Krishan Jangid

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Krishan Jangid

@KrishanjangidIn

Advocate || Political conscious, strategist, Article/Content/story writer, Student representative, Socialist, Traveler, Expertise in IR & Indian Constitution.

Jaipur, Rajasthan Katılım Nisan 2015
706 Takip Edilen355 Takipçiler
Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
This is how legends are treated 💙
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
बस, बस, बस भाई...😅
BJP Rajasthan@BJP4Rajasthan

ऐतिहासिक यमुना जल समझौते के बाद कल मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी के जयपुर आगमन पर आयोजित होने वाले भव्य स्वागत कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया गया। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री @madanrrathore, गृह राज्य मंत्री श्री @jawaharbedam, प्रदेश महामंत्री श्री @bjpbhupendraRYB, प्रदेश मंत्री श्री नारायण मीणा एवं श्री @Imsitaramposwal उपस्थित रहे।

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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
हॉर्मुज में अमेरिकी हमले में मारा गया है आदित्य शर्मा। अमेरिका द्वारा की गई हत्या है यह
Anurag Thakur@ianuragthakur

यह अत्यंत दुख का विषय है कि मेरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के हमीरपुर के गलोड़ के 23 वर्षीय होनहार युवा श्री आदित्य शर्मा जी का ओमान तट के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुए जहाज हमले में दुखद निधन हो गया। मर्चेंट शिप में बतौर डेक कैडेट अपना कर्तव्य निभाते हुए श्री आदित्य शर्मा जी का निधन अत्यंत कष्टदायी व हृदय विदारक है। दुख की इस घड़ी में मैं पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ हूँ और मेरी हार्दिक संवेदनाएं आदित्य शर्मा जी के परिजनों के साथ हैं। ईश्वर आदित्य शर्मा जी दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोक संतप्त परिवार को यह दारुण दुःख सहन करने की शक्ति दें। इस मामले को लेकर मैं व्यक्तिगत रूप से विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर व विदेश मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के संपर्क में हैं। आदित्य शर्मा जी के पार्थिव देह को शीघ्र स्वदेश लाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही व इसके यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
अस्पताल में बच्चा जन्म देने आई महिलाओं की किडनी फेल हो गई, उन्हें डायलिसिस करवाना पड़ रहा है। और उस पर यह बेहद शर्मनाक बयान! क्या मंत्रीजी के घराने की प्रेग्नेंट महिलाएं प्रसव के लिए नाचती हुई अस्पताल जाती हैं ?
राजस्थानी ट्वीट@8PMnoCM

