आलोक कुमार

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आलोक कुमार

आलोक कुमार

@alok

देवनागरी में स.मो.से. (संक्षिप्त मोबाइल संदेश)। कुर्सीतोड़ इंकलाबी। https://t.co/BGD3s6jDnl पर भी पाया जाता हूँ

बेंगलूरु, भारत Katılım Temmuz 2007
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आलोक कुमार
@sifarchand चलिए आज इनके बारे में भी बता चल गया। en-wikipedia-org.translate.goog/wiki/Ibn_Khald… ट्यूनिस से हैं, अब पूरा दिन लगाके समझता हूँ कि तमिळनाडु की राजनीति का पैटर्न इनपे कैसे फ़िट होता है
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cigarchand
cigarchand@sifarchand·
im afraid the intersection of {people familiar w TN political history} and {people familiar with ibn khaldun} might be too small
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cigarchand
cigarchand@sifarchand·
tamil nadu has its own version of the khaldunian civilisational cycle where an actor launches a party, becomes CM, passes it on to successors who are fulltime politicians. the decadent dynasty is then defeated by the next steppe army (kollywood fandom) w superior asabiyyah
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आलोक कुमार
हूडी स्टेशन के बाहर तुलसीदास जी। चाय पीने रुक गया। किसी पवन कुमार के बारे में बात हो रही है।
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आलोक कुमार
कौन हैं वो लोग जो सोमवार सुबह बिस्तर से उछल कर उठते हैं? भीड़ इतनी है चेहरे उतने ही लटके। पर थोड़ी ही देर में नींद खोलने वाला कोई न कोई गलाटा शुरू हो ही जाएगा।
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आलोक कुमार
@avtansa @Konkanist @ajaydiv न और ण का फ़र्क तो स्कूल और घर दोनों में ही बचपन से ही पता था लेकिन श और ष का फ़र्क आज भी नहीं पता। हमेशा शलगम वाला श और षट्कोण वाला ष के नाम से ही फ़र्क किया गया।
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Śaśā́ṅkaḥ 𑖫𑖫𑖯𑖒𑖿𑖎𑖾
Amidst the nasal-n, flat-n debate, it is absolutely worth noting that some Indo-Aryan languages (and some dialects of those languages) have genuinely lost the distinction between “retroflex” ṇ and “dental” n. Speakers of said languages pronounce both like the “dental” n.
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Batmanrealista
Batmanrealista@batmanrealista·
Esse foi o dia em que o pânico fez o @Alok tocar Gaga de Ilhéus na Tomorrowland 🤣
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आलोक कुमार retweetledi
RUBEL ALI
RUBEL ALI@Virall_Memess·
मैं जब छोटा था, हमारे मोहल्ले में एक लड़का रहता था। बहुत सीधा। पढ़ाई में अच्छा। मोहल्ले के छोटे बच्चों को फ्री में पढ़ा देता था, बुज़ुर्गों का सामान उठा देता था, और हर किसी को देखकर मुस्कुरा देता था। सब कहते थे— “बहुत अच्छा लड़का है… बस किस्मत साथ दे दे।” उसका सपना बड़ा सीधा था— उसे पढ़ना था। शहर जाकर कॉलेज करना था। अपनी ज़िंदगी अपने दम पर बनानी थी। 12वीं के बाद उसका अच्छे कॉलेज में नंबर भी आ गया। घर में पहली बार किसी का इतना अच्छा admission हुआ था। वो बहुत खुश था। हम सबको मिठाई खिलाई थी उसने। लेकिन घर में ख़ुशी ज़्यादा दिन नहीं रही। दो दिन बाद उसके पिता ने साफ़ कह दिया— “इतनी पढ़ाई का क्या करेगा? दुकान संभालो। घर का काम सीखो। ज़िंदगी किताबों से नहीं चलती।” उसने बहुत समझाया। कहा— “एक मौका दे दीजिए, मैं खुद संभाल लूँगा।” लेकिन घरवालों को डर था— अगर वो बाहर चला गया, तो दुकान कौन संभालेगा? लोग क्या कहेंगे? इतना पढ़-लिखकर भी आखिर करना तो यही है। बस… उसका admission छूट गया। किसी ने उसकी मजबूरी नहीं देखी। सबने सिर्फ़ अपना मतलब देखा। धीरे-धीरे उसने पढ़ाई छोड़ दी। सुबह दुकान, दोपहर दुकान, रात हिसाब। चेहरे पर वही लड़का था… बस आँखों से चमक चली गई थी। कुछ साल बाद उसकी शादी कर दी गई। फिर बच्चा। फिर ज़िम्मेदारियाँ। फिर वही रोज़ की भागदौड़। बाहर से सब ठीक दिखता था। दुकान चल रही थी। घर चल रहा था। कमाई ठीक थी। लेकिन अंदर से वो लड़का कहीं रुक गया था। जब भी किसी बच्चे को बैग लेकर स्कूल जाते देखता, कुछ सेकंड उसे बस देखता रह जाता। जब भी कोई कॉलेज की बात करता, वो चुप हो जाता। एक बार मोहल्ले में किसी ने पूछा— “तू कभी बाहर नहीं गया?” वो हँसकर बोला— “घरवालों ने ज़रूरत ही नहीं समझी।” बात छोटी थी… लेकिन बहुत कुछ कह गई। कुछ साल बाद उसके छोटे भाई को भी वही मौका मिला। इस बार घरवालों ने उसे बाहर पढ़ने भेज दिया। क्योंकि अब दुकान संभालने वाला कोई था। उस दिन पहली बार उसके चेहरे पर अजीब-सी मुस्कान थी। खुशी नहीं। बस एक चुप दर्द। जैसे कोई अंदर ही अंदर समझ गया हो कि उसे रोका ज़रूरत ने नहीं… सोच ने था। आज उसके पास सब है। घर है। दुकान है। परिवार है। बस एक चीज़ नहीं है— वो ज़िंदगी जो उसकी हो सकती थी। सच कहूँ तो कभी-कभी बर्बादी शोर से नहीं आती। कभी-कभी वो चुपचाप आती है— ज़िम्मेदारी के नाम पर, परिवार के नाम पर, और “हम तुम्हारे अच्छे के लिए कह रहे हैं” के नाम पर। हर टूटे हुए इंसान की कहानी किसी हादसे से शुरू नहीं होती। कुछ लोग बस इसलिए अधूरे रह जाते हैं क्योंकि उनके सपनों का फैसला उन्होंने खुद नहीं लिया होता। गलती हमेशा इंसान की नहीं होती… कभी-कभी गलती उस सोच की होती है जो प्यार को ज़िद, सपनों को बेवकूफ़ी, और चुप रह जाने को संस्कार समझ लेती है।
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आलोक कुमार
घूमने फिरने के मक़सद से भी जा सकते हैं या तीर्थयात्री होना ज़रूरी है?
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh

बड़ी ख़बर चीन ने कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए ‘ऑफिशियल पिलग्रीम्स’ की तादाद बढ़ाई 2026 की तीर्थयात्रा के लिए चीन 1000 भारतीय तीर्थयात्रियों को सुविधाएँ मुहैया कराएगा भारत में चीन के दूतावास की प्रवक्ता @ChinaSpox_India ने दी जानकारी यानि कि इस साल 1000 भारतीय ‘आधिकारिक तीर्थयात्री’ के तौर पर कैलाश मानसरोवर के दर्शन कर सकेंगे पहले ये तादाद (500+250) 750 तीर्थयात्रियों की थी (वीडियो : 2025 कैलाश मानसरोवर दर्शन)

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Ashok yogi
Ashok yogi@ashokyogi1994·
@zeerajasthan @HANUMANKISAN @alok 4th Grade भर्ती 2024 इस भर्ती को @alokrajRSSB PH ओर SP कैटेगरी के अभ्यर्थियों की सीटों को Hold करके रिजल्ट निकालना चाहिए अन्यथा VDO भर्ती 2021 की तरह हो जाएगी सर 4th Grade @1stIndiaNews
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Ashok yogi
Ashok yogi@ashokyogi1994·
4th Grade भर्ती 2024 इस भर्ती को @alokrajRSSB PH ओर SP कैटेगरी के अभ्यर्थियों की सीटों को Hold करके रिजल्ट निकालना चाहिए अन्यथा VDO भर्ती 2021 की तरह हो जाएगी सर 4th Grade @1stIndiaNews @RajCMO @HANUMANKISAN @TheUpenYadav @madandilawar @alok
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Mohit bunker
Mohit bunker@Mohitbunker123·
@babitameena1010 @alokrajRSSB @educationnagari @KrishanTetawral @RohitKu53620910 @VoiceOfManisha @RaviKantMina111 @kambesh78 4th Grade भर्ती 2024 इस भर्ती को आलोक राज सर PH ओर SP कैटेगरी के अभ्यर्थियों की सीटों को Hold करके रिजल्ट निकालना चाहिए अन्यथा VDO भर्ती 2021 की तरह हो जाएगी सर @alok
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Babita
Babita@babitameena1010·
4th Grade भर्ती 2024 : SP कैटेगरी के अभ्यर्थियों के वेरिफिकेशन में कई महीने या कई साल भी बीत जाते है वेरिफिकेशन होते होते, VDO भर्ती 2021 के SP अभ्यर्थियों को अभी तक नियुक्ति नहीं मिली ओर 4th Grade में SP कैटेगरी के 8-9 हजार अभ्यर्थी है जिनकी जांच में 1 से 2 साल का टाइम लगना तय है इसलिए आप सभी से निवेदन है कि 4th Grade में जो भी चयनित अभ्यर्थी हैं वह ट्विटर पर अपनी मांग उड़ाते रहे ओर आप धरातल पर ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से सम्पर्क करे PH Category के सभी 9 मंडलों की जांच जल्द से जल्द करे ओर विस्तृत कार्यक्रम जारी करे अन्यथा PH ओर SP कैटेगरी के अभ्यर्थियों की सीटों को hold करके जल्द से जल्द रिजल्ट निकाले
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Niks
Niks@Pivot2Centre·
If I want to retire in India and want this, where should I end up? 1. Coastal city because pollution will be low 2. No danger of language warriors - I don’t intend to get into anyone’s way 3. Decent infra 4. At least 2 good hospital within 20-30kms 5. Airport within 2-3hr drive; railways station a major plus I can think of these: 1. Vizag 2. North Goa (Ponda, Mapusa) 3. Bhubaneswar (not coastal but you get the drift) 4. Udupi 5. Mangalore What else?
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आलोक कुमार
@sifarchand मुआफ़ करें ज़रा नस्तलीक़ पढ़ना सीख के आता हूँ, मेरे दादा, दादी, नाना, नानी चारों को आती थी लेकिन अगली पीढ़ी से सफ़ाया
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