arjun sen retweetledi

“अहम (Ego) को समझने का एक तरीका”
मैंने खुद से एक सवाल पूछा —
“मैं क्यों पैदा हुआ?”
यह सवाल मुझे सीधे Big Bang तक ले गया।
सबसे पहले ब्रह्मांड का जन्म हुआ — बिग बैंग।
फिर अरबों सालों में पृथ्वी बनी, उस पर पानी आया।
पानी में रासायनिक प्रक्रियाओं से एककोशिकीय जीव (single-celled organisms) बने।
ये जीव धीरे-धीरे Evolution के माध्यम से बदलते गए —
कुछ ने जमीन पर आना शुरू किया, पौधे बने, फिर जटिल जीव, फिर जानवर, और अंततः मानव।
इस पूरी प्रक्रिया में कोई “नया” नहीं था —
सिर्फ लगातार बदलाव (continuous transformation) था।
और इसी अनंत श्रृंखला में…
मैं (Vinod) पैदा हुआ।
अब सवाल:
क्या इस पूरी प्रक्रिया में कहीं “अहम” था?
नहीं।
अहम कहाँ आया?
जब मैंने सोचना शुरू किया:
* “मेरा क्या होगा?”
* “मैं कमजोर हूँ”
* “मुझे ऐसा होना चाहिए”
यानी, अहम कोई प्राकृतिक सत्य नहीं है, बल्कि मन की एक मनोवैज्ञानिक संरचना (psychological construct) है।
वैज्ञानिक दृष्टि से सच्चाई:
तुम ब्रह्मांड के एक छोटे से हिस्से हो,
जो खुद को देखने और समझने की क्षमता रखता है।
न तुम अलग हो,
न ही तुम केंद्र हो।
तो डर क्यों?
जब शुरुआत और अंत दोनों पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं है,
तो बीच का जीवन डर में क्यों बिताना?
👉 खुलकर जियो।
👉 प्रयोग करो।
👉 गिरो, सीखो, आगे बढ़ो।
क्योंकि सच्चाई यह है —
तुम ब्रह्मांड की प्रक्रिया हो, उसका केंद्र नहीं।
@Advait_Prashant @Prashant_Advait
#AcharyaPrashant #Science
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