मंत्री जी की तुरंत रवानगी करनी चाहिए

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Krishan Jangid retweetledi
Comrade M
Comrade M@ComradeMalal·
हर्षद मेहता सीरीज़ में एक डायलॉग है कि जब किसी का काम खराब नहीं कर सकते तो उसका नाम खराब कर दो। दुर्भाग्य से नेहरू इस देश की सबसे मिसअंडरस्टुड शख्सियत हैं, इतने कि कुछ लोग शास्त्री जी से भी उनकी तुलना करके शास्त्री जी को महान बताने का प्रयास करते हैं। पता नहीं, शास्त्री जी ये सब देखते तो ऐसे लोगों को क्या कहते। जब तक नेहरू जीवित थे, न तो विपक्ष में किसी का क़द उनके सामने राजनीति करने लायक़ था, और न ही कांग्रेस में कोई उनके खिलाफ जाने की हैसियत रखता था। तब घोर रूढ़िवादी कांग्रेसी उन्हें कट्टर कम्युनिस्ट कहते थे, मुस्लिम लीगी उन्हें कट्टर हिंदुवादी कहते थे, सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट उन्हें पूँजीपतियों का एजेंट कहते थे। महासभाई और संघी उन्हें मुस्लिम तुष्टिकर्ता कहते थे। यह महासभाइयों का फैलाया हुआ झूठ ही है कि नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैं शिक्षा से अंग्रेज, संस्कृति से मुस्लिम और केवल दुर्घटनावश हिन्दू हूँ, जो आज सच की तरह बिकता है। नेहरू दुनिया के उन दुर्लभतम पिता-पुत्र द्वय में से एक हैं, जिन्होंने जब अपने महान पिता की पगड़ी अपने सिर पर बांधी तो उनके पिता की पहचान फुटनोट्स में समा गई। यह पंडित मोतीलाल नेहरू ही थे जिन्होंने लॉर्ड बिर्किनहेड की इस चुनौती का कि इंडियन इतने मैच्योर नहीं हैं कि स्वयं अपने शासन के लिए संविधान लिख सकें, प्रत्युत्तर नेहरू रिपोर्ट लिखकर दिया था, जिसे भारत का पहला लिखित संविधान माना जाता है। इसी रिपोर्ट में पहली बार भारत को एक आज़ाद देश के रूप में देखने की अवधारणा दी गई थी। नेहरू शौक से कम्युनिस्ट नहीं थे, उस वक्त तीसरी दुनिया ही पूरी तरह से कम्युनिज़्म की चपेट में थी। यूरोप की तरह यहाँ दुनिया भर से लूटकर लाई गई संपदा नहीं थी और इन्हीं यूरोपियन्स से आबाद हुए अमेरिका जैसे विभिन्न पूंजी के स्रोत भी नहीं थे। इनमें से ज़्यादातर देशों में पारंपरिक सामंती व्यवस्था थी। पूंजी के एकमात्र स्रोत भूमि पर असमान स्वामित्व था। भारत भी इससे अछूता नहीं था। कम्युनिज़्म जहाँ भी फैला, उसके लिए सबसे उर्वर भूमि यहाँ भी थी। बड़े संख्या में जमींदार थे , जो कि विभिन्न व्यवस्थाओं के दें थे। देशभर में बड़े ज़मींदारों से लेकर छोटी जोत के किसान भी स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेसी थे। कई जगहों पर ज़मींदारों ने स्वतंत्रता के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया था। वे कांग्रेस से लेकर क्रांतिकारी संगठनों तक की फंडिंग करते थे। इनके योगदान को भुलाकर नेहरू इन्हें कम्युनिस्टों के हवाले नहीं छोड़ सकते थे, जो कल्चरल रेवोल्यूशन के नाम पर सबको मरवा दें और फिर बाद में जिनसे मरवाएँ उन्हें भी भूखे मरने के लिए छोड़ दें, जैसे माओ ने छोड़ दिया था। नेहरू ने अपनी सूझबूझ से पहले तो कम्युनिस्टों को लोकतंत्र स्वीकारने पर मजबूर किया, फिर उनके सशस्त्र विद्रोह के ख्वाबों के एक-एक करके पर कुतरे। फिर उनकी जायज नीतिओं को स्वीकारा , भूमि सुधार लागू किया। पूंजी के नए स्रोतों का सृजन किया।
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
अशोक गहलोत के बयानों के बाद कई लोग इसे सेल्फ गोल, बता रहे हैं, कोई गाइडेड स्टेटमेंट तो कोई बौखलाहट तो कोई आख़िरी दाव ! हालांकि, यकीन मानिए अशोक गहलोत ने जो कहा है, बड़ी सूझबूझ और नियंत्रण के साथ कहा है। गहलोत को जिसे खदेड़ना था, अपनी भावुक प्रस्तुति से खदेड़ दिया है। आलाकमान के कानों में यह बार बार गूंजेगा कि गहलोत ने सरकार बचाई, विधायक चाहते थे कि सरकार बचाने वाले 100 में से किसी को भी CM बना दिया जाए, मगर मानेसर जाने वालों को नहीं। इसका असर यह होगा कि अभी लंबे समय तक राजस्थान की कमान गहलोत की इच्छाओं के विरुद्ध किसी को नहीं दी जाएगी। #Rajasthan
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि है और यह चिंता करने का समय है कि इस देश का हर नागरिक हर तरह के आतंकवाद से सुरक्षित रहे। वह आतंकवाद बमों का तो हो ही सकता है, वह पृथकतावादियों का, सांप्रदायिकों का, धर्मांध लोगों और इस देश को जानबूझकर कमज़ोर करने वालों और नादानी से कमज़ोर करने वालों का भी हो सकता है। आइए, जानें उस अलग तरह के प्रधानमंत्री के बारे में कुछ ज़रूरी बातें। एक, Rajiv Gandhi ने भारत में कंप्यूटर और टेलीकॉम क्रांति का बीज उस समय बोया जब सरकारी दफ़्तरों में टाइपराइटर को ही आधुनिकता माना जाता था। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती दौर में उन्हें “कंप्यूटर वाला प्रधानमंत्री” कहकर उनका इतना अधिक मज़ाक उड़ाया गया कि विज्ञान और तकनालॉजी की समझ रखने वाली दुनिया भारत के इन लोगों पर हंसती थी। आपको हैरानी होगी कि राजीव गांधी का मज़ाक उड़ाने वाले इन लोगों में आज की सत्ताधारी पार्टी के लोग तो थे ही, विपक्ष तक में मौजूद दलों के लोगों ने उनका इतना उपहास किया कि वे अपने पुराने बयानों को देखें तो उन्हें शर्म आएगी कि ये बयान उन्होंने दिए थे। और राजीव गांधी का वही काम बाद में भारत की आईटी ताक़त की बुनियाद बनीं। Rajiv Gandhi शायद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने प्रशासनिक बैठकों में तकनीकी प्रस्तुतियों और डेटा आधारित निर्णयों पर ज़ोर दिया। एयरलाइन पायलट रहने के कारण उनकी कार्यशैली “कॉकपिट अनुशासन” जैसी थी। कम बोलना, मौसम का ख़याल रखना, उनके साथ जितने भी यात्री हैं, उन सबकी सुरक्षित लैंडिंग, हर दिन के ज्यादा से ज्यादा नोट बनाना और हर चीज़ की चेकलिस्ट रखना। भारतीय शासन प्रणाली में चेकलिस्ट नामकी दुर्लभ चीज़ राजीव गांधी ही लेकर आए थे। पंचायती राज संस्थाओं को मज़बूत करने का उनका प्रयास केवल राजनीतिक नहीं था; वे गांव स्तर तक सीधे वित्त और अधिकार पहुँचाने के पक्षधर थे। कम लोग जानते हैं कि वे अफ़सरशाही की परतों से बेहद परेशान रहते थे और अक्सर कहते थे कि “दिल्ली से भेजा गया एक रुपया गांव तक पहुँचते-पहुँचते 15 पैसे रह जाता है।” सत्ता के पिपासु राजनेताओं ने इसे भी उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया और मीडिया के हम लोग उनके छवि हनन में बहुत आगे रहे। लेकिन आज अगर प्रधानमंत्री कह दें कि मेरी शासन व्यवस्था इतनी अच्छी है कि मैं दिल्ली से 15 पैसे भेजता हूँ तो वह आख़िरी भारतीय नागरिक के पास पहुँचते-पहुँचते एक रुपया हो जाता है तो इस व्यवस्था की तारीफ़ में अंजना ओम कश्यप बहस बाज़ीगर पक्का कर डालेंगी और रूबिया बहन कांग्रेसियों को कोसने में पूरा दम लगा देंगी। सुधीर चौधरी इस पर डिकोड करेंगे और अर्नब गोस्वामी अपने चैनल के सारे रिपोर्टरों को दौड़ा देंगे कि इस सिस्टम की ख़ूबियों का लाइव करिए। Rajiv Gandhi ने ही युवाओं को राजनीति में लाने के लिए मतदान आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की थी। आलोचक भी मानते हैं कि इससे भारतीय लोकतंत्र में करोड़ों युवाओं की सीधी भागीदारी संभव हुई। विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी रुचि केवल औपचारिक नहीं थी। वे वैज्ञानिकों से घंटों अनौपचारिक चर्चा करते थे और नई तकनीक के डेमो देखने में व्यक्तिगत रुचि लेते थे। उस दौर के कई वैज्ञानिकों ने बाद में लिखा कि वे तकनीकी बातें जल्दी समझ लेते थे और कठिन सवाल पूछते थे। लेकिन राजीव गांधी की ग़लती यह थी कि वे रॉकेट लॉचिंग के समय कभी नारियल फोड़ने वाली बात नहीं सोच पाए। उन्हें यह मालूम ही नहीं हो सका कि भारतीय ज्ञान विज्ञान और तकनालॉजी वैज्ञानिकों की मेधा से नहीं, नारियल की जटाओं में विद्यमान रहती है। विदेश नीति में उनका व्यक्तित्व अपेक्षाकृत आधुनिक और गैर-टकराववादी माना गया। वे शीत युद्ध के अंतिम दौर में भारत को “पुरानी वैचारिक भाषा” से थोड़ा बाहर निकालकर तकनीकी और आर्थिक सहयोग की ओर ले जाना चाहते थे। उनके बारे में एक कम चर्चित तथ्य यह है कि उन्हें भारतीय हस्तशिल्प, कपड़ा डिज़ाइन और लोक कला में गहरी दिलचस्पी थी। वे विदेश यात्राओं में कई बार भारतीय कारीगरों के काम को विशेष रूप से प्रदर्शित करवाते थे ताकि भारत केवल “गरीब देश” की छवि तक सीमित न रहे। Rajiv Gandhi को प्रशासन में “मध्यस्थ संस्कृति” पसंद नहीं थी। वे सीधे अधिकारियों, इंजीनियरों और जिला स्तर के लोगों से बात कर लेते थे। इससे कई वरिष्ठ नेता असहज भी हो जाते थे, लेकिन इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होती थी। पर्यावरण और गंगा सफाई पर शुरुआती सरकारी पहल को राष्ट्रीय एजेंडा बनाने वालों में उनका नाम आता है। उस समय पर्यावरण राजनीति का लोकप्रिय विषय नहीं था, फिर भी उन्होंने इसे सरकारी प्राथमिकता दी। यह समय से बहुत आगे की बात थी, लेकिन उस समय काँग्रेस के लोग भी खादी की टोपी उतार कर सिर खुजाते हुए राजीव को नासमझ बताया करते थे। राजीव गांधी को जो जलवायु संकट 1986 में समझ आ गया था, उसके बारे में आज 2026 में हमारे नेता खुद झुलस रहे हैं तो समझ आने लगा है। उनकी सबसे उल्लेखनीय व्यक्तिगत खूबियों में एक थी निजी कटुता से बचना। तीखे राजनीतिक हमलों के बावजूद वे सार्वजनिक भाषा में अपेक्षाकृत संयमित रहे। उनके कई समकालीन विरोधियों ने भी बाद में स्वीकार किया कि निजी व्यवहार में वे विनम्र, सुनने वाले और कम आक्रामक स्वभाव के थे। मैं भी अपने मीडिया के सीनियर लोगों और उनमें भी वामपंथी और समाजवादी विद्वानों के चक्कर में राजीव गांधी का आलोचक ही रहा था। उस समय आरएसएस, भाजपा, समाजवादी और वामदलों के सब लोग एक ही सुर में सुर साधकर राजीव गांधी का विरोध किया करते थे और उस अंधविरोध में उनकी ख़ूबियों को नहीं समझ पाए या उनका संतुलित आकलन उनके जीवन काल में नहीं कर पाए। वह अच्छाइयों से भरपूर एक सादा और संवेदनशील इनसान थे। मैं उनकी बहुत सी नीतियों का मुखर आलोचक हूँ, लेकिन आज उनके स्मरण दिन पर उनकी इन ख़ूबियों को याद करता हूँ तो लगता है कि हमारी राजनीति कहाँ से कहाँ चली आई है। राजीव गांधी जैसे लोग बहुत कम होते हैं। #RajivGandhi #राजीवगांधी #राजीव_गाँधी #राजीव_गांधी #कंप्यूटरक्रांति #तकनीकीक्रांति #सूचनाप्रौद्योगिकी #कंप्यूटर_क्रांति #तकनीकी_क्रांति #सूचना_प्रौद्योगिकी #आतंकवादविरोधीदिवस #आतंकवाद_विरोधी_दिवस
Rahul Gandhi@RahulGandhi

पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।

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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कई बार हुआ है, जब बड़ी बेंच (larger bench) ने छोटी बेंच के फैसले को overrule किया. Supreme Court अपना फैसला बदलता है ताकि कानून static न रहे. - Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) में Golaknath v. State of Punjab (1967) को overrule किया गया था. Golaknath (11-judge bench) में SC ने कहा था कि संसद Fundamental Rights को amend नहीं कर सकती, जबकि Kesavananda (13-judge bench) ने इसे partly overrule किया। संसद संविधान amend कर सकती है, लेकिन Basic Structure नहीं बदल सकती। - Navtej Singh Johar v. Union of India (2018) केस ने Suresh Kumar Koushal v. Naz Foundation (2013) को overrule किया था. Koushal ने Section 377 (consensual same-sex relations) को upheld किया था, Navtej (5-judge) ने इसे overrule कर decriminalize कर दिया. - Justice K.S. Puttaswamy v. Union of India (2017) केस ने ADM Jabalpur v. Shivkant Shukla (1976) को overrule किया था. Emergency के दौरान habeas corpus को suspend करने वाले कुख्यात ADM Jabalpur को Justice K.S. Puttaswamy के 9-judge bench ने overrule किया। Right to Privacy को Fundamental Right माना गया. #supremecourt
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath

सुप्रीम कोर्ट में जो आज हुआ वह अभूतपूर्व है। मुझे नहीं लगता है कि आज तक सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा हुआ होगा! अपने ही फैसले पर सवाल उठा दे ।वह भी वैसा फैसला जो चीफ जस्टिस वाली बेंच ने दिया हो। अभूतपूर्व!

