
DevilGSingh
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बिजली के इम्तिहान में एक और "माननीय जी" आ ही गए..मैदान में ! @UPPCLLKO लखनऊ पूर्वी के विधायक @opsrivastavabjp जी ने ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा @aksharmaBharat जी को चिट्ठी लिखकर बिजली संकट पर 'हाई-वोल्टेज' चिंता जता ही दी ! जब सरकार के अपने ही विधायक को.. गुहार लगानी पड़े..तो समझो सिस्टम सचमुच 'शॉर्ट-सर्किट' हो ही चुका है..😉..@PMOIndia @CMOfficeUP @MinOfPower @EMofficeUP #Lucknowpowercrisis #UttarPradesh #PowerCut





@dharmendra22368 @navalkant @myogioffice महोदय, बिजली से संबंधित समस्याओं के लिए कृपया अपना मोबाइल नंबर, पता और संबंधित सबस्टेशन का नाम (DM) में बताएं ताकि हम आपसे संपर्क कर आपकी समस्या का उचित समाधान कर सकें। #1912MVVNL220526










Today’s Hindustan Hindi सड़क पर नमाज़ क्यों नहीं! सड़क पर नमाज़ को लेकर बहस जारी है। कुछ मुसलमान तर्क कर रहे हैं कि कांवड़िये भी सड़क रोक कर चलते हैं वह भी फुल डीजे के साथ। जगराता भी होता है, वहाँ भी कई नियम टूटते हैं, परंतु पुलिस उनपर कृपा बरसाती है। अन्य धर्मों की शोभा-यात्राएँ तो सामान्य बात है, जिसके चलते घंटों ट्रैफिक रुका रहता है। ऐसे में चंद मिनटों के लिए नमाज़ क्यों नहीं पढ़ सकते? सड़क पर नमाज़ नहीं पढ़ सकते, क्योंकि इस्लामी शिक्षा में चलती रास्ते पर नमाज़ का न तो कोई औचित्य है, न ही इसमें पुण्य है। यह इस्लामी इबादत और सामाजिक मूल्यों - अख़लाक़ और हुक़ूक़ुल-इबाद - दोनों के विरुद्ध है। रास्ते रोकना इस्लाम में मना है जिनके बताए अनुसार नमाज़ पढ़ी जाती है यानी पैग़म्बर मुहम्मद स॰, उन्होंने जिन सात जगहों पर नमाज़ पढ़ने को नाजायज़ बताया है, उसमें रास्ता शामिल है [हदीस; तिरमिज़ी 346, इब्ने माजा 746]। इस्लाम में रास्तों को खाली और चौड़ा रखने के साफ़ और विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। जिस युग में घोड़े और ऊँट सवारी थे, उस समय पैग़म्बर मोहम्मद स॰ ने रास्ते की चौड़ाई सात हाथ अर्थात् लगभग दस फ़ीट रखने का आदेश दिया [हदीस; सहीह मुस्लिम 4139]। इसी प्रकार नबी स॰ ने रास्ते से काँटा हटाने या उसे साफ़ रखने को “सदक़ा” बताया है [हदीस; मुस्लिम 2618] और दूसरी जगह इसे ईमान की 70 से अधिक शाखाओं में से एक बताया है [हदीस; बुख़ारी व मुस्लिम]। मजबूरी अलग है, आदत अलग क़ुरान का उसूल है 'ला युकल्लिफ़ुल्लाहु नफ़्सन इल्ला वुसअहा' - अल्लाह किसी पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता [क़ुरान 2:286]। अगर वाक़ई मस्जिद न मिले, वक़्त निकल रहा हो, और कोई और जगह न हो, तो इस्लाम में खुले में नमाज़ जायज़ है। मगर जानबूझ कर हर जुमे को सड़क चुनना मजबूरी नहीं, आदत और दिखावा है। इसे बेशर्मी कहें या हठधर्मी कि आज हमारी बस्तियों में सड़कों पर कूड़ा-करकट डालने और दुकानों तथा घरों के सामने क़ब्ज़ा करने की परंपरा इतनी हावी है कि कुछ नहीं तो नमाज़ और मस्जिद के नाम पर ही सड़क घेर ली जाती है। इस्लामी शिक्षा के अनुसार नमाज़, रोज़ा, हज, दान-पुण्य सब ईश्वर के लिए की जाती है। अगर न कर पाएँ तो ईश्वर से क्षमा-प्रार्थी हों और दयालु ईश्वर माफ़ कर देगा। परंतु सामाजिक और जन-व्यवहार के कार्यों में अगर त्रुटि रह गई तो उसे ईश्वर ने अपने द्वारा माफ़ी की परिधि से बाहर रखा है। इस्लामी दिशानिर्देशों का तीन-चौथाई भाग आपसी अधिकार और सामाजिक आचरण पर आधारित है, जिसमें धोखा देना, गाली देना, लूट-मार करना, हानि पहुँचाना मना है। अगर ऐसा कुछ भी किया तो उसकी माफ़ी केवल पीड़ित पक्ष ही दे सकता है। सहीह मुस्लिम में है: नबी ने पूछा 'क्या तुम जानते हो निर्धन कौन है?' साथियों ने कहा जिसके पास दिरहम-दीनार न हो। आप ने कहा: 'मेरी उम्मत का निर्धन वो है जो क़यामत में नमाज़, रोज़ा, ज़कात लेकर आएगा, मगर उसने किसी को गाली दी होगी, किसी का माल खाया होगा, किसी का ख़ून बहाया होगा। फिर उसके पुण्य उन लोगों को दे दिए जाएँगे'। रास्ता रोकना भी लोगों का हक़ मारना है। ऐसे में अगर नमाज़ न पढ़ी तो हो सकता है कि ईश्वर माफ़ कर दे, परंतु रास्ता रोक कर पढ़ने से किसी को तकलीफ़ पहुँची तो कोई क्षमा नहीं। क़ुरान के अनुसार ऐसी नमाज़ियों पर लानत भेजी गई है और उनकी नमाज़ को दिखावा कहा गया है जो लोगों का हक़ तो अदा नहीं करते, सामाजिकता नहीं निभाते [क़ुरान; सूरह माऊन 107:4-7]। पड़ोसी का हक़ सबसे बड़ा हक़ है इस्लाम ने पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करने का आदेश दिया है। क़ुरान में जहां माता-पिता, रिश्तेदार, यतीम, निर्धन के साथ अच्छा व्यवहार करने को कहा गया, वहीं पास वाले पड़ोसी और दूर वाले पड़ोसी दोनों को रेखांकित कर अच्छे व्यवहार का आदेश दिया गया है [क़ुरान; सूरह निसा 4:36]। पैग़म्बर मुहम्मद स॰ ने यहाँ तक कहा है कि पड़ोसी को हानि पहुँचाने वाला मोमिन नहीं हो सकता [हदीस; सहीह बुख़ारी 6016] यानी उसका ईमान ही संदेह के दायरे में है। एक और जगह नबी स॰ ने कहा कि मुझे पड़ोसियों के बारे में इतना उपदेश दिया गया कि मैं समझा कि अब शायद विरासत में भी उनका हिस्सा होगा [हदीस; बुख़ारी]। रास्ते पर नमाज़ पढ़कर हम खुल्लम-खुल्ला क़ुरान और हदीस की शिक्षा को नकार कर पड़ोसियों - पास के मुहल्ले वाले दुकानदार और दूर वाले राहगीर - को तकलीफ़ पहुंचा रहे हैं। हल व्यवस्था में है, अराजकता में नहीं एक मस्जिद के प्रांगण में नमाज़ की कई जमातें हो सकती हैं। संगठन और व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है। इससे सभ्यता और व्यवहारिकता तो जीवन में आएगी ही, साथी नमाज़ियों का कुशलक्षेम जानना कहीं अधिक आसान होगी।… livehindustan.com/blog/hindustan…


