RAMASHRAY YADAV

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RAMASHRAY YADAV

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@ramashrayy1981

Katılım Mayıs 2022
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Matin Shaikh
Matin Shaikh@Matinrshaikh·
@_KajalKushwaha जैसी तुम्हारी पोस्ट काल्पनिक है ? कुरआन और हदीस मे दीखा दो के उडनेवाला घोडा था ? मै सबुत के साथ दिखा सकता हु के 101 मटको से बच्चे पैदा हुवे थे . रावन के 10सर थे . सुरज की दो पत्निया है और बच्चे भी है . सबुत के साथ बात किया करो . कल्पना से निकलो बाहर.
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Kajal Kushwaha
Kajal Kushwaha@_KajalKushwaha·
मोहम्मद का घोड़ा उड़ता था। जीजस भी तीन दिन बाद फिर जिंदा हुए। गौतम बुद्ध भी 6 साल भूखा रहकर भी जिंदा रहे। सिर्फ़ रामायण महाभारत ही काल्पनिक है ?
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
यही सब कारण है कि किसी ईश्वर द्वारा माथे और हाथ पर लिखी लकीरों से घृणा होती है, बहुत दुखद एवं दुर्भाग्य पूर्ण।
Rajesh Sahu@askrajeshsahu

रॉविल और कल्पना…5 दिन पहले एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। जमकर डांस किया और सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने के वादे किए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दोनों सिर्फ 2 दिन ही साथ रह सके। पत्नी की हादसे में जान चली गई। शुक्रवार को पति रॉविल को अपनी दुल्हन कल्पना को मुखाग्नि देनी पड़ी। अंतिम संस्कार में कल्पना को शादी का लाल जोड़ा पहनाया गया। सोलह श्रृंगार किया गया। श्रृंगार करते वक्त रॉविल की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। दरअसल, शाहजहांपुर में गुरुवार दोपहर सड़क हादसे में दुल्हन कल्पना, उसकी ननद, बुआ और देवर की मौत हो गई थी। सोमवार को चारों का अंतिम संस्कार किया गया। गुरुवार को पगफेरे के बाद दुल्हन ससुराल आ रही थी, लेकिन रास्ते में एक टैंकर ने कार को टक्कर मार दी। दुल्हन कल्पना का सिर पूरी तरह कुचल गया। मांस के लोथड़े बाहर आ गए थे। उसकी चुनरी में मांस के टुकड़ों को समेटा गया।

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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
स्मार्ट सिटी तो बनने से रही, हां स्मार्ट मीटर अवश्य बन गया गरीबों के छाती पर मूंग दरने के लिए
Rahul Saini@JtrahulSaini

"स्मार्ट मीटर हाथ में है.."मेरी स्मार्टत देख लो..पतलून में खड़ा हूं.."बच्चों को पढ़ाऊं लिखाऊँ पेट पालू की बिजली बिल भरू"...! अलीगढ़ के श्याम बाबू को सुनिए....👇👇👇 श्यामबाबू कहते हैं साहब बड़ी दिक्कत है..हमे पता ही नहीं चल पाता कि कब ये स्मार्ट मीटर हमारी छाती पर चढ़ गया..! क्या योगी बाबा को हम इसलिए लाए थे कि हमारे साथ ऐसा अन्याय करेंगे...समूचे यूपी में स्मार्ट मीटर का विरोध तेज हो गया है..! क्या लगता है सरकार बैक फुट पर आएगी...चुनाव से पहले अपने ओवर स्मार्ट मीटर वापस लेगी..?

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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@ews_army हा हा हा , मूर्ख बना दिया आप को।
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EWS ARMY
EWS ARMY@ews_army·
मुस्लिम अपने धर्म के प्रति कितना ईमानदार है मैं अपना अनुभव बताता हूं। मैं हार्डकोर मांसाहारी व्यक्ति हूं। पहले झटका और हलाल मीट में विश्वास नहीं करता था। फिर भी फिलोसोफर की तरह एक अनुभव लेने गया, मैंने 1 किलो चिकन लिया, जो चिकन बेचता था वह गरीब था। मैंने उसके पास इतना कहा कि तुम इसे हलाल मत करो एक बार में झटका करके दो, उसके बदले मैंने उसे ₹500 रुपये एक्स्ट्रा देने का प्रलोभन दिया, यकीन मानिए उन्होंने गरीब होकर 500 रुपया को ठुकरा दिया लेकिन अपने ईमान से समझौता नहीं किया। तभी मुझे समझ में आ गया इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा दूसरा धर्म क्यों है। इस बात को समझिए यह धर्म इतना मजबूत है कि ₹500 में एक गरीब बंदा भी अपने धर्म के सिद्धांत से समझौता नहीं करता है। आपके यहां 5 किलो अनाज पर परिवर्तन कर लेता है। अगर आप यह कहते हैं कि इस्लाम ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करके फैलाया यह भी गलत है।
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@khurpenchh हा हा हा, आबादी बढ़ने पर सांसद, विधायक बढ़ाएं जाएंगे, उसके लिए माननीय रोड जाम करते हुए हो हल्ला मचाएंगे।रोड अस्पताल, स्कूल, नौकरी बढ़ाने की क्या जरूरत। इन्हें ऐसे ही रहना है।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
आपका नाम बृजेश पाठक है , आप उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं , आपने 2004 से लेकर 2016 तक बहुजन समाजवादी पार्टी से सत्ता के गलियारों में धूम धड़ाम किया , लेकिन मौसम बदलते ही 2016 में भाजपा के पाले में आ गए , 2022 विधानसभा चुनाव के बाद ब्राह्मणों के समीकरण को साधते हुए आपको उप मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई , आपकी PR टीम जबरदस्त है ,आप कैमरे की उपस्थिति में औचक निरीक्षण करने और ब्राह्मण महासभाएं संबोधित करने के लिए जाने जाते हैं, झांसी में NICU में 10 नवजात बच्चों की मृत्यु हो गई थी लेकिन अधिकारी गण आपके औचक निरीक्षण के लिए चूना डालकर आपके स्वागत की तैयारी कर रहे थे ,आप बीच सड़क पर ट्रैफिक जाम करवा कर स्वागत करवाने के लिए जाने जाते हैं , ये होती है राजा वाली क्वालिटी , अस्पतालों में लाइने लगी हैं,लेकिन राजा साहब का PR कार्यक्रम चलता रहना चाहिए, ये कर सको तो समझो राजा हो ।
खुरपेंच tweet media
खुरपेंच@khurpenchh

मैं उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जी को चैलेंज देता हूँ कि आप आम आदमी बनकर प्रदेश के किसी भी बड़े अस्पताल में बिना सोर्स सिफारिश के पेशेंट को एडमिट करके दिखा दीजिए, मैं आपके पूरे दिन का डीज़ल और खाने पीने का खर्चा उठाने के लिए तैयार हूं।

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EWS ARMY
EWS ARMY@ews_army·
देश में कई लेजेंड प्रधानमंत्री हुए हैं Jawaharlal Nehru को IITs , ISRO, परमाणु ऊर्जा संस्थान (BARC), IIM, AIIMS के लिए याद किया जाता है। Indira Gandhi को पाकिस्तान को दो हिस्सों में बाँटने के लिए और बैंकों को राष्ट्रीयकरण के याद किया जाता है. Rajiv Gandhi को कंप्यूटर क्रांति के लिए याद किया जाता है।। तो आपके हिसाब Narendra Modi को किस चीज़ के लिए याद किया जाएगा??
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खुरपेंची स्वास्थ्य
यह सिर्फ़ एक मेडिकल मुद्दा नहीं है। यह लाखों माताओं के दर्द, डर और मजबूरी का सवाल है। यह उन नवजात बच्चों की ज़िंदगी का सवाल है, जो इस दुनिया में आते ही एक ऐसे सिस्टम के बीच फँस जाते हैं जहाँ इलाज से पहले कमाई देखी जाती है। डिफेंस हॉस्पिटल और सिविल हॉस्पिटल के बीच फर्क डॉक्टरों की योग्यता का नहीं, सिस्टम की नीयत का है। ARMY, NAVY, AIRFORCE के अस्पतालों में लगभग 90% बच्चे नॉर्मल डिलीवरी से जन्म लेते हैं, क्योंकि वहाँ डॉक्टर पर किसी टारगेट, कमीशन, पैकेज या सर्जरी कोटा का दबाव नहीं होता। वहाँ डॉक्टर सिर्फ़ एक बात सोचता है... मां सुरक्षित रहे, बच्चा स्वस्थ रहे। लेकिन सिविल सोसाइटी में तस्वीर उलटी है। कई जगह 60–70% तक डिलीवरी सिजेरियन से कराई जा रही है। सवाल है ... क्या सच में इतनी माताओं को ऑपरेशन की जरूरत होती है? या फिर जरूरत किसी और चीज़ की होती है ... हॉस्पिटल की कमाई की? जब एक नॉर्मल डिलीवरी से हॉस्पिटल को कम पैसा मिलता है , और सिजेरियन से ₹50,000 से ₹1,00,000 या उससे भी ज़्यादा, तो फिर इंसानियत और बिज़नेस के बीच की लड़ाई शुरू हो जाती है। और दुख की बात यह है कि इस लड़ाई में अक्सर हार मां की होती है। हर सिजेरियन गलत नहीं होता। कई बार यह मां और बच्चे की जान बचाने के लिए जरूरी होता है। लेकिन जो डिलीवरी सामान्य रूप से हो सकती है, उसे भी डर, जल्दबाज़ी, या कमाई के लिए ऑपरेशन में बदल देना सिर्फ़ अनैतिक नहीं, अमानवीय है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि कई डॉक्टर भी इस खेल के हिस्सेदार कम, शिकार ज़्यादा होते हैं। उन पर हर महीने revenue target, OT filling, surgery quota और billing pressure डाला जाता है। यानी जिस पेशे का आधार सेवा होना चाहिए था, उसे धीरे-धीरे sales job बना दिया गया है। कोरोना लॉकडाउन ने इस सच की एक झलक भी दिखाई। जब लोग अस्पतालों तक नहीं पहुँच पा रहे थे, तब हजारों महिलाओं ने घर पर या न्यूनतम मेडिकल सहायता के साथ नॉर्मल डिलीवरी की। वही मांएँ, वही शरीर, वही प्रकृति .... लेकिन अस्पताल पहुँचते ही कई जगह पहला वाक्य होता है 👇 “ऑपरेशन करना पड़ेगा।” यही वह जगह है जहाँ सवाल उठते हैं। क्या हर बार ऑपरेशन सच में जरूरी था? या सिस्टम ने मातृत्व को भी कमाई का पैकेज बना दिया है? यह सिर्फ़ हेल्थकेयर की खामी नहीं है। यह एक ऐसी संगठित व्यवस्था का चेहरा है जहाँ मरीज सबसे कमजोर कड़ी है। एक गर्भवती महिला, जो पहले ही डर, दर्द और चिंता में होती है, उससे कहा जाता है कि “बच्चे की जान का सवाल है” ... और उस हालत में वह बहस नहीं कर सकती, बस हामी भर देती है। यही इस सिस्टम की सबसे बड़ी क्रूरता है।
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Dr. Om Sudha
Dr. Om Sudha@dromsudhaa·
एंबुलेंस को रास्ता देने वाला स्क्रिप्ट में कुछ चेंज होना चाहिए।
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खुचरेंप
खुचरेंप@khuchrep·
>स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे, >बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं, >ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है, >ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था। >1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था > मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था >लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था >दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था। "दरअसल इन सबके बारे में सिस्टम को पता होता है, बस भ्रष्टाचार की वजह से चलता रहता है। जब पकड़े जाते हैं तब सबकुछ सामने आता है।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
हाइयर ज्यूडिशियरी के जजों का जीवन >भाई भतीजावाद की सीढ़ी चढ़कर जज बनो >सर पर बरतानिया हुकूमत वाली टोपी पहन कर शपथ लो >कांख में अंग्रेजी किताबें फंसा कर सेमिनारों में दिस डैट करो >विधायिका और कार्यपालिका के कामों में टांग अड़ाओ >दुनिया भर को मोरालिटी पर ज्ञान पेलो >हर चीज में रिफॉर्म की बात करो लेकिन जब खुद की बात आए तो उसको ज्यूडिशियरी पर हमला बताओ >जब कोई आपसे सवाल पूछे तो तुरंत कंटेंप्ट लगाओ >देश भर में अपराधियों को सजा दो >लेकिन जब खुद को सजा मिलने वाली हो तो इस्तीफा देकर मस्त टैक्स के पैसों से रिटायरमेंट के मजे लो।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
पूरे देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति बचा होगा जिसने कैंसर जैसी बीमारी को नजदीक से न देखा हो , क्या नेता क्या अभिनेता कोई इससे बचा नहीं है, इसके अलावा तमाम ऐसे डिसऑर्डर्स हैं जिनसे लोग डेली बेसिस में जूझ रहे हैं, डॉक्टर्स से आप कारण पूछेंगे तो वो आपको लाइफस्टाइल बोल कर आगे बढ़ जायेंगे, आज के समय में हर कोई व्यक्ति स्वयं के लिए सारे सामान नहीं बना सकते , सुबह दांतों की सफाई से लेकर रात में कुल्ला करके सोने तक हम फैक्टरीज द्वारा बनाई गई पैकेज्ड चीजों पर निर्भर हैं और हर चीज पर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स दे रहे हैं, हम इस भरोसे पर चल रहे हैं कि इतना टैक्स देने के बाद सरकार द्वारा संचालित एजेंसियां अपना काम बखूबी कर रही हैं और हम सही चीज़ें कंज्यूम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं , हम इस मामले में पूरी दुनिया से काफी पीछे हैं, पूरे देश में मिलावट चरम पर है, जो भी चीजें हम सुबह से शाम तक इस्तेमाल करते हैं ,उनमें प्रिजर्वेटिव्स से लेकर खराब और खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है, कुछ ब्रांडेड प्रोडक्ट्स को छोड़ दे तो हालत बहुत खराब है , ये काम धड़ल्ले से चल रहा है और रोज बढ़ रहा है , जहां दुनिया के कई देशों में एजेंसियां बहुत सजग होकर काम कर रही हैं, बेहतरीन से बेहतरीन गाइडलाइंस और पैरामीटर्स बना रही हैं और टेक्नोजिकली बहुत एडवांस्ड हैं,वहां FSSAI जैसी एजेंसियां केवल लाइसेंस देने में और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं , आप और हम क्या बीमार होने का इंतजार कर रहे हैं? इस मामले में हम सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए , खुद बीमार होने का इंतजार न करें। @fssaiindia
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Akshay Yadav
Akshay Yadav@Akshay_Yadav22·
सपा के जितने भी नेता, विधायक, सांसद हैं एक-दो को छोड़ दें तो ज़्यादातर किसी काम के नहीं हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में एक इमरजेंसी बेड की सख्त जरूरत है, लेकिन अफसोस… कोई भी नेता, कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सामने आया हो? जब वोट चाहिए होता है तब सब याद आते हैं, लेकिन जब कार्यकर्ताओं पर बात आती है तब कोई नहीं आता। हमने हमेशा पार्टी का साथ दिया, हर वक्त खड़े रहे… लेकिन आज आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है। 🙏 हाथ जोड़कर अपील है अगर किसी के पास कोई संपर्क हो, या कोई मदद कर सकता हो, तो तुरंत आगे आए… एक जिंदगी का सवाल है। और नेताओं से बस इतना कहना है अगर मुश्किल में जनता के काम नहीं आ सकते, तो फिर इस पद का क्या मतलब?
Akshay Yadav tweet mediaAkshay Yadav tweet media
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@BhanuNand पानी तो रिंकू सिंह के पिता जी भी पिए थे, अब इस दुनिया में नहीं हैं, विनम्र श्रद्धांजलि
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Bhanu Nand
Bhanu Nand@BhanuNand·
अब प्रेमानंद जी बिल्कुल सही हो जाएंगे मनौना वाले बाबा ने जल फूंक कर दे दिया है आपको क्या लगता है इनके दिए हुए जल से प्रेमानंद जी की किडनी सही हो जाएंगी?
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
शायद प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते मोदी जी
दे भचीड़@PropagandaRaid

भाई मैं कसम खा के कह रहा हूं यह video जिसने भी बनाई है उसके 15 लाख तो मैं पर्सनली करवाऊंगा @UzmaParveen94 @Aazma30 @Afsarali190 @_Sweet_Parul_ #जय_श्री_राम #जवान_विरोधी_ModiShah #Ramayana

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रावण
रावण@raavan_india·
पिछले 24 घंटे से FSSAI ऑल इंडिया ट्रेंडिंग लिस्ट में ट्रेंड कर रहा है और खुरपेंच FIR के मुद्दे पर 1 लाख से अधिक ट्वीट्स हो चुके हैं और लगातार हो रहे हैं। ये दिखाता है कि जनता की आवाज खुरपेंच की कमान खुद जनता ने संभाल ली है। आप सभी का धन्यवाद, आगे भी इसी मजबूती से भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले रहेंगे। जय हिंद 🙏 🇮🇳
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रावण
रावण@raavan_india·
कौन है "खुरपेंच" ?? सुनो बे भ्रष्टाचारियों ध्यान से जो भ्रष्ट सिस्टम की पोल खोल दे वो "खुरपेंच " जो रिश्वतखोर अफसरों की नींद उड़ा दे वो "खुरपेंच" जो गरीब असहाय लोगों की आवाज बने वो "खुरपेंच" जो फेक सर्टिफिकेट वालों को नंगा कर दे वो "खुरपेंच" असल में "खुरपेंच"वह मशाल है ,जो देश में फैले हर तरीके के फर्जीवाड़े की दुकान को जलाकर राख कर देगी , चाहे वह सरकार हो , ढोंगी पाखंडी बाबा मौलवी हो या कोई रिश्वत खोर अधिकारी कोई बचेगा नहीं , बारी बारी सबका नंबर आयेगा। #I_Stand_With_Khurpenchh #FSSAI
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@askshivanisahu मेरी भी तीन महीने में ही खराब हो गई
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Shivani Sahu
Shivani Sahu@askshivanisahu·
आप कोई भी साईकिल खरीदिए, 1 साल से पहले तो उसका पहिया खराब ही नहीं होगा। लेकिन अगर यही साइकिल नेता जी लोग दिए हों तो यह 500 मीटर चलने पर ही खराब हो जाती है. जी हां, ये साइकिल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी थी। ये स्थिति देखने के बाद अफसर कह रहे हैं, गारंटी में है, बदल देंगे.
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@PuVVNLHQ @madhesiya @UPPCLLKO @aksharmaBharat आप की पॉलिसी गरीबों को अंधेरे में रहने को विवश करेगी ही सक्षम भी इससे नहीं बच पाएंगे। यूपी पुलिस की तरह सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही वाला दो लाइन x पर लिख