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बिल गेट्स के एनजीओ द्वारा 8-14 साल की ल़डकियों /युवतियों /महिलाओं को एक सुई लगाई जा रही है. एचपीवी HPV की सुई गर्भाश्य ग्रीवा (Cervix Uteri) कैंसर से बचाव के लिए देश भर में स्कूलों में कैंपेन चलाकर लगाई जाएगी.
कहा जा रहा है कि ये सुई कैंसर से बचाएगी जो कि factually सही नहीं है. डाटा इस बात को सपोर्ट नहीं करते हैं.
अगर आप पेरेंट्स हैं तो अब खुद से एक ही प्रश्न करिए जब देश में सेरविक्स /सरवाइकल कैंसर की दर प्राकृतिक रूप से घट रही है तो हमें सुई क्यूँ लगवानी है ?
2008 में भारत में इस टीके को क्लीनिकल ट्रायल के तहत 32000 ट्राइबल लड़कियों के लगाया गया था इसके घातक प्रभावों के कारण भारत ने 2010 में संयुक्त संसदीय समिति गठित की थी. समिति की 2013 में राज्य सभा में प्रस्तुत रिपोर्ट अनुसार टीके के काफी गंभीर साइड इफेक्ट हुए और उस पर रोक की बात थी. अब 2026 में ये सुई देश के इम्यूनिजेशन प्रोग्राम का भाग बन गई है.
स्वीडन एचडीआई रैंकिंग में शीर्ष देशों में शामिल है. महिलाओं की स्वास्थ्य की स्थिति यूरोप में और दुनियां में अच्छी मानी जाती. शिक्षा स्वास्थ्य भारत से बहुत बेहतर है कि कोई तुलना ही नहीं हो सकती.
वहां पर Cervix गर्भाश्य ग्रीवा कैंसर अपने आप इतना घट गया था कि सुई की जरूरत ही नहीं थी ये बात है 2006 की. (भारत में भी cervix कैंसर प्राकृतिक रूप से घट रहा है.)
फिर किसी राजनेता को hpv की सुई स्वीडन की महिलाओं, ल़डकियों के लगवाने का फितूर चढ़ा. 2016 तक आते आते स्वीडन के हर राज्य में 20 साल से कम उम्र की ल़डकियों में cervix cancer के केस में जबरदस्त उछाल आया. हर तहसील जिला स्तर पर केस दर्ज किए जा रहे हैं. डाटा नीचे दी गई इमेज में देख सकते हैं.
राजस्थान की बात करें तो राजस्थान सरकार के आँकड़ों अनुसार राजस्थान में 6-15 साल की 73 लाख लड़कियां है. वहीं 330 लाख कुल महिलाओं की संख्या है. 2024 में cervix एवम जननांगों से जुड़े कैंसर से मात्र मात्र 258 महिलाओं की मौत हुई. वहीं 2017 में ये आंकड़ा मात्र 65 ही था.
2024 में, चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में, राज्य में सभी तरह के कैंसर से 3,845 लोग मारे गए । इनमें से मात्र 258 (7 प्रतिशत) सर्वाइकल/Cervix कैंसर के मरीज थे. बाकी 93% के दवा इलाज की कोई बात नहीं है. राजस्थान में Cervix कैंसर से मरने वाली अधिकांश महिलाओं की उम्र 45-54 वर्ष थी. तो नाबालिग ल़डकियों के सुई क्यूँ लगे?
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ये स्वैच्छिक है. माता पिता की अनुमति जरूरी है. और इससे होने वाले किसी भी नुकसान की सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है. कोई मुआवजा नहीं मिलेगा.
राजस्थान में जो कैंसर के प्रकार बढ़ रहे हैं उसकी एक ही दवा है - साफ़ पानी. साफ़ हवा. साफ़ खाना. नहरों नदियों में उद्योगों के जहरीले पानी से कैंसर बढ़ा है.
अब बात करते हैं पंजाब की. पंजाब में 6-14 साल की कुल 20 लाख लड़कियां है. वहीं पंजाब की महिलाओं में Cervix गर्भाश्य की ग्रीवा का कैंसर रिपोर्ट होता है वो निम्न है -
2021=1279, 2022=1288,2023=1296,2024=1305, 2025=1314
वहीं मौतें हुई है वो बहुत सामान्य है -(2021=691, 2025=710)
और ये इतना बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है. पंजाब में 55,73,686 महिलाओं की जांच किए जाना प्रस्तावित है.
चिकित्सा विभाग स्कूलों में कैम्प लगाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करके टीके लगाने की तैयारी कर रहा.
28 फरवरी से अगले तीन महीने तक स्कूलों में 9-14 साल की ल़डकियों के एचपीवी टीके लगाने का दौर चलेगा.
Uwin पोर्टल पर केवल रजिस्ट्रेशन का मतलब है आपने अपनी सहमति दे दी है. (देखें कमेंट बॉक्स में UWIN पोर्टल का स्क्रीन शॉट)
सहमति देने का मतलब है आपने इससे होने वाले नुक़सान पढ़ लिए हैं.
नुकसान पढ़ लिए हैं इसका मतलब है आप इससे नुकसान से वाकिफ़ होकर लगवा रहे हैं.
अर्थात, आप स्वेच्छापूर्वक लगवा रहे हैं और किसी ने कोई दबाब नहीं डाला है.
आपको मुवावजे या ईलाज के लिए चवन्नी भी नहीं मिलेगी.
राजस्थान में निजी, सरकारी, केंद्रीय, नवोदय विद्यालय में चिकित्सा अधिकारी जाएंगे. और साढ़े आठ लाख ल़डकियों से बोलेंगे कि सुई सेफ है.
प्रशासन consent फॉर्म ऑफलाइन नहीं ले सकता चूंकि पेरेंट्स सवाल पूछेंगे अतः ऑनलाइन फॉर्म भर के लीगल एक्शन से बचना चाहते हैं.
ल़डकियों को समझायें कि स्कुल, अस्पताल, आंगनबाड़ी वाले बिना उनकी मर्जी के जबरदस्ती टीका नहीं लगा सकते. ये स्वेच्छिक है.
लड़कियों को भी अपने स्वास्थ्य, अधिकारों के प्रति जागरूक होकर आवाज उठानी चाहिए.
लेटर लिखे. मेल करे. सीएमएचओ को. प्रिन्सिपल को.
पेरेंट्स बात करे सरपंच सें. पंचायत सैक्रेटरी सें. एसडीएम सें. कलक्टर सें, कि एचपीवी सुई नहीं लगवानी है.
कोई भी एकेडेमिक रिकॉर्ड खराब करने के नाम पर डराकर टीके लगाना चाहे तो अपनी बेटी के साथ खड़े हों. उनका सपोर्ट करें.
सरकार सिर्फ टीका लगाना चाह रही. वहीं जिन पर्यावरणीय कारकों से ये होता है उस पर आंख मूंद कर बैठी है.
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