Amir Prasad

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@amirprasady

सामाजिक न्याय मिशन, मंडल आर्मी(बिहार) । अध्यक्ष- मंडल आर्मी (सामाजिक न्याय मिशन)जिला-मधुबनी। अम्बेडकरवादी एवं समाजवादी मिशन हर घर। जय भीम,जय मंडल ,जय संविधान ।

बीरपुर ,मधेपुर(मधुबनी) Katılım Ocak 2015
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Amir Prasad
Amir Prasad@amirprasady·
@yadavtejashwi भरोसा मतलब तेजस्वी
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Rashtriya Janata Dal
Rashtriya Janata Dal@RJDforIndia·
और क्या अब क्या लोगों की किडनी और हार्ट निकालोगे? बकलोली की भी कोई हद होती होगी?
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Santosh Yadav, Ph.D.
@MrinalPande1 डालडा कहिए या वनस्पति घी लेकिन यह वनस्पति तेलों (vegetable oil) के हाइड्रोजिनेशन से बनाया जाता है और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।😊
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Santosh Yadav, Ph.D.
इनको गाय से कोई प्रेम नहीं है। गाय इनके लिए नफ़रत फैलाने और सत्ता पाने का मात्र एक ज़रिया है। अब ये मरी गायों को देखकर किसी की भावना आहत नहीं होगी।
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Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav@yadavakhilesh·
तेल के बेतहाशा बढ़ते दामों के बीच भाजपा सरकार के पास बस एक ही तरीक़ा बचा है और वो है उनका पुराना ‘बोरी में चोरी वाला फ़ार्मूला’ मतलब तेल के दाम बढ़ाने के बजाय एक लीटर में तेल की मात्रा घटा दो। तेल के दामों और भाजपा के कमीशन में सीधा संबंध है मतलब जितने दाम बढ़ेंगे उतना ही भाजपा का कमीशन बढ़ेगा। तेल के दाम बढ़ाकर भाजपा दरअसल हालिया चुनाव में ख़र्च किये गये अपने पैसों की रिकवरी कर रही है। भाजपा का एक ही सिद्धांत है कि उसका और उसके लोगों का ख़ज़ाना खाली न हो, उसके लिए भले जनता की जेब पर डाका ही क्यों न डालना पड़े।
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Office of Tejashwi Yadav
Office of Tejashwi Yadav@TejashwiOffice·
कच्चे तेल की कीमतें घट रही है फिर भी मोदी जी पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ा रहे है। तेल कंपनियों ने चौथी तिमाही में ₹19,470 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो 41% की वृद्धि है। इसके बावजूद फिर जनता से लूट क्यों? satyahindi.com/india/state-ru…
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Dr. Mukesh Kumar
Dr. Mukesh Kumar@mukeshbudharwi·
बूड़ा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल.... श्रीकांत वर्मा जहाँ कहीं होंगे विलाप कर रहे होंगे... उनके पुत्र शिवसेना के नेता बनकर अपने पिता के चालीसवें जन्मदिन पर इतराते फिर रहे थे। क्या वे श्रीकांत वर्मा के वारिस हैं.....क्या वे यही विरासत उनके लिए सौंपकर गए हैं... हम भी गए थे कार्यक्रम में। सोचा था अशोक वाजपेयी, ओम थानवी जो को सुनेंगे। मगर कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही निकल आए। मैं और पापोरी दोनों इसलिए निकल आए क्योंकि मंच से सावरकर का ज़िक्र किया जा रहा था और हाल शिवसैनिकों से खचाखच भरा हुआ था। थानवीजी माफ़ करेंगे। ऐसी आवाजाही मुझे नहीं जमती। शिवसैनकों को श्रीकांत वर्मा से क्या मतलब...यहाँ तक कि उनके पुत्र की मंशा भी उन्हें भुनाने की थी। वे अपने दिवंगत पिता का राजनीतिक दोहन कर रहे थे। श्रीकांत वर्मा जी हमें माफ़ करना। हम कृतघ्न हिंदीभाषी आपको इस घृणित राजनीति से नहीं बचा पाए।
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Dr. Mukesh Kumar
Dr. Mukesh Kumar@mukeshbudharwi·
इन्हें ऐंकर न कहा जाए। इन्हें समाज विरोधी और देश विरोधी कहना पर्याप्त नहीं होगा। ये देश को तोड़ने वाले लोगों के वारिस हैं। आज़ादी के आंदोलन के दौरान भी यही कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं। भारत माता ऐसे लोगों की वज़ह से ज़ार ज़ार रो रही होंगी।
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh

This is India's ‘FREE PRESS’ ! He's an anchor on Doordarshan, a central government TV channel. He's always spewing venom. When a child questioned the flaws in the CBSE exam testing, this national channel anchor @AshokShrivasta6 labeled him a P@kistani child. Imagine the mental trauma the child and his entire family must have suffered! This is a serious crime. It's online bullying. If it were any other country, he would be in jail for violating child rights. But the @narendramodi government won't take action against this anchor. If they do, we'll let you know. This is PRESS FREEDOM here… you can FREELY commit any crime while sitting in the government's lap. Thank you