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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
नीट रद्द नहीं हुई, देश के भरोसे का पोस्टमार्टम हुआ है NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ़ एक परीक्षा का स्थगन नहीं, यह भारत की परीक्षा-व्यवस्था पर लगा वह काला धब्बा है, जिसे प्रेस-नोट, जांच-कमेटी और “नई तारीख़ जल्द” जैसे वाक्यों से धोया नहीं जा सकता। NTA ने 3 मई 2026 को हुई परीक्षा रद्द कर दी है और कहा है कि परीक्षा दोबारा होगी; मामला CBI को सौंपे जाने की बात भी सामने आई है। यह मामला गंभीर तो अभी दो दिन पहले ही हो गया था, जब जयपुर के दैनिक नवज्योति, दैनिक राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर सहित सभी अख़बारों में प्रमुखता से छपा। यह कहना आसान है कि बच्चों को फिर मौक़ा मिल जाएगा। लेकिन क्या किसी अफ़सर ने उन बच्चों की आंखों में झांककर देखा है, जिन्होंने दो-दो साल मोबाइल बंद कर दिए, घर की शादियों से दूर रहे, मां-बाप की कमाई को कोचिंग की आग में झोंका और फिर पाया कि उनके भविष्य की चाबी किसी “गेस पेपर”, किसी गिरोह, किसी डिजिटल फॉरवर्ड और किसी अंदरूनी लापरवाही के हाथ में थी? राजस्थान SOG की जांच में जिस तरह पहले से घूम रहे प्रश्नों, कई सवालों के मिलान और कथित नेटवर्क की बात सामने आई है, वह यह बताने के लिए काफ़ी है कि यह मामला सामान्य अफ़वाह नहीं, परीक्षा-तंत्र की रीढ़ में लगी दीमक है। सरकार और NTA को अब यह पुराना नाटक बंद करना चाहिए कि “जांच चल रही है, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” दोषी नीचे बैठे क्लर्क, केंद्राधीक्षक या कोई दलाल भर नहीं हो सकते। ऐसी राष्ट्रीय परीक्षा में अगर पेपर की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाए तो जवाबदेही शीर्ष से शुरू होनी चाहिए। NTA के सर्वोच्च स्तर पर बैठे लोगों को तत्काल बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए। यह बर्खास्तगी दंड नहीं, प्रशासनिक शुचिता की न्यूनतम शर्त है। जिस संस्था का काम परीक्षा कराना था, वही परीक्षा की पवित्रता नहीं बचा पाई तो उसके शीर्ष अधिकारी कुर्सी पर क्यों रहें? यह भी याद रखना चाहिए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का रद्द होना बिल्कुल पहली घटना नहीं है। 2015 में AIPMT, जो NEET-UG का पूर्ववर्ती ढांचा था, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रद्द हुआ था; तब अदालत ने परीक्षा की “sanctity and credibility” बचाने को प्राथमिकता दी थी। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG को इसलिए रद्द नहीं किया था; क्योंकि उसके सामने व्यापक “systemic breach” का पर्याप्त आधार नहीं माना गया था। लेकिन 2026 में अगर परीक्षा रद्द करनी पड़ी है तो इसका अर्थ है कि व्यवस्था ने खुद मान लिया कि भरोसा बचा नहीं। अब सिर्फ़ री-एग्जाम नहीं, री-कंस्ट्रक्शन चाहिए यानी NTA का फॉरेंसिक ऑडिट, पेपर-सेटिंग से ट्रांसपोर्ट तक हर कड़ी की जवाबदेही, निजी एजेंसियों की भूमिका की जांच और परीक्षा माफिया पर संगठित अपराध जैसी कार्रवाई। नीट में बैठने वाला बच्चा सिर्फ विद्यार्थी नहीं होता; वह भारत के भविष्य के अस्पतालों का संभावित डॉक्टर होता है। अगर डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी ही चोरी, रिसाव और अविश्वास से भीग जाए, तो यह बच्चों के साथ अन्याय नहीं, राष्ट्र के स्वास्थ्य-भविष्य के साथ अपराध है। इसलिए इस बार सिर्फ परीक्षा नहीं दोहराई जाए; जिम्मेदारी भी तय हो और सबसे ऊपर बैठे लोग पहले जाएं। #NEET
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Sarvapriya Sangwan
Sarvapriya Sangwan@DrSarvapriya·
Read till the end:  SpiceJet cancelled my Delhi to Srinagar flight (PNR: H8FKMY) today. It was at 11:15 am, and they informed me only at 9:20 am. I was taking my 60+ old parents to Kashmir for their anniversary. They travelled all the way from Rohtak, reached the airport on time, only to be told there’s no flight today. Their entire plan for the next 5 days is ruined. When I tried to rebook for today, fares were already higher. And the moment I clicked “pay,” the price jumped another 40%.  So, I booked for tomorrow, but it cost way more than the SpiceJet tickets I paid for. SpiceJet says they’ll refund the cancelled flight but what about the extra money I had to pay? What about hotels refusing refunds for the lost day? What about the taxi costs and the stress my old parents had to go through? Just for my own curiosity, I tried cancelling the Indigo flight I booked for tomorrow. Guess what? They wanted more than ₹5,000 per ticket as cancellation fee, just 10 minutes after booking. All this in the name of “base fare” and “fuel surcharge.” Base fare they’ll recover anyway by selling the seat at a higher price to someone else. And fuel surcharge? Is fuel price fluctuating every single minute? Airlines and apps happily charge “convenience fees,” but when they ruin your plans, there’s no inconvenience fee for passengers. No cancellation fees for passengers. Just a cold “write mail to us.” You may get a voucher from their airline. The staff at the counter have no power, yet they’re the ones who face all the anger. The real decision-makers sit on annual packages worth crores, but don’t lift a finger when it comes to fixing anything real. FYI: At European airports, airlines are required to give a full refund and pay up to £600 to passengers when they cancel a flight. Even if it’s an Indian airline operating there, the same rule applies. These airlines pay compensation there, even for a flight delay. But what about Indian Janta?  We’re not flying for free, we pay taxes on every single ticket we buy. GST, User development fees, airport charges and even for our security.  Anyway, DGCA rules say 24 hours’ notice is required before cancelling. Why was this ignored? Staff claimed “technical fault” in the plane, but I doubt it. I want SpiceJet to share how many seats were actually booked for this flight. Was the flight only 30-40% full and cancelled for that reason? I didn’t see many passengers stranded there. These airlines keep sinking and government keeps negotiating. Aviation minister, where are you? Ministers fight for cabinet seats, they take one, enjoy the power and go, but ordinary people keep suffering because of government’s policies. At least one minister has to set an example. I want answers. And I want real compensation, not just vouchers or empty apologies. @RamMNK @DGCAIndia @flyspicejet
