Kapil retweetledi

लोग विनोद कापड़ी को @HQ_IDS_India द्वारा 'फिल्ममेकर' के रूप में सेवाएँ देने और उसके घोषित रूप से भारतीय सेना को उसी ऑपरेशन सिंदूर के समय उपहासपूर्ण शब्दों का प्रयोग करने के बाद भी, संभवतः, पैसे देने पर आश्चर्यचकित हैं।
क्यों? मंडल सरकारी पैसे नहीं ले रहा? कापड़ी ने भी तो वही किया जो मंडल कर रहा है: वामपंथी एजेंडा चलाना और अवसर मिलने पर सरकार से जुड़ जाना! दोनों में क्या अंतर है?
नादेव लैपिड, योग सीखने वाली ईशा, देवदत्त पटनाइक, काम्या जानी समेत कितने उदाहरण हैं जिसमें यही हुआ है। यहाँ नया क्या हुआ है जो इतने उदास हो? वामपंथी की सास मरने पर PM की चिट्ठी जाती है ताकि उनकी ब्रांडिंग हो सके कि कितने समावेशी हैं मोदी जी कि वैचारिक शत्रुओं को भी चिट्ठी भेजते हैं।
इस से तो भाजपा और मोदी जी की अच्छी ब्रांडिंग हो रही है न कि वामपंथियों को भी काम देती है क्योंकि उनको काम आता है, भेदभाव नहीं है। यह बात तो अब साबित हो गई है, IT सेलिए ही कह रहे हैं, कि इनको पैसा दिया जा रहा है!
मुझे आश्चर्य IDS के हैंडल में उसे 'फिल्ममेकर' लिखने पर नहीं हुआ, मुझे आश्चर्य तब हुआ जब @BJP4India के हैंडल से उसे 'फिल्ममेकर' लिखा गया। फिर थोड़ी देर बाद मंडल की याद आई, तो वह आश्चर्य भी 'MJNKKHTSSKHKH' के स्वर्णिम वाक्य के याद आने से समाप्त हो गया।
इस से अधिक आश्चर्य मुझे तब हुआ कि IT सेलिए इस पर उदास और आहत दिखे। अरे ब्रो, वो वाला लॉजिक नहीं दोगे, "हम चाहते हैं कि उधर के लोग जो अच्छा लिखते और बोलते हैं, उनको ओब्लाइज कर के इधर लाएँ, वो हमारे एसेट बनेंगे।"
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