प्रताप प्रजापति

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प्रताप प्रजापति

प्रताप प्रजापति

@PRATAP_IIMC

Currently Working as a PR and Political Consultant. ex Network 18 ( IIMCIAN) ( यहाँ बोया गया सारा चरस खुद का है)

Jaisalmer, Jodhpur, Phalodi Katılım Kasım 2014
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Media Manthan News
Media Manthan News@mediamanthan_·
लोहावट के मोरिया एवं मुंजासर में अतिक्रमित गौचर भूमि को खाली करवाने को लेकर पत्रकारिता की पढाई कर रहे @PRATAP_IIMC ने @rashtrapatibhvn @PMOIndia @RajCMO एवं जिलाधिकारी समेत 24 विभागों को ज्ञापन पेश कर उचित कार्यवाही करने की अपील की! @RajCMO @Barmer_Harish @dineshgurjar_04
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रामेश्वर राठौड़
@PRATAP_IIMC @RavindraBhati__ आप ने किस आधार पर तय किया है, कि वो रविंद्र सिंह का समर्थक हैं,या फ़िर सोशल मीडिया टीम का हिस्सा हैं कोई सिंह लगाकर आपके साथ अभद्र व्यवहार करें तो वो रविंद्र या अन्य राजपूत नेता का ही समर्थक हैं।
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प्रताप प्रजापति
आदरणीय @RavindraBhati__ जी नमस्कार 🙏 मैं नहीं जानता कि ये‌ बात आपके संज्ञान में है या‌ नहीं लेकिन आपके तथाकथित समर्थक आपका ही‌ नुकसान कर रहे हैं, बेशक आपके पास शोशल मीडिया टीम अच्छी है लेकिन राजनीति व लोगों को समझे ऐसे लोगों का अभाव है। कुछ बातें अगर एक बार पब्लिक प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो जाए वो जीवन भर पीछा नहीं छोड़ती है इसलिए निवेदन है कि आपके शोशल मीडिया के जॉम्बीज को समझाइए कि शांत रहे, सभ्य रहे उसमें भलाई है ।
Barmer Update@BARMERUPDATE

क्या किसी क्षत्रिय को इस तरिके से गाली गलोच कर एक महिला को धमकी देना उचित हैं, क्या एक राजपूत को सोभा देता हैं?

