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Osimertinib (Tagrisso 80 mg) फेफड़ों के कैंसर (EGFR-positive NSCLC) की दवाई है। प्रति स्ट्रिप की कीमत ₹1,51,670 है। लेकिन अगर किसी प्राइवेट हॉस्पिटल इलाज कराते है तो आपके लुभावने ऑफर देने के लिए इसी दाम में आपको 2–3 स्ट्रिप पकड़ा देते हैं। इतनी महंगी दवाओं के चलते गरीब मरीज इलाज शुरू होने से पहले ही हार मान जाते हैं। अब असली सवाल सरकार और हेल्थ अथॉरिटीज से पूछे जाने चाहिए 👇 भारत में कैंसर दवाओं का MRP इतना आसमान छूता क्यों है? प्राइवेट हॉस्पिटल मरीजों को ओवरप्राइस्ड स्ट्रिप्स क्यों बेचते हैं? इस पर कौन-सी जांच होती है? क्या FSSAI/CDSCO या राज्य ड्रग कंट्रोलर ने कभी इन दवाओं की प्राइस ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की है? क्या सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर मरीज को जेन्युइन MRP पर ही दवाई मिले? PM-JAY/CGHS जैसी योजनाओं में ये दवाएं शामिल क्यों नहीं होती, जिससे हजारों मरीज बिना इलाज के मर जाते हैं? मल्टीनेशनल कंपनियों को भारत में मनमाने दाम तय करने की छूट किस आधार पर दी जाती है? क्या कैंसर दवाओं पर चिकित्सा माफिया–प्राइवेट हॉस्पिटल–डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क की जांच कभी हुई? कैंसर मरीज के लिए यह दवाई जीवन और मृत्यु का फासला तय करती है, लेकिन सिस्टम ने इसे अमीरों की दवा बनाकर छोड़ दिया है।








