Prashant Singh

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Prashant Singh

@imprashant9876

Kanpur Katılım Ekim 2015
91 Takip Edilen39 Takipçiler
Gems
Gems@gemsofbabus_·
Top 10 Gutkha Eating States In India 🇮🇳.
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tweetsforupsc
tweetsforupsc@factsforupsc·
Make ur Mind Set ur Goal And Just give ur 100% Without any Second Thought Or Doubt 🔥🔥
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Palak Muchhal
Palak Muchhal@palakmuchhal3·
And 3000 LIVES SAVED! ♥️ Thank you for your prayers for Alok! The surgery went successfully and he is absolutely fine now! 🙏🏻 #SavingLittleHearts
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Ankit Kumar Avasthi
Ankit Kumar Avasthi@kaankit·
खिलाड़ी के तौर पर पसंद-नापसंद अपनी जगह लेकिन इस वीडियो में चैम्पियन खिलाड़ी ने बहुत ही कायदे की बात कही है। सुना जाए!
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Motivational Panktiyaan
Motivational Panktiyaan@mpanktiya·
Never give up 🏃‍♀
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Motivational Panktiyaan
Motivational Panktiyaan@mpanktiya·
किसी के लिए बुरा मत सोचो, सिर्फ अपना अच्छा सोचो।
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शब्दसार
शब्दसार@shabdsar·
"पढ़ोगे तो अपने भीतर के सन्नाटो से दो चार होओगे " twitter.com/MeriKhanii/sta…
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Awanish Sharan 🇮🇳
Awanish Sharan 🇮🇳@AwanishSharan·
How To Always Stay Motivated.
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Psyche Liberator | Improve Your Life
A mind with vast knowledge will outperform a mind with infinite resources.
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Prashant Singh
Prashant Singh@imprashant9876·
Interesting 👌👌
Vikash Mohta@VikashMohta_IND

इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है। विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) ■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग ■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग ■ 2 त्रुटि = 1 लव , ■ 1 लव = 1 क्षण ■ 30 क्षण = 1 विपल , ■ 60 विपल = 1 पल ■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) , ■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा ) ■3 होरा=1प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार) ■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) , ■ 7 दिवस = 1 सप्ताह ■ 4 सप्ताह = 1 माह , ■ 2 माह = 1 ऋतू ■ 6 ऋतू = 1 वर्ष , ■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी ■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी , ■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग ■ 2 युग = 1 द्वापर युग , ■ 3 युग = 1 त्रैता युग , ■ 4 युग = सतयुग ■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग ■ 72 महायुग = मनवन्तर , ■ 1000 महायुग = 1 कल्प ■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ ) ■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म ) ■ महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म ) सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यहीं है जो हमारे देश भारत में बना हुआ है। ये हमारा भारत जिस पर हमे गर्व होना चाहिये। दो लिंग : नर और नारी । दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)। दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन। तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी। तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल। तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण। तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु। तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत। तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा। तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव। तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी। तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान। तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना। तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं। तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति। चार धाम : बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका। चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार। चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। चार निति : साम, दाम, दंड, भेद। चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद। चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री। चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग। चार समय : सुबह, शाम, दिन, रात। चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा। चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु। चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर। चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज। चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्। चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास। चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य। चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन। पाँच तत्व : पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु। पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य। पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा। पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि। पाँच उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा। पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य। पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर। पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस। पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा। पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान। पाँच इन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन। पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)। पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक। पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी। छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर। छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष। छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान। छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य। सात छंद : गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती। सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि। सात सुर : षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद। सात चक्र : सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार। सात वार : रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि। सात मिट्टी : गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब। सात महाद्वीप : जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप। सात ॠषि : वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक। सात ॠषि : वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज

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