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Bhawani
Bhawani@TheDesiCEO·
@prem_baba1622 @1K_Nazar @commando1000 @Jabarsingh_ सीसीटीवी का क्यों वैट करना, अब जब सर ने बोला है तो तरुण ने नहीं लिए होंगे तो आजाएगा न सामने? 😊 और तरुण मना करेगा तो सीसीटीवी भी होंगे ही।
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प्रताप प्रजापति
@crosschat_wala आदरणीय लोकसा क्या मैं जान सकता हूं कि आपका रविन्द्र सिंह भाटी व छोटू सिंह रावणा के बारे में की गई टिप्पणी गायब क्यों है? क्या आपका विचार और वक्तव्य बदल गए हैं या कुछ और कारण थे।
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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
How Rajasthan influenced Bangal 19 वीं सदी के उत्तरार्ध का काल और बंगाली साहित्य पर बंकिम चंद्र चटर्जी का एकतरफा वर्चस्व। इसी काल में उपन्यासों के मोर्चे पर बंकिम चंद्र थे तो दूसरा मोर्चा माइकल मधुसूदन दत्त ने अपने नाटकों से खोल दिया। बंगाली समाज को नाटक देखने का चाव तो पहले से लग गया था। लेकिन ये नाटक कुलीन बंगाली समाज तक पहुंच बना सके थे। एक तरफ बंकिम चंद्र आम जन के लेखक स्थापित हो चुके थे वहीं दूसरी तरफ नाटकों की विषयवस्तु से कुलीन बंगाली समाज एक तरह से ऊब रहा था क्योंकि थियेटर के मंच पर शेक्सपियर, जॉर्ज बर्नार्ड शो के अलावा कुछ गिने चुने संस्कृत नाटक ही थे। इसी समय माइकल मधुसूदन दत्त जो सिर्फ अंग्रेजी भाषा पर एकाधिकार रखते थे, ने नाटकों में रुचि लेना शुरू किया। माइकल मधुसूदन खालिस अंग्रेजी मिजाज के शख्स थे। ईसाई युवती से प्रेम किया और हिंदू से ईसाई बन गए। इस कारण हिन्दू कॉलेज भी छोड़ दिया और बिशप कॉलेज में पहुंच गए। बैरिस्टरी करने लंदन गए और वापस वतन लौट आए। दूसरी शादी एक फ्रांसीसी महिला से करी और फिर ग्रीक साहित्य में रम गए। अंग्रेजी, हिब्रू, जर्मन जैसी तमाम विदेशी भाषाएं माइकल मधुसूदन दत्त ने सीख ली लेकिन उन्हें बंगाली भाषा अब भी नहीं आती थी। इसी दरमियान माइकल मधुसूदन दत्त की मुलाकात केशवचंद्र सेन से हुई और केशवचंद्र सेन ने उन्हें कर्नल जेम्स टॉड की "Annals and Antiquities of Rajast'han" पढ़ने की सलाह दी। केशवचंद्र सेन ने उन्हें कर्नल टॉड के इस महान ग्रन्थ को पढ़ने की सलाह इसलिए दी क्योंकि बंगाल के थियेटरों में घटिया नाटकों को देखकर एक दिन माइकल मधुसूदन दत्त ने ऐलान कर दिया कि अब वे अच्छे और बेहतरीन नाटक लिखेंगे। लेकिन इससे पहले उन्होंने बंगला भाषा सीखी। बंगला भाषा सीखकर माइकल मधुसूदन दत्त किसी नाटक के लिए विषयवस्तु की तलाश कर रहे थे। उन्होंने रजिया सुल्तान पर एक नाटक लिखने का निश्चय किया और काम शुरू भी कर दिया। तब केशवचंद्र सेन ने पत्र लिखकर कहा कि वे कर्नल टॉड के इस महान ग्रन्थ से राजस्थान के इतिहास से कोई वीरता की कहानी को चुनें जिससे कि राष्ट्रवादी विचारों को प्रोत्साहन मिले। मधुसूदन दत्त ने केशवचंद्र सेन की इस सलाह पर काम किया और बड़े ही इत्मीनान से कर्नल टॉड के ग्रंथ को पढ़ा। इस ग्रन्थ को पढ़ने के बाद उन्होंने एक नाटक लिखा - "कृष्णाकुमारी" यानि कि बंगाल के उपन्यासकार और कवियों की भांति ही राजस्थान के इतिहास की कहानियां बंगाली नाटककारों को भी राजस्थान तक खींच लाई। माइकल मधुसूदन दत्त के दो नाटक बंगाली साहित्य में सबसे अधिक प्रसिद्ध हुए एक मेवाड़ की राजकुमारी कृष्णाकुमारी पर लिखा गया उनका ऐतिहासिक नाटक और एक नाटक उन्होंने पद्मावती नाम से लिखा। पद्मावती नाम से ही बंगाल के दूसरे प्रसिद्ध नाटककार रंगलाल बंधोपाध्याय ने एक नाटक लिखा लेकिन माइकल मधुसूदन दत्त द्वारा लिखा गया पद्मावती नाटक उस दौर का सर्वश्रेष्ठ नाटक साबित हुआ। केशवचंद्र सेन और डॉ क्षेत्र गुप्त जैसे विद्वानों ने मधुसूदन दत्त के कृष्णाकुमारी नाटक को ही बंगाली भाषा का सर्वश्रेष्ठ नाटक कहा है। खुद मधुसूदन दत्त ने राजनरायन बसु को लिखे एक पत्र में लिखा - " I have been dramatizing writting, a regular tragedy in prose. The plot is taken from Jems Tod." सिर्फ माइकल मधुसूदन दत्त की क्यों ? उसके बाद तो तमाम बंगाली नाटककारों ने राजस्थान के इतिहास से विषय चुन - चुनकर नाटकों की झड़ी लगा दी। द्विजेंद्रपाल, क्षीरोप्रसाद जैसे विख्यात नाटककारों ने अपने बेहतरीन नाटकों के लिए कर्नल जेम्स टॉड के ग्रंथ से विषय उठा - उठाकर नाटकों की झड़ी लगा दी और इन राष्ट्रवादी नाटकों ने बंगाल के थियेटरों में राष्ट्रवाद को डटकर उतार दिया। इसलिए यह कहना समीचीन होगा कि कविता, उपन्यास और कहानियों के सहारे ही नहीं बल्कि नाटकों के विषयों में भी राजस्थान के इतिहास ने बंगाल में राष्ट्रवाद को पनपने में मार्ग प्रशस्त किया। ~ लोकेन्द्रसिंह किलाणौत नॉट - बंगाल में राष्ट्रवाद के पनपने के कारणों में राजस्थान के इतिहास क्या योगदान था, यह पढ़ने के लिए लगातार बने रहिए।
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प्रताप प्रजापति
