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अगर बिहार और उसके त्योहारों के प्रति आपके मन में ज़रा भी अपनापन नहीं है — इतना भी नहीं कि दिल से शुभकामना दे सकें — तो फिर चुनाव ही क्यों लड़ते हैं? छठ जैसे पवित्र पर्व में आस्था, परंपरा और रंगों की इतनी विविधता है, लेकिन आप सिर्फ़ दिखावे के लिए महीनों बाद पुरानी पोस्ट डाल देते हैं। आपको बिहार के लोग गंदे लगते हैं, उनके शरीर से बदबू आती है — फिर भी आप हाथ मिलाने की मजबूरी निभाते हैं। उनके त्योहार आपको उत्साह नहीं देते, पर राजनीतिक मजबूरी में आप उन्हें बधाई देते हैं। यह आपकी महानता नहीं, मजबूरी है। बिहार का अपमान बंद कीजिए, और अगर आस्था की समझ नहीं है, तो वापस कोलंबिया जाकर छुट्टी मनाइए। बिहार अब राजद–कांग्रेस को वोट नहीं देगा।




The tragedy in Ahmedabad has stunned and saddened us. It is heartbreaking beyond words. In this sad hour, my thoughts are with everyone affected by it. Have been in touch with Ministers and authorities who are working to assist those affected.







