GyanTalks With Sushila

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GyanTalks With Sushila

@TheGyanTalks

Jaipur, Rajasthan Katılım Mart 2026
91 Takip Edilen98 Takipçiler
GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@puran24 @sushilakajla2 @Rajasthanwalla मैंने ये कहा भी नहीं कि मेरे ट्विट पर ज़वाब दो, मैंने लिखा है कि मेरे मन में सवाल हैं उनका कोई तार्किक जवाब दे तो मैं भी राजस्थानी भाषा का समर्थन कर सकती हूं लेकिन आप जैसों के पास तार्किक जवाब नहीं होते तो वो ऐसे ही इधर उधर की अनावश्यक बातों से मुख्य मुद्दे को भटकाना चाहते हैं।
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Sushila kajla
Sushila kajla@sushilakajla2·
मैं राजस्थानी का समर्थन करना चाहती हूं लेकिन कुछ सवाल हैं मन में... अगर कोई इन सवालों का तार्किक जवाब देना चाहे तो स्वागत है और गाली गलौज करने वालों को इतनी ही कहूंगी कि अगर यही (गाली गलौज) राजस्थानी भाषा है तो फ़िर हमें नहीं चाहिए 🙏
Jat Ethnic Religion@Jat_Ethnic

★ मेरे राजस्थानी भाषा के समर्थकों से कुछ सवाल हैं। अगर आप तर्क के साथ जवाब देना चाहें तो स्वागत है, अन्यथा दूर रहें। 1. आज राजस्थानी को भाषा का दर्ज़ा दिलाने की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। कहा जा रहा है कि हिंदी के प्रभुत्व को समाप्त कर local language और culture को बचाना जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में यह पूरे राजस्थान की भाषा और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है, या सिर्फ एक विशेष क्षेत्र और वर्ग का प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास है? भारत में जाति और भाषा का घनिष्ठ सम्बन्ध है। वास्तव में भारत में भाषा सिर्फ communication का माध्यम नहीं, बल्कि symbolic power और social privilege का महत्वपूर्ण उपकरण है। जैसा कि Pierre Bourdieu ने कहा था, भाषा तय करती है कि किसकी आवाज़ वैध मानी जाएगी और किसकी बोली का मजाक उड़ाया जाएगा। भारत के हर क्षेत्र में अलग-अलग बोलियां बोली जाती हैं। बड़े शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों का उनकी बोली और accent को लेकर मजाक उड़ाया जाता है ताकि language based privilege कायम रखा जा सके। यह सिर्फ भाषाई नहीं, बल्कि social hierarchy और domination का हिस्सा है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में वरहदी, सोलापुरी, कोकणी, कोल्हापुरी, खानदेशी और अहिरानी जैसी अनेक बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन standard Marathi मुख्यतः पुणे के उच्चवर्णीय शहरी linguistic structure पर आधारित मानी जाती है। परिणामस्वरूप बाकी बोलियों को “ग्रामीण” या “कम प्रतिष्ठित” मान लिया जाता है। 2. अब सवाल यह है कि अगर राजस्थानी को भाषा का दर्ज़ा मिल गया, उसे पाठ्यक्रम में compulsory कर दिया गया और RPSC जैसी परीक्षाओं में उसका fixed weightage तय हो गया, तो क्या मारवाड़ के अलावा बाकी क्षेत्रों की बोलियों और communities को भी equal representation मिलेगा? क्या मेवाड़, हाड़ौती, ढूंढाड़, शेखावाटी, मेवात, बागड़ आदि क्षेत्रों की भाषाई पहचान को भी समान महत्व मिलेगा? यहां तक कि मारवाड़ के भीतर भी क्या यह प्रत्येक community की local language है? या फिर यह एक विशेष सामंती वर्ग की भाषा को पूरे राजस्थान पर impose करना होगा? अगर किसी विद्यार्थी को राजस्थानी नहीं आती, तो क्या वह competitive exams में पीछे नहीं रह जाएगा? फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि “हम किसी पर language नहीं थोप रहे”? 