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पुराणों में श्रीमद्भागवत पुराण ७.११.३५ (नारद मुनि) का श्लोक: यस्य यल्लक्षणं प्रोक्तं पुंसो वर्णाभिव्यञ्जकम्। यदन्यत्रापि दृश्येत तत्तेनैव विनिर्दिशेत्॥ अर्थ: यदि किसी वर्ण के लक्षण (गुण-कर्म) दिखें, चाहे जन्म कहीं और हो, तो उसी वर्ण से पुकारो। जन्म आधारित नहीं। वज्रसूची उपनिषद में भी ब्राह्मणत्व जन्म से नहीं, ज्ञान-कर्म-गुण से बताया गया है। गरुड़ पुराण २१९:६-११ में भी यही भाव।


यही लड़की ब्राह्मणवाद जिंदाबाद के नारे लगा रही थी. मैं ज्यादा कुछ बोलूंगा तो विवाद हो जाएगा. लेकिन ज्ञान कितना है, कितनी किताबें पढ़ी हैं. सब इसी वीडियो में पता चल जाएगा. तमाम लोगों ने कहा मेघा लावरिया के पास ज्ञान ठीक ठाक होगा. मैंने कहा अधजल गगरी छलकत जाये. धैर्य रखिए धीरे-धीरे सारा सच बाहर आएगा. जय भीम #aisa #du #mauricenagarps #northdelhi #meghalavariya



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