SHANKAR DUTT RUWALI

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@DuttRuwali

Katılım Ağustos 2021
116 Takip Edilen59 Takipçiler
SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@PremShuklaBJP वक्फ बोर्ड में घोटाले की बात सुनकर ही गैर एनडीए राजनीतिक दलों और एक बुद्धिजीवी वर्ग की जीभ तालू से चिपक जाएगी और कानों में शीशा भर जाएग। एक महीने तक राम मंदिर चोरी पर लगतार बहस कराने वाले न्यूज चैनल अपना स्टूडियो ही इरान में सिफ्ट कर देंगे। लगता है सब हिस्सेदार हैं।
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Prem Shukla -प्रेम शुक्ल
वक्फ बोर्ड में गड़बड़झाले के जो गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष और गहन जांच होना अत्यंत आवश्यक है। आरोप लगाने वाले व्यक्ति को "हिला हुआ" कहकर इन गंभीर आरोपों से बचा नहीं जा सकता...
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@iamnarendranath अगर सोनम वांगचुक अनशन नहीं तोड़ते तो (विरोध या सहनुभूति जो भी उचित लग) केजरीवाल और अखिलेश को अनशन पर बैठ जाना चाहिए।
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Narendra Nath Mishra
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath·
अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की । उम्मीद करते हैं केंद्र सरकार जिद छोड़कर 16 दिन से चल रहे इस अनशन को समाप्त करने के लिए संवाद करेगी!
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@ShivamSanghi12 गलत कह रहा है भाई तेरी बुद्धि ही इतनी है। सच्चाई यह है कि ताहिर नाम था इसलिए उसने मार दिया। कपिल होता तो कभी मारता ही नही।
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Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar)
Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar)@ShivamSanghi12·
उसका नाम ताहिर था इसलिए फँस गया कपिल होता तो वो भी बरी हो जाता- इमरान मसूद काँग्रेस 53 लोगों की जान गई दिल्ली दंगे में 51 चालू आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा को लगे ताहिर हुसैन की छत से हमला हुआ पेट्रोल बम चले लेकिन उसको काँग्रेस बचाना चाहती है अदालत के फैसले से भी ऊपर मुस्लिम है काँग्रेस के लिए
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@umashankarsingh मफलर बहुत जल्दी याद आ गई। पर टी शर्ट तो अब तक याद नहीं आयी। बहुत चूजी लगते हो भाई।
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SHANKAR DUTT RUWALI retweetledi
Rubika Liyaquat
Rubika Liyaquat@RubikaLiyaquat·
ये क़िस्सा आप में से कितने लोगों ने सुना है! UPA में क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद के किए का ज़िम्मा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को को ये कहकर उठाना पड़ गया था कि “ऐसा कहने से पहले में आत्महत्या कर लूँगा!” ऐसा पहली बार हुआ था कि चुनाव आयोग को राष्ट्रपति को ख़त लिखना पड़ गया था!
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@umashankarsingh इण्डी गठबंधन वाले कहेंगे कि बहुत ही कमजोर सरकार है। वह सरकार में होते तो 10 इराकियों के सिर काटकर राजमाता के चरणों मे रख दिए होते।
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
ओमान की खाड़ी में व्यापारिक जहाज़ पर ईरान के हमले में एक भारतीय के मारे जाने के विरोध में भारत ने ईरान के राजनयिक को तलब किया
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh

बड़ी ख़बर ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक जाज पर हमले के बाद एक भारतीय लापता, अब तक 10 को बचाया गया

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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@AadeshRawal यह विद्वान लोग विपक्ष को पहले ही हारा हुवा घोषित कर देते हैं। सामान्य समझ की बात है कि जब सीटें बढेंगी तो वह सभी के लिए बढेंगी। पक्ष और विपक्ष को बराबर अवसर मिलेगा। पप्पू पर से भरोसा उठ ही गया लगता है।
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Aadesh Rawal
Aadesh Rawal@AadeshRawal·
देश की राजनीति बदलने वाली है।बंगाल चुनाव से पहले सरकार संविधान संशोधन विधेयक हार गई थी।केजरीवाल,ममता और ठाकरे के सांसद तोड़े गए।परिसीमन की तैयारी हो चुकी है।संख्या बल भी पूरा है।फिर आएगा संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा की सीटें बढ़ जाएगी।विपक्ष के सामने एक और चुनौती आने वाली है !