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
क्या तमिलनाडु में दलपति विजय की TVK बिना पूर्ण बहुमत के भी सरकार चला सकती है ? इसे थोड़ी डिटेल में समझिए। 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 234 सीटों वाली विधानसभा में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। DMK 59 सीटों पर, जबकि AIADMK अपनी 47 और गठबंधन की कुल 53 सीट्स के साथ भी बहुमत से काफी दूर है। यानी Tamilnadu की जनता ने इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नई राजनीतिक ताकत को सबसे बड़ा जनादेश दिया है। ऐसी स्थिति में संवैधानिक परंपरा कहती है कि राज्यपाल सबसे बड़े दल को पहले सरकार बनाने का अवसर देते हैं। लेकिन अभी तक तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर द्वारा TVK को औपचारिक रूप से सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। खबरें हैं कि विजय से पहले पूर्ण बहुमत यानी 118 विधायकों का समर्थन पत्र मांगा जा रहा है। यहां जानने वाली बात है कि भारत के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं कि राज्यपाल बहुमत टेस्ट करें। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले भी साफ कहते हैं कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर होता है। S.R. Bommai v. Union of India केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी सरकार का असली बहुमत सदन के भीतर फ्लोर टेस्ट से तय होगा। अब समझिए इसका गणित; 234 सीटों वाली विधानसभा में सामान्य परिस्थितियों में बहुमत का आंकड़ा 118 होता है। TVK के पास 108 सीटें हैं, यानी केवल 10 सीटें कम। विजय अपनी दो जीती हुई सीट्स में से एक छोड़ देंगे, तब असेंबली में कुल सीट्स 233 और बहुमत का आंकड़ा 117 हो जाएगा। कांग्रेस 5 विधायकों के साथ समर्थन दे चुकी है। TVK को 5 और MLAs का सपोर्ट चाहिए। VCK के 2, CPI के 2 और CPI(M) के 2 या IUML, DMDK जैसी पार्टियां समर्थन दे दें, तो विजय आराम से बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकते हैं। TVK+ की सरकार आसानी से बन जाएगी। लेकिन क्या असेंबली फ्लोर पर “118” से कम में काम नहीं चलेगा ? इसे समझिए; फ्लोर टेस्ट में किसी सरकार को “Absolute Majority” नहीं बल्कि “Simple Majority” साबित करनी होती है। यानी उस दिन सदन में उपस्थित और वोटिंग करने वाले विधायकों में बहुमत चाहिए। मान लीजिए फ्लोर टेस्ट वाले दिन 234 की बजाय केवल 210 विधायक ही मतदान करते हैं। तब बहुमत का आंकड़ा 106 होगा। अगर कुछ विधायक अनुपस्थित रहें, वॉकआउट करें या मतदान से दूरी बना लें तो यह आंकड़ा और नीचे आ सकता है। ऐसी स्थिति में TVK अपने 108 विधायकों के दम पर भी सरकार बचा सकती है। भारतीय राजनीति में इसके पहले भी उदाहरण रहे हैं। केंद्र में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार भी पूर्ण बहुमत के बिना चली थी और बाहर से समर्थन के सहारे स्थिर बनी रही थी। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक बार सरकार फ्लोर टेस्ट जीत लेती है, तो तुरंत हर दिन उसकी परीक्षा नहीं होती। सरकार को स्थिरता मिल जाती है। Majority प्रूव करने के 6 महीने तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। यानी अगर विजय पहली बार बहुमत साबित कर देते हैं, तो उनकी सरकार राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में आ सकती है। सबसे अहम बात यह है कि तमिलनाडु की जनता ने इस चुनाव में स्पष्ट संदेश दिया है। DMK की स्थापित सरकार को पीछे छोड़कर TVK को सबसे बड़ी पार्टी बनाना केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलाव की इच्छा का संकेत है। DMK ने स्पष्ट कह दिया है कि वो विपक्ष में बैठेंगे, क्योंकि जनता ने उन्हें इसीलिए चुना है। इसलिए सबसे बड़े दल यानी TVK को सरकार बनाने का मौका देना ही चाहिए। #tamilnadussembly #tamilnaduelectionresults2026 Vijay thalapathy । Oath Ceremony @actorvijay @TVKVijayHQ
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
Union Cabinet ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले Amendment Bill को स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी।
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
एक बार किसी ने भँवर जितेन्द्र सिंह से कहा कि सर दिल्ली ऑफ़िस में दीवार पर असम का मैप लगाकर रखिए, अच्छा लगता है। जितेंद्र सिंह का जवाब था कि ज़रूरत नहीं है, Assam की एक-एक constituency दिमाग़ में छप चुकी है। Bhanwar Jitendra Singh असम को इतना जान गए, जितना ज़्यादातर असम के नेता भी नहीं जानते। Upper Assam हो, Middle या Lower… सदिया से लेकर धुबरी तक जितेंद्र सिंह ने असम के हर एक पार्ट की गहराई से स्टडी की थी। कांग्रेस को जिताने के लिए अपने आप को पूरी तरह झोंक दिया था। दिल्ली में होते तो सप्ताह में हर दिन असम पर मीटिंग्स करते, बड़े नेताओं से लेकर छोटे कार्यकर्ता से मिलते। असम जाते तो अपने स्टे में सिर्फ़ नाईट में सोने जाते। असम के हर ज़िले, हर assembly में जितेंद्र सिंह घूमे हैं। जितना एक्टिव भँवर जितेंद्र सिंह असम में रहे, शायद ही कोई कांग्रेस के प्रभारी किसी स्टेट में रहते हो! मगर फिर भी किसी स्टेट का election लोकल चेहरों पर ही लड़ा जाता है, incharge के फेस पर वोट नहीं मिलते हैं। यह बहुत सिंपल सी बात है, शायद सबको समझ भी आती हो! मगर आपको टारगेट करना हो तो आप भँवर जितेंद्र सिंह को बड़ी आसानी से कर सकते हो। वो easy face है, टारगेट करने के लिए। राजस्थान से होकर Caste based politics भी नहीं करते। इसलिए हर नेता के जातीय समर्थक जितेंद्र सिंह के विरोध में लिखने लगे हैं। जितेंद्र सिंह के खिलाफ लिखना easy भी है, आप नाजायज़ आरोप लगाओगे, अनाप-शनाप लिखोगे तो पोस्ट हटाने के लिए कोई कॉल भी नहीं आएगा। मुझे याद है, हरियाणा विधानसभा चुनाव के result पर रिपोर्टिंग करते हुए भी पत्रकार मौसमी सिंह ने जितेंद्र सिंह की आलोचना की थी, जबकि जितेंद्र सिंह का उस चुनाव से कुछ लेना-देना नहीं था। आज भी सोशल मीडिया पर दिख रहा है कि असम के रिजल्ट को लेकर हर कोई जितेंद्र सिंह पर टूटना चाहता है। क्या party incharge किसी राज्य में स्थानीय चेहरों से ज़्यादा vote bank रखता है? क्या इंचार्ज की अहमियत लोकल चेहरों से ज़्यादा होती है? क्या असम का चुनाव जितेंद्र सिंह के फेस पर लड़ा गया? नहीं ना! बस यही कहना था।🙂 #Assam #electionresult2026 । Assam Assembly Elections । Assam Election Result
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
भाई, आपकी भावनाओं से सहमत हूँ, लेकिन फैक्ट सही रखो, झूठ नहीं। Rajasthan University असिस्टेंट प्रोफेसर की हायरिंग बंद नहीं कर रही। टीचिंग एसोसिएट की पोस्ट कॉलेज एजुकेशन डिपार्टमेंट के लिए है। राजस्थान के सरकारी कॉलेजेस के लिए है, राजस्थान विश्वविद्यालय के लिए नहीं। @AshutoshRanka
Ashutosh Ranka@AshutoshRanka

