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Dev Deep Singh
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Dev Deep Singh
@Devdeepsingh3
सनातन धर्म क्षत्रिय
Jaipur, India Katılım Şubat 2016
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देश के प्रधानमंत्री @narendramodi की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, आप पहले ही देश का 3.48 लाख करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं को आधार से लिंक कर बचा चुके हैं, आप देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान हैं, आप भारतवर्ष की पूँजी हैं, आपकी सुरक्षा पर देश के भीतरी और बाहरी दुश्मनों की पैनी नज़र है, देश के नागरिक अपने प्रयासों ईधन की खपत कम कर लेगें, ग़ैर ज़रूरी विदेशी सामान की ख़रीदी कम कर लेगे, ग़ैर ज़रूरी विदेश यात्रा नहीं करेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री की सुरक्षा, सम्मान और गौरव के साथ कोई समझौता ठीक नहीं हैं.
#Savefuel
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@pkmdli @uday111234 @AnilYadavmedia1 Khesari or pawan dono chutiye hai.. Bihar state tbhi to pichhe hai.
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@uday111234 @AnilYadavmedia1 भाई एक्टर ही है न नेता तो नहीं?
रही बात पसंद की तो उनके राज्य में उनको अगर पसंद किया जाता है तो बिहार में भी खेसारी और पवन को पसंद किया जाता है ये सच है।
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तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोजेफ़ विजय ने
अपने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को अपना नया OSD नियुक्त किया था,
लेकिन इस नियुक्ति के खिलाफ पूरा तमिलनाडु उठ खड़ा हुआ,
और 24 घंटे के अंदर पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को उनके पद से हटा दिया गया,
तमिलनाडु साक्षर राज्य है,
और ज्योतिष विद्या को वो लोग पाखंड मानते हैं,
तमिलनाडु पेरियारवादियों का राज्य है,
पेरियार जीवन भर ब्राम्हणवाद के खिलाफ लड़ते रहे,

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जब तक कांग्रेस की सरकार थी 2014 तक ,एक CAG नामक सरकारी संस्थान था जो सरकार के हर मामले की ऑडिट कर के बताता था इसमें इतना देश को इतना घाटा हो जायेगा उस संस्थान का प्रमुख हर दिन अखबार, न्यूज चैनल पर छाया रहता था
फिर सरकार बदली वो संस्थान अब कही गायब सा ही हो गया है,और अब तो गूगल सर्च बिना आप ये नहीं बता सकते उस संस्थान का प्रमुख कौन है
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'पत्नी को छठी बार कैंसर हो गया, सर्जरी से बदला चेहरा', 'द फैमिली मैन' एक्टर शारिब हाशमी का दर्द
शारिब हाशमी ने पत्नी नसरीन हाशमी की कैंसर से जंग पर भावुक खुलासा किया है. नसरीन 5 बार कैंसर को मात दे चुकी हैं, लेकिन अब बीमारी छठी बार लौट आई है और इलाज जारी है.
पूरी खबर intdy.in/1vjq9a
#SharibHashmi #NasreenHashmi #CancerBattle

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@RajatKapil11 @Gobhiji3 Kuch bhi ho road pr jana hi padega..