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@ashutosh83B Rahul's way to solve the problems is better than others. Keep your fingers on your ears ald run away to unknown countries. Leave all the problems to second high command.
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SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@umashankarsingh हिन्दू आस्था का मजाक उड़ाने का कोई भी अवसर गंवाना नहीं चाहिए। ऐसा करने के बाद कोई व्यक्ति इण्डी गठबंधन का खास माना जाता है।उसकी एक आइडेंटिटी बन जाता है।वह मंच पर दिखाई देने लगता है।गिफ्ट पैकेट भी फूलने लगता है।
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
हमारे फ़्रिज के डीप फ़्रीज़र में इतना तसला-कटोरा भरा रहता है कि ‘शिव लिंग’ अवतरित भी होना चाहें तो नहीं हो सकते! 😭 आई एम सॉरी शिव जी। विल कीप इट इम्पटी सून। 🙏
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह tweet media
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SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@Pankaj___Sharma जब कोई तथ्य हाथ नहीं आता है तो हाय हाय करने के अलावा कुछ बचता नहीं है। धैर्य बनाये रखने के लिए कभी कभी न्यायालय का रुख कर लेते हैं।वहां दो धुरंधर हमेशा तैनात रहते ही हैं।वह भी बेचारे आखिर में हाय हाय कर ही रह जाते हैं।
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Pankaj Sharma पंकज शर्मा
पिछले एक-डेढ़ दशक से हमारा समाज लगातार आर्तनादी होता जा रहा है। हर बात पर रोना ही उस का काम रह गया है। हाय-हाय नोटबंदी क्यों कर दी? हाय-हाय कोरोना काल में इतनी बदइंतज़ामी क्यों हुई? हाय-हाय धारा 370 क्यों हटा दी? हाय-हाय पुलवामा और पहलगाम कैसे हो गए? हाय-हाय मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण क्यों कर रहे हो? हाय-हाय निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्सीमन क्यों हो रहा है? हाय-हाय ‘एक देश-एक चुनाव’ की क्या ज़रूरत है? हाय-हाय ईरान पर ख़ामोश क्यों रहे? हाय-हाय पैट्रोल में एथेनाॅल क्यों मिला रहे हो? हाय-हाय भारत-पाक युद्ध रुकवाने का एक सौ बीस बार श्रेय लेने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने घुटने क्यों टेक दिए? मुंहतोड़ जवाब क्यों नहीं दिया? घिघियाते क्यों रहे? हाय-हाय प्रधानमंत्री जी के विदेश दौरों पर खर्च हुए अरबों रुपए का हमें फ़ायदा क्या मिला? हाय-हाय प्रधानमंत्री संवाददाता सम्मेलन क्यों नहीं करते हैं। हाय-हाय प्रधानमंत्री मैलोनी के लिए मैलोडी ले कर क्यों चले गए? हाय-हाय देश की सरकारी संपत्ति एक चेहेते धन्नासेठ को क्यों दी जा रही है? हाय-हाय इम्तहान के पर्चे लीक कैसे हो गए? हाय-हाय रामलला का दान कोई कैसे खा गया? हाय-हाय एक मुख्यमंत्री और उस के नाते-रिश्तेदारों ने इतनी ज़मीनें कैसे खरीद लीं? हाय-हाय आप ने ऐसा कैसे कह दिया कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है? हर वक़्त बस हाय-हाय हाय-हाय।
