Aman kumar

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@amankumar_live

Journalist, Reporter. Old School. Don't believe in anything. Words at: @thumbsuckers19, @thecaravanindia @themojostory।

New Delhi Katılım Ekim 2013
324 Takip Edilen213 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
Aman kumar
Aman kumar@amankumar_live·
आरएसएस का शताब्‍दी वर्ष समारोह न मनाने का सरसंघचालक मोहन भागवत का बयान पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आया। तब से दो चरण हिंदी पट्टी में ठंडे गुजर चुके हैं। रामनवमी के जुलूसों से भी चुनाव में गर्मी नहीं आ सकी क्‍योंकि राम मंदिर अब लोगों के आत्‍मसम्‍मान का सवाल नहीं रहा।
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The Caravan Hindi
The Caravan Hindi@thecaravanhindi·
ओपेन एक्सेस | सितंबर 2025 को दुर्गा पूजा की रोशनी में सराबोर कोलकाता शहर के सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर लोगों का रेला लगा हुआ था. वहां आ रहे ज़्यादातर लोग संतोष मित्रा स्क्वायर का रास्ता पूछ रहे थे, जो स्टेशन से दो किलोमीटर की दूरी पर है. वहां बने पंडाल की थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थी. यह अप्रैल 2025 में पहलगांव में हुए आतंकी हमले के बाद, मई में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारतीय सेना के अभियान का नाम था. पंडाल में आर्टिफीशिल इंटेलीजेंस और वर्चुअल रियलिटी के इस्तेमाल से सैन्य कार्रवाई से संबंधित घटनाएं प्रदर्शित की जा रही थीं. पंडाल की तरफ़ जाती हुई भीड़ में कोई ‘जय श्रीराम’ चिल्ला रहा था, तो कोई ‘भारत माता की जय’. पंडाल के क़रीब नारों का स्वर कर्णभेधी था. साफ़ दिख रहा था कि नारे लगा रहे ज़्यादातर लोग कोलकाता के बाहर से थे. भीड़ में से ही कुछ लोगों ने मुझे बताया कि उन्हें वहां आने के लिए मेहनताना भी मिला है. इन तेज़ नारों की गूंज इन्हें लगाने वालों की पहचान स्पष्ट कर रही थी. शाह दुर्गा पूजा के समय दूसरी बार बंगाल पहुंचे थे, इससे पहले 2023 में भी वह बंगाल आए थे और इसी संतोष मित्रा स्क्वायर पर लगे राम मंदिर की थीम पर बने पंडाल का उद्घाटन किया था. बीते कुछ सालों से यह पंडाल बीजेपी की राजनीतिक को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है. बंगाल में दुर्गा पूजा समितियां समय और परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को बदलती रहती हैं, लेकिन जो बात स्थायी है वह है इनका राजनीति के साथ संबंध. संतोष मित्रा स्क्वायर पंडाल के मुख्य आयोजकों में लेबुतल्ला इलाके के पुराने कांग्रेसी नेता प्रदीप घोष का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. टीएमसी और कांग्रेस के कई पुराने नेताओं को अपने पाले में लेकर बीजेपी ने इन क्लबों के ज़रिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया है. टीएमसी का लोकल क्लबों के समूहों पर कब्जा है, ऐसे में बीजेपी छोटे स्तर के प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में लाकर पूजा पंडालों या फिर स्पोर्टिंग क्लब के माध्यम से आगे बढ़ रही है. पढ़ें अमन गुप्ता का पूरा लेख: hindi.caravanmagazine.in/news/west-beng… #WestBengal #westbengalelection2026
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Aman kumar
Aman kumar@amankumar_live·
@Interceptors बहुत दिनों से पार्टी बदलने की जुगत में लगे हुए हैं, अगले चुनाव में टिकट काटे जाने का भी अंदेशा है। इसलिए यह सब हो रहा है।
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Anil Tiwari
Anil Tiwari@Interceptors·
ऐसा क्या हुआ जिसके कारण जल जीवन मिशन का सहारा लेना पड़ा ? यह भी क्या पिछले साल वाला नंदी कांड टाइप मामला है? कोई नेता कभी जनता के काम के लिए इतना गुस्सा नहीं होते... असलियत क्या है, क्या पता..