देखो ऐसा है ना कि रविन्द्र सिंह जी ने फोन किया उसको ये खुद ने स्वीकार किया है, और सामने वाला बोल रहा है कि मुझे धमकी दी गई है तो आप रविन्द्र जी से पूछिए कि आपने उन 5 मिनट में उसको क्या बोला क्योंकि वो लाखों युवाओं के आदर्श इंसान पर उंगली उठा रहा है, मान लेते हैं कि छोटू सिंह राजनीति कर रहा, चरित्रहीन आदमी है जैसा की समर्थक बता रहे हैं लेकिन रविन्द्र सिंह जी का तो स्तर ऊंचा है ना ? वो तो बताते ना आप लाखों समर्थकों को की मेरी ये बात हुई है बाकी एक चीज़ बता दूं कि नेता वहीं होता है जिसकी कथनी और करणी मे फ़र्क हो और जैसा दिखे वैसा न हो । रविन्द्र सिंह विधायक हैं और कोई व्यक्ति खुद को पीड़ित बता रहा है तो उसकी शोशल बुल्लिंग नही करनी चाहिए। रही बात पुनम राजस्थानी की तो कल से रविन्द्र सिंह जी के करीबी समर्थकों के द्वारा पूनम और रविन्द्र का वो फोटो साझा करके गद्दार, धोखेबाज और दोगली बताया जा रहा है जिसमें रविन्द्र ने पूनम के सर पर हाथ रख रखा है, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या कोई रविन्द्र सिंह जी का करीबी आदमी अपने समाज के लिए, अपने हितों के लिए, अपने अधिकारों के लिए खिलाफ न बोलें की मैं तो इनके साथ रहा हूं ? अंध समर्थन व अंध विरोध दोनों घातक है। अभी समर्थक बोल रहे हैं कि कुमावत समाज को भड़काया भाटी के खिलाफ और वो ठेकेदार भाजपा का आदमी था इसको लेकर समर्थकों ने खुब अहसान गिनाए मुझे ऐसा लग रहा था कि जिल्लेइलाही नहीं होते तो हमारे हिस्से की ऑक्सीजन व ओजोन परत खत्म हो जाती लेकिन रविन्द्र सिंह जी ने इतने बड़े मैटर में कोई सार्वजनिक व आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया जबकि होना तो ये चाहिए था कि एक विधायक के नाम का प्रयोग करके उसकी छवि धूमिल करने व अपने लोगों (तथाकथित) को धमकी देने के कारण मुकदमा दर्ज करवाना चाहिए था। तो ब्रो इस रामायण का लब्बोलुआब ये है कि दुध का धुला कोई नहीं है सब अपने हिस्से की राजनीति करना चाहता है और उसमें आने वाली अड़चन का फायदा उठाना व ठिकाने लगाने की कोशिश हर कोई करता है और रही बात इस ‌कॉल की तो आप कैसे दावा कर सकते हैं कि ये रविन्द्र सिंह जी का समर्थक नहीं है?
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Prem Prakash Detha
Prem Prakash Detha@prem_baba1622·
@PRATAP_IIMC @TheDesiCEO @RavindraBhati__ बताओ तो सही कैसे आपने निर्धारण किया की वो भाटी का समर्थक है ऐसे सिंह लगाने वाले सारे ही भाटी के समर्थक है क्या ??
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Prem Prakash Detha
Prem Prakash Detha@prem_baba1622·
@PRATAP_IIMC @TheDesiCEO @RavindraBhati__ आप कैसे कह सकते उनके समर्थक है में आपको मोदी जी का फोटो या नाम लेके गाली दे दु तो क्या मोदी जी दोषी हो गए ? सब प्री प्लान से चल रहा गवैया जी द्वारा देखे कहा तक गिरते है
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Bhawani
Bhawani@TheDesiCEO·
@SangitaBishnoi_ हमने तो राघव प्रकाश ही पढ़ी थी। लेकिन आज कल कलिराना सर की बुक के काफी पॉजिटिव चर्चे है।
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संगीता माँझु बिश्नोई
हिंदी व्याकरण की दोनों पुस्तक में से सबसे बेस्ट बुक कौनसी है....?? राघव प्रकाश या सुखराम कालीराणा..? कमेंट जरूर करे.....
संगीता माँझु बिश्नोई tweet mediaसंगीता माँझु बिश्नोई tweet media
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प्रताप प्रजापति
@TheDesiCEO जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं सर। भगवान आपको दीर्घायु प्रदान करें
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Bhawani
Bhawani@TheDesiCEO·
आज मेरा और हनुमान जी का संयोगवश साथ ही जन्मदिन है , लेकिन कोई मुझे wish नहीं कर रहा है। कितने सालों बाद ऐसा संयोग आता है। जय बजरंग बली 💪🙏🚩
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प्रताप प्रजापति
गजब तर्क दिया है पत्रकार महोदय जी। इस हिसाब से रविन्द्र सिंह जी के सामने कोई चुनाव नहीं लडे, कोई आलोचना भी नहीं करें, कोई कुछ नहीं बोले और अगर किसी ने बोला तो कॉल करके धमकी देना भी जायज माना जाएगा। क्या कमेंट रविन्द्र सिंह जी की पोस्ट पर किया गया? क्या कमेंट में रविन्द्र सिंह जी का नाम लिया गया? क्या रविन्द्र सिंह स्वयं को रील स्टार मान रहे हैं क्या? क्योंकि उनको अहसास हुआ कि ये रील स्टार मुझे बोला जा रहा है? रविन्द्र सिंह जी मीडिया के सवाल पर बोल रहे हैं कि मैं ऐसा हूं क्या, वैसा हूं क्या, जिम्मेदार व्यक्ति को ऐसा कमेंट नहीं करना चाहिए लेकिन रविन्द्र सिंह जी ये क्यों नहीं बताते कि उन 5 मिनट में उन दोनों के बीच क्या चर्चा हुई। और अन्त में यही सलाह है कि दोनों प्रतिभाशाली हैं, बैठकर सुलह करें और साथ ही समर्थकों से निवेदन है कि आप सभ्य रहे, अतिरिक्त दंभ में नहीं रहे क्योंकि आपकी ये तासीर नहीं है कि किसी का चरित्र चित्रण करें, मां बहन की गालियां निकाले। अगर आप रविन्द्र सिंह जी के बारे में गर्व से बोल सकते हैं कि हमारा भाई शांत, सौम्य व शालीन है तथा कभी भी आपा नहीं खोता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं करें कि रविन्द्र सिंह जी को ऐसे गर्व करने में झिझक हो। ( नोट - पुराने वीडियो से किसी का वर्तमान का निर्धारण कर रहे हैं तो हमें भी मालूम है कि किस का लहजा कैसा था ) @crosschat_wala @TheDesiCEO @Kapil_Jyani_
Dr. Ashok Sharma@ashok_Jodhpurii

