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Maya
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Maya
@mayaraj_97
News | Opinions | India 🇮🇳 समाज और राजनीति पर नजर बोलती वही हूँ जो सही लगता है Views are personal
India Katılım Aralık 2021
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इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
Atul Londhe Patil (INDIA Ka Parivar)🇮🇳@atullondhe
दो भारत बन रहा है 1. वंदे भारत वाला 2.सांस ना ले पाने के कारण घुटन से मरने वाला बाकी पॉजिटिव बातें करते रहिए 😐
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@dilipyadav8951 मिलावटखोरी करने वालों को कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए
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एक व्यक्ति ने अपनी मेहनत और सालों की कमाई लगाकर घर बनवाया। मकान लगभग तैयार होने पर उसने छत की ढलाई के लिए एक नामी ब्रांड का सीमेंट इस्तेमाल किया, क्योंकि उसे उस पर भरोसा था।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति बिगड़ने लगी। छत में बीच से दरारें दिखने लगीं और धीरे-धीरे वे बढ़ती चली गईं। इससे घर मालिक को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा और उसका सपना भी प्रभावित हुआ।
उसने संबंधित दुकान और डीलर से शिकायत की, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यहां तक कि गुणवत्ता को लेकर अलग-अलग बातें सामने आने लगीं, जिससे मामला और उलझ गया।
पीड़ित का कहना है कि जिस ब्रांड और सामग्री पर भरोसा करके उसने इतना बड़ा निवेश किया था, उसी में कमी के कारण उसे नुकसान उठाना पड़ा।
ऐसी घटनाएं आम उपभोक्ताओं के मन में बड़ा सवाल खड़ा करती हैं—आखिर वे किस पर भरोसा करें?
घर बनाना पहले ही बेहद महंगा और मेहनत भरा काम होता है, और अगर सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ जाए तो पूरा सपना टूटने जैसा महसूस होता है। 🏠💔
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@afjalrajguru @Rudhrayadav001 यह नियम मिडल बर्थ वालों के लिए लागू होता हैं
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@Rudhrayadav001 नियम तो यही कहता है ऊपर वाला व्यक्ति दिन में नीचे बैठेगा
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इस आदमी की गुंडई देखिए! 😡
एक यात्री ने ट्रेन में अपनी सीट विधिवत बुक करवाई थी। उसकी सीट नंबर 24 थी,
जबकि इस व्यक्ति की सीट नंबर 23 थी।
लेकिन जनाब ने दोनों सीटों पर कब्जा जमा रखा था और बार-बार कहने के बावजूद उठने का नाम नहीं ले रहे थे।
अब आप ही बताइए, जब कोई व्यक्ति दूसरे के अधिकार वाली सीट पर जबरन कब्जा करे और उसे बैठने तक न दे, तो इसे क्या कहा जाए?
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@Raushan72802441 @RailwaySeva @RailMinIndia @AshwiniVaishnaw @ECRlyHJP @Bihar_se_hai @kaankit @khuchrep @khurpenchh @BaatBiharKii @BiharTeacherCan भारतीय रेल की जवाबदेही तय होनी चाहिए
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रेलवे की गलत समय-सारणी और लगातार देरी की वजह से मेरा परीक्षा छूट गया। तैयारी मैंने की, टिकट मैंने लिया, लेकिन नुकसान आपकी लापरवाही से हुआ। अब मेरे भविष्य के साथ हुए इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? @RailwaySeva @RailMinIndia @AshwiniVaishnaw @ECRlyHJP