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@semeerc आप असहज महसूस करें,जनता असहज महसूस करे इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं हैं।राहुल गांधी के आसपास रहने वाले नेता,चमचे व चाटुकार उनसे हमेशा खुश रहते और राहुल को आभास दिला देते हैं जनता भी ऐसे ही खुश है।राहुल भी खुश हो जाते हैं ।
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sameer chougaonkar
sameer chougaonkar@semeerc·
राहुल गांधी 20 दिनों के विदेश दौरे के बाद भारत वापस आ गए हैं।राहुल कहा थे,मुझे यह जानने में जरा भी दिलचस्पी नहीं है।मेरी दिलचस्पी यह जानने में हमेशा रही है कि कांग्रेस के संकट के समय राहुल ने कांग्रेस के लिए क्या किया,या मोदी से लड़ने के लिए राहुल ख़ुद को ओर कांग्रेस को कैसे तैयार कर रहे हैं? राहुल की राजनीति पर विचार करता हूँ तो मैं अक्सर निराशा महसूस करता हूँ।मेरा निराश होना मायने नहीं रखता।कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और प्रवक्ता राहुल गांधी की राजनीति से असहज महसूस करने लगे ओर राहुल की राजनीति पर बात करने से बचने लगे तो यह कांग्रेस के लिए गंभीर संकट का लक्षण है। क्यो राहुल गांधी हर बार वहाँ अनुपस्थित रहते हैं जहाँ उनका उपस्थित होना जरूरी था। राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का पर्चा कांग्रेस की राजनीति के चलते ख़ारिज हो जाता है,झारखंड में कांग्रेस के उम्मीदवार को हराकर निर्दलीय परिमल नथवानी जीत जाते हैं।राहुल इसे सहजता से स्वीकार कर लेते हैं। पंजाब जैसे अति महत्वपूर्ण चुनावी राज्य में कांग्रेस टूटने के कगार पर है ओर राहुल इस सबसे परे विदेश में छुट्टियाँ मना रहे थे।राम मंदिर जैसा मामला और मसाला हाथ में आने के बाद भी राहुल ने इस पर चुप्पी साध ली।मोदी के मंत्री का पूरा स्टाफ हटा दिया गया,राहुल इस मुद्दे पर मोदी को घेरना तो दूर,एक शब्द नहीं बोले। राहुल क्या चाहते हैं,कोई नहीं समझ सकता।देश की जनता राहुल से क्या चाहती है,राहुल गांधी यह भी नहीं समझना चाहते।राहुल की राजनीतिक समझ,सबके समझ से परे है । यह राहुल की राजनीति ही है जिसके कारण मोदी-शाह की भाजपा को राहुल के नेतृत्व वाली कांग्रेस इतनी सुविधाजनक प्रतिद्वंद्वी नजर आती है। एक पत्रकार, एक नागरिक और एक मतदाता के रूप में मैं राहुल गांधी से उम्मीद करता हूँ कि एक सक्षम विपक्ष और बेहतर विकल्प के तौर पर ख़ुद को पेश करें। लोकतंत्र में जनता के पास हमेशा मजबूत विकल्प होना चाहिए।विपक्ष विहीन सरकार और विकल्प विहीन लोकतंत्र किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे बड़ा संकट होता है।फ़िलहाल देश का लोकतंत्र इसी संकट से गुज़र रहा है।
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@Pankaj___Sharma हिन्दुस्तान संस्कार व मान्यताओं का देश है। विवाह तय होने से पहले दोनों पक्षों के खानदान को देखा जाता है।कांग्रेस के दौर मंत्री बनाने के लिए योग्यता व ईमानदारी की जगह "परिवार" से नजदीकी और चापलूसी पर जोर था। अब ऐसा नहीं है। योगी जी पर जनता का अटूट विश्वास है। यही फर्क है।
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Pankaj Sharma पंकज शर्मा