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@Gobhiji3 जब पिछली बार प्रदर्शन किया था तो बच्चों के अभिभावकों और मीडिया ने ही राजनीति ना करने का राग अलाप दिया था। फिर मीडिया में बयान देते हैं कि हमें सरकार पर भरोसा है। कौन सड़क पर आएगा जनता के लिए।
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NEET पेपर लीक होने के बावजूद किसी भी विपक्ष ने सड़कों पर किसी भी तरह का धरना प्रदर्शन नहीं किया है
यही अगर भाजपा होती तो हर चौक चौराहे पर प्रदर्शन हो रहे होते
सरकार के इस्तीफा की मांग हो रही होती
लेकिन हमारे विपक्ष वाले तो AC रूम छोड़कर कहीं बाहर जाने को ही नहीं तैयार है
केवल ट्वीट कर दिया उसी से इनका काम खत्म हो गया
और यह लोग फिर बोलते हैं कि ईवीएम हैक हो गई
ईवीएम हैक नहीं हुई है
आप लोगों ने जनता से कनेक्ट होने का हुनर खत्म कर दिया है
जब तक आप जनता के मुद्दों पर जनता के बीच जाकर नहीं बोलेंगे तब तक लोग आपको सीरियसली नहीं लेंगे
अगर सत्ता में आना है तो आपको सड़कों पर उतरना ही होगा
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7 सालों में 70 पेपर लीक - करोड़ों युवाओं का टूटा हुआ भरोसा है।
चाहे कोई भी सरकार रही हो,
पेपर लीक अब आम बात है…
क्योंकि कई एजेंसियों और आयोगों का उद्देश्य अब निष्पक्ष परीक्षा से ज्यादा कमाई होता जा रहा है।
विडंबना देखिए, 2025-26 का डेटा छोड़ भी दें,
उससे पहले ही NTA ने 5 सालों में लगभग 500 करोड़ का profit बनाया।
दुनिया के कई देश education को free और subsidized बना रहे हैं…
और यहाँ हमारी परीक्षा एजेंसियाँ ही profit model बनती जा रही हैं।
जब शिक्षा और भर्ती व्यवस्था कमाई का माध्यम बन गई हो,
तो खाक होगा देश विकसित।
#paperleak #neet2026
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ये बात RSS नेता ने कही है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत की खिड़की बंद नहीं की जानी चाहिए।
उनकी इस भावना का सम्मान होना चाहिए
वैसे किसी कांग्रेस नेता ने ये बात कही होती तो अभी तक गोदी मीडिया उन्हें देशद्रोही करार दे चुका होता… टीवी सेटों पर आग निकल रही होती 😬
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh
Big News RSS leader Hosabale advocates keeping the window of dialogue with Pakistan open बड़ी ख़बर RSS नेता होसबोले ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की खिड़की खुली रखने की वकालत की
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वित्त मंत्री से महंगाई नहीं संभल रही,
गृह मंत्री से मणिपुर नहीं संभल रहा…
शिक्षा मंत्री से पेपर लीक नहीं संभला,
पर्यावरण मंत्री से प्रदूषण नहीं संभला…
रेल मंत्री से रेल हादसे नहीं संभलते,
कृषि मंत्री से किसानों की समस्या नहीं संभलती…
स्वास्थ्य मंत्री से अस्पताल नहीं संभलते,
खाद्य विभाग से मिलावट नहीं संभल रही…
और फिर कहा जाता है
देश सही हाथों में है…
#neet2026
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देश की आर्थिक स्थिति कोई बहुत गंभीर है।
जिस तरह से अपने काफिले में गाड़ियां कम करने मेट्रो ट्रेन से चलने की घोषणाएं हो रही हैं, सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई, पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने वाले हैं यह सब एक साथ होना बहुत ही असामान्य है।
प्रधानमंत्री मोदी को सामने आकर बताना चाहिए कि क्या हुआ?
देश कैसे आर्थिक संकट में फंस गया?
यह कितना बड़ा है?
क्या सरकारी बैंक सुरक्षित हैं?
जनता में बहुत घबराहट है।
छुपाने से, गोदी मीडिया के जरिए आधी अधूरी अप्रमाणिक खबरें पहुंचने से अफवाहें फैलेंगी।
पहले ही खूब अफवाहें फैला कर लोगों को उस पर विश्वास करना सिखा दिया है।
अब ऐसे वास्तविक संकट काल में वही अफवाहें उल्टी मार करेंगी।
मोदी के पास यह खुद का टेस्ट लेने का सबसे अच्छा मौका है।
आकर सब सच्चाई बता दें और जनता की मदद मांगे।
जनता में विश्वास अगर बचा होगा तो वह सहयोग करेगी!
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प्रधानमंत्री मोदी जी नें फ़िर एक आह्वान किया है!
घर से पढ़िए, घर से काम करिए, विदेश मत जाइए, गाड़ी मत चलाइए, तेल मत खाइए, सोना मत खरीदिए…
लगता है ये भी कुछ नोटबंदी जैसा ही है!
अब इस बार मोदी जी जनता को किस लाईन में खड़ा करेंगे, या थाली कब बजवायेंगे, ये घोषणा वो अपनी विदेश यात्रा के बाद करेंगे!!
तो चूँकि बहुत जल्द मोदी जी फ़िर से “देशहित” में “आम जनता” से "क़ुर्बानी" माँगेगे,
इसलिए पिछली क़ुर्बानी, यानि नोटबंदी का थोड़ा बहुत हिसाब कर लेते हैं।
मोदी जी नें कहा था, नोटबंदी से नक़ली नोटों का प्रचलन बंद हो जाएगा। क्या ऐसा हुआ?
मोदी जी ने कहा था, नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। क्या ऐसा हुआ?
