Dharmendra senwar

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Katılım Kasım 2017
212 Takip Edilen74 Takipçiler
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Ramandeep Singh Mann
Ramandeep Singh Mann@ramanmann1974·
सरकार किसान की दुश्मन। बाबू किसान के दुश्मन। व्यापारी किसान के दुश्मन। पुलिस किसान की दुश्मन। भगवान बचा था, आज कल वो भी दुश्मन।
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
बधाई @RasDevilal sir कर्मनिष्ठ, संवेदनशील और परिणामोन्मुख श्री देवी लाल यादव SDM, NSD को SIR में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर राज्य स्तरीय सम्मान मिलने की हार्दिक बधाई। जनसेवा में आपका यह योगदान अनुकरणीय है। 🌼👏 @CeoRajasthan@ECISVEEP #ProudMoment #Nasirabad
CEO RAJASTHAN@CeoRajasthan

👉विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 ✌️राजस्थान ने एसआईआर में हासिल की बड़ी उपलब्धि, डिजिटाइजोशन में लगातार नंबर-1 ✌️समन्वित प्रयास और सतत संवाद से पुनरीक्षण कार्य में आई उल्लेखनीय तेजी 👉राजस्थान के 6000 से अधिक बूथों पर 100% कार्य पूरा 👉एसआईआर में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 26 ईआरओ राज्य स्तर पर होंगे सम्मानित - @CeoRajasthan श्री नवीन महाजन 👉डिजिटाइज प्रपत्रों के वैरिफिकेशन एवं अनमैपिंग की सुविधा प्रारंभ 👉देखें सम्मानित होने वाले #EROs की सूची #शुद्धमतदातासूचीमजबूतलोकतंत्र @ECISVEEP @spokespersonECI @PIB_INDIA @DIPRRajasthan @DDNational @airnews_jaipur #SIR #PureElectoralRolls #StrengthenDemocracy #Rajasthan #SIR2026 #कोई_पात्र_मतदाता_ना_छूटे

