पंचायत सहायक यूनियन - उत्तर प्रदेश@psunionup
माननीय मुख्य सचिव जी @ChiefSecyUP
उक्त प्रकरण के मामले में एक पत्र में इतने बेबुनियादी आरोप लगाए गए है जो समस्त 57000+ पंचायत सहायक के आत्मसम्मान , मौलिकता और स्वाभिमान की गरिमा भंग करते है
> अतः हम जवाब चाहते है सभी आरोपों का किस आधार पर किस साक्ष्य के अंतर्गत कार्यवाही की गई।
1. पहला आरोप : हमारे मीडिया प्रभारी पर यह आरोप लगाया गया कि वह अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, पंचायत सहायकों को भड़काते हैं और कार्य में बाधा डालते हैं।
महोदय, ज़रा यह बताइए
यदि कार्य में वास्तविक कठिनाइयाँ न होतीं, तो क्या 57,000 पंचायत सहायक एक साथ विरोध करते, बहिष्कार करते, अपनी समस्याएँ गिनाते?
क्या सभी 57,000 कर्मचारी फालतू हैं?
हमारे मीडिया प्रभारी केवल समस्याओं को सामने रखकर कर्मचारियों को एकजुट कर रहे हैं, और यह हमारा मौलिक अधिकार है।
संगठित होना और अपनी कठिनाइयाँ बताना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, अपराध नहीं।
यहां पर यह भी ध्यान दिलाना ज़रूरी है कि
सभी डीएम महोदय द्वारा आए हुए समस्त आदेशों का सभी 75 जिलों में पालन किया जाता है जिसमें फैमिली ID, आयुष्मान कार्ड और अन्य सभी कार्य अपने निजी फोन इंटरनेट का प्रयोग करते हुए पंचायत सहायकों ने बिना किसी बहिष्कार के पूरे किए हैं।
लेकिन क्रॉप सर्वे फील्ड वर्क है, इसमें वास्तविक खतरे हैं—दुर्घटनाएँ हो सकती हैं, जंगली जीव काट सकते हैं।
तो ऐसे में कौन जिम्मेदार होगा?
इलाज का खर्च कौन देगा?
बीमा और संसाधनों की आपूर्ति कौन करेगा?
तभी तो आवाज उठाई जा रही की हमारी समस्याओं का समाधान किया जाए या सर्वे से पृथक रखा जाए
इन जायज़ प्रश्नों के समाधान की मांग करना अभद्रता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिक का अधिकार है।
महोदय, कृपया बताइए कि इन सवालों को उठाना कैसे अभद्रता और बाधा कहलाता है?
@IASEverester
@dmazamgarh
2. दूसरा आरोप जन्म-मृत्यु ID हैकिंग का लगाया गया सवाल यह है कि जब तक व्यक्ति के मोबाइल पर OTP न पहुँचे, तब तक कोई ID हैक कैसे हो सकती है?
फिर भी आदेश था कि पंचायत सहायकों की अलग से ऑपरेटर ID बनाई जाए, लेकिन किसी ग्राम पंचायत में यह आदेश लागू ही नहीं किया गया। यह तो स्वयं अपर मुख्य सचिव का आदेश था। और जब यही सचिवगण प्राइवेट संचालकों को ID देकर कार्य कराते हैं, तब आपकी जांच कहाँ चली जाती है? @IASEverester
@dmazamgarh
3. तीसरा आरोप :
जिस पंचायत सहायक ने ग्राम पंचायत में डिजिटल सेवाएं पहुँचाकर 400 लोगों को लाभान्वित किया, उसी को गबन का आरोपी बना दिया गया।
जब OSR खाते में कोई लेन-देन ही न हुआ, तो सवाल सचिव से क्यों नहीं?
वित्तीय मामलों का जिम्मा सचिव का है, न कि पंचायत सहायक का।
यह कार्रवाई लापरवाह सचिव की ढाल बनाकर ईमानदार सहायकों पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश है।
जब 57000 ग्राम पंचायत में यह नियम अभी तक लागू नहीं हुआ तो आप इसे गबन का नाम कैसे दे सकते है ?? @uppanchayatiraj
@DirectorUPPR @dmazamgarh
ये सभी सवाल आरोप बहुत बड़े प्रश्न खड़े करते यदि आपकी आपके ब्लॉक की कार्यप्रणाली इतनी ही पारदर्शी है तो आपने अभी तक क्यों सचिवों को OSR खाते में धनराशि जमा कराने हेतु निर्देशित किया क्यों आपके द्वारा सिर्फ पंचायत सहायक के कंधे से बंदूक चलाई जा रही है ।।।
महोदय हम शांत नहीं रहेंगे आपने हमारे स्वाभिमान, मौलिकता,और समस्त पंचायत सहायक साथियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है यह कतई बर्दाश्त नहीं है।
#JusticeForMediaPrabhari