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@micchamasala रेलवे नियमों के अनुसार किसी महिला के पास टिकिट नहीं होने पर भी रात्रि के समय उसे बीच रास्ते में अकेले होने पर ट्रेन से नीचे नहीं उतारा जा सकता।
उपरोक्त केस में अगर लड़की को बीच रास्ते में उतारा गया है तो TTE के खिलाफ़ शख्त कार्यवाही होनी चाहिए!
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एक लड़की जल्दबाजी में ट्रेन का टिकट नहीं ले पाई। ट्रेन आने वाली थी, इसलिए वह बिना टिकट ही उसमें चढ़ गई।
कुछ देर बाद टीटीई टिकट चेक करने पहुंचा तो लड़की ने बताया कि उसके पास टिकट नहीं है और जुर्माना भरने के लिए भी पैसे नहीं हैं।
वायरल दावों के मुताबिक इसके बाद टीटीई ने उसे अगले स्टेशन पर उतार दिया। उस समय रात थी और तेज बारिश हो रही थी। लड़की अपना सामान लेकर प्लेटफॉर्म पर उतर गई, जबकि TTE ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा था।
बिना टिकट यात्रा करना गलत है और रेलवे के नियमों का पालन भी जरूरी है। अगर लड़की के पास पैसे नहीं थे तो उससे बाद में जुर्माना वसूला जा सकता था।
लेकिन रात के समय तेज बारिश के बीच एक युवा लड़की को ट्रेन से उतार देने का फैसला बिल्कुल संवेदनहीन लग रहा है।
नियम अपनी जगह हैं, लेकिन कई बार इंसानियत और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी होती है..!


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@micchamasala रेलवे नियमों के अनुसार किसी महिला के पास टिकिट नहीं होने पर भी रात्रि के समय उसे बीच रास्ते में अकेले होने पर ट्रेन से नीचे नहीं उतारा जा सकता... उपरोक्त केस में अगर लड़की को बीच रास्ते में उतारा गया है तो TTE के खिलाफ़ शख्त कार्यवाही होनी चाहिए!
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@askrajeshsahu ऐसा लगता हैं मंदिरों का निर्माण इन जैसे जाती विशेष के लोगो के विकाश के लिए ही हो रहा हैं!
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लवकुश मिश्रा 6 महीने पहले राम मंदिर में ड्यूटी करना शुरू किया। दान में आए पैसों को गिनने का काम मिला।
6 महीने में ही उसने अयोध्या में 40 लाख का प्लॉट लिया। उसपर निर्माण शुरू करवा दिया। घर में 10 लाख कैश मिला। इसके अलावा इसके बारे में अभी और खुलासा होना बाकी है।
अब आप सोचिए कोई व्यक्ति महज 6 महीने पहले मंदिर से जुड़ा और इतनी बड़ी चोरी कर गया। लवकुश के जैसे दर्जनों लोग हैं, कुछ और के बारे में भी पता चला कि उन्होंने करोड़ों के प्लॉट खरीदे हैं।
अभी तक न किसी के खिलाफ FIR हुई है और न ही मंदिर की तरफ से इस पूरे गबन पर अपनी बात कही गई। दान गिनती का सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट है। साल में एकात बार ये लोग बताते हैं। जबकि दूसरे मंदिर में इससे ज्यादा पारदर्शिता है।
इस पूरे मामले ने राम मंदिर की व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। इसके पहले ट्रस्ट ने जब जमीनें खरीदी थी तब भी ऐसे मामले सामने आए थे। कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

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@apna123neeraj इसको कोल्हू का बैल बोलते है पहले के समय में भैल की आंखों पर पट्टी बांध कर उन्हें कुएं से पानी निकालने के लिए गोल गोल घुमाया जाता था!
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* Article 370 abrogated. ✅
* Ram Mandir consecrated after 500 years of waiting. 🛕
* UPI became the world’s largest real-time payments system. 💳
* GST unified India. 📈
* Vande Bharat ushered in a new era of indigenous rail travel. 🚄
From long-pending aspirations to historic achievements, these 4,399 days reflects PM Modi’s committment to transforming India’s potential into progress.
#LongestServingElectedPMModi