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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
इस साल का मानसून पूर्णाहुति की ओर 🌨️
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
फ़ैक्टचेक की मूल भूमिका को जानना ज़रूरी है। फ़ैक्टचेक तब सार्थक होता है जब कोई भरोसेमंद या मुख्यधारा का स्रोत, जैसे कोई समाचार माध्यम, बड़ी संस्था, राजनेता आदि झूठी या ग़लत सूचना दे और उसका खंडन करना ज़रूरी हो। ऐसे मामलों में सार्वजनिक हित में भ्रम दूर करने का मूल्य है। लेकिन जब कोई अनाम या अज्ञात व्यक्ति सिर्फ़ सोशल मीडिया पर सनसनीख़ेज़ बयान देकर ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा है तो पुलिस या आधिकारिक एजेंसियों का फ़ैक्टचेक करना अनजाने में उसी व्यक्ति को “प्रमोशन” दे देना है। यह जोखिम भरा है; क्योंकि यह विज़िब्लिटी बूस्ट का खेल है। जिस अनाम व्यक्ति को पहले बहुत कम लोग देख रहे थे या नहीं देख रहे थे, पुलिस का “फ़ैक्टचेक” उसके आधारहीन कॉण्टेंट को वायरल बनाकर एक प्रॉपर्टी में परिवर्तित कर देता है। अब ये लोग ऐसा अधिक करेंगे। इसी विडियो को देखें कि इसे कितने लोग कर चुके हैं। इसे देखने वाले हर व्यक्ति को मालूम है कि ऐसा कुछ नहीं है और यह एकदम बकवास बात है। मॉनेटाइजेशन की संभावना फेसबुक, यू ट्यूब या इंस्टा पर जब वीडियो की व्यूज़ और ऐंगेज़मेंट मिलता है तो एल्गोरिद्म उसी को आगे पुश करता है। ऐसे में कुछ हफ़्तों में ही (लगातार वायरल होने पर) व्यक्ति अपने अकाउंट को मॉनेटाइज़ कर सकता है। सामाजिक विश्वास का संकट लोग सोचते हैं कि पुलिस भी इसका खंडन कर रही है तो बात “बड़ी” होगी यानी अफ़वाह और भी फैलती है। यह दुर्भाग्य है कि पुलिस जैसी एजेंसी को भी लोग झूठा मान लेते हैं। क्योंकि उनके लोगों ने भी हम मीडिया वालों की तरह अपनी विश्वसनीयता पर कभी इतनी गंभीरता से ख़याल ही नहीं किया। जैसे विज्ञापनदाता हम मीडिया वालों को खिलौना बनाए रखता है, वैसा ही राजनेताओं ने पुलिस के साथ कर रखा है; जबकि एक बेहतरीन समाज के लिए हमारी पुलिस का स्वतंत्र, सजग, अच्छे वाहनों और अच्छे हथियारों से सुसंपन्न होना ही नहीं, अच्छे भोजन, अच्छी तरह से खड़े रहने और दिन भर की ज़रूरतों को पुलिस मुख्यालय से मुहैया करवाना बहुत ही अनिवार्य है। लेकिन हम जानते हैं कि पुलिस को पानी की बॉटल तक हमारे प्रदेश का गृहमंत्री, जो कि हमेशा ही या आम तौर पर खुद मुख्यमंत्री होता है, मुहैया करवाना जरूरी नहीं समझता। पुलिस को क्या करना चाहिए सार्वजनिक खंडन नहीं, कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे मामलों में सीधा एफआईआर दर्ज़ करना और अकाउंट हटवाने की कार्रवाई करना अधिक प्रभावी है। और इस मामले में ट्विटर या एक्स के भारत स्थित अधिकारियों के खिलाफ आप दो चार एफआई दर्ज करें तो वे भूल जाएंगे कि इस तरह की छूट दी जाए। आख़िर अमेरिका वहाँ बैठा हुआ इस देश के प्रधानमंत्री और आम नागरिकों तक को अपमानित करता है और हम उन्हें यह छूट देते हैं कि वे हमारे देश में कुछ भी करें। आखि़र आप खंडन के लिए नहीं, आप अपराधियों को जेल भेजने के लिए बने हैं। सिर्फ़ सत्ता में बैठा नेता बदले की भावना से कार्रवाई करवाए तो पुलिस को ऐसा तरीका अपनाना चाहिए और कार्रवाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि हम सभी एक देश के अच्छे नागरिक हैं और हमारा एक कर्तव्य है। जैसा पुलिस का कर्तव्य है, एक नागरिक का भी कर्तव्य है। हम जानते हैं कि सत्ताधारी लोग बहुत बार बदलने की भावना से काम करते हैं। कभी-कभी यह विचारधारा के नाम पर होता है। कोई अपने विरोधियों को जेल भेजने की साजिश करता है तो कोई अपने ही दल के भीतर के विरोधियों के खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल करता है। प्रतिभा से आए आईपीएस अधिकारी इस मामले में थोड़ा सा सजग हो जाएं और सॉरी सर कहना सीख्न जाएं तो संविधान की रक्षा आसान हो जाए। लेकिन पुलिस से क्या कहा जाए, मीडिया के लोग ही अपनी रीढ़ की स्टील को शहतूत की कमनीय टहनी में बदल चुके हैं। जेनरिक एडवाइज़री "सोशल मीडिया पर फलाँ तरह की झूठी बातें चल रही हैं, इन पर विश्वास न करें”, ऐसी जेनरिक एडवाइजरी दी जा सकती है, बिना उस व्यक्ति के नाम या वीडियो को ऐंप्लीफाई किए। मीडिया लिटरेसी कैंपेन जनता को यह सिखाना कि “अनाम एकाउंट्स” के दावों पर तुरंत विश्वास न करें। और अंत में पुलिस का ज़िम्मा कानूनी कार्रवाई करना है, न कि अनाम अफ़वाहबाज़ों के लिए मुफ़्त का विज्ञापन बनना। अगर पुलिस सीधे ऐसे अकाउंट्स को हटवाए और अभियोजन करे तो डिटरेंस पैदा होगा। वरना “फ़ैक्टचेक” का मंच कभी-कभी उन लोगों की पब्लिसिटी मशीन बन जाता है, जिनके लिए झूठ बोलना ही “बिज़नेस मॉडल” है। मैं क्षमा चाहूँगा कि एक मामले में हस्तक्षेप किया। मुझे मीठा लिखना नहीं आता। इसलिए मीडिया, पॉलिटिकल लोगों और पुलिस को लेकर कुछ बातें निकल जाती हैं और इसीलिए मन से कह रहा हूँ कि मित्र लोग इसे अन्यथा नहीं लें। और मेरी मूल बात पर ग़ौर किया जाए। जैसे इस मामले में हम मीडिया वालों को भी फैक्ट चेक के चक्कर में भटका दिया गया है। हमारा काम था, सच तलाश करना। लेकिन जिन लोगों को सच से परेशानी थी। वे बहुत चालाक हैं तो वे जिन्हें सच की तलाश का कर्तव्य पूरा करना था, सुबह-सुबह एक झूठ फैलाकर इस काम में लगा देते हैं कि जा बेटा, सच की तलाश छोड़, तू उस झूठ को झूठ साबित कर, जो हमने सुबह-सुबह इस देश के सीने पर लघुशंका की तरह फैला दिया है! जय हिन्द!
Rajasthan Police@PoliceRajasthan

