Politiकल Commentary

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@GAPDDN

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Union of India Katılım Mayıs 2019
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
चुनावी राहत खत्म, महंगाई की गर्मी तैयार! 29th April के बाद देखिए - पेट्रोल, डीज़ल, सब महंगे होंगे। जब तेल सस्ता था, मोदी सरकार ने अपना मुनाफ़ा रखा। अब महंगा है, तो बोझ आप पर डालेगी। सस्ते की लूट मचाती सरकार - जनता को बस महंगाई की मार।
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
एक बार अन्ना हजारे की सच्चाई बता दीजिए! बापू की समाधि पर जाना सार्थक हो जाएगा। किसके कहने से उन्हें लेकर आए थे? कितने पाखंडी आदमी थे वे? लोकपाल, भ्रष्टाचार, टू जी, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, शीला दीक्षित पर झूठ किसके कहने से बोला था? और आज अन्ना हजारे चुप क्यों हैं? अन्ना हजारे को पूरी तरह एक्सपोज़ कर दीजिए। उन्हें दूसरा गांधी कहने के लिए माफी मांग लीजिए। बापू से आपकी प्रार्थना सफल हो जाएगी वे शक्ति दे देंगे।
Arvind Kejriwal@ArvindKejriwal

आज मनीष जी और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुँच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए 'सत्याग्रह' के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
100 साल से संघ और जब से उसने जनसंघ फिर भाजपा को शुरू किया तब से वे गांधी को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। एक सूत्रीय कार्यक्रम। लेकिन हुआ क्या जब-जब इन्होंने सत्ता पाई गांधी का नाम लेने वालों की मदद से ही। 1967 में लोहिया की मदद से 1977 जयप्रकाश नारायण की मदद से 1989 वीपी सिंह की मदद से अभी 2014 में अन्ना हजारे की मदद से! चारों गांधी की बात करते थे। वीपी सिंह ने तो सर के बाल मुंडवा के गांधी की मुद्रा में फोटो सेशन भी कराया था। धर्मयुग में मुखपृष्ठ से लेकर अंदर तक खूब छपे थे। सोचिए 100 साल का संगठन एक ही काम लेकिन गांधी खत्म ही नहीं हुए! सच की ताकत का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा?
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@shakeelNBT यह व्यक्ति आज भी संघ की गोदी में बैठकर खेलने में व्यस्त हैं। मोदी जी अपने ढ़लान पर है और उन्हें बच निकलने के लिए यह कवर फायर टाइप दे रहे हैं।
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
वाह बापू! क्या ताकत है आपकी! केजरीवाल भी आ रहे हैं नरेंद्र मोदी भी जाते हैं। किसी का काम आपके बिना नहीं चलता। क्यों? क्योंकि जनता पर आज भी आपका ही असर है? इन लोगों ने लाख कोशिशें कर लीं की गांधी के बदले गोडसे को स्थापित कर दें। 12 साल में और केजरीवाल तो मोदी से कुछ महीने पहले ही सत्ता में आ गए थे‌ पूरी कोशिश कर ली की गांधी खत्म हो जाएं। नोटों पर से गांधी का फोटो हटाने का आइडिया केजरीवाल ने ही दिया था। अपने पीछे से तो हटा ही दिया था। लेकिन उनके बिना काम चलता नहीं। जा रहे हैं उन्हीं के पास!
Arvind Kejriwal@ArvindKejriwal

आज बापू का आशीर्वाद लेने के लिए मैं और मनीष सिसोदिया जी 12 बजे राजघाट जाएँगे

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Maadhyam
Maadhyam@maadhyam_engage·
Wow, amazing speed! Working overtime and on weekend, the Chairman of #RajyaSabha approved a 'merger' which was announced only 3 days ago and against which AAP filed a disqualification petition only 1 day ago. This is the same Chairman who: - took 24 days to ultimately decline the notice for removal of Chief Election Commissioner, moved by 63 Rajya Sabha MPs - NEVER decided the motion moved by Opposition MPs in December 2024 for impeachment of Justice Shekhar Yadav for his controversial speech at a Vishwa Hindu Parishad event. Yadav has now conveniently retired (read more here - x.com/maadhyam_engag…) - Throughout the entire Budget Session, kept sitting on a notice submitted by Opposition MPs for a debate on crisis in West Asia and its impact on India's energy security (see here - x.com/maadhyam_engag…) Also, as explained here, once a petition for disqualification is moved, a process as laid down in Rajya Sabha rules has to be followed (x.com/maadhyam_engag…). How many of these steps did the Chairman follow or skip to give this decision with lightening speed? And here is Minister of Parliamentary Affairs celebrating the fact that provisions of #Constitution and rules of procedures of #Parliament were manipulated to approve the 'merger' of these 7 AAP MPs into BJP. Hypocrisy ki koi seema nahin hoti!