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12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?
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सार्थक 18 साल का है - पर सोच, साहस और सिद्धांत में किसी से कम नहीं।
उसने और उसके साथी निसर्ग ने वो कर दिखाया जो देश के बड़े मीडिया हाउस, खोजी पत्रकार नहीं कर पाए - CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया।
मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा reels बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें, सवाल न पूछें, आँखें न खोलें। पर इन बच्चों ने सवाल भी पूछे। और जवाब भी ढूँढ निकाले।
देश का 18 साल का बच्चा CBI से तेज़ निकला - नौजवानों की ये जीत सही मायने में सरकार की हार है।
यही है भारत की असली युवा शक्ति - जिज्ञासु, जागरूक, जानकार। और याद रखिए, देश का भविष्य किसी बहकावे में नहीं आएगा।
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@voiceofshizu दलित, आदिवासियों का बीजेपी में कोई सम्मान नहीं
रंग भेद, जातिवाद और धार्मिक भेदभाव में बीजेपी दुनियां में सबसे आगे है
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ये हैं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन जी
जब JMM में थे तो
तो इनकी कुर्सी ठीक हेमंत सोरेन के बगल में लगती थी
JMM में हेमंत सोरेन के बाद कोई नेता था तो चंपई सोरेन जी थे
खुद हेमंत सोरेन अगर किसी से सलाह मशवरा करते थे तो चंपई सोरेन जी से करते थे
हेमंत सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन के बाद किसी को अभिभावक का दर्जा दिया तो चंपई सोरेन जी को दिया
जब हेमंत सोरेन जेल गए तो अपने परिवार में से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया बल्कि अपने अभिभावक चंपई सोरेन जी को मुख्यमंत्री का ताज देकर गए
मगर चंपई सोरेन जी को सम्मान पसंद नहीं आया
आज चंपई सोरेन जी BJP में है
BJP उन्हें भरपूर सम्मान दे रही है
वो अलग बात है कुर्सी नहीं मिली
बेचारे खड़े है

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लड़का - "यार, जब मैं PG या हॉस्टल से बाहर जाता हूँ तो हमेशा एक चिंता रहती है।"
दोस्त - "किस बात की?"
लड़का - "मेरे पीछे कोई कमरे में आया या नहीं, ये कैसे पता चले?"
दोस्त - "उसके लिए एक बहुत आसान ट्रिक है।"
लड़का - "क्या?"
दोस्त - "एक छोटा सा कागज लो और उसे मोड़ लो।"
लड़का - "फिर?"
दोस्त - "उसे दरवाजे और दरवाजे के फ्रेम के बीच उस जगह फंसा दो जहाँ दरवाजा बंद होने पर वह पूरी तरह छिप जाए।"
लड़का - "अच्छा..."
दोस्त - "अब कमरे को लॉक करो और आराम से कॉलेज, ऑफिस या छुट्टियों पर निकल जाओ।"
लड़का - "फिर वापस आकर क्या करना है?"
दोस्त - "दरवाजा खोलने से पहले सबसे पहले उस कागज को देखना।"
लड़का - "अगर कागज वहीं मिला तो?"
दोस्त - "मतलब तुम्हारी गैरमौजूदगी में किसी ने दरवाजा नहीं खोला।"
लड़का - "और अगर कागज नीचे गिरा हुआ मिला?"
दोस्त - "तो समझ जाओ कि किसी ने दरवाजा खोला था।"
लड़का - "लेकिन अगर कोई समझदार आदमी कागज उठाकर वापस रख दे तो?"
दोस्त - "उसका भी उपाय है।"
लड़का - "कैसे?"
दोस्त - "कागज के दोनों तरफ निशान लगा दो।"
लड़का - "फिर?"
दोस्त - "एक तरफ को Head और दूसरी तरफ को Tail मान लो।"
लड़का - "उससे क्या होगा?"
दोस्त - "याद रखो कि कौन सा हिस्सा दरवाजे को छू रहा था और कौन सा फ्रेम को।"
लड़का - "ओह..."
दोस्त - "और एक बात और।"
लड़का - "क्या?"
दोस्त - "कागज किस ऊंचाई पर लगाया था, यह भी याद रखना।"
लड़का - "मतलब अगर कोई वापस लगाएगा तो शायद सही दिशा और सही ऊंचाई पर नहीं लगा पाएगा?"
दोस्त - "बिल्कुल।"
लड़का - "यानी दरवाजा फिर से लॉक होने के बाद भी पता चल सकता है कि कोई अंदर आया था?"
दोस्त - "यही तो इस ट्रिक की खासियत है।"
लड़का - "ये ट्रिक सबसे ज्यादा कहाँ काम आएगी?"
दोस्त - "PG, हॉस्टल, किराए के फ्लैट, होटल रूम या तब जब तुम घर की चाबी किसी पड़ोसी को देकर बाहर गए हो।"
लड़का - "कमाल है, एक छोटे से कागज से इतना कुछ पता चल सकता है।"
दोस्त - "कई बार सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका सबसे आसान होता है।"



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