SafetyFirst
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BJP Delhi
BJP Delhi@BJP4Delhi·
झूठ बोले कौवा काटे 👇 आज तक सिर्फ सुना था, आज देख भी लिया कौवे ने झूठे को काटा !
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Agra Traffic Police
Agra Traffic Police@Agratraffic·
परीक्षाओं एवं त्योहारों को देखते हुए आज #DCPT के मार्गदर्शन में #ACPT द्वारा समस्त TI/TSI एवं रूट मार्शल की मीटिंग की गई। इस दौरान #RTC_अभियान को गति देने व यातायात प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। @uptrafficpolice @agrapolice
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Sumi👉
Sumi👉@Sumi_s11·
सिर्फ एक महीने पहले हमने LG कंपनी का फ्रिज लिया था इसकी कीमत 14500 थी और जब लगाया तो यह बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन पिछले दो दिनों से यह बिल्कुल भी ठंडा नहीं हो रहा फ्रिज के अंदर लाइट है फिर भी ठंडा नहीं हो रहा । मिस्त्री से बात की तो बोल रहा है इसका कंप्रेसर जाम हो गया सही करने के लिए ₹5000 लगेंगे ! कंपनी वालों को मैंने कॉल किया तो उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा है अब बताओ क्या किया जाए सिर्फ एक महीने पहले फ्रिज लिया था और अब ₹5000 का खर्चा आ गया
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PAPA- Progressive Association of Parents Awareness
स्याही सिर्फ कॉपियों पर नहीं, व्यवस्था के चेहरे पर भी दिख रही है. #बागपत से आई यह खबर बेहद चिंताजनक है. यदि बोर्ड परीक्षाओं में खुलेआम नकल, सौदेबाज़ी और संगठित खेल के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह सिर्फ परीक्षा प्रणाली पर नहीं, शिक्षा की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न है. मेहनत करने वाले छात्रों के साथ इससे बड़ा अन्याय क्या होगा कि कोई “व्यवस्था” के सहारे परिणाम खरीदने की कोशिश करे. नकल केवल नियम उल्लंघन नहीं, यह प्रतिभा के खिलाफ अपराध है. जब परीक्षा ईमानदारी की जगह नेटवर्क और नोटों पर टिकने लगे, तो डिग्रियां तो बनती हैं, ज्ञान नहीं. ऐसे हालात युवाओं के भविष्य और संस्थाओं की साख दोनों को चोट पहुंचाते हैं. प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि इस प्रकार के आरोपों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए. यदि कहीं संगठित नकल तंत्र सक्रिय है तो दोषियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई हो, ताकि ईमानदार छात्रों का विश्वास बचा रहे. शिक्षा में सुधार केवल नई नीतियों से नहीं, परीक्षा की पवित्रता बचाने से भी आता है. अगर परिणाम “स्याही” नहीं, “सिस्टम” लिखने लगे, तो समाज को सचेत होना पड़ेगा. सवाल यह है, हम बच्चों को परिश्रम का मूल्य सिखा रहे हैं या शॉर्टकट का? यही तय करेगा कि आने वाली पीढ़ी कैसी बनेगी. दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) @UPGovt @UPBoardPryagraj @EduMinOfIndia @BSA_Baghpat @CMOfficeUP #Baghpat #ExamIntegrity #StopCheating #EducationJustice #papango
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PAPA- Progressive Association of Parents Awareness
साहब… समय निकल रहा है, किताबें कब मिलेंगी? #आगरा की यह खबर केवल पुस्तकों की देरी नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी दिखाती है. नया सत्र शुरू हुए हफ्ते बीत गए, लेकिन अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के हजारों बच्चे अब भी किताबों की प्रतीक्षा में हैं. शिक्षा का अधिकार सिर्फ दाखिले से पूरा नहीं होता, पाठ्यपुस्तक भी उसका बुनियादी हिस्सा है. जब एक तरफ परिषदीय विद्यालयों में किताबें पहुँच रही हों और दूसरी तरफ सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चे वंचित रह जाएँ, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, अवसरों में असमानता है. शिक्षा में भेदभाव संसाधनों से शुरू होता है और भविष्य तक असर डालता है. बिना किताबों के कक्षा चलना वैसा ही है जैसे बिना औज़ार के निर्माण. बच्चों का समय लौटकर नहीं आता. जो पाठ आज छूटा, उसकी भरपाई सिर्फ आश्वासन से नहीं होगी. प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों की समयबद्ध उपलब्धता सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. बच्चों के बीच संसाधनों का असंतुलन शिक्षा न्याय के विरुद्ध है. संबंधित विभाग को तत्काल सभी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पुस्तक वितरण सुनिश्चित करना चाहिए. सवाल किताबों का ही नहीं, नीति की प्राथमिकताओं का भी है. अगर सरकारी व्यवस्था बच्चों तक समय पर किताब नहीं पहुँचा पा रही, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए. शिक्षा इंतज़ार पर नहीं चल सकती. दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) @UPGovt @basicshiksha_up @EduMinOfIndia @AgraDM @CMOfficeUP #Agra @UPBasicShiksha #TextbookCrisis #RightToEducation #SchoolEducation @CommissionerAgr @OfficeOfDMAgra #papango
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