Aaradhya Nirmalkar retweetledi

Jai gurudev G 🙏🏻
जो व्यक्ति ध्यान नहीं करता, वह जान-बूझकर या अनजाने में आत्महत्या कर रहा है; क्योंकि जो व्यक्ति ध्यान नहीं करता, वह अपने जीवन में कभी अपनी आत्मा को खोज नहीं पाएगा।
वह अपनी चेतना को समझ नहीं सकेगा।
जिस व्यक्ति ने ध्यान के आनंद को नहीं जाना, वह केवल मृत्यु के चक्र में ही उलझा रहेगा। और मृत्यु के इस चक्र में जीवन का कोई सार नहीं है।
वह बस छोटी-छोटी बातों में लगा रहेगा, छोटी-छोटी चिंताओं और उलझनों में फँसा रहेगा।
वह क्षणिक और तुच्छ सुखों का ही उपभोग करता रहेगा।
यहाँ कोई मुक्ति नहीं है।
इसलिए जिसे तुम जीवन कहते हो, वह वास्तव में एक प्रकार की आत्महत्या ही है।
तुम यहाँ प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा मरते रहते हो।
तुम्हारा हर दिन बीतता जाता है और तुम्हारा जीवन घटता जाता है।
जितने दिन बीत गए, उतने ही अवसर भी हाथ से निकल गए।
उसी समय में तुम परमात्मा को प्राप्त कर सकते थे।
उसी समय में तुम्हें परमात्मा का साक्षात्कार हो सकता था।
तुम्हारे भीतर का शून्य समाप्त हो सकता था।
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि जो समय बीत गया है उसके लिए शोक करो।
बल्कि जो समय अभी शेष है, उसमें पूर्णता प्राप्त की जा सकती है।
अब इस बचे हुए समय को रोने-धोने में व्यर्थ मत गँवाओ।
क्योंकि जो सुबह भटक गया था और शाम को घर लौट आए, उसे भटका हुआ नहीं कहा जाता।
तुम्हारे जीवन का एक क्षण भी पर्याप्त है।
और तुम अभी जीवित हो — इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है?
रूपांतरण के लिए एक क्षण ही पर्याप्त है।
एक क्षण में संसार नष्ट हो सकता है।
बस तुम्हारे भीतर तीव्रता, संपूर्णता और प्रज्वलित आकांक्षा होनी चाहिए।

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