मोदी जी नें कहा था, नोटबंदी से रुपयों की जगह डिजिटल लेनदेन होगा। क्या ऐसा हुआ?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए फ़िल्म धुरंधर 2 नहीं, मोदी सरकार की ख़ुद की रिपोर्ट देखिए।
2016, यानि नोटबंदी वाले साल में 20 करोड़ से भी कम नक़ली नोट पकड़े गए थे।
और ये रक़म इतनी "बड़ी" थी कि मोदी जी नें तुरंत नोटबंदी की घोषणा कर दी, रातो रात जनता को ATM की लाइन में खड़ा कर दिया!
पर अगले सालों में, यानि 2017 से 2024 तक, हर साल 20 करोड़ से ज़्यादा नक़ली नोट पकड़े गए, अब तक कुल ₹638 करोड़ के नक़ली नोट पकड़े गए हैं।
यानि 2016 के मुक़ाबले 2020 में पाँच गुना, 2022 में बीस गुना, और 2024 में तीन गुना ज़्यादा नक़ली नोट पकड़े गए!!
मतलब, बजाय नक़ली नोट कम होने को, नोटबंदी के बाद इनका प्रचलन बढ़ गया…
पर मोदी जी ने फिर पलट कर कभी नहीं बताया कि वो अब नक़ली नोटों के प्रवाह को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं!!
ख़ैर, कुतर्की भक्त शायद ये तर्क देंगे कि नोटबंदी के बाद मोदी जी नें ऐसी नई नोट छपवाई, जिसे पहचानना और पकड़ना ज़्यादा आसान हो गया है, इसलिए इतने सारे नक़ली नोट बरामद होने लगे!
तो भाई, कुल पकड़े गए नए नक़ली नोटों में 63% नोट ₹500 और ₹100 के हैं। यानि छोटे डिनॉमिनेशन के नए नक़ली नोट भी बड़ी तादाद में प्रचलित हैं!
तो न सिर्फ़ नक़ली नोट पहचानना, बल्कि छोटे डिनॉमिनेशन के भी नक़ली नोट छापना अब और आसान हो गया है...
इतना आसान कि ख़ुद गुजरात में, नोटबंदी के बाद से अब तक, आधे से ज़्यादा, यानि ₹356 करोड़ के नक़ली नोट पकड़े गए हैं!
बाक़ी रही बात भ्रष्टाचार रोकने की, तो अपना कोई काम कराने के लिए किसी सरकारी दफ़्तर का एक चक्कर लगा लीजिए,
और ख़ुद तय कर लीजिए कि रिश्वत अब भी कितनी, किसको और कैसे देनी पड़ती है!
और हाँ, अगर आपको लगता है कि काग़ज़ के नोटों की जगह डिजिटल ट्रांजेक्शन नें ली है, जो की मोदी जी का एक और दावा था,
तो यहाँ भी आपका अंदाज़ा ग़लत है!
RBI का डेटा कहता है कि नोटबंदी की पूर्व संध्या पर जहाँ ₹17.74 लाख करोड़ के नोट सर्कुलेशन में थे,
वहीं अब ₹42.12 लाख करोड़, यानि 137% अधिक नोट हमारे बीच घूम रहे हैं!!
और हों भी क्यों न, आख़िर पेटीएम और गूगल पे पर थोड़े न रिश्वत लिया या दिया जाता है!!
तो नेट नेट ये है कि 2016 में ग़ज़ब टोपी पहनाया था मोदी जी नें नोटबंदी के नाम पर!
अब चिंता इस बात कि है कि खाड़ी की जंग का हवाला देकर इस बार क्या छीनेंगे मोदी जी, अपने प्यारे भाइयों और बहनों से…
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ऐसा नहीं है सिर्फ युद्ध के कारण हमारी इकॉनमी प्रभावित हुई है! हमारा शेयर बाजार लगभग दो सालों से कमजोर है! डॉलर के मुकाबले रुपैया बिना युद्द और कच्चे तेल में लगी आग के भी कमजोर हो रहा था!
पिछले कई दिनों से तमाम एक्सपर्ट दबी जुबान से इस बारे में बात कर रहे थे! लेकिन "वाह वाह" गैंग हमेशा की तरह एक सुझाव/आलोचना सुनने को कभी तैयार नहीं होता है!
अब युद्ध ने आर्थिक सूरत को और बीमार कर दिया जहाँ अब देश के लोगों को और कई "कड़वी गोली" कहानी होगी!
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