बड़ा अजीब देश है। यह तो चाहता है कि अगर किसी केंद्रीय मंत्री पर स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले का आरोप लगे तो वह इस्तीफ़ा दे दे, अगर किसी की पत्नी पर क्रिकेट टीम खरीदी के मामले में आरोप लगें तो वह ख़ुद मंत्रिमंडल से विदा ले ले, अगर किसी के भांजे पर रिश्वत लेने के आरोप लगें तो उसे मंत्रिमंडल से निकाल दिया जाए, अगर किसी पर कोयला आवंटन घोटाले की जांच रपट में हस्तक्षेप करने का आरोप लगे तो उसे मंत्री पद से हटा दिया जाए। किसी के बेटे पर तेल-वाउचर लेने के आरोप हों तो पिता को सरकार से विदा कर दिया जाए, किसी मुख्यमंत्री पर हाउसिंग घोटाला करने के आरोप हों तो उसे सियासी सूली पर लटका दिया जाए और यह सब आरोप लगते ही हो जाए, जांच-वांच बाद में होती रहे। मगर यह नया भारत है। यह क़ानून और नियमों से चलता है। यह ‘न खाने, न खाने देने’ के लिए संकल्पित है। इसलिए रामलला के दान में अरबों की हेराफेरी से ले कर अपने मुख्यमंत्री के ‘धरतीधर’ होने तक के मामलों में हबड़-तबड़ कार्रवाई करने के बजाय धैर्य से काम लेने की राह पर चलता है।
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@VinodAgnihotri7 हिन्दुस्तान में एक वर्ग ऐसा है ही जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए राम का नाम लेने से परहेज ही नही बल्कि घृणा का भाव भी दर्शाता है। एक बुद्धजीवियों का वर्ग भी ऐसा हो जो अपने आकाओं के डर से वैसा ही व्यवहार करता है। लेकिन राम मंदिर में हुई घटना के कारण वहसभी राम का नाम ले रहे हैं।
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विनोद अग्निहोत्री Vinod Agnihotri
कालनेमि रामभक्त था।पहले उसने रावण को समझाया।श्रीराम व हनुमान की महिमा बताई।जब रावण क्रोधित हुआ तो उसने रावण के हाथों मौत की बजाय भक्त शिरोमणि हनुमान जी के हाथों मरना पसंद किया।चढ़ावा चोरी प्रकरण में एक दूसरे को कालनेमि बताने वाले न रामकथा जानते हैं न ही उसका मर्म।
विनोद अग्निहोत्री Vinod Agnihotri tweet media
Lal Chandra Singh LC@lcsingh73

@VinodAgnihotri7 दोषी कैकेई-मंथरा को छोड़ेंगे नहीं। कालनेमियों-रावणों को जोड़ेंगे नहीं।। राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा॥ जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा॥ "उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥"

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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@UrmileshJ यह बड़ा दुर्भाग्य पूर्ण है कि इतना शक्तिशाली हाईकमान और लगभग उतना ही शक्तिशाली अनुभवी चमचा पत्रकारों की टोली भी इन संकटों को नहीं सुलझा पा रही है।
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urmilesh
urmilesh@UrmileshJ·
पंजाब में किसी पार्टी के पास उतने नेता नहीं, जितने कांग्रेस में हैं.5-6 तो हमेशा ही CM पोस्ट का दावा कर रहे होते हैं. लेकिन इस बार विचित्र स्थिति है. सारे बड़े नेता PCC Chief राजा वडिंग को हटाना चाहते हैं. पर दिल्ली बैठा हाईकमान वडिंग के साथ है! यही है, पंजाब का कांग्रेस संकट!