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Dr. Mukesh Kumar
Dr. Mukesh Kumar@mukeshbudharwi·
कहा जाता है कि राजनीति संभावनाओं का खेल होती है और जो संभावनाएं पैदा कर लेते हैं वही राजनीति के माहिर खिलाड़ी। और ध्यान रहे कि बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी संभावनाएं ख़त्म नहीं होतीं। इसीलिए जब राजनेता संभावना नहीं खोज पाते तो जनता ये काम खुद कर लेती है। क्या भारत इस समय ऐसे ही कि मुकाम पर खड़ा है, जहाँ नई संभावनाएं बन रही हैं....क्या नेता इस बुरे वक़्त में किसी संभावना की आहट सुन रहे हैं.....राहुल ऐसा क्यों कह रहे हैं कि साल भर के अंदर सरकार चली जाएगी.... ममता बैनर्जी अब इंडिया गठबंधन को क्यों मज़बूत करना चाहती हैं.....क्या इसका एकमात्र कारण यही है कि वे चुनाव हार गई हैं और उनके पास इंडिया के अलावा कोई विकल्प बचा भी नहीं है....या उन्हें भी कोई संभावना नज़र आने लगी है... क्या ये संभावना भयावह आर्थिक संकट की वज़ह से बन रही हैं......प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है....देश में गुस्सा खदबदा रहा है.....कॉकरोच जनता पार्टी के मिला समर्थन क्या इसी दिशा में संकेत नहीं कर रहा है..... अगर हाँ तो इंडिया गठबंधन की बैठक में क्या होगा? बिहार-बंगाल की हार के बाद इसका क्या महत्व है? क्या वह एकजुट होकर नई लड़ाई के लिए कमर कसेगा, आगे के संघर्ष की रणनीति बनाएगा? क्या ममता बैनर्जी और दूसरे क्षत्रप राहुल गाँधी के साथ तालमेल बैठाने के लिए तैयार हैं या फिर वे पहले की तरह अपने दोहरे रवैये से खेल बिगाड़ेंगे? सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि मोदी सरकार के बढ़ते संकट को इंडिया कैसे भुना सकता है? क्या 2029 के आम चुनाव के पहले कोई बड़ा खेल हो सकता है?
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Dr. Mukesh Kumar
Dr. Mukesh Kumar@mukeshbudharwi·
कांग्रेस में जो घनघोर सांप्रदायिक नेता थे। यही सांप्रदायिकता उनके साहित्य में भी देखी जा सकती है। मनुवादी लेखक मनुवादी साहित्य, मनुवादी राजनीति।
Dr. Ruchika Sharma@tishasaroyan

Full video here (youtu.be/ZqjVSLV7BbQ) Meet Kanhaiyalal Munshi ji, a Gujarati and a founding member of the Vishwa Hindu Parishad (VHP). His two books on Somnath, today, serve as an excellent source for WhatsApp forwards on the temple!

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मनीषा चौबे , 𝙄𝙉𝘿𝙄𝘼
चोरी करने में भी अकल चाहिए? 'मोडी जी' को भगवान मानने वाली महिला , भारत से ही भेजी जाती है, स्क्रिप्ट कि पहले रिहर्सल करवाई जाती है , उसके बाद इससे काम लिया जाता है यह एक पैड वर्कर है
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Dr Gautam Krishna Ex-BDO
Dr Gautam Krishna Ex-BDO@DrGautamKrishna·
आज बिहार विधानसभा में👉पर्यटन उद्योग कमिटी के विभागीय बैठक #स्वास्थ्य_विभाग के बैठक में शामिल होकर अपने महिषी विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य विभाग से संबधित समस्याओ को रखा।
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Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
पानी की एक-एक बूंद के लिए आज भी हजारों ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं किलोमीटरों पैदल चलने को मजबूर हैं। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है।
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Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
यह तस्वीर झारखंड के दुमका की है, जहाँ आदिम जनजाति परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। गोपीकांदर प्रखंड के नामोडीह गांव के पहाड़िया टोला में 22 परिवार भीषण जल संकट झेल रहे हैं। आखिर कब मिलेगा इन आदिम जनजाति परिवारों को शुद्ध पेयजल का अधिकार?
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Science Journey@ScienceJourney2·
प्रेमानंद उर्फ अनिरुद्ध पांडे की पढ़ाई के बारे में संलग्न दैनिक भास्कर खबर क्या बताना चाह रहा है ? @grok
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Santosh Yadav, Ph.D.
@MANJULtoons मिलते होंगे लेकिन जोशी जी की अनुमति नहीं मिलेगी रिपोर्ट करने के लिए।
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Neeraj Kanojia
Neeraj Kanojia@NeerajKanojia16·
मृत्युभोज कोई उत्सव नहीं, बल्कि एक रूढ़िवादी सामाजिक मजबूरी है। तेरहवीं संस्कार के नाम पर कर्ज लेकर लोगों को खाना खिलाना बंद होना चाहिए। दुख में डूबे परिवार को सहानुभूति की जरूरत होती है, किसी बड़े भोज के आयोजन की नहीं। ध्यान रहे,यदि आप आर्थिक रूप से मजबूत हैं, अच्छी बात है। लेकिन आपके द्वारा किया गया तेरहवीं का भारी खर्च, समाज के कमजोर वर्ग के लिए एक जानलेवा सामाजिक दबाव बन जाता है। किसी की मृत्यु पर अपनी आर्थिक ताकत का प्रदर्शन बंद होना चाहिए। सक्षम लोग ही आगे बढ़कर इस कुप्रथा को खत्म कर सकते हैं। नोट– यह कोई धर्म–कर्म का कार्य नहीं है और न ही इसके करने से मरने वाले को स्वर्ग या उसके परिवार को शांति मिलती है। 🍁🍁शुक्रिया 🍂
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