सभी लोग रविन्द्र भाटी द्वारा कॉल करके छोटूसिंह रावणा को धमकाने की बात कर रहे हैं! लेकिन कोई इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहा कि जब छोटूसिंह को यह अच्छी तरह से पता हैं कि उसके व रविन्द्र भाटी जी के बीच पूर्व में अनबन रही हैं और मेरे किसी भी तरह के कमेंट से सीधा पर्सनल अटैक माना जायेगा, फिर भी जानबुझकर विवादित एवं उकसाने वाला कमेंट करने की जरूरत कहाँ पड़ी!इसका मतलब छोटूसिंह द्वारा उक्त कृत्य जानबूझकर एवं भड़काऊ कमेंट किया और अब विक्टिम बनकर अनावश्यक समाज में दरार एवं विवाद उत्पन्न किया किया है।

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प्रताप प्रजापति
@Swiggy थारो लिट्टी चोखो बढ़िया है म्हाने इण बात रो कोई ऐतराज कोनी है पण थे ओ लिखियो नी की 'litti chokha better than dal batti' आ घणी ओछी बात कर दी थें, और ओ भूरट दिमाग उं निकाल देई वरना चोपड काडूला उबे उबे न। @vinay_sultan
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प्रताप प्रजापति
आदरणीय महारावल सा मेरे द्वारा लिखी गई स्टोरी को तवज्जो देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार! जैसलमेर मेरे लिए नयी जगह है, मैं जैसलमेर को समझ रहा हूँ, लिखना सीख रहा हूँ आपका स्नेह बना रहे! सराहना व जैसलमेर की अमूल्य धरोहर तथा संस्कृति के लिए जायज चिंताओं के लिए आपका धन्यवाद 🙏
Chaitanya Raj Singh@crsinghbhati

राजस्थान प्रदेश का राज्य पशु होने के बावजूद प्रदेश में ऊंटों की संख्या लगातार काम होती जा रही है, जोकि एक चिंताजनक विषय है। राज्य की पहचान, 'रेगिस्तान का जहाज़' कहे जाने वाले ऊंट से है जिसके कारण मरू भूमि के सैंकड़ों परिवारों के घर चलते हैं... hindi.news18.com/news/rajasthan… 1/2

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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
Sorry पावर से याद आया... पावर फील लेने वाले इस संगठन ने विधानसभा चुनाव के वक्त बीजेपी को 35 लोगों की लिस्ट टिकिट के लिए सौंपी थी। अगर वह लिस्ट मैं खोल दूं तो हंसी छूट जाए। जो राजेन्द्र राठौड़ खुद टिकट बांट रहे थे उनके लिए ये लोग टिकट मांग रहे थे और बता रहे थे कि राजेन्द्र राठौड़ के टिकिट की डिजायर उन्होंने लिखी है 😅🤣 लेकिन फिलहाल इनसे सिर्फ इतना पूछ लिया जाए कि प्रेम सिंह बनवासा को झोटवाड़ा से टिकिट कब तक मिल जाएगा ?
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala

असल में जिन लोगों ने यह बैठक आयोजित करवाई है वे ऐसी बैठकों के बहाने ही अपनी कम्युनिटी को खुद के पावरफुल होने का मेसेज देते रहते हैं। और जानबूझकर ऐसी बैठकें आयोजित करते हैं ताकि यह बताते रहें कि हम पावर कॉरिडोर क्रिएट करते हैं। वरना तो फिर ऐसे संगठनों के आव्हान पर कैसे बिरादरी की भीड़ आएगी ? जबकि जाति - समाज के मुद्दों पर जब भी जन - प्रतिनिधियों को बुलाया जाए तो उसे सीक्रेट रखने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन फिर बिरादरी कैसे मानेगी कि पावर उनके यहां नतमस्तक होता है। जबकि ऐसी मीटिंग्स को ओपन करके ये लोग खुद की जाति का नुकसान तो करते ही हैं बल्कि जाति के नेताओं को भी कभी - कभार मुसीबत में डाल देते हैं। जबकि जो पावर में होता है उसे बताने की जरूरत नहीं पड़ती कि हमारी बात सुनी जाती है। फील आना चाहिए Bro...

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Vivek Shrivastava
Vivek Shrivastava@Viveksbarmeri·
ख़बरें और भी हैं… मगर चयनित चुप्पी का शोर सबसे ज़्यादा सुनाई देता है। राजस्थान में एक व्यक्ति के पीछे किसी संस्था का यूँ नियमित पड़ जाना, और प्रदेश के असली, ज्वलंत मुद्दों पर आँखें मूँद लेना यह सिर्फ़ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि पत्रकारिता और सार्वजनिक जवाबदेही दोनों पर सवाल है। प्रदेश के UDH मंत्री, जो ACB कोर्ट से भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं…उस पर कभी कोई बड़ी ख़बर दिखी? “Love Home Joypur” के चमचमाते विज्ञापन, भव्य आयोजन, मुख्य अतिथि…सब दिखता है, मगर CM जन आवास योजना में धांधली पर सन्नाटा क्यों?
Vivek Shrivastava tweet media
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Ashok Gehlot
Ashok Gehlot@ashokgehlot51·
राजस्थान की पहचान और बिश्नोई समाज सहित समस्त प्रदेशवासियों की आस्था के प्रतीक 'खेजड़ी' को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा आंदोलन अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। विकास के नाम पर हज़ारों खेजड़ी के पेड़ों की निर्मम कटाई बेहद दुखद है। श्रीमती अमृता देवी बिश्नोई सहित सभी 363 शहीदों की विरासत को बचाने के लिए आज फिर संत और पर्यावरण प्रेमी अनशन पर हैं। अब यह समय की जरूरत हो गई है कि पर्यावरण के मुद्दे पर सभी को गंभीर होने की आवश्यकता है। राज्य सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए और 'ट्री प्रोटेक्शन एक्ट' की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। हम पर्यावरण की कीमत पर ऐसा विकास स्वीकार नहीं कर सकते जो हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय कर दे।
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Durag Singh Rajpurohit 🇮🇳
जिस व्यक्ति पर निर्दलीय MLA ऋतु बनावत का डीप फेक वीडियो वायरल करने जैसे घिनौने आरोप लगे हों, जिसकी शिकायत विधानसभा स्पीकर और DGP तक पहुंची हो उसी व्यक्ति को प्रशासन ने मंच पर बुलाकर सम्मानित कर दिया। वाह! अब अपराध नहीं, पीड़िता की चीख अपराध बन गई है। पीड़िता स्वयं विधायक हैं , आम महिला होती तो ? विधायक दो साल से चिल्ला रही है। “मेरी अस्मिता को नोचा गया” और सिस्टम का जवाब है , आरोपी को माला, प्रमाण-पत्र और तालियां। यह सम्मान नहीं है. यह महिला की इज्ज़त पर थूकने की सरकारी रस्म है। डीप फेक मज़ाक नहीं होता। यह डिजिटल दुष्कर्म ही है। यह किसी महिला को ज़िंदा लाश बनाने की साज़िश है। और जब यह सब एक महिला विधायक के साथ हो, तो समझ लीजिए। आम औरत के लिए इस सिस्टम में कोई जगह नहीं बची। @BhajanlalBjp आप तो ऐसे न थे फिर कार्रवाई क्यों नहीं ? @DrRituBanawat @Barmer_Police @BarmerDm @BhajanlalBjp @PoliceRajasthan @RajPoliceHelp
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