3. आपका दूसरा तर्क यह है कि “संस्कृति और परंपरा बचाने के लिए राजस्थानी जरूरी है।” लेकिन यहां एक और बड़ा सवाल है। आज राजस्थान में अधिकांश विद्यार्थी third language के रूप में संस्कृत लेते हैं। German और French जैसी भाषाओं का डर दिखाना सिर्फ psychological fear creation है। वास्तविकता यह है कि राजस्थान का बहुसंख्यक विद्यार्थी आज भी संस्कृत पढ़ता है। अब सवाल उठता है : • क्या राजस्थानी संस्कृत से पुरानी भाषा है? (Is Rajasthani older than Sanskrit?) • क्या राजस्थानी की अपनी independent script है? (Does Rajasthani have its own independent script?) • क्या राजस्थानी में दर्शन (Philosophy), तत्त्वमीमांसा (Metaphysics), अध्यात्म (Spirituality), Logic (तर्कशास्त्र), Scientific Grammar (वैज्ञानिक व्याकरण), Mathematics (गणित), Ayurveda (आयुर्वेद), Astronomy (खगोलशास्त्र), Political Thought (राजनीतिक चिंतन), Jurisprudence (न्यायशास्त्र), Yoga (योग), Meditation (ध्यान), Drama (नाट्यशास्त्र), Poetics (काव्यशास्त्र), Prosody (छंदशास्त्र), Social Ethics (सामाजिक नैतिकता) और Knowledge Tradition (ज्ञान परंपरा) जैसी विशाल intellectual tradition मौजूद है? संस्कृत सिर्फ धार्मिक भाषा नहीं, बल्कि Indian civilization की foundational knowledge language रही है। संस्कृत में : • दर्शन (Philosophy) • तत्त्वमीमांसा (Metaphysics) • अध्यात्म (Spirituality) • चेतना एवं आत्मा पर गहन चिंतन (Consciousness & Soul Inquiry) • मोक्ष एवं जीवन-दर्शन (Liberation & Philosophy of Life) • नैतिकता एवं सदाचार (Ethics & Moral Conduct) • धर्म एवं कर्तव्य सिद्धांत (Duty & Dharma Theory) • योग एवं ध्यान परंपरा (Yoga & Meditation Tradition) • तर्कशास्त्र एवं शास्त्रार्थ (Logic & Debate Tradition) • वैज्ञानिक व्याकरण (Scientific Grammar) • ध्वनि विज्ञान एवं उच्चारण शुद्धता (Phonetics & Pronunciation Precision) • भाषाई संरचनात्मक शुद्धता (Structural Linguistic Precision) • शब्द निर्माण की क्षमता (Word Formation Capacity) • समृद्ध दार्शनिक शब्दावली (Rich Philosophical Vocabulary) • विशाल शास्त्रीय साहित्य (Vast Classical Literature) 1/. @sushilakajla2 @Decentladki1 @Commonmanist @dank0029

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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 अनिवार्य ही हो जाएगी ..स्पेशली इन राजस्थान बोर्ड... बस कुछ ही समय में ( सालों में) ।
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Sushila kajla
Sushila kajla@sushilakajla2·
