sunil kumar
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sunil kumar
@editorsunil
an amateur YouTuber, a print journalist, photographer, media teacher, an atheist, opinion writer, https://t.co/t0l42QVdX4
chhattisgarh, india Katılım Nisan 2009
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मोटा बीमा, कत्ल की मोटी वजह भी!
बीवी-नन्हें बेटे को मारकर एक करोड़ का बीमा पाने के लिए आदमी ने इंतजाम तो पुख्ता किया था, तीन-तीन, चार-चार तरीके से कत्ल की कोशिश की थी, कोशिश तो कामयाब हुई, लेकिन गिरफ्तार हो गया। एक के बाद एक, हर तरह के सबसे करीबी रिश्तों में बीमा-दावा की मोटी रकम पाने के लिए लोग क्या-क्या करके कत्ल नहीं करते हैं! नानी और बाप को सांप से डंसवाकर मारते हैं, तो कत्ल का हर और तरीका भी इस्तेमाल करते हैं।
कहीं वसीयत की दौलत पाने के लिए, तो कहीं बीमा-दावा पाने के लिए, घर-परिवार के भीतर ही कत्ल एक बड़ी वजह है, अमरीकी उपन्यासों से लेकर हिन्दुस्तान के शहर-कस्बों तक...
‘छत्तीसगढ़’ अखबार के संपादक सुनील कुमार का यह वीडिटोरियल देखें।

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दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : 7 अप्रैल 2026
देश-प्रदेश को प्यासा मरने
से बचाना हो, तो वक्त रहते
जागना जरूरी है, वरना...
-सुनील कुमार
छत्तीसगढ़ के अखबारों में पिछले कुछ दिनों से गर्मी बढऩे के साथ-साथ जमीन के भीतर पानी नीचे जाने की खबरें आ रही हैं। ऐसा हर गर्मी में होता है, और कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग जिलों में कलेक्टरों के आदेश निकल जाएंगे कि जिला प्रशासन की इजाजत के बिना गर्मी में नए ट्यूबवेल नहीं खोदे जा सकेंगे। लेकिन गर्मी निकलते ही ट्यूबवेल खोदना फिर शुरू हो जाएगा, और उनसे पानी निकालना तो बाकी की पूरी जिंदगी चलता ही रहेगा। केन्द्र सरकार के भूजल के सर्वे के आंकड़ों को देखें, तो छत्तीसगढ़ के कई जिलों, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, मुंगेली, बालोद, जैसे जिलों के सभी विकासखंडों में लगातार भूजल नीचे जा रहा है। बस्तर संभाग को छोडक़र बाकी चार संभागों में हालत तेजी से बिगड़ रही है। और यह तब है जब 2023-24 में छत्तीसगढ़ में औसत से बेहतर बारिश हुई थी। अखबारी खबरों से किसी की नींद खुलते दिख नहीं रही है, और जब छत्तीसगढ़ की हालत चेन्नई शहर, या महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों जैसी हो जाएगी, तब नौबत संभालने का वक्त निकल चुका रहेगा। आज समय रहते अगर राज्य सरकार जागकर कड़ी कार्रवाई करे, कमर कसकर यह तय करे कि जब तक भूजल स्तर बढऩे नहीं लगे, तब तक जो-जो जरूरी रहेगा, वह किया जाएगा, तो ही बात बन सकती है।
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दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : 5 अप्रैल 2026
...अब जलवायु परिवर्तन से
मजदूरों की बेबस घरवापिसी
-सुनील कुमार
दुनिया में डॉनल्ड ट्रम्प जैसे बेवकूफों की कमी नहीं है जो जलवायु परिवर्तन को एक फर्जी दावा मानते हैं। और भी बहुत से लोग अपने सुख या दुख के घरौंदों के भीतर रहते हुए यह मानकर चलते हैं कि पर्यावरण शायद एक दिन अपने आप ठीक हो जाएगा, या कि यह महज सरकार की जिम्मेदारी है, और इसमें उनके करने का भला क्या है। लेकिन पूरी दुनिया में जगह-जगह जलवायु परिवर्तन से जो स्थाई नुकसान होना शुरू हो रहा है, वह आगे बढ़ते ही चलना है। मिसाल के लिए राजस्थान का गर्मी का यह मौसम देखें, तो वहां यूपी-बिहार से आए हुए लाखों खेतिहर मजदूर वापिस अपने गांव लौट रहे हैं, क्योंकि 48 से 50 डिग्री तक गर्म होने वाले राजस्थान की सूखी मिट्टी में पानी इतना नीचे जा चुका है, और जाते जा रहा है कि वहां के बहुत से हिस्सों में अब खेती मुमकिन नहीं रह गई है। जो खेतिहर मजदूर पिछले 10-15 बरस से वहां फल-सब्जी, और मसालों के खेतों में काम करते थे, वे वापिस जा रहे हैं कि राजस्थान के खेतों में अब फसल मुमकिन नहीं रह गई। इनमें खेतिहर मजदूरों से थोड़े ऊपर के ऐसे किसान भी हैं जो राजस्थान जाकर खेती करते थे, लेकिन अब वह मुमकिन नहीं रह गया।
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दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का ‘आजकल’ : सुनील कुमार, 5 अप्रैल 2026
ट्रम्प के दिमाग में झांककर देखना,
मनोवैज्ञानिकों के लिए भी डरावना!
-सुनील कुमार
अपने इस दूसरे कार्यकाल में आने के पहले से डॉनल्ड ट्रम्प की दिमागी हालत की नुमाइश, चाहे-अनचाहे कर रहे थे, वह लोगों को उनके बारे में सोचने को मजबूर कर रही थी। लेकिन अब जब वे दुनिया के सबसे ताकतवर देश के बेताज तानाशाह की तरह पूरी दुनिया को अपनी लाठी से हांक रहे हैं, तो लोग उन्हें कुछ अधिक गौर से देख रहे हैं। लोगों से हमारा मतलब दुनिया के आम लोग नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने वाले लोगों से है, जिनमें से दो सौ लोगों ने एक खुली चिट्ठी लिखकर ट्रम्प के खतरों से अमरीका, और बाकी दुनिया को आगाह किया था। इस चिट्ठी में इन दो सौ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। लेकिन इस चिट्ठी से परे के और विशेषज्ञों ने भी अपनी राय अलग-अलग जगहों पर सामने रखी है।
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🇺🇸🇮🇷 Archbishop Timothy Broglio, head of the US military archdiocese, says the Iran war “does not meet just war criteria” and is therefore not morally justified.
Broglio warned Catholic troops they are not bound to obey every order in such a conflict, advising them to “do as little harm as possible” and protect innocent lives. He noted US law allows objection to war in general, not specific conflicts.
Broglio also called Defense Secretary Pete Hegseth’s use of Jesus to justify the war “problematic,” saying it is “hard to cast this war as something sponsored by the Lord.”
Follow: @europa