Maadhyam tweet media
Kiren Rijiju@KirenRijiju

Honb'le Chairman Rajya Sabha Shri C.P. Radhakrishnan Ji has accepted the merger of 7 AAP MPs with BJP. Now, Raghav Chadha ji, Sandeep Pathak ji, Ashok Mittal ji, Harbhajan Singh ji, Swati Maliwal ji, Rajinder Gupta ji & Vikramjit Singh Sahney ji are Members of BJP Parliamentary Party. For a long time I've observed that these 7 Honb'le MPs have not resorted to abusive languages and never created any indiscipline and Un-Parliamentary conducts. Welcome to nation building NDA under the visionary leadership of Prime Minister @narendramodi ji and good bye to Tukde-Tukde INDI Alliance.

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Indresh Maikhuri
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
जब बाड़ ही खाए उज्याड़ ! उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये कौन आईजी साहब हैं, जिन्होंने रात 11 बजे बार बंद करने के नियम का अनुपालन देहरादून की पुलिस को नही करने दिया, उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को इनके विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए. अगर शाम तक पुलिस इनका नाम स्पष्ट नहीं करेगी तो उत्तराखंड पुलिस के जितने आईजी रैंक के अफसर हैं, उनकी लिस्ट सोशल मीडिया में डाल कर जानकारों से ही पूछेंगे कि कौन आईजी हो सकते हैं, जो रात को 11 बजे के बाद पुलिस को बार में जाम छलकाते मिले होंगे और फिर जिन्होंने 11 बजे बाद बार बंद करवाने की पुलिस की कोशिशों पर पलीता लगाया और रौब गालिब करने की कोशिश की. सबकी छिछालेदर हो, इससे बेहतर है, जो ऐसा कारनामा अंजाम देने वाले हैं, उनका ही नाम सार्वजनिक हो ! मर्जी उत्तराखंड पुलिस की है कि वो क्या चाहती है ! अगर कार्रवाई नहीं होती तो यह माना जाएगा कि नियम कानून की धज्जियां उड़ाने वाले उक्त आईजी को राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का संरक्षण है. इसलिए हम आपको ललकारते हैं, चुनौती देते हैं कि ऐसे बेलगाम अफसरों पर कार्रवाई का साहस दिखाइये मुख्यमंत्री जी !
Indresh Maikhuri tweet media
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
उत्तर प्रदेश में किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मंडियों में कई कई दिन से किसान पड़ा हुआ है लेकिन उसका गेहूं MSP पर नहीं खरीदा जा रहा। मजबूर किसान को निजी व्यापारियों को समर्थन मूल्य से दो सौ से ढाई सौ रुपए प्रति क्विटल कम में गेहूं बेचना पड़ रहा है। देखिए कृषि पर केंद्रित वेबसाइट - @ruralvoicein ruralvoice.in/states/farmers…
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
माल नही है। प्लान तो है। ●● बैंक जाओ, फाइनांस कराओ। 50 करोड़ देकर राज्यसभा लो, फिर 80 करोड़ लेकर पार्टी बदल दो। 50 का कर्जा लौटा दो, 30 का शुद्ध मुनाफा। उसको SIP करवा दो। सीट अभी भी हाथ में है। खर्चा पानी जनता के पैसे, और "कैश फ़ॉर क्वेश्चन" से निकलता रहेगा। MPLAD फंड का कमीशन तो पूरा सेविंग हो जायेगा। ●● अभी वाली को एतराज न हो, तो लगे हाथ किसी फ्लॉप बॉलीवुड हीरोइन से ब्याह भी कर लूंगा। हिहिखि, खिक्खी 😎
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
Rashtriya Surrender Sangh. Farzi nationalism in Nagpur. Pure servility in USA. Ram Madhav has only revealed Sangh’s true nature.