abhishek upadhyay@upadhyayabhii

बड़ी ख़बर- योगी आदित्यनाथ के सबसे चहेते मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को अब गंगा चरण राजपूत ने दिखाया आईना। विधायक ब्रजभूषण राजपूत के पिता और तीन बार के सांसद रहे गंगाचरण राजपूत ने शब्दों की बुंदेलखंडी तलवार निकाल ली। साफ लिख दिया कि- "मंत्री अपने आप को राजा न समझे,  और विधायक उसका नौकर नहीं है।" योगी आदित्यनाथ की समस्या ये है कि ब्राह्मण विधायकों को तो नोटिस दिलवाई जा सकती है, मगर इस कद्दावर लोध नेता को नोटिस दिलवाने का साहस भी नहीं कर सकते। वजह ये कि कल्याण सिंह के जमाने से ही बीजेपी समर्थित मानी जाने वाली पिछड़े तबके की ये कद्दावर कौम अगर नाराज़ हुई, तो बीजेपी सत्ता से हमेशा के लिए 'स्वतंत्र' हो सकती है!! @narendramodi @PMOIndia @AmitShah @myogiadityanath

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Aman kumar
Aman kumar@amankumar_live·
@tripsashu @MohtaPraveenn इनकी खुद की जमीन हिली हुई है, पार्टी बदलने की जुगत में लगे हुए हैं, अपने पिता जी की राजनीतिक विरासत को बढ़ा रहे हैं जो यूपी के कुछ नेताओं में से हैं जो हर पार्टी में रह चुके हैं।
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Ashutosh Tripathi
Ashutosh Tripathi@tripsashu·
यह राजनीति नहीं, अंतरात्मा की आवाज़ लगती है। अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री को सरेआम सवालों के कटघरे में खड़ा करना आसान नहीं होता। इसके लिए पद नहीं, हिम्मत चाहिए। बृजभूषण राजपूत ने वही किया, जो अक्सर सत्ता के गलियारों में सबसे पहले दम तोड़ देता है…सच बोलने का साहस। जब नमामि गंगे और हर घर जल जैसी योजनाओं पर सवाल सिर्फ मीडिया तक सीमित थे, तब उन्हें नकारात्मकता कहकर टाल दिया गया। लेकिन अब वही सवाल सत्ता के भीतर से उठ रहे हैं, तो यह सिर्फ विरोध नहीं, चेतावनी है। चेतावनी कि ज़मीन पर सब कुछ वैसा नहीं है, जैसा फाइलों में दिखाया जा रहा है। महोबा की धरती पर खड़े होकर, अपने ही दल के मंत्री से जवाब मांगना…यह कदम राजनीतिक आत्महत्या भी हो सकती थी। लेकिन बृजभूषण राजपूत ने सुविधाजनक चुप्पी नहीं चुनी। उन्होंने अपने लोगों की प्यास, उनकी पीड़ा और उनकी नाराज़गी को अपनी आवाज़ बना लिया। आज ऐसे दौर में, जब विधायक अक्सर पोस्टर बनकर रह गए हैं और सवाल पूछना अनुशासनहीनता कहलाने लगा है, वहां सड़क पर उतरकर सरकार से ही सवाल करना विधायक होने का असली अर्थ याद दिलाता है। सच है कि चुनाव नज़दीक हैं, तल्ख़ियां बढ़ रही हैं…लेकिन उससे बड़ा सच यह है कि अगर सत्ता के भीतर से आवाज़ें नहीं उठेंगी, तो योजनाएं सिर्फ नारों तक सिमट कर रह जाएंगी।बृजभूषण राजपूत ने ये बता दिया कि वफादारी सरकार से नहीं, जनता से होती है। #brijbhooshanrajpoot #mahobanews #mahoba #swatantradevji #BreakingNews
Ashutosh Tripathi tweet media
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Parth MN
Parth MN@parthpunter·