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आत्म-समर्पित माओवादियों के लिए नियमित रोजगार की व्यवस्था करना जरूरी है!
@editorsunil @triptisoni6194

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Ro Khanna: “We need to say it was a genocide. We need to say there can be no military sales of weapons that kill civilians to Israel. We need to say we’re done with US aid, not a dollar more to Israel, a rich country, a first world country. They can buy for themselves. And we need to be for the recognition of a Palestinian state”
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Retired Supreme Court Judge, Justice V. Ramasubramanian is the chairperson of @India_NHRC
How many times has he taken suo motu cognizance of police brutality on streets?
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Bishop Strickland: "The loss of life in Gaza is a holocaust of our time."
lifesitenews.com/news/bishop-st…

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दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : 3 अप्रैल 2026
तानाशाह ट्रम्प को चाहिए
निजी प्रतिबद्धता, वरना जंग
के बीच आर्मी चीफ बर्खास्त
-सुनील कुमार
अमरीका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने जंग मिनिस्टर पेट हेगसेथ से कहलवाकर थलसेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को खड़े-खड़े बर्खास्त कर दिया। दुनिया के किसी भी बड़े और जिम्मेदार लोकतंत्र में ऐसी घटना याद नहीं पड़ती कि देश की एक मुश्किल जंग के बीच थलसेना प्रमुख को हकालकर निकाल दिया जाए। आज ईरान के मोर्चे पर अमरीका को बहुत से लोग बहुत मुश्किल नौबत में देख रहे हैं, और ऐसे में एक सबसे बड़े फौजी अफसर को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करके निकाल देना अमरीकी सरकार के बाकी लोगों को एक बड़ा साफ संदेश देता है। संदेश यह कि अब अमरीका में किसी भी संवैधानिक या सरकारी संस्था में ट्रम्प के प्रति निजी निष्ठा सबसे ऊपर है, और लोगों से किसी पेशेवर काबिलीयत की जरूरत नहीं है। जो लोग ट्रम्प की हमलावर नीतियों से जरा भी असहमति जताएंगे, उनके लिए ट्रम्प की सरकार में जरा भी जगह नहीं है। पिछले कुल सवा साल के इस कार्यकाल में ट्रम्प ने कुछ सबसे बड़े फौजी अफसरों को इसी तरह बर्खास्त किया, और इनमें से एक को तो ट्रम्प ने देशद्रोही तक कहा। रक्षा मंत्रालय के कई गैरफौजी अफसरों को भी ट्रम्प ने हटा दिया जिन्हें वह अमरीका के भीतर एक सरकारविरोधी भूमिगत सरकार (डीप स्टेट) कहता है। हमारी अपनी समझ यह कहती है कि अब अमरीका ईरान के मोर्चे पर अपने सैनिकों को वहां की जमीन पर उतारने के लिए उन्हें खाड़ी के पड़ोसी देशों में भेज चुका है, और इस बात को अमरीका में बहुत ही खराब फैसला माना जा रहा है। जो ईरान अमरीका के लिए किसी भी तरह का खतरा नहीं था, उस ईरान पर पहले तो इजराइल के कहे हुए इस तरह का निहायत गैरजरूरी, और नाजायज फौजी हमला करना, पूरी दुनिया को तेल, और दूसरे कारोबारी संकट में डालना, और अब अमरीकी सैनिकों के उस इजराइल की इस जंग में विदेशी जमीन पर उतार देना, जहां पर खुद इजराइल शायद अपने सैनिकों को भेजने के लिए तैयार नहीं है। हमारा सिर्फ एक अंदाज है कि कोई भी जिम्मेदार थलसेना अध्यक्ष राष्ट्रपति के ऐसे फैसले का विरोध करेगा जो कि हजारों अमरीकी सैनिकों को एक अवांछित युद्ध में भेजने का है, जहां से सैकड़ों का ताबूत में लौटना तय सरीखा होगा।
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