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Indresh Maikhuri
Indresh Maikhuri@indreshmaikhuri·
दल-बदल करके राजनीति का दलदल करने के लिए संविधान का हवाला दे रहे हैं, राघव बाबू ! संविधान का इससे ज्यादा मखौल और क्या उड़ाया जा सकता है ! जो साफ- सुथरी राजनीति करने आए थे, वे अब राजनीतिक गंदगी धोने की वाशिंग मशीन बन चुकी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं ! कहते हैं कि मनुष्य के लिए दो ही डर सबसे बड़े हैं- मरने का डर और जेल जाने का डर ! "आप" में जो जेल गए, उनसे ज्यादा जेल का डर उनमें पैदा हुआ, जो जेल नहीं गए और इसीलिए वो एक-एक कर भाजपा में गए ! शुरुआत में "आप" ने घोषणा की कि वो विचारधारा आधारित पार्टी नहीं समाधान आधारित पार्टी है ! यह विचारधाराहीनता का खुला ऐलान था ! आप के चमकदार, ग्लेमरस चेहरों का जो हश्र हुआ, वो बताता है कि विचारधाराहीनता का सीधा अर्थ अवसरवाद भी होता है !
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
पोज एज ए फ्रेंड एक्ट एज आ स्पाई!! रॉबर्ट ग्रीनी की किताब पढ़ता हुआ शख्स, पॉवरफुल हो सकता है। लेकिन मित्र, सहयोगी, प्रेमी या किसी का वेल विशर नही हो सकता। ●● यह किताब जो सिखाती है, वह 48 नियम इस तरह है- 1- मालिक से ज्यादा होशियार मत दिखना 2- दोस्त पर भरोसा नहीं, दुश्मनों को यूज करें। 3- इरादे छुपाकर रखो। 4- बात साफ हो जाये, उतना न बताओ। 5- छवि बनाकर रखो, हर कीमत पर बचाओ 6- ड्रामा करो, ध्यान खींचो। 7- काम दूसरों से करवाओ, क्रेडिट खुद लो 8- चारा फेंककर लोगो को अपने दायरे में लाओ। 9- बात बहस नहीं, एक्शन करो, निपटा दो। 10- नाखुश और बदकिस्मत लोगों से दूर रहें। 11- लोगों को अपने पर निर्भर बनाये रखो। 12- सलेक्टिव ईमानदारी और उदारता दिखाओ। 13- मदद मत मांगो, सौदा करो। 14- दोस्त बनकर रहो, जासूसी करते रहो। 15- दुश्मन को पूरी तरह कुचलकर खत्म कर दें। 16- महत्वपूर्ण अवसर पर गायब हो जाएं, इंपोर्टेंस बनेगी। 17- दूसरों को टेटर में रखें। अप्रत्याशित व्यवहार करें। 18- सुरक्षित किले मत बनाएं, अकेलापन खतरनाक है। 19- अपने से वजनी पहलवान से पंगा न लें। 20- किसी से वादा/कमिटमेंट न करें। 21- सामने वाले को मूर्ख दिखे, और फंसा लें। 22- लड़ाई जीतकर, रुक जायें, ओवर्स्टेप नहीं 23- सरेंडर का नाटक करें, मौका पाकर हमला करें। 24- अपनी ताकत को केंद्रित रखें, रिसोर्स न बिखराएँ। 25- परफेक्ट दरबारी बनें। 26- खुद को री इन्वेंट् करते रहें। 27- अपने हाथ साफ रखें। गन्दा काम दूसरे से करायें। 28- पर्सनालिटी कल्ट बनायें। 29- एक्शन में हिम्मत और साहस से उतरें। 30- अंत बिंदु तक की प्लानिंग करें। 31 - उपलब्धियों को दिखायें की बड़ा आसान था 32- शत्रु के विकल्प नियंत्रित करें, अपने दिए विकल्प से ही खेलने दे। 33- दूसरों की इच्छाओं से खेलें। 34- कमजोरी तलाश करें, उसी से चूड़ी टाइट करें। 35- खुद को राजसी तरीके से पेश करें, राजा जैसा बर्ताव करें। 36- टाइमिंग की कला में माहिर बनें। 37- जो नहीं मिल सकता, उसे घटिया कहो। 38- नयनाभिराम इवेंट रचो 39- सोचें जैसा चाहें, लेकिन बर्ताव वो सुंदर हो। 40- पानी में बवंडर बनाकर मछली पकड़ें। 41- मुफ्त के माल के ट्रेप दूर रहें। 42- महान व्यक्ति के जूतों में पैर न डालें। 43 - चरवाहे को मार डालो, भेड़ें बिखर जाएंगी। 44- दूसरों के दिल और दिमाग से खेले। 45- नकल (मॉक) करके गुस्सा दिलाएं। 46- बदलाव का उपदेश दें, लेकिन ज्यादा सुधार न करें। 47- कभी बहुत परफेक्ट न दिखें। 