Death of an Indian tech worker Banners went up in Nikhil Somwanshi's small village after he landed a job at Ola Krutrim. In less than a year, he died by suicide. He was 24. My long-form feature for @restofworld is out. For the past four months, I have been reporting on India's IT industry, and its toxic work culture. The industry is estimated to be worth around $280 billion and employs more than 5 million people. But the reality behind these glittering numbers is stark. 83% of India’s tech workers suffer from burnout. One in four clocks over 70 hours a week. In Karnataka, tech workers account for a starkly disproportionate 20% of patients seeking transplants due to organ failure. A study of tech employees in the IT hub of Hyderabad found that 84% had a liver disease linked to long hours of sedentary work and high stress. Our analysis of local news articles found 227 reported cases of suicides among Indian tech workers between 2017 and 2025. And the stress and uncertainty is further intensifying with the integration of AI. Do read and share restofworld.org/2026/india-tec…
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Aman kumar
Aman kumar@amankumar_live·
लगभग दो महीने पहले की बात है, दिमाग में एक आइडिया था, जिन लोगों ने भारत को बनते देखा है। बात की जाए, उनके अनुभवों को रिकॉर्ड किया जाए, अलग अलग नामों पर चर्चा हो रही थी, अचानक से एक नाम याद आया मार्क टली का, नाम सुनते ही पहला शब्द जो निकला वो था मार्क अभी हैं? #RIP Mark tully
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V!shnu
V!shnu@hellovishnu·
A very interesting report on the upcoming WB elections by @amankumar_live . Pls read.
The Caravan Hindi@thecaravanhindi

ओपेन एक्सेस | सितंबर 2025 को दुर्गा पूजा की रोशनी में सराबोर कोलकाता शहर के सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर लोगों का रेला लगा हुआ था. वहां आ रहे ज़्यादातर लोग संतोष मित्रा स्क्वायर का रास्ता पूछ रहे थे, जो स्टेशन से दो किलोमीटर की दूरी पर है. वहां बने पंडाल की थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थी. यह अप्रैल 2025 में पहलगांव में हुए आतंकी हमले के बाद, मई में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारतीय सेना के अभियान का नाम था. पंडाल में आर्टिफीशिल इंटेलीजेंस और वर्चुअल रियलिटी के इस्तेमाल से सैन्य कार्रवाई से संबंधित घटनाएं प्रदर्शित की जा रही थीं. पंडाल की तरफ़ जाती हुई भीड़ में कोई ‘जय श्रीराम’ चिल्ला रहा था, तो कोई ‘भारत माता की जय’. पंडाल के क़रीब नारों का स्वर कर्णभेधी था. साफ़ दिख रहा था कि नारे लगा रहे ज़्यादातर लोग कोलकाता के बाहर से थे. भीड़ में से ही कुछ लोगों ने मुझे बताया कि उन्हें वहां आने के लिए मेहनताना भी मिला है. इन तेज़ नारों की गूंज इन्हें लगाने वालों की पहचान स्पष्ट कर रही थी. शाह दुर्गा पूजा के समय दूसरी बार बंगाल पहुंचे थे, इससे पहले 2023 में भी वह बंगाल आए थे और इसी संतोष मित्रा स्क्वायर पर लगे राम मंदिर की थीम पर बने पंडाल का उद्घाटन किया था. बीते कुछ सालों से यह पंडाल बीजेपी की राजनीतिक को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है. बंगाल में दुर्गा पूजा समितियां समय और परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को बदलती रहती हैं, लेकिन जो बात स्थायी है वह है इनका राजनीति के साथ संबंध. संतोष मित्रा स्क्वायर पंडाल के मुख्य आयोजकों में लेबुतल्ला इलाके के पुराने कांग्रेसी नेता प्रदीप घोष का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. टीएमसी और कांग्रेस के कई पुराने नेताओं को अपने पाले में लेकर बीजेपी ने इन क्लबों के ज़रिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया है. टीएमसी का लोकल क्लबों के समूहों पर कब्जा है, ऐसे में बीजेपी छोटे स्तर के प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में लाकर पूजा पंडालों या फिर स्पोर्टिंग क्लब के माध्यम से आगे बढ़ रही है. पढ़ें अमन गुप्ता (@amankumar_live ) का पूरा लेख : hindi.caravanmagazine.in/news/west-beng… #WestBengal #westbengalelection2026

