
Ikman Ali, Mantri UPPSS, Block Moradabad.
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Ikman Ali, Mantri UPPSS, Block Moradabad.
@ikmanali
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माननीय मुख्यमंत्री जी के इस वक्तव्य से तमाम शिक्षकों को राहत मिलेगी ।मुख्यमंत्री जी ने जमीनी हकीकत को देखा और जाना है ।हमआपके आभारी हैं 🙏 @myogiadityanath @CMOfficeUP @TFI4India @UPPSS1921







गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा । राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है। RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया। NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि— • 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी। • 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी। बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET। जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।

डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जिंदाबाद ।

TFI जिंदाबाद डा दिनेश चन्द्र शर्मा जिंदाबाद

डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जी जिंदाबाद

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ व टीएफआई के अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश चंद शर्मा जी ने बहुत पहले यह कह दिया है कि टेट से मुक्ति हमे कोर्ट से नहीं बल्कि संसद से मिलेगी अतः वे कोर्ट व संसद दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ रहे हैं, ईश्वर उन्हें सफल करे यही कामना है

सिविल अपील 1385/2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट अनिवार्यता के सम्बन्ध में दिये गये निर्णय के विरूद्ध दाखिल रिव्यू पर आज सुनवाई सम्पन्न हुई। सुनवाई के समय सुप्रीम कोर्ट में टी.एफ.आई. की ओर से डा. दिनेश चन्द्र शर्मा, श्री संजय सिंह, श्री राम मूर्ति ठाकुर, श्री राधेरमण त्रिपाठी, श्री अनूप केसरी, श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव, श्री मेघराज भाटी, श्री अशोक कुमार शर्मा एवं सलीम सहाय तिग्गा आदि उपस्थित रहे। देश के विभिन्न राज्यों से दाखिल रिव्यू में याचियों ने सुप्रीम कोर्ट के लगभग एक दर्जन प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पूरी दमदारी एवं तथ्यों सहित शिक्षकों का पक्ष प्रस्तुत किया। आज की सुनवाई के महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नवत हैं:- 1. सुनवाई की शुरूआत उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने की। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक बार भी ये स्वीकार नहीं किया गया कि 2017 का संशोधन आर.टी.ई. से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू नहीं होता है। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा कोई भी ऐसा तथ्य नहीं रखा गया जो आर.टी.ई. से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के पक्ष में हो। 2. सभी प्रसिद्ध एवं विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा विभिन्न मजबूत तर्कों के साथ यह तथ्य प्रस्तुत किया गया कि आर.टी.ई. लागू होने के समय 23 अगस्त, 2010 के राज पत्र में पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टी.ई.टी. लागू नहीं किया गया है। 3. सुनवाई के दौरान न्यायधीश महोदय ने स्पष्ट कहा कि संसद ने जब 2017 में आर.टी.ई. में संशोधन करके 31 मार्च, 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टी.ई.टी. अनिवार्य किया गया तब इस संशोधन को चुनौती क्यों नहीं दी गयी। (जबकि भारत के किसी भी राज्य ने इस संशोधन को लागू करने हेतु कोई भी शासनादेश निर्गत नहीं किया गया अर्थात भारत सरकार ने यह संशोधन छिपा कर रखा था।) 4. सुनवाई के अन्त में जज साहब ने फैसला रिजर्व कर लिया। @DrDCSHARMAUPPSS @TFI4India @UPPSS1921

TFI .. जिंदाबाद जिंदाबाद।। डॉ दिनेश चंद शर्मा... जिंदाबाद जिंदाबाद।।

टीएफआइ जिंदाबाद डॉ दिनेशचंद्र शर्मा जिंदाबाद राममूर्ति ठाकुर जिंदाबाद संजय सिंह जिंदाबाद टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ टीएफआइ डॉ दिनेशचंद्र शर्मा जी के नेतृत्व में संघर्षरत है। हम सब होंगे कामयाब एक दिन। @DrDCSHARMAUPPSS @Priyanshu_UpPsS @RamMurtiThakur @TFI4India @UPPSS1921

#TET #सुप्रीमकोर्ट टेट प्रकरण की लाइव सुनवाई आप सभी देख सकते हैं जो कोर्ट में चल रहा है। youtube.com/live/AKRf7iial…

लड़ाईयां आसान नहीं होतीं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और TFI आपके नेतृत्व में कई स्तर पर TET की लड़ाई लड़ रहे हैं। जीवटता विजय की गारंटी होती है, हताशा नहीं। अल्लामा इक़बाल ने कहा है- नहीं नाउम्मीद इक़बाल अपनी कश्त-ए-वीरां से, ज़रा नम हो तो यह मिट्टी बड़ी ज़रख़ेज़ है साकी।

TFI जिंदाबाद जिंदाबाद

जय शिक्षक

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिन्दाबाद जिन्दाबाद! आदरणीय डा दिनेश चन्द्र शर्मा जिन्दाबाद जिन्दाबाद!! @DrDCSHARMAUPPSS @RRTRIPATHIUPPSS @ashutoshUPPSS @TFI4India @Jitendrdixit004

T FI जिंदाबाद, डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जिंदाबाद जिंदाबाद, उत्तर प्रदेशी प्राथमिक शिक्षक संघ जिंदाबाद जिंदाबाद

मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये । टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई । माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई । चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं । सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे । सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है । कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो । निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