48- आकारहीन बनें। ●● किताब पॉवरफुल है, प्रैक्टिकल है। पर आप कितना प्रैक्टिकल होना चाहते है, आप पर निर्भर है। मेरी समझ में यह बेईमान, धोखेबाज, स्वार्थी, क्रूर, ड्रामेबाज, नकली आदमी- असली रोबोट बनाने की किताब है। इसे पढ़ने वालों से सावधान रहिये। उसे अपनी कीमती चीज- धन, भरोसा, वोट, बिजनेस पार्टनरशिप, या राज्यसभा की सीट कतई मत दीजिये ●● आम आदमी पार्टी के मितरों से क्षमा, यह पोस्ट जरा पहले लिखनी चाहिए थी। लेकिन आपको जब से झाड़ू मिली है.. कचरा ही बटोर रहे हो। भाजपा वाले न पढ़ें। तुम्हारे तो गैंग में सबई पैदाइशी इस कैटगरी के हैं। शाखा में यही तो बौध्दिक चलता है। तुम धोखेबाजी में प्राकृतिक प्रतिभा के इतने धनी हो कि ये लल्ला किताब पढके तुमको क्या ही धोखा देगा। खिखिखि!! 😂
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
भाजपा वाले सबको पार्टी ज्वाइन कराते हैं एक अन्ना हजारे को नहीं! कहते हैं उनके शामिल हो जाने से सारी पोल पट्टी खुल जाएगी! मतलब अभी भी भरम बनाकर रखना चाहते हैं कि अन्ना हजारे उनमें से नहीं थे। यह समझ में नहीं आता की 100 साल का संघ हो गया 12 साल की मोदी सरकार हो गई फिर भी इन लोगों को ऐसा क्यों लगता है की समाज में उनके साथ आना कोई सम्मान की बात नहीं मानी जाती। किसी भी भाजपा संघ समर्थन से कहो कि आप उनके हैं तो एकदम जोर से विरोध करते हुए कहता है की बिल्कुल नहीं। जबकि कांग्रेस लेफ्ट समाजवादी सभी विचारधारा के लोग खुद को संबंधित पार्टी के सिंपैथाइजर मानने में कोई आपत्ति व्यक्त नहीं करते हैं। लगता है समाज में सम्मान सकारात्मक लोगों को ही मिलता है। अभी भी नकारात्मकता को समाज में अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता।
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
संघ भाजपा जनसंघ के साथ जो जो गया है उसकी राजनीति खत्म हो गई। सबसे पहले जाने वालों में लोहिया थे समाजवादी पार्टी को लेकर। ‌1967 में। आज समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान भी नहीं है। फिर कम्युनिस्ट। ‌1977 जयप्रकाश के बहाने फिर वीपी सिंह के फिर अन्ना हजारे के बहाने और आज राष्ट्रीय राजनीति से लेकर बंगाल के चुनाव तक में कहीं नहीं। बाकी क्षेत्रीय दल अकाली पार्टी, बीजू जनता दल, तेलंगाना की केसीआर की पार्टी, मायावती सब निपट गए। आखरी यह केजरीवाल थे। देश में कांग्रेस ही ऐसी पार्टी रही जिसके कभी भाजपा संघ से कोई संबंध नहीं रहे। इसलिए 2014 से कई बड़ी हारों के बावजूद उसके लड़ने की क्षमता आज भी बनी हुई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उससे सबसे मजबूती के साथ लड़ने वालों में हैं। कांग्रेस के नेताओं में भी अगर देखा जाए तो आज तक के इतिहास राहुल गांधी ही उससे सबसे कड़े तेवरों के साथ लड़ने वाले नेता हैं। नेहरू भी लड़े सरदार पटेल भी लड़े इंदिरा गांधी भी सब मगर वे उस समय जब उनके पास सत्ता थी। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी थोड़े समय के लिए विपक्ष में थे। मगर राहुल गांधी तो 12 साल से लगातार विपक्ष में रहते हुए। सारे हमले झेले मगर तेवरों कहीं कोई कमी नहीं आई।
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
आम आदमी पार्टी में जो बचे हैं वे कह रहे हैं भाजपा उनके राज्यसभा सदस्यों को तोड़ रही है। तोड़ क्या रही है यह तो वही है कि- पहुंचे वहां ही खाक जहां का ख़मीर हो! एक दिन पूरी पार्टी मिल जाएगी जिस दिन संघ मोदी का विकल्प खोजने की कोशिश करेगा केजरीवाल दौड़ में सबसे आगे दिखेंगे!