Dear GenZ - जागो। उठो। लड़ो। यह सरकार तुम्हें अनपढ़ रखकर तुम्हें बर्बाद करना चाहती है। एक समय देशभर में टॉप में गिनी जाने वाली राजस्थान यूनिवर्सिटी को एक सिस्टेमेटिक तरीके से बर्बाद किया गया। जिस यूनिवर्सिटी में 949 टीचर्स होने चाहिए थे, उनके सिर्फ 394 टीचर्स है। उनमें भी सिर्फ 2 प्रोफेसर्स और सिर्फ 19 एसोसिएट प्रोफेसर्स है। बाकी 373 असिस्टेंट प्रोफेसर्स। 60% पद खाली। लेकिन अब, इस यूनिवर्सिटी को एक लेवल और नीचे गिराने की तैयारी है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर्स की जगह संविदा पर Teaching Associates लगाए जायेंगे। बहुत साफ़ है कि यह सरकार नहीं चाहती कि तुम पढ़ो। जीवन में आगे बढ़ो। यह चाहती है कि तुम अनपढ़ रहकर इनके ग़ुलाम बनो। रीलबाज़ी और फालतू के मुद्दों में उलझ कर आपस में लड़ते रहो। आज हम एक निर्णायक मोड़ पर खड़े है। यहाँ से एक रास्ता हमें आबाद करेगा। और एक रास्ता पूरी तरह बर्बाद करेगा। फ़ैसला तुम्हें करना है।

