🎈आज मेरा जन्मदिन है…
ट्विटर ने तो बैलून भेज दिए,
बस अपनों की बधाइयों का इंतज़ार है… 😊
एक छोटी सी “Happy Birthday”
दिन को और भी खास बना देती है 🙏🎂
#BirthdayVibes#WaitingForWishes 🎂
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"Om Tatpurushaya Vidmahe Mahasenaya Dhimahi Tanno Skanda Prachodayat". Daily blessings this Mantra.✳️✳️🔅
🕉️ श्री गणेशाय नमः 🕉️
वक्रतुंड महाकाय,
सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा॥
🙏 भगवान श्री गणेश जी 🙏
आप बुद्धि के दाता हैं,
विघ्नों के विनाशक हैं,
और शुभ आरंभ के प्रतीक हैं।
आपकी कृपा से जीवन में
सुख, शांति, समृद्धि
और सफलता बनी रहे।
🌸 गणपति बप्पा मोरया 🌸🌺🌿
✨ मंगलमूर्ति मोरया ✨ 💥🌺🌿
🚩 श्री गणेशाय नमः 🚩
विघ्नहर्ता गणपति बाप्पा की कृपा से हर कार्य सफल हो।
बुद्धि, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद सदैव बना रहे।
🌸 गणपति बाप्पा मोरया 🌸
🙏 जय श्री गणेश जी 🙏
कालरात्रि जब नाचते, भस्म तन पर धारण।
भय भी भय से काँप उठे, जग जाने तूफान॥
महाकाल जब रौद्र रूप में नाचते हैं, तो भय भी उनसे डर जाता है और सारा संसार काँप उठता है।
महाकाल प्रभु की जय हो
जिनके हृदय में सिर्फ प्रभु श्रीराम हैं
ऐसे महावीर को कोटि-कोटि प्रणाम है।
बस नाम लेते रहो श्री राम का,
साथ मिलता रहेगा हनुमान का।
प्यार से भजे जो कोई नाम हनुमान का ,
हो जाए विनाश सारेबसंकट का
#जय_श्री_राम🌹
#जय_हनुमान🌹
नवरात्रि का तृतीय दिन (तीसरा दिन) माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित होता है।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप
इनके मस्तक पर अर्धचंद्र से सुशोभित घंटा सदृश चिन्ह है, इसी कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
माँ का वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है।
इनके दस हाथ हैं और सभी में विभिन्न शस्त्र धारण किए हुए हैं।
इनकी सिंह वाहन पर सवारी रहती है।
माँ का स्वरूप सौम्य, परंतु असुरों के लिए उग्र एवं प्रचंड है।
महत्व
तृतीय दिन साधक को शौर्य, बल और निर्भीकता प्राप्त होती है।
भक्त की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में शांति एवं समृद्धि आती है।
माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक के चारों ओर दिव्य आभा और ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा विधि
1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. माँ दुर्गा की प्रतिमा/चित्र पर जल, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
3. माँ चंद्रघंटा को सुगंधित धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएँ।
4. इनका विशेष प्रिय भोग है — दुग्ध (दूध) से बने व्यंजन।
5. पूजा के समय निम्न मंत्र का जाप करें:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ चंद्रघंटायै नमः"
जय माता रानी
माँ चंद्रघण्टा - नवरात्रि का तीसरा दिन
चंद्रघण्टा पूजा
चंद्रघण्टा माता की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। इनके नाम का अर्थ, चंद्र मतलब चंद्रमा और घण्टा मतलब घण्टा के समान। उनके माथे पर चमकते हुए चंद्रमा के कारण ही उनका नाम चंद्रघण्टा पड़ा। इन्हें चंद्रखंडा नाम से भी जाना जाता है। देवी का यह स्वरूप भक्तों को साहस और वीरता का अहसास कराता है और उनके दुःखों को दूर करता है। देवी चंद्रघण्टा माता पार्वती की ही रौद्र रूप हैं, लेकिन उनका यह रूप तभी दिखता है जब वे क्रोधित होती हैं, अन्यथा वे बहुत ही शांत स्वभाव की हैं।
माता चंद्रघण्टा का स्वरूप
माँ चंद्रघण्टा शेरनी की सवारी करती हैं और उनका शरीर सोने के समान चमकता है। उनकी 10 भुजाएँ हैं। उनके बाएँ चार भुजाओं में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमण्डलु विभूषित हैं, वहीं पाँचवा हाथ वर मुद्रा में है। माता की चार अन्य भुजाओं में कमल, तीर, धनुष और जप माला हैं और पाँचवा हाथ अभय मुद्रा में है। माता का अस्त्र-शस्त्र से विभूषित यह रूप युद्ध के समय देखने को मिलता है।
पौराणिक मान्यताएँ
जब भगवान शिव ने देवी से कहा कि वे किसी से शादी नहीं करेंगे, तब देवी को यह बात बहुत ही बुरा लगा। देवी की यह हालत ने भगवान को भावनात्मक रूप से बहुत ही चोट पहुँचाया। इसके बाद भगवान अपनी बारात लेकर राजा हिमावन के यहाँ पहुँचे। उनकी बारात में सभी प्रकार के जीव-जंतु, शिवगण, भगवान, अघोरी, भूत आदि शामिल हुए थे।
इस भयंकर बारात को देखकर देवी पार्वती की माँ मीना देवी डर के मारे बेहोश हो गईँ। इसके बाद देवी ने परिवार वालों को शांत किया, समझाया-बुझाया और उसके बाद भगवान शिव के सामने चंद्रघण्टा रूप में पहुँचीं। उसके बाद उन्होंने शिव को प्यार से समझाया और दुल्हे के रूप में आने की विनती की। शिव देवी की बातों को मान गए और अपने आप को क़ीमती रत्नों से सुसज्जित किया।
ज्योतिषीय संदर्भ
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
प्रार्थना मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥
मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥
स्त्रोत
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
कवच मंत्र
रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् सर्वसिद्धिदायकम्॥
बिना न्यासम् बिना विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्।
स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम॥
कुशिष्याम् कुटिलाय वञ्चकाय निन्दकाय च।
न दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम्॥
उपरोक्त जानकारियों के साथ हम उम्मीद करते हैं कि नवरात्रि का तीसरा दिन आपके लिए ख़ास होगा और देवी चंद्रघण्टा की कृपा आपके ऊपर बरसेगी।
नवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएँ!