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Twitter account of National Crime Investigation Bureau (NGO) Uttar Pradesh Division |

Uttar Pradesh, Bharat Katılım Ocak 2018
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सरकारी काम करने का सबसे फेमस तरीका, पहले सड़क बनाओ… फिर डिवाइडर के नाम पर वही सड़क तोड़ दो… फिर सड़क ठीक करो, फिर बिजली और पानी की पाइपलाइन डालने के लिए दोबारा खुदाई करो… एक बार फिर से सड़क को ठीक करो… फिर नाला बनाने के लिए फिर से तोड़ दो.. और अंत में… एक बार फिर नई सड़क बना दो! यानी काम एक, लेकिन मरम्मत बार-बार… ताकि व्यस्तता भी बनी रहे और बजट भी चलता रहे!
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न्यायाधीश: मैं आपकी तनख्वाह रोक रहा हूँ। पुरुष: नहीं, क्यों? लेकिन… न्यायाधीश: क्या आप अपने बुजुर्ग माता-पिता का आर्थिक रूप से भरण-पोषण करेंगे या नहीं? पुरुष: हाँ… न्यायाधीश: कब? आज ही अपने माता-पिता को पैसे भेजिए। यह संवाद सिर्फ एक अदालत का दृश्य नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है – जहाँ वही माता-पिता, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दी, बुढ़ापे में अपने ही घर में पराये बना दिए जाते हैं। कितना दर्दनाक है कि जिन हाथों ने हमें चलना सिखाया, आज वही हाथ अपने हक के लिए न्यायालय की चौखट पर मजबूर खड़े होते हैं। काश, हमारे देश की व्यवस्था ऐसी होती कि बुढ़ापे में ठुकराए गए मां-बाप को न्याय पाने के लिए वर्षों की लंबी लड़ाई न लड़नी पड़े। कम से कम SDM स्तर के अधिकारियों को यह अधिकार होता कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर सकें, और किसी भी असहाय माता-पिता को उनके अपने बच्चों से उनका हक दिला सकें। माता-पिता का सम्मान कोई एहसान नहीं, हमारा कर्तव्य है। और जब बेटा बेटी या बहू अपना कर्तव्य भूल जाएँ, तो कानून को इतना सुगम और सक्षम होना चाहिए कि वह इंसाफ जल्दी और सम्मान के साथ दिला सके। ~ साभार: @NCIBHQ
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रिलबाजी एक गंभीर बीमारी बन चुकी है, अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में ये देश के लिए कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी साबित हो सकती है। एक रील बनाने के लिए ट्रेन के टॉयलेट का इस्तेमाल करना आखिर कहाँ तक सही है? पहले लड़की जाती है, फिर लड़का – ये लोग आखिर समाज को क्या मैसेज देना चाहते हैं? ट्रेन का टॉयलेट कोई मजाक या शूटिंग की जगह नहीं है, ये यात्रियों की जरूरत के लिए होता है। इसे रील बनाने के लिए इस्तेमाल करना बेहद घटिया हरकत है और बेशर्मी की सारी हदें पार करना है। ऐसे लोग सिर्फ व्यूज़ और लाइक्स के लिए समाज में गंदगी फैला रहे हैं और गलत सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। आज ये सब देखकर आने वाली पीढ़ी क्या सीखेगी? @RailMinIndia को ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स पर सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए, ताकि कोई भी आगे से ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे। क्योंकि ये सिर्फ एक रील नहीं, बल्कि समाज के गिरते स्तर की निशानी होने के साथ साथ यात्रियों के सुरक्षा के लिए खतरा भी है। ~ साभार: @NCIBHQ
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पापा ‘विधायक जी’ के फास्ट फ्रेंड… और बेटा देहरादून की सड़कों पर हूटर बजाकर खुद को VIP समझ रहा था! उत्तराखंड पुलिस की चेकिंग में जैसे ही असली VIP से सामना हुआ – सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई! नतीजा? गाड़ी भी गई… और भोकाल भी हवा हो गया। @uttarakhandcops
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पेट्रोल बोतल में ले जाना मना है, तो ये महाशय इतना नियमों के पक्का निकले कि बाइक घर छोड़कर सिर्फ टैंक ही लेकर पहुंच गए पेट्रोल पंप।
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रामनवमी की शुभकामनाएं —————————— आप समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को एनसीआईबी मुख्यालय के तरफ से राम नवमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन हमें सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आप सभी अधिकारी इसी भावना के साथ देश की सेवा में निरंतर समर्पित रहें, यही कामना है। भगवान श्रीराम आप सभी को शक्ति, साहस और सफलता प्रदान करें इसी अभिलाषा के साथ एक बार पुनः आप एवं आपके परिजनों को मेरे आराध्य प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की ढेरों बधाईयां और शुभकामनाएं। ~ सादर: @NCIBHQ
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याद है न आपको…? अहमदाबाद का वो भयानक प्लेन क्रैश, जिसमें 241 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। जब पूरा देश सदमे में था…. लेकिन अब जो सामने आया है, वो उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला है। उस हादसे के बाद मलबा हटाने और राहत कार्य में लगे लोगों के लिए 16 लाख 74 हजार रुपए सिर्फ चाय, नाश्ता, पानी, दूध और बिस्कुट पर उड़ा दिए गए! जी हाँ… आपने एकदम सही पढ़ा – 16,74,000 रुपए सिर्फ नाश्ते पर! और सबसे हैरानी वाली बात है कि, अहमदाबाद म्युनिसिपल अथॉरिटी ने इस पर मुहर भी लगा दी।
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बांग्लादेश के राजबाड़ी शहर में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां 3 दर्जन से अधिक यात्रियों को लेकर जा रही बस पद्मा नदी में जा गिरी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में 16 लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना बस चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार में वाहन चलाने के कारण हुई। एक छोटी सी चूक ने दर्जनों जिंदगियों को खतरे में डाल दिया। यह हादसा साफ दिखाता है कि सड़क पर एक ड्राइवर की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होती है – एक गलत फैसला कई परिवारों की खुशियां छीन सकता है। ~ साभार: @NCIBHQ
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भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए वीरता पुरस्कार प्राप्त सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों तथा उनके परिवारों को सम्मानित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस निर्णय के तहत वीरता पदक विजेताओं, उनके जीवनसाथी (पुनर्विवाह तक विधवा/विधुर) तथा अविवाहित मरणोपरांत सम्मानित जवानों के माता-पिता को भारतीय रेलवे की ट्रेनों में फर्स्ट क्लास, 2AC और AC चेयर कार में एक सहयात्री के साथ आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश के कौशांबी की रहने वाली यह महिला हरियाणा में पकड़ी गई। बताया जा रहा है कि वह दो महीने पहले एक गैर-पुरुष के साथ घर से चली गई थी, जिसके बाद परिवार ने उसकी मौत की FIR तक दर्ज करा दी और निर्दोष पति और ससुरालजनों को इसके हत्या के जुर्म में जेल में डाल दिया गया। क्या कहें इन जैसे लोगों को, इसी कारण से कई बार बलात्कार, छेड़छाड़ या अन्य मामलों में महिलाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता हैं। साथ ही असली पीड़िताओं की आवाज भी कमजोर पड़ती है, जो पहले ही न्याय के लिए संघर्ष कर रही होती हैं। ~ साभार: @NCIBHQ
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अगर मैं यह कहूं कि दुनिया में सबसे असुरक्षित यात्रा भारतीय ट्रेनों की होती जा रही है, तो शायद इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। हाल ही में भारतीय ट्रेन में सीट को लेकर ट्रेन में हुई मारपीट की घटना ने एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटी-छोटी बातों पर हिंसा, अव्यवस्था और कानून का डर कम होना – ये सब मिलकर हालात को चिंताजनक बना रहे हैं। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक संकेत है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ट्रेन यात्रा सच में असुरक्षित होती चली जाएगी। अब जरूरत है @RailMinIndia के सख्त कार्रवाई और यात्रियों में जागरूकता की, ताकि हर यात्री का सफर सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
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जब अपने ही करे देश से गद्दारी… नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग अगर दुश्मन देश तक पहुंच रही हो, तो यह सिर्फ एक खबर नहीं – यह देश की सुरक्षा पर सीधा हमला है। गाजियाबाद पुलिस द्वारा पकड़ा गया यह जासूसी नेटवर्क एक खतरनाक सच्चाई उजागर करता है कि खतरा सिर्फ सीमाओं के बाहर से नहीं, बल्कि देश के अंदर छिपे गद्दारों से भी है। पंचर की दुकान की आड़ में जासूसी, रेलवे स्टेशन और सुरक्षा ठिकानों की फोटो-वीडियो पाकिस्तान भेजना, और कैमरों के जरिए लाइव जानकारी पहुंचाना – ये सब सुनियोजित देशद्रोह के उदाहरण हैं। सोचिए, जब देश में रहने वाले ही अपने स्वार्थ या लालच के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करेंगे, तो सबसे बड़ा खतरा किससे होगा? यह घटना सिर्फ एक गिरोह का पर्दाफाश नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि आपके आसपास एवं साथ रहने वाला भी देश का गद्दार हो सकता हैं। हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि देश के खिलाफ गद्दारी किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसलिए अब समय है सतर्क रहने का, समय है संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का और समय है हर गद्दार को सबक सिखाने का। क्योंकि देश की सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर तैनात जवानों की नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी है। इसलिए अगर आपको भी अपने आसपास किसी संदिग्ध व्यक्तियों या गतिविधियों की जानकारी है तो इसकी सूचना तुरंत अपने क्षेत्रीय पुलिस को दे। ~ साभार: @NCIBHQ
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क्या आप जानते हैं कि – भारत में हर साल लाखों लड़कियां और महिलाएं बलात्कार का शिकार होती हैं। लेकिन इनमें से केवल लगभग 20 से 25% ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराती हैं, बाकी समाज, परिवार या डर की वजह से चुप रह जाती हैं। इसी भय और चुप्पी के बीच एक और कड़वी सच्चाई छिपी होती हैं। इन लाखों पीड़िताओं में से अनुमानित 5% यानी 5,000 से अधिक महिलाएं और मासूम बच्चियां हर साल तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और तथाकथित “इलाज” के नाम पर यौन शोषण का शिकार बनती हैं। आरोपी खुद को “बाबा”, “तांत्रिक”, “पीर”, “आमिल”, “फेथ हीलर” या “एक्सॉर्सिस्ट” बताकर लोगों के डर और अंधविश्वास का फायदा उठाते हैं और इंसानियत को शर्मसार करते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे मामलों को पुलिस रिकॉर्ड में अलग से दर्ज नहीं किया जाता। कुछ केस सामने आते हैं, लेकिन असली संख्या कहीं ज्यादा है, क्योंकि बहुत से मामले कभी रिपोर्ट ही नहीं होते। यह सिर्फ एक अपराध नहीं – यह अंधविश्वास की आड़ में विश्वास, मासूमियत और इंसानियत का निर्मम शोषण है। इसलिए, ऐसे मामलों में सरकार को कड़े कानून बनाना चाहिए। ~ साभार: @NCIBHQ
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आखिर कौन है ये दरिंदा…? एक मासूम बच्चे के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार करने वाला, इंसान के रूप में छिपा यह शैतान अभी भी खुलेआम घूम रहा है। इसे पहचानना और सज़ा दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी है, तो कृपया तुरंत हमें DM करें। आपकी एक छोटी सी जानकारी भी इस हैवान को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। @NCIBHQ की टीम पूरी ताकत के साथ इसे सख्त से सख्त सज़ा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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Say no to Drugs....
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प्रिय उपभोक्ता, देशभर में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। ईंधन की आपूर्ति सामान्य है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर खरीदारी न करें। कृपया सामान्य रूप से ही ईंधन लें। एचपीसीएल अपने नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध और सुचारु ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। Dear Customers, There is no shortage of petrol, diesel, or LPG across the country. Fuel supplies remain stable, and adequate stocks are available. Customers are advised not to be misled by rumours or resort to panic buying. Please continue with normal consumption patterns. HPCL remains committed to ensuring an uninterrupted and seamless fuel supply across its network. ~ सौजन्य से: @HPCL
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2.30 लाख सब्सक्राइबर्स का ये मुकाम सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि आप सभी के विश्वास, समर्थन और जुड़ाव का प्रतीक है। एनसीआईबी मुख्यालय की ओर से X (ट्विटर) पर जुड़े सभी फॉलोवर्स और चाहने वालों का दिल से आभार। आपका साथ ही हमारी ताकत है और यही हमें निरंतर बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। आगे भी आपका सहयोग और विश्वास यूं ही बना रहे – यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। धन्यवाद। ~ सादर: @NCIBHQ
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आदरणीय @gupta_rekha जी, दिल्ली में एक अनुमान के मुताबिक 3 से 5 हजार रोहिंग्या परिवार रहते हैं, जिनकी मौजूदगी मुख्य रूप से मदनपुर खादर, कालिंदी कुंज और शाहीन बाग जैसे इलाकों में बताई जाती है। कुछ रिपोर्टों और शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे डीटीसी बसों, मेट्रो आदि में चोरी जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, तथा अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में झूठे आरोप लगाकर उगाही करने की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। यदि इन मुद्दों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में इसके दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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सोशल मीडिया पर इस प्रकार के सेमी पोर्न कंटेंट की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देशों की कमी के कारण ये प्लेटफॉर्म, जो कभी सूचना और मनोरंजन के माध्यम हुआ करते थे, अब धीरे-धीरे अनुचित सामग्री के प्रसार का साधन बनते जा रहे हैं। एनसीआईबी मुख्यालय द्वारा समय-समय पर इस संवेदनशील मुद्दे की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है, किन्तु अब तक कोई ठोस और प्रभावी परिणाम सामने नहीं आया है। अतः एक बार पुनः माननीय @PMOIndia जी से विनम्र आग्रह है कि इस विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसके दुष्प्रभावों पर संज्ञान लें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस प्रकार के कंटेंट की रोकथाम हेतु सख्त एवं स्पष्ट नीतियाँ बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएँ। @narendramodi
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