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राजस्थानी ट्वीट
⚠️ आगामी कुछ दिन अनावश्यक बाइक पर या गाड़ी में बिना काम घूमने, लौंग ड्राइव, गाड़ी में a/c चालू रख बैठ कर पार्टी करने या तफरी करने से परहेज करें। बेवजह टंकी फुल नहीं करवाएं, जितनी जरूरत हो उतना ही ईंधन लें, फालतू पैनिक हो कर स्टॉक न करें।
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United Nations Geneva
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"Tolerance is the only thing that will enable persons belonging to different religions to live as good neighbours and friends.” Mahatma Gandhi’s wise counsel reminds us that unity is stronger than division, and peace is the only pathway to a better future for all.
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Krishan Jangid
Krishan Jangid@KrishanjangidIn·
'Facts are facts and will not disappear on account of your likes.' ~ Jawaharlal Nehru
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#BREAKING #SupremeCourt BANS the NCERT textbook chapter with references to corruption in judiciary. SC prohibits publication, re-printing, and digital sharing of the copies. Orders seizure of physical copies. Those sharing the copies in any form will face legal action.

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António Guterres
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In situations as confused & complex as the one we now face in Venezuela, it's important to stick to principles: Respect for the @UN Charter. Respect for the sovereignty, political independence & territorial integrity of states. The prohibition of the threat or use of force. The power of the law must prevail. International law contains tools to address issues such as illicit traffic in narcotics, disputes about resources & human rights concerns. This is the route we need to take. My full remarks to the Security Council: un.org/sg/en/content/…
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