Aman Singh
196 posts

























भेदभाव और और जातीय अहंकार अंजना ओम कश्यप जी के व्यवहार में साफ़ दिखाई दिया, जो उन्होंने कल बहस के दौरान मेरे साथ किया। मैंने तो केवल उनके एक पुराने बयान को याद दिलाया था, जिसमें वह कहती हैं.. “मैं व्यक्तिगत रूप से आरक्षण की विरोधी हूँ। मुझे लगता है कि आरक्षण सबसे बड़ा अन्याय है। मेरे पिता ओमप्रकाश तिवारी हैं। हम भूमिहार हैं, मेरे पति ब्राह्मण हैं। हम सभी ऐसे परिवेश में पले-बढ़े हैं जहाँ हम आरक्षण से घृणा करते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि हमारा हिस्सा हमसे छीन लिया गया है।” मैंने तो सिर्फ़ उनके इसी बयान को कोट किया था। इस पर वह भड़क गईं, गुस्सा हो गईं। मुझे टीवी स्क्रीन से हटवा दिया गया और फिर बहस से भी निकलवा दिया गया। यही है जातीय अहंकार और भेदभाव। वह इसे शांति से सुन सकती थीं और तथ्यों के आधार पर खंडन भी कर सकती थीं। लेकिन जो लोग एक्टर धर्मेंद्र जी की झूठी मौत की खबर चला सकते हैं, लालू जी को झूठे “जंगलराज” और “भूरा बाल साफ़ करो” जैसे मुद्दों पर बहस करवा सकते हैं,जब बात खुद पर आती है तो उनका रवैया अहंकार, घमंड और जातीय दंभ में बदल जाता है। उस स्थिति में वे किसी की भी इज़्ज़त नहीं करतीं। Madam, this is not personal. This is who you are your arrogance and attitude. And throwing someone out of a debate, yes, this is exactly how caste arrogance operates in universities. I hope you will understand.