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@CJP_for_India किसने कहा अनशन पर बैठने को। किसके कहने पर बैठे थे। जिसने बैठाया था वह जिम्मेदार ह या यह खुद जिम्मेदार हैं । बहुत सौक चर्राया है नेता बनने का तो बनें।
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Cockroach Janta Party
Cockroach Janta Party@CJP_for_India·
गिर पड़े सोनम वांगचुक सर 🤯 पर सरकार में बैठे लोगों को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है 😳 क्या ही होगा इस देश का🥺🙏
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@Pankaj___Sharma कुछ अजनवी फालतू लोग बीजेपी के बारे में सोच सोच कर पतले हुये जा रहे हैं। जो कभी अपने मुंह से बीजेपी नाम भी लेना पसंद नहीं करते वह भी। करें भी क्या बेचारे। रात दिन जिसका नाम जपते हैं,आरती उतारते हैं वह गायब है। कोई खबर मिल नहीं रही है।
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Pankaj Sharma पंकज शर्मा
बारह साल में तक़रीबन दो सौ सांसद और विधायक दूसरे राजनीतिक दलों को छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं। हर चार दलबदलू सांसदों-विधायकों में से तीन से ज़्यादा को भाजपा ने सीधे अपनी गोद में बिठाया है और आधा-पौना ही अपना दल छोड़ने के बाद भाजपा के बजाय कहीं और गए हैं। भाजपा में शामिल हुए 68 प्रतिशत सांसद-विधायक पहले कांग्रेस में थे। तो जिन्हें इस बात पर ख़ुशियां मनानी हो कि कांग्रेस अपने लोगों को साथ नहीं रख पा रही है या कि सेकुलर विचारधारा के अनुयायी भी अंततः इस नतीजे पर पहुंचते जा रहे हैं कि हिंदू राष्ट्र ही भारत का अंतिम सत्य है, वे अपनी नृत्य-गोपाली में मशगूल रहने के लिए स्वतंत्र हैं। मगर ज़रा उन बेचारे दधीचि-पुत्रों का तो सोचिए, जिन्होंने 101 बरस तक दिन-रात परिश्रम कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सियासी संतान जनसंघ और फिर भाजपा को इस मंज़िल तक पहुंचाया। उन के दिल पर आज क्या बीत रही है, वे ही जानते हैं।
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@janardanmis हो सकता है कि वह अनजान देश में पदयात्रा कर रहे हों। यस अच्छी बात है। इससे लोगों का सम्पर्क बढ़ता है। लेकिन तलवाचाट चमचों और तनख्वाह पर रखे गये पत्रकारों को साथ नहीं ले गये। यस अच्छी बात नहीं है।
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Janardan Mishra
Janardan Mishra@janardanmis·
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने UK से आइसलैंड और फिर जर्मनी तक का सफ़र किया है, जिसमें उन्होंने यूरोप में लगभग 1,900 km और फिर 2,400 km की दूरी तय की है। वे पिछले करीब 16 दिनों से सार्वजनिक रूप से कहीं नज़र नहीं आए हैं। वे किसी आधिकारिक दौरे पर भी नहीं हैं, यहाँ तक कि कांग्रेस भी उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रही है। क्या वे यूरोप में देश को एक और अशांति में धकेलने की ट्रेनिंग ले रहे हैं? मैं कोई बढ़ा-चढ़ाकर बात नहीं कह रहा हूँ, बस उनके विदेशी दौरों और उसके बाद हुई उथल-पुथल की टाइमलाइन पर एक नज़र डालिए।
Janardan Mishra tweet media
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@Pankaj___Sharma सनातन की बिचारा वाले व्यक्ति इतना भी संकुचित शोच नहीं रखता। टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी में आने के लिए अपनी सीट का त्याग किया।उस सीट पर शेष कार्यकाल के लिए उनको टिकट दिया गा जो उनका हक भी है। यदि वह त्यागपत्र न देते तो सीट भी खाली नहीं होती।
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Pankaj Sharma पंकज शर्मा
जैसी भी है, भाजपा की एक विचारधारा है। देश का बहुमत उस विचारधारा के साथ नहीं है, लेकिन 35-40 फ़ीसदी लोग उस विचारधारा से कुल मिला कर इत्तफ़ाक रखते हैं। उन में से कई ‘बेहद आक्रामक’ हिंदुत्व के पक्ष में नहीं हैं, मगर वे हिंदू अस्मिता और हिंदू गौरव की हिफ़ाज़त के लिए अपनाए जाने वाले ‘ठोस उपायों’ के समर्थक हैं। इसलिए वे भाजपा के बुनियादी वैचारिक स्तंभ में पड़ चुकीं संजीदा दरारों को ले कर चिंतित ही नहीं, उद्वेलित हैं। वे दूसरे राजनीतिक दलों के लोगों की भाजपा में हो रही ‘घुसपैठ’ पर अब तक भीतर-ही-भीतर कुनमुन-कुनमुन कर रहे थे, मगर तृणमूल के सांसदों के लिए बिछाए गए लाल कालीन से अब उन की यह कुनमुनाहट चैराहे पर आती जा रही है। उन्हें भय सता रहा है कि कहीं वह दिन ज़्यादा दूर तो नहीं रह गया है, जब भाजपा का अध्यक्ष कोई आयातित व्यक्ति बन बैठेगा?