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक युवती दावा कर रही है कि “राजस्थान में एक परंपरा के तहत शादी के बाद पहले ससुर, फिर देवर और फिर पति का संबंध होता है और जो पहला बच्चा होगा उसे गिरा दिया जाता है।” राजस्थान में ऐसी कोई परंपरा या रस्म नहीं है। यह दावा पूर्णतः फर्जी, झूठा एवं भ्रामक है। आप सभी से निवेदन है कि ऐसी फर्जी खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें। फेक न्यूज प्रसारित करना कानूनन दंडनीय है। #SayNoToFakeNews #FactCheckFirst #RajasthanPolice

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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
इस लिए ऐ शरीफ़ इंसानो जंग टलती रहे तो बेहतर है आप और हम सभी के आँगन में शमाजलती रहे तो बेहतर है @8PMnoCM @mandeeppunia1
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है जंग क्या मसअलों का हल देगी आग और ख़ून आज बख़्शेगी भूक और एहतियाज कल देगी
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
इस लिए ऐ शरीफ़ इंसानो जंग टलती रहे तो बेहतर है आप और हम सभी के आँगन में शमाजलती रहे तो बेहतर है @8PMnoCM @ma
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Dharmendra senwar@dharmsenwar·
होली की "राम राम सा "🙏🙏🙏
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Manuj Jindal
Manuj Jindal@manujjindalIAS·
Brilliant article. Rethinking Bureaucracy in the changing times..
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Department of Food & Public Distribution
'मेरा राशन 2.0' ऐप आपको घर बैठे राशन की उपलब्धता, निकासी रिकॉर्ड, नजदीकी दुकान की जानकारी और लेन-देन का पूरा ब्यौरा देखने की सुविधा देता है। यह ऐप राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाता है, ताकि लाभार्थियों को कोई भी दिक्कत न हो। #MeraRationApp #FoodSecurity #FoodForAll #eGovernance
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
@8PMnoCM ' आप खास से आम हो गए हैं ' जब दायरों का विस्तार होता है तो शायद बहुतों को ऐसा लगता है । लगे रहिए श्रीमान जी,आप लाखों लोगों की ' उम्मीद' हैं ।
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
#जनचेतना #जनसहयोग के बिना यह संभव ही नहीं है । कौनसे और किस- किसखेत में कितनी ट्यूबवेल खुदवाई और पानी नहीं होने पर उसने बंद की या नहीं ? यह तो नागरिक कर्त्तव्यों के पालन से ही सम्भव है । ज्यादा नियम और परमिशन के चोंचले #रेडटेपेजिम को बढ़ावा देंगे।
राजस्थानी ट्वीट@8PMnoCM

हर काम की ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं है, हमारे खेतों में खुले पड़े बोरवेल और उसमें हो रही मौतों के हम ख़ुद ज़िम्मेदार हैं।

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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
@8PMnoCM Dear sir PMKISAN portal me self application system h , baki record verification jesa kuch nhi hota h village level par , only jamabandi or aadhar name match ka verification hota patwar level par, Village level employee ki koi online verification I'd nhi h
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Dharmendra senwar
Dharmendra senwar@dharmsenwar·
अल्फ़ाज़ की गहराइयां #पाब्लो_नेरुदा #मंगलेश_डबराल
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