चलो देर से ही आए..बस अब अपूर्ण कार्य..दुरुस्त जरूर कराएं -@LkoDevAuthority आखिरकार सोशल मीडिया पर प्रसारित खबर से विभागीय अफसरों की कुंभकर्णी नींद तो.. खुली! #LDA के विद्युत यांत्रिक विभाग के सहा. अभि.शिवा सिंह की अगुवाई में अभियंताओं की टीम के साथ शुक्रवार को ही 520फ्लैटों वाले सृष्टि अपार्टमेंट पहुंचकर निष्क्रिय पड़े व गायब हो चुके अग्निशमन यंत्रों और गल चुकी पाइप लाइनों की सुध ले ही ली..😊 चलो अच्छा है, अब तक जो सुरक्षा सिर्फ 'दुआओं और झाड़-फूंक' के भरोसे चल रही थी..शायद उसे अब असली 'यांत्रिक' देखभाल मिल जाए। जनहित में आपसे व्यक्तिगत निवेदन..कागजी खानापूर्ति बंद हो.. प्रत्येक अपार्टमेंट का ऑन-ग्राउंड 'Safety Audit' और समय-समय पर अपार्टमेंटों में मॉक ड्रिल अनिवार्य की जाए। साथ ही अव्यवस्थाओं पर..जिम्मेदार विभागीय अभियंताओं की जवाबदेही अवश्य ही तय हो..@CMOfficeUP @LucknowDivision @AdminLKO @InfoDeptUP