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@janardanmis न्यूज 24से भी इसीलिए भगाया गया था।
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Janardan Mishra
Janardan Mishra@janardanmis·
टीवी एंकर संदीप चौधरी की बेशर्मी की मिसाल बन चुकी है। बीते सात दिनों से श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय पर एबीपी न्यूज पर लगातार मीडिया ट्रायल चलाना उनकी पत्रकारिता की निचली सतह को उजागर करता है। जब मंदिर निर्माण जैसे पवित्र कार्य पर सवाल उठाने वाले अखिलेश यादव सरीखे लोग खुद विवादों में घिरे हों, तब संदीप बिना सबूत के आरोपों की बौछार कर रहे हैं। मेरठ मामले में आईपीएस अधिकारी को आज कानून पढ़ाते हुए उनका घमंडी अंदाज देखकर लानत भेजने को दिल करता है, उनकी एंकरिंग पर। खुद की पत्रकारिता की बुनियाद कमजोर होने पर दूसरों को ज्ञान बांटना उनकी सबसे बड़ी बेशर्मी है। पहले अपनी रिपोर्टिंग की पढ़ाई तो ठीक से कर लीजिए साहब! तथ्यों की जांच, संतुलित विश्लेषण और नैतिकता-ये बुनियादी सिद्धांत आपको अभी भी समझ नहीं आए। लोग आज भी अक्सर उन्हें सुधीर कहकर पुकार देते हैं, क्योंकि संदीप चौधरी सुधीर चौधरी की छाया भी नहीं बन पाए। सुधीर की तीखी, साहसिक और तथ्यपरक पत्रकारिता का मुकाबला करने की क्षमता उनमें कहां? एक औसत एंकर बनकर रह गए, जो चीख-चीखकर बहस जीतने का भ्रम पालते हैं। सबसे बड़ा ढोंग तो 'गोदी मीडिया' का है। संदीप से कोई पूछे-किस संविधान की धारा में लिखा है कि जो आपकी मन की बात न करे, उसे गोदी कह दो? जबकि उनका अपना अतीत न्यूज 24 का रहा है, जहां 'मैडम' की चापलूसी और सनसनीखेज खबरों का बाजार गरम था। इसीलिए संदीप से लेकर अजीत तक, सारे सनसनीखेज पत्रकार न्यूज 24 से ही निकले हैं। ऐसे एंकर टीवी पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं। संदीप चौधरी, अपनी आंख में फंसे तिनके को पहले हटाइए, फिर दूसरों को उपदेश दीजिए। 🙏🙏 पोस्ट साभार
Janardan Mishra tweet media
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SHANKAR DUTT RUWALI
SHANKAR DUTT RUWALI@DuttRuwali·
@harshktweets सलाद उसके हिसाब से सही है। इससे साफ ज्यादा साफ सुथरा उसे पचेगा नहीं। लेकिन मुफ्तखोर के लिए पैसे ज्यादा ही लग रहे हैं।
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