जो कह रहे हैं कि उर्दू, संस्कृत, सिंधी ईत्यादि पढ़ने में हमें दिक्कत नहीं है केवल राजस्थानी से दिक्कत है उनको बता दूं कि इनमें से एक भी भाषा अनिवार्य नहीं है, सब वैकल्पिक हैं। जिसको पढ़नी है वो पढ़े, नहीं पढ़नी उस पर थोपी नहीं जा रही। फ़िर राजस्थानी सब पर क्यों थोपनी है? राजस्थानी को वैकल्पिक रखो ना, कौन विरोध करता है वैकल्पिक का? जिसको पढ़नी होगी वो पढ़ेगा और जिसको नहीं पढ़नी, वो नहीं पढ़ेगा। रही बात राजस्थानी भाषा में करियर की तो वैकल्पिक में भी शिक्षक तो चाहिए ही होंगे? जिन्होंने राजस्थानी में स्नातक, स्नातकोत्तर किया है वो इस भाषा के शिक्षक बन जाएंगे। जिसको राजस्थानी में अच्छा प्रदर्शन करना होगा, इसी में अपना भविष्य बनाना होगा वो कक्षा 6 से तृतीय भाषा राजस्थानी चुन लेंगे। विरोध राजस्थानी भाषा का कभी था ही नहीं, विरोध है अनिवार्यता का। किसी पर थोपी क्यों जाए? तर्क के अभाव में लोग किसी भी चीज़ की तुलना किसी से भी किए जा रहे हैं।
Sushila kajla@sushilakajla2

मैं इस बात से सहमत हूं कि राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए लेकिन ये अनिवार्य नहीं वैकल्पिक होनी चाहिए। कक्षा 6 में बच्चे जो तृतीय भाषा चुनते हैं वहां संस्कृत/, राजस्थानी का विकल्प होना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी ये वैकल्पिक होनी चाहिए। ताकि जिनको ये सुविधाजनक लगे वो इसको चुन कर इस भाषा को नया आयाम दे सकें। राजस्थानी भाषा के और अधिक लेखक और कवि हमारे राज्य को मिल सकें व जिनको नहीं आती वो संस्कृत चुनें ताकि उनके लिए यह बाधा के रूप में काम न करे। धीरे धीरे संस्कृत की तरह राजस्थानी में भी लोगों की रूचि बढ़ जाएगी और सभी को आसान लगने लगेगी। हो सकता है us दिन सभी इसे अनिवार्य भी स्वीकार करने को तैयार हों लेकिन फिल्हाल वैकल्पिक के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए।

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Sushila kajla
Sushila kajla@sushilakajla2·
तरीका मिलता नहीं तुम्हें पार करने का मुझे, तुम मेरे सीने में एक सागर की तरह बहते हो। मैं जो रोई तो महफूज़ तुम भी न रह पाओगे, तुम मेरी आँख में काजल की तरह रहते हो।।
Sushila kajla tweet media
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 अब आपके और हमारे बच्चों को इंग्लिश और हिंदी के साथ एक और भाषा अनिवार्य पढ़नी ही होगी तो क्यों न वो हमारी अपनी लोकल बोली / भाषा हो..🙂
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 राजस्थानी को अनिवार्य किया है या वैकल्पिक? मुझे ये बताएं आप। क्योंकि मुझे राजस्थानी वैकल्पिक चाहिए ना कि अनिवार्य। और नेरेटिव कौन set कर रहा है ये मुझे बताने की आवश्यकता नहीं है।
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 मैडम जी अगर मुझे कुछ भी सीखने के लिए बाध्य किया जाएगा तो तो मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी कि मैं अपनी स्थानीय चीज़ें पहले सीखू..और आज की CBSE की गाइडलाइंस ने तीन लेंग्वेज और उनमें से दो नेटिव लेंगेज को ऑप्शनल नहीं अनिवार्य किया है तो यह तो आपके नेरेटिव के बिल्कुल खिलाफ हो गया
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GyanTalks With Sushila retweetledi
Ashok Meghwal
Ashok Meghwal@AshokMeghwal_·
मै राजस्थानी भाषा का खुलकर विरोध करता हूँ। राजस्थान हाई कोर्ट से लेकर UPSC जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं तक में आज भी अंग्रेज़ी भाषा का बड़ा प्रभाव है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अंग्रेज़ी शिक्षा को सामाजिक न्याय और समान अवसरों का शक्तिशाली माध्यम माना था। अगर वंचित समाज केवल सीमित भाषाई दायरे में रहता, तो राष्ट्रीय स्तर पर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना और भी कठिन हों जाता। राजस्थान के वो नेता लोग ओर शुभ चिंतक जो राजस्थानी भाषा लागू करने की मांग उठा रहे है। क्या उन्होंने अंग्रेजी भाषा को बढ़ावा देने की मांग उठाई? क्योंकि दलित/किसान/आदिवासी/गरीब का बेटा अंग्रेजी पढ़ने लग गया तो सिस्टम में आ जाएगा। जो यह लोग कभी नहीं चाहते है। युवाओं से ज्यादा कुछेक नेता, एक दो कोचिंग टीचर ओर कुछ शुभ चिंतकों को आखिर राजस्थानी भाषा लागू करवाने में इतनी क्यों दिलचस्पी है? मातृभाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन युवाओं को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, न्यायपालिका और वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए अंग्रेज़ी शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। आपने कभी अफसरों ओर नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ते देखा है? क्या वो राजस्थानी भाषा का समर्थन करते है? नहीं। फिर हम लोग कुछ लोगों की राजनैतिक महत्वाकांक्षा और कुछ लोग के निजी स्वार्थ के चक्कर में आकर क्यों राजस्थानी भाषा का समर्थन करे। एक तरफ़ पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देने की कवायद शुरू की गई थी। जिसे वर्तमान BJP सरकार ने बंद कर दिया। राजस्थानी भाषा को लागू करने की मांग करने वाले शुभ चिंतक अंग्रेजी भाषा के मुद्दे पर चुप क्यों है? क्या गांव,ढाणी के बच्चों को अच्छी उच्च गुणवत्ता वाली अंग्रेजी शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए। मेरा एक छोटा सा सवाल राजस्थानी भाषा के समर्थन में खड़े लोगों से है।
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@prem_baba1622 @RajendraMeena50 @AmitYaddav वैकल्पिक नहीं प्रेम जी, अनिवार्य की मांग कर रहे हैं कुछ लोग। विरोध क्यों न किया जाए?
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Prem Prakash Detha
Prem Prakash Detha@prem_baba1622·
@RajendraMeena50 @AmitYaddav स्कूल में संस्कृत पढ़के फिर मास्टर बनते समय भी पढ़ते हो तो कैसे समझ आती है ? ये भी ऑप्शनल आएगी जिनको अच्छी लगे लेंगे ना लगे दूसरी ले लेंगे इसमें इतना जूठा ही हो हल्ला करने की की जरूरत
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Rajendra Meena
Rajendra Meena@RajendraMeena50·
मान लो राजस्थानी भाषा को मान्यता मिल गई फिर सिलेबस में राजस्थानी जुड़ेंगी और जिन जिलों में इस भाषा की ABCD पता नहीं हैं उन जिलों के छात्र तो कॉम्पटीशन में पिछड़ेगे और पूरा फायदा तो 2-4 जिलों वालों को ही होगा। इसलिए सरकार को सबका साथ सबका विकास को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए।
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 पढ़ाई छोड़ने वाली स्थिति से बचने के लिए ही तो वैकल्पिक चाहिए, अनिवार्य नहीं।
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 ऐसे तो कल को राजस्थानी अनिवार्य हो गई तो क्या आप बच्चे को पढ़ाई करवाना छुड़वा देंगी?? हां अब हो सकता है आपके पास अन्य बोर्ड के ऑप्शन होंगे लेकिन मेरे पास तो गांव में थे ही नहीं तो मेरे ऊपर इम्पोजिशन था कि नहीं यह बताइए ?
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Siya7232 सहमत वैकल्पिक रखने में क्या ही दिक्कत है? वैकल्पिक रखने से भी बची रहेगी भाषा तो? जो राजस्थानी भाषा प्रेमी हैं वो पढ़ेंगे, पढ़ाएंगे और इसे बचाएंगे। अनिवार्य रूप से लागू करने पर पूर्वी राजस्थान इसे कैसे अपना पाएगा?
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Siya Choudhary
Siya Choudhary@Siya7232·
राजस्थानी भाषा का प्रेम अपनी जगह है लेकिन सिर्फ मारवाड़ी बोली को पूरे राजस्थान में लागू करना अन्य बोली वाले लोगों के साथ अन्याय होगा हालांकि इसका तोड़ क्षेत्रवार बोलियों को मान्यता देकर किया जा सकता है। और वैकल्पिक भाषा के रूप में मान्यता देकर किया जा सकता है, न कि अनिवार्य बाकी पश्चिमी राजस्थान की भाषा को पूर्वी राजस्थान में अनिवार्य करना गलत है।
Siya Choudhary tweet media
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GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 किसने थोपा आप पर? आपकी इच्छा रही तभी पढ़े होंगे? अनिवार्य शिक्षा तो 14 वर्ष की आयु तक ही है। उसके बाद आप चाहते तो छोड़ भी सकते थे।
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 तो राजस्थान बोर्ड में एक तृतीय भाषा को छोड़कर दसवीं तक कौनसा वैकल्पिक विषय था मैडम जी ?? मुझे अंग्रेजी मैथ्स साइंस में रुचि थी बाकी सब्जेक्ट्स ऐसे लगते है जैसे जर्बदस्ती थोपे गए है क्या आप जैसे इंटेलेक्चुअल ने मुझे ऑप्शन दिया था ?? फिर भी मैने पढ़ा या सीखा था न?
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 मैंने तो पढ़ रखी है, वैकल्पिक ही पढ़ी है, वैकल्पिक का ही समर्थन करूंगी। मैं तो चाहती हूं कि मेरे बच्चे भी इसे वैकल्पिक तौर पर ही पढ़ें, अपनी मर्ज़ी से पढ़े ना कि दवाब में। थोपने पर पढ़ना अच्छा नहीं लगता मुझे तो।
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 हां तो हमे अंग्रेजी की भी ज़रूरत है .. हमने सीखी भी है .. हमें आती भी है और उतनी ही ज़रूरत हमें राजस्थानी की भी है इसलिए हमें आने वाली पीढ़ी को अंग्रेज़ी के साथ राजस्थानी भी पढ़ानी है और सिखानी है इसलिए आप भी अपना मुंह हिसाब से खोले ..आपको नहीं चाहिए मत पढ़िए और बच्चों को पढ़ाइए
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 मेरे जले पर नमक का काम क्यों करेगी? मैंने राजस्थानी भाषा की वैकल्पिकता का कभी विरोध नहीं किया, मुझे तो आती है अच्छे से। अनिवार्य करना तो किसी पर थोपने वाली बात है। क्यों थोपी जाए किसी पर?
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@TheGyanTalks @sushilakajla2 हमने भी आपके आधुनिकता का ठेका नहीं लिया ..देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने दिशा निर्देश दिया है उसका पालन करने की कोशिश बिल्कुल करेंगे और करते रहेंगे । आप जैसे नृत्य करते रहना और हां आज की CBSE की गाइडलाइंस भी देख लेना थोड़ा ..शायद जले पर नमक का काम करे 🙂
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 थोड़ी बहुत भी बुद्धि नहीं है क्या? भाषा का विरोध और अनिवार्यता का विरोध में अंतर नहीं जानते क्या? मैंने विभिन्न भाषाओं के शब्द मेरी रूचि से सीखे हैं ना कि मुझ पर थोपे गए। आप चले हो so called राजस्थानी थोपने...
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M S RATHORE
M S RATHORE@Rathorems221·
@sushilakajla2 इसमें मूल हिंदी के कितने शब्द है और कितने अन्य भाषाओं के मैडम जी?
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 जितना तर्क के साथ खोल पाते हों। और हां, फ़ालतू की सभ्यता का ठेका नहीं उठा रखा मैंने जो आप कुतर्क के साथ सिर पर नृत्य करो और मैं तमीज से पेश आऊंगी। जितनी अकड़ से आप बोलोगे उतना रूतबा हम भी रखते हैं।
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GyanTalks With Sushila
GyanTalks With Sushila@TheGyanTalks·
@Rathorems221 @sushilakajla2 मुँह बंद नहीं,अंग्रेजी की मुझे आवश्यकता है और सिर्फ़ राजस्थान तक ही सीमित नहीं सबका जीवन। शिक्षा, रोज़गार ईत्यादि के लिए राजस्थान या भारत से भी बाहर जाना पड़ता है युवाओं को। वहां हम इस राजस्थानी के सहारे जिएंगे? हमें अंग्रेज़ी भाषा नहीं चाहिए होगी? इसलिए मुंह उतना खोलें
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