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The Caravan Hindi
The Caravan Hindi@thecaravanhindi·
ओपेन एक्सेस | सितंबर 2025 को दुर्गा पूजा की रोशनी में सराबोर कोलकाता शहर के सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर लोगों का रेला लगा हुआ था. वहां आ रहे ज़्यादातर लोग संतोष मित्रा स्क्वायर का रास्ता पूछ रहे थे, जो स्टेशन से दो किलोमीटर की दूरी पर है. वहां बने पंडाल की थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थी. यह अप्रैल 2025 में पहलगांव में हुए आतंकी हमले के बाद, मई में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारतीय सेना के अभियान का नाम था. पंडाल में आर्टिफीशिल इंटेलीजेंस और वर्चुअल रियलिटी के इस्तेमाल से सैन्य कार्रवाई से संबंधित घटनाएं प्रदर्शित की जा रही थीं. पंडाल की तरफ़ जाती हुई भीड़ में कोई ‘जय श्रीराम’ चिल्ला रहा था, तो कोई ‘भारत माता की जय’. पंडाल के क़रीब नारों का स्वर कर्णभेधी था. साफ़ दिख रहा था कि नारे लगा रहे ज़्यादातर लोग कोलकाता के बाहर से थे. भीड़ में से ही कुछ लोगों ने मुझे बताया कि उन्हें वहां आने के लिए मेहनताना भी मिला है. इन तेज़ नारों की गूंज इन्हें लगाने वालों की पहचान स्पष्ट कर रही थी. शाह दुर्गा पूजा के समय दूसरी बार बंगाल पहुंचे थे, इससे पहले 2023 में भी वह बंगाल आए थे और इसी संतोष मित्रा स्क्वायर पर लगे राम मंदिर की थीम पर बने पंडाल का उद्घाटन किया था. बीते कुछ सालों से यह पंडाल बीजेपी की राजनीतिक को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है. बंगाल में दुर्गा पूजा समितियां समय और परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को बदलती रहती हैं, लेकिन जो बात स्थायी है वह है इनका राजनीति के साथ संबंध. संतोष मित्रा स्क्वायर पंडाल के मुख्य आयोजकों में लेबुतल्ला इलाके के पुराने कांग्रेसी नेता प्रदीप घोष का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. टीएमसी और कांग्रेस के कई पुराने नेताओं को अपने पाले में लेकर बीजेपी ने इन क्लबों के ज़रिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया है. टीएमसी का लोकल क्लबों के समूहों पर कब्जा है, ऐसे में बीजेपी छोटे स्तर के प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में लाकर पूजा पंडालों या फिर स्पोर्टिंग क्लब के माध्यम से आगे बढ़ रही है. पढ़ें अमन गुप्ता (@amankumar_live ) का पूरा लेख : hindi.caravanmagazine.in/news/west-beng… #WestBengal #westbengalelection2026
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Aman kumar
Aman kumar@amankumar_live·
@MinOfCooperatn व्यापार करना सरकार का काम नहीं है यह शायद मोदीजी ने ही कही थी। अब एक टैक्सी सर्विस क्या यह व्यापार नहीं है? अगर आपको लगता है कि कैब सर्विस चलाने वाली कंपनियां ड्राइवर को कम पैसा दे रही हैं या उनके साथ किसी तरह का भेदभाव हो रहा है तो नियम बनाना किसका काम है ?
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Ministry of Cooperation, Government of India
कमीशन लेने वाले टैक्सी ऐप्स ड्राइवर्स को ऐसे नुकसान पहुँचाते हैं! • हर राइड पर भारी कमीशन कटता है, जिससे असली कमाई कम हो जाती है • ज़्यादा घंटे काम करने के बाद भी हाथ में पूरा पैसा नहीं आता • इंसेंटिव और बोनस के नियम जटिल होते हैं, भरोसा टूटता है • फ्यूल, मेंटेनेंस और ईएमआई का बोझ ड्राइवर पर ही रहता है • रेटिंग और एल्गोरिदम का दबाव—गलती की गुंजाइश नहीं • कमाई में अनिश्चितता, भविष्य की प्लानिंग मुश्किल नतीजा: मेहनत ड्राइवर की, मुनाफ़ा प्लेटफ़ॉर्म का। इसलिए जल्द आ रही है एक ऐसी सर्विस जिससे न सिर्फ ये समस्याएं दूर होंगी, बल्कि ड्राइवर्स की पूरी कमाई ड्राइवर्स के पास ही रहेगी। अधिक जानकारी के लिए हमारे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़े रहें। #EmpoweringCooperatives #SahkarSeSamriddhi @narendramodi @PMOIndia @AmitShah @KPGBJP @mohol_murlidhar @pibindia @pibcooperation
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Follow-up Stories@thumbsuckers19·
हँसी मनुष्‍य की सबसे सहज अभिव्‍यक्ति है; हँसी हर दर्द की दवा है; लेकिन हँसना ही मर्ज बन जाए तब? भारतीय समाज में हास्यबोध के इतिहास और उसके क्षरण पर श्रीप्रकाश की गहरी नज़र followupstories.com/ideas/loss-of-…
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Follow-up Stories@thumbsuckers19·
मध्य प्रदेश की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। पार्टियां, संगठन और लोग, एक स्वर में शहर की एक नंबर सीट से विधायक कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा मांग रहे थे। राहुल गांधी आकर चले भी गए, लेकिन इस्तीफा नहीं हुआ! @amankumar_live इंदौर से लौटकर followupstories.com/politics/two-d…?
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Dr Mohan Yadav
Dr Mohan Yadav@DrMohanYadav51·
भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी वॉरेन एंडरसन को भगाकर कांग्रेस ने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया था...
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Umang Singhar
Umang Singhar@UmangSinghar·
नेता विपक्ष माननीय श्री राहुल गांधी जी ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई जल त्रासदी से पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹1-1 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान कर सरलता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया | इसी भाव से प्रेरित होकर मैंने भी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹50,000 की आर्थिक सहायता में योगदान किया । यह कोई राजनीति नहीं, बल्कि जनता के दुख में सहभागी बनकर अपने दायित्व निभाने का संकल्प पूरा किया । . . . @INCMP @RahulGandhi #JusticeForIndore #WaterAuditIndore #indoremangesaafpaani #RightToCleanWater
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Puneet Kumar Singh
Puneet Kumar Singh@puneetsinghlive·
इंदौर : दो दर्जन मौतों के बाद वह इस्तीफा, जिसका इंतजार तो सबको था पर अब तक हुआ नहीं. यहां बात कैलाश विजयवर्गीय की हो रही है. स्टोरी: @amankumar_live followupstories.com/politics/two-d…
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Follow-up Stories@thumbsuckers19·
संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर के दौरे पर आए, पीड़ितों से मिले और चले गए। इस बीच वह बात हवा में उड़ गई जो दो हफ्ते से यहां की फिजाओं में तैर रही थी- कैलाश विजयवर्गीय का इस्‍तीफा! इंदौर से लौटकर सियासी सरगर्मी पर @amankumar_live की रिपोर्ट followupstories.com/politics/two-d…
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Follow-up Stories@thumbsuckers19·
पांच साल बाद आज किसान आंदोलन को कैसे याद किया जाए? अपने बच्चों की उसकी कहानी कैसे सुनाई जाए? पिछले पांच बरस में आईं ऐसी पांच किताबें, जिनमें दर्ज है भारत के अन्नदाता की किस्मत का इतिहास #FarmersProtest followupstories.com/politics/five-…
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Aman kumar@amankumar_live·
Death toll rise 9, sevral injured.
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