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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट । ।। उपभोक्ता देवों भव ।। अध्यक्ष - इं• संजय सिंह चौहान महासचिव -इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर

Lucknow, India Katılım Mayıs 2020
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बिजली कर्मियों के उत्पीड़न के विरोध में मध्यांचल मुख्यालय पर हुई विरोध सभा। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में मध्यांचल मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन : उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले जनपदों के बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं ने गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती हैं, तो बिजली कर्मचारी प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने संघर्ष समिति के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉरपोरेशन प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उत्पीड़न की सभी कार्यवाहियां वापस ली जाएं। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन वर्ष से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद अब तक आंदोलन से संबंधित कार्यवाहियां वापस नहीं हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में पिछले 533 दिनों से चल रहे आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इस दृष्टि से कार्यालय समय के उपरांत ही सभाएं एवं प्रदर्शन किए। इसके बावजूद बिजली कर्मियों का विभिन्न प्रकार से उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक औद्योगिक अशांति पैदा हो रही है। मध्यांचल मुख्यालय पर आयोजित विरोध सभा को संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहेल आबिद, श्री चंद, मोहम्मद वसीम,मोहम्मद इलियास, सनाउल्लाह, सरजू त्रिवेदी, के.एस. रावत, आर सी पाल एवं जय गोविन्द ने मुख्यतया संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आगरा में बिजली कर्मियों का जोरदार विरोध प्रदर्शन: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय, आगरा में बिजली कर्मियों की जोरदार विरोध सभा आयोजित की गई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों श्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेन्द्र राय ने संबोधित किया। संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति के संयोजक श्री शैलेन्द्र दुबे के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पॉवर कारपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के फलस्वरूप की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं। ऊर्जा मंत्री द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, सभी मुकदमे एवं एफआईआर वापस लेने सहित सभी दंडात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने की घोषणा की गई थी। संघर्ष समिति ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आज तक उत्पीड़न की कोई भी कार्यवाही वापस नहीं ली गई। ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिजली कर्मियों को उन्हें लागू कराने हेतु सड़क पर उतरने को विवश होना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय के बाद से बिजली कर्मी बिना कार्य बाधित किए शांतिपूर्ण ढंग से बिजली पंचायत, बिजली महापंचायत, क्रमिक अनशन, रैली एवं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन अनावश्यक रूप से उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां जारी रखे हुए है, जिससे कार्य का वातावरण प्रभावित हो रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संकल्पबद्ध हैं, किन्तु प्रबंधन लगातार उत्पीड़न की नीति अपनाकर बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की दिशा में कार्य कर रहा है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मियों का शांतिपूर्ण आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता तथा सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जातीं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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मुख्यमंत्री के सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण वाले बयान का संघर्ष समिति ने किया स्वागत : ऊर्जा निगमों में प्रबंधन बना रहा है टकराव का वातावरण: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री मा योगी आदित्यनाथ जी द्वारा शिक्षामित्रों की बैठक में दिए गए इस वक्तव्य का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों से अपनी मांगों को मनवाने के लिए टकराव के बजाय सकारात्मक एवं रचनात्मक (Positive & Constructive) दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि वह प्रारंभ से ही इसी मार्ग पर चल रही है। पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने हेतु संघर्ष समिति ने सदैव शांतिपूर्ण, संयमित और जिम्मेदार तरीके से आंदोलन किया है। इसके बावजूद यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक टकराव का वातावरण उत्पन्न हो रहा है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की है। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने डाउन साइजिंग के नाम पर अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश के बावजूद ऊर्जा निगम के संविदा कर्मी अभी तक आउटसोर्स निगम के अंतर्गत नहीं लाए गए हैं और उनका मनमानी ढंग से उत्पीड़न हो रहा है। नियमित कर्मचारियों के लिए अनुशासन सेवा नियमावली में संशोधन करके बिना चार्ज शीट दिए, बिना सफाई का मौका दिए सेवा से बर्खास्त करने का अधिकार ले लिया गया है। इससे ज्यादा उत्पीड़न की कार्यवाही और क्या हो सकती है, जिससे अनावश्यक टकराव का वातावरण बन रहा है। संघर्ष समिति ने बताया कि ध्यानाकर्षण आंदोलन के तहत पिछले 525 दिनों से बिजली कर्मचारी कार्यालय समय के बाद अथवा भोजनावकाश के दौरान ही विरोध सभाएं कर रहे हैं। आंदोलनरत रहते हुए भी कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है। विशेष रूप से जनवरी–फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर कर्मचारियों ने अद्वितीय कार्य किया, जिसकी देश-विदेश में सराहना हुई और उत्तर प्रदेश सहित भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी। संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पूरे आंदोलन के दौरान यह सुनिश्चित किया गया है कि उपभोक्ताओं एवं किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उनकी समस्याओं का समाधान हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों, कर्मचारियों एवं अभियंताओं के हितों की रक्षा तथा निजीकरण के विरोध में भी पूरी तरह सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है—ठीक उसी भावना के अनुरूप, जैसा माननीय मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा है। किन्तु यह अत्यंत खेदजनक है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने इस सकारात्मक दृष्टिकोण को नजरअंदाज करते हुए लगातार दमनात्मक कार्रवाइयां की हैं। दिनांक 19 मार्च 2023 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा श्री अरविंद कुमार शर्मा जी द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई कार्रवाइयां अब तक वापस नहीं ली गई हैं, बल्कि नई कार्रवाइयां की जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन जानबूझकर टकराव का वातावरण बना रहा है। संघर्ष समिति ने माननीय मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करें, जिससे बिजली कर्मचारियों को न्याय मिल सके। साथ ही अब तक आंदोलन के दौरान की गई सभी दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए तथा ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही समाप्त की जाए। संघर्ष समिति ने दोहराया कि बिजली कर्मचारी हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, किंतु प्रबंधन का रवैया लगातार तनाव और टकराव को बढ़ावा दे रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना आवश्यक है। उत्पीड़न के विरोध में चल रहे प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज औरैया एवं इटावा में सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें मुख्य रूप से श्री जितेंद्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेंद्र राय ने संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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एक वर्ष से वार्ता नहीं, उत्पीड़न जारी — प्रबंधन की उदासीनता से बिगड़ रही बिजली व्यवस्था : संघर्ष समिति के सुझावों पर अमल होता तो उपभोक्ताओं को न झेलनी पड़ती आज की परेशानियां: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष से संघर्ष समिति के साथ कोई वार्ता नहीं की गई है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है। इससे कार्यस्थल का वातावरण खराब हो रहा है और बिजली व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निरंतर कर्मचारी संगठनों से संवाद पर बल दिया जाता रहा है तथा मुख्य सचिव स्तर से भी नियमित वार्ता के निर्देश हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी है। संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि ठीक एक वर्ष पूर्व, 05 मई 2025 को क्रमिक अनशन के दौरान संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए बाध्य होना पड़ा और 12 मई 2025 को विस्तृत बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु एक व्यापक और ठोस प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया था। उस समय अध्यक्ष द्वारा इस पर अध्ययन कर आगे वार्ता करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई प्रगति नहीं हुई। संघर्ष समिति का कहना है कि यदि उस समय प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लिए गए होते, तो आज उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति से संबंधित जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वे काफी हद तक टाली जा सकती थीं। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि संवाद के बजाय दमनात्मक नीति अपनाकर भय का वातावरण बनाकर बिजली व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही टिकाऊ। संघर्ष समिति ने मांग की है कि भीषण गर्मी को देखते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रबंधन तत्काल सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस ले तथा संघर्ष समिति के साथ सम्मानजनक और सार्थक वार्ता शुरू करे। साथ ही, पूर्व में दिए गए सुझावों के आधार पर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उत्पीड़न के विरोध में 16 अप्रैल से चल रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज चित्रकूट एवं बांदा में सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों श्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेन्द्र राय ने संबोधित किया और कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो शीर्ष प्रबंधन तत्काल इस्तीफा दे : उत्पीड़न के दम पर पटरी से उतरी बिजली व्यवस्था नहीं चलाई जा सकती:पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घर के निजीकरण का टेंडर किया तो उसी समय प्रांतव्यापी आंदोलन शुरू होगा: प्रदेश की चरमराती बिजली व्यवस्था को लेकर आज कानपुर में केस्को मुख्यालय पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले बिजली कर्मियों की एक विशाल और जोरदार सभा आयोजित की गई। सभा में केस्को डिस्कॉम से आए कर्मचारियों और अभियंताओं ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि यदि प्रबंधन बिजली व्यवस्था संभालने में अक्षम है, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल पद छोड़ दे। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने एलान किया कि यदि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन और अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का एकतरफा टेंडर किया गया तो उसी समय बिना और कोई नोटिस दिए प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी प्रांत व्यापी आंदोलन शुरू कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली व्यवस्था सुधारने में पूरी तरह विफल प्रबंधन अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह दमनकारी नीति न केवल कर्मचारियों का मनोबल तोड़ रही है, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को भी पूरी तरह पटरी से उतारने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन में वर्टिकल व्यवस्था लागू करना, संविदा कर्मियों को बाहर करना, नियमित पदों में कटौती करना और अव्यवहारिक प्रयोग करना—ये सब प्रबंधन की गलत नीतियों के उदाहरण हैं, जिनके कारण आज राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश जनपदों में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है और जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “बिजली व्यवस्था सुधारने का एकमात्र रास्ता है कि अनुभवी और योग्य अभियंताओं को पावर कॉरपोरेशन व ऊर्जा निगमों का नेतृत्व सौंपा जाए, जो कर्मचारियों को विश्वास में लेकर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशानुसार निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें।” संघर्ष समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। हर शिकायत का त्वरित समाधान किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का मनमाने तरीके से उत्पीड़न किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। शैलेन्द्र दुबे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और बिजली कर्मियों पर की गई हर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को निरस्त नहीं किया जाता।” केस्को मुख्यालय पर आयोजित इस सभा को शैलेन्द्र दुबे,जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.एस. बाजपेई, विजय त्रिपाठी, गौरव दीक्षित, रफीक अहमद, आर.एस. मिश्रा सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इसके साथ ही आज कानपुर क्षेत्र के गोविंद नगर मुख्यालय और पनकी ताप विद्युत गृह में भी विरोध सभाएं आयोजित कर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की गई। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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जवाहरपुर (2*660 MW) एवं पनकी (1*660 MW) तापीय परियोजना के सम्पूर्ण ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने का प्रस्ताव है। यह दोनों तापीय परियोजना लगभग 22000 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है, यह परियोजनाओं बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने पूरे 8 साल कड़ी मेहनत कर बनाई है और आज इन परियोजनाओं से पूरे प्रदेश को बिजली मिल रही है। अभी कुछ महीने पहले ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने इन परियोजनाओं का लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को समर्पित किया है अब इन नई तापीय परियोजनाओं को 25 साल के लिए निजी क्षेत्र को दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे प्रदेश के बिजली कर्मी इस निजीकरण के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करते हैं और जिस प्रकार से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण को रोका है इसी प्रकार तापीय परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के निजीकरण के लिए की जा रही यूनिफाइड टेंडर की प्रक्रिया को भी रोकेंगे। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से सम्पूर्ण परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के कार्यों को 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की कृपा करें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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जवाहरपुर (2*660 MW) एवं पनकी (1*660 MW) तापीय परियोजना के सम्पूर्ण ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने का प्रस्ताव है। यह दोनों तापीय परियोजना लगभग 22000 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है, यह परियोजनाओं बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने पूरे 8 साल कड़ी मेहनत कर बनाई है और आज इन परियोजनाओं से पूरे प्रदेश को बिजली मिल रही है। अभी कुछ महीने पहले ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने इन परियोजनाओं का लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को समर्पित किया है अब इन नई तापीय परियोजनाओं को 25 साल के लिए निजी क्षेत्र को दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे प्रदेश के बिजली कर्मी इस निजीकरण के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करते हैं और जिस प्रकार से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण को रोका है इसी प्रकार तापीय परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के निजीकरण के लिए की जा रही यूनिफाइड टेंडर की प्रक्रिया को भी रोकेंगे। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से सम्पूर्ण परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के कार्यों को 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की कृपा करें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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जवाहरपुर (2*660 MW) एवं पनकी (1*660 MW) तापीय परियोजना के सम्पूर्ण ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने का प्रस्ताव है। यह दोनों तापीय परियोजना लगभग 22000 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है, यह परियोजनाओं बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने पूरे 8 साल कड़ी मेहनत कर बनाई है और आज इन परियोजनाओं से पूरे प्रदेश को बिजली मिल रही है। अभी कुछ महीने पहले ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने इन परियोजनाओं का लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को समर्पित किया है अब इन नई तापीय परियोजनाओं को 25 साल के लिए निजी क्षेत्र को दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे प्रदेश के बिजली कर्मी इस निजीकरण के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करते हैं और जिस प्रकार से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण को रोका है इसी प्रकार तापीय परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के निजीकरण के लिए की जा रही यूनिफाइड टेंडर की प्रक्रिया को भी रोकेंगे। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से सम्पूर्ण परियोजना के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के कार्यों को 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की कृपा करें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण का फैसला वापस होने और उत्पीड़न की कार्यवाहियां समाप्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा : जन-जागरण अभियान के अंतर्गत हाथरस और मथुरा में हुईं जोरदार विरोध सभाएं: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज ऊर्जा निगम प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदेश के बिजली कर्मचारी भीषण गर्मी के बीच उपभोक्ताओं और किसानों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं, किंतु इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उन पर दमन और उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही हैं, जो अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य हैं। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि उत्पीड़न की कार्यवाहियां तत्काल प्रभाव से वापस नहीं ली गईं, तो बिजली कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश और प्रबंधन का दमनात्मक रवैया ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति को जन्म देगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि इसी बीच प्रबंधन द्वारा पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के संचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का अचानक लिया गया निर्णय कर्मचारियों के आक्रोश को और भड़काने वाला है। संघर्ष समिति ने दोहराया कि जनता के धन से निर्मित ऊर्जा परिसंपत्तियों को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय की घोषणा के बाद से विगत 517 दिनों से प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी निरंतर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि जिस दिन निजीकरण का टेंडर जारी किया जाएगा, उसी दिन प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी सामूहिक “जेल भरो आंदोलन” प्रारंभ करेंगे। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा शांतिपूर्ण आंदोलनों के बावजूद कर्मचारियों पर लगातार दमनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देश एवं समझौते के बावजूद आज तक वापस नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में 16 अप्रैल से प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज हाथरस और मथुरा में बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी श्री जितेंद्र सिंह गुर्जर, श्री महेंद्र राय एवं श्री मोहम्मद वसीम ने संबोधित किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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जवाहरपुर एवं पनकी तापीय परियोजना के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में एवं आंदोलन के दौरान हुई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों के विरोध में जन जागरण अभियान जनपद हाथरस में संपन्न हुआ। #stop_victimization_of_uppcl_employees @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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जवाहरपुर एवं पनकी तापीय परियोजना के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 साल के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में एवं आंदोलन के दौरान हुई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों के विरोध में जन जागरण अभियान जवाहरपुर तापीय परियोजना में संपन्न हुआ। #stop_victimization_of_uppcl_employees @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पनकी एवं जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों में आक्रोश, 13 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध का ऐलान : टेंडर हुआ तो सीधी कार्रवाई की चेतावानी: लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पनकी (660 मेगावाट) एवं जवाहरपुर (2×660 मेगावाट) ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण (O&M) कार्य को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से निजी कंपनियों को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता एवं कड़ा विरोध व्यक्त किया है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का कोई एकतरफा टेंडर किया गया तो बिजली कर्मी उसी समय कार्य स्थल से बाहर आकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे और प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। संघर्ष समिति की कोर कमेटी की 26 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस जनविरोधी एवं कर्मचारी-विरोधी निर्णय का पुरजोर विरोध किया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा कि पनकी एवं जवाहरपुर की सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित अत्याधुनिक इकाइयाँ प्रदेश की महत्वपूर्ण विद्युत परियोजनाएँ हैं, जिनके निर्माण में जनता की गाढ़ी कमाई के हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जवाहरपुर परियोजना पर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप विद्युत गृह पर लगभग 8,000 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य निजी कंपनियों को सौंपना न केवल अनुचित है, बल्कि जनहित के भी प्रतिकूल है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि इस प्रकार के निर्णय से सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर होगा तथा निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिलेगा। निजीकरण से बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा बोझ प्रदेश के आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। संघर्ष समिति ने प्रबंधन से मांग की है कि पनकी एवं जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा इस संबंध में लिया गया निर्णय निरस्त किया जाए। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर एवं अभियंता कार्य स्थल से बाहर आकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। प्रबंधन एवं सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आगामी 13 मई 2026 को प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करेंगे। इसके उपरांत भी यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो संघर्ष समिति द्वारा प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि वह प्रदेश की बिजली व्यवस्था, कर्मचारियों के हित एवं आम जनता के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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ताप बिजली घरों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का उग्र विरोध: अलीगढ़ व हरदुआगंज में बड़ा विरोध प्रदर्शन : आंदोलन तेज करने की चेतावनी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के तहत आज अलीगढ़ एवं हरदुआगंज ताप बिजली घरों में सैकड़ों बिजली कर्मियों, अभियंताओं और कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी विरोध सभाओं का क्रम पूर्ववत जारी रहा, जिससे स्पष्ट है कि बिजली कर्मियों में निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पनकी एवं जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण (O&M) के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस नहीं ली गई तथा आंदोलन के चलते बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन और ऊर्जा निगम के उच्च अधिकारी सुनियोजित तरीके से निजीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं और कर्मचारियों का उत्पीड़न कर कार्यस्थल का माहौल खराब कर रहे हैं। यह न केवल औद्योगिक शांति भंग करने वाला कदम है, बल्कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को भी संकट में डालने वाला है। संघर्ष समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भीषण गर्मियों के दौरान जब उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, उस समय प्रदेश के बिजली कर्मी पूरी निष्ठा के साथ उपभोक्ताओं और किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके विपरीत प्रबंधन टकराव की स्थिति पैदा कर रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि जानबूझकर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पनकी एवं जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से 25 वर्षों के लिए निजी हाथों में सौंपने के निर्णय के विरोध में आंदोलन की रूपरेखा तय करने हेतु संघर्ष समिति की कोर कमेटी की आपातकालीन बैठक दिनांक 26 अप्रैल, 2026 को बुलाई गई है। इस बैठक में आगे के आंदोलन की घोषणा एवं नोटिस जारी किया जाएगा। आज हरदुआगंज ताप बिजली घर एवं अलीगढ़ में आयोजित विरोध सभाओं को मुख्य रूप से संजय सिंह चौहान,जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, राहुल बाबू कटिहार सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया और निजीकरण के खिलाफ एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मी किसी भी स्थिति में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे और जनहित में इस निजीकरण के निर्णय को वापस कराने तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने तक आंदोलन जारी रहेगा। #stop_victimization_of_uppcl_employees #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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मार्च 2023 से लेकर अब तक आंदोलन के दौरान हुई समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में मेरठ में बिजली कर्मियों की हुई विशाल ऐतिहासिक रैली। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि लोकतांत्रिक तरीके से किए गए आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें, जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके तथा बिजली कर्मी भीषण गर्मियों में प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने में अपना पूर्ण योगदान दे सके। #stop_victimization_of_uppcl_employees #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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शक्तिभवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ द्वारा उ.प्र. पावर कॉरपोरेशन लि. के नव नियुक्त प्रबंध निदेशक श्री नितीश कुमार, आईएएस का भव्य स्वागत किया गया। संघ के महासचिव जितेंद्र गुर्जर ने कहा कि श्री नितीश कुमार एक दूरदर्शी एवं परिणामोन्मुखी प्रशासनिक अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में दक्षिणांचल डिस्कॉम में अनेक नवाचारात्मक एवं संरचनात्मक सुधार लागू किए। उनके नेतृत्व में स्थापित इलेक्ट्रिकल म्यूजियम (Electrical Museum) तथा मॉडल सबस्टेशन (Model Substation) जैसे प्रयास न केवल तकनीकी प्रशिक्षण को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि कर्मचारियों की कार्यकुशलता, सुरक्षा जागरूकता एवं व्यावहारिक ज्ञान को भी नई दिशा देते हैं। अभियंता संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री नितीश कुमार के नेतृत्व में पावर कॉरपोरेशन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ एवं उपभोक्ता-केंद्रित बनेगी। साथ ही विद्युत क्षेत्र में नवाचार, दक्षता एवं सेवा गुणवत्ता के नए मानक स्थापित होंगे। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश की जनता को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सभी अभियंता पूर्ण मनोयोग से प्रयास जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl
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मेरठ मुख्यालय पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का जोरदार जमावड़ा : उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस न होने पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी : पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय, मेरठ पर सैकड़ों बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों का विशाल जमावड़ा हुआ। इस दौरान प्रदेश के अन्य जनपदों में भी निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा प्रभावी विरोध सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों ने अपना आक्रोश प्रकट किया। सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की “डर और दमन” की नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की  होगी। उन्होंने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप लगाते हुए कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने हाल ही में पनकी ताप बिजली घर और जवाहरपुर ताप बिजली घर के संचालन और अनुरक्षण का 25 साल के लिए निजी कंपनी को टेंडर जारी करने का फरमान निकाला है । यह सब कर्मचारियों के बीच में आंदोलन भड़काने वाला कदम है। सभा को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी मुख्यालय दिल्ली के यशपाल शर्मा ने संबोधित किया। केन्द्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, योगेन्द्र लाखा, आर सी पाल, सी पी सिंह ,एवं निखिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं—दोनों के हित में नहीं हैं। वक्ताओं ने ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से मिल रही लगातार शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों—जैसे एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां—को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। इसके साथ ही डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने, निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली तथा लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। संघर्ष समिति ने मई 2025 में सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए उनका विरोध किया और कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा समाप्ति जैसे प्रावधान पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई। संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील की कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का साझा संघर्ष है। निजीकरण से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी। सभा में संघर्ष समिति ने संकल्प दोहराया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी निर्बाध एवं बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और निजीकरण एवं उत्पीड़न के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे। #stop_victimization_of_uppcl_employees @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews
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उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक श्री नीतीश कुमार आई ए एस से शक्ति भवन में मुलाकात कर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें कार्यभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई दी। @UPPCLLKO @dvvnlhq
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DVVNL के प्रबंध निदेशक श्री नितीश कुमार के उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि (UPPCL) के प्रबंध निदेशक (MD) के पद पर नियुक्त होने पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात सिंह व समस्त सदस्यों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। @UPPCLLKO
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