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
पहले फेज के चुनाव के बाद जिनको बंगाल को ठीक से समझना है वे यह दोनों लेख पढ़ लें। पहला बंगाल से निकलने वाले अखबार में है ।और दूसरा बंगाल से होकर आने वाले पत्रकार की कलम से।
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Rajeev Dhyani•राजीव•راجیو•ਰਾਜੀਵ•রাজীব•రాజీవ్
23 अप्रैल 1930. पेशावर के मशहूर किस्साख्वानी बाज़ार का काबुली गेट. बाज़ार में बनी पुलिस चौकी के ठीक सामने हज़ारों की भीड़ नारे लगा रही थी. सूबा-ए-सरहद में सरहदी गाँधी खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के ख़ुदाई ख़िदमतगार संगठन में शामिल पश्तूनों ने अंग्रेजों के विरुद्ध ज़बरदस्त शांतिपूर्ण आन्दोलन छेड़ दिया था, और उनके आह्वान पर यह भीड़ इकठ्ठा हुई थी. माहौल पर क़ाबू पाने के लिए एक अँगरेज़ कैप्टन रिकेट के नेतृत्व में 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफ़ल्स की एक टुकड़ी पहले से ही तैनात थी. अपनी सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगते देख अंग्रेज़ कप्तान का खून खौलने लगा. भीड़ को तितर-बितर करने की तमाम कोशिशें बेकार हो रही थीं, उलटा और भी लोग आकर भीड़ में शामिल होने लगे थे. जब मामला बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो अपमान और उत्तेजना में काँप रहे कैप्टन रिकेट की बुलंद आवाज़ गूंजी. गढ़वाली......... थ्री राउंड्स फायर!!! सैनिकों की राइफलें तन गईं. लेकिन इससे पहले कि एक भी गोली छूट पाती, सैनिकों के पीछे से एक और आवाज़ गूंजी. कैप्टन रिकेट की आवाज़ से कहीं ज़्यादा बुलंद आवाज़. गढ़वाली, सी........ज़ फायर. (गढ़वाली, गोली नहीं चलानी है) सैनिकों ने घूमकर देखा. ये हवलदार मेजर चन्द्र सिंह भंडारी की आवाज़ थी. उनकी अपनी आवाज़, उनकी अंतरात्मा की आवाज़.... कि हम अपने ही लोगों पर गोली नहीं चलाएंगे. कैप्टन चिल्लाता रह गया. गोली नहीं चली. 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी का आधिपत्य ख़त्म होने तथा ब्रिटेन द्वारा आधिकारिक रूप से भारत पर शासन प्रारम्भ करने के बाद यह पहली सैन्य बगावत थी. बाद में सेना की एक और टुकड़ी लाकर गोली चलवाई गई. इस बग़ावत के लिए गढ़वाल राइफल्स के लगभग 60 सैनिकों को बर्खास्त कर उन पर मुक़दमे चलाये गए. सभी को सज़ा हुई. 16 को 10 साल से ज्यादा की सजा मिली, और बग़ावत के अगुआ चन्द्रसिंह गढ़वाली को आजीवन कारावास का दण्ड सुनाया गया. बाद में आज़ादी के आन्दोलन से जुड़े तमाम बड़े वकीलों के अथक प्रयास के बावजूद वे 11 साल बाद ही जेल से निकल सके. इसके बाद वे आज़ादी के आन्दोलन से जुड़े. आज़ादी के बाद से सन 1979 में अपनी मृत्यु तक लगातार सामाजिक आंदोलनों से जुड़े रहे.आज़ादी के बाद नेहरु जी ने उन्हें कांग्रेस से जोड़ने की कोशिशें की, लेकिन उनके भीतर के बागी ने उन्हें वामपंथी विचार के निकट ला दिया था. पेशावर विद्रोह की उस घटना के ठीक 96 साल बाद आज 23 अप्रैल 1926 के दिन हम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों को सैल्यूट करते हैं.
Rajeev Dhyani•राजीव•راجیو•ਰਾਜੀਵ•রাজীব•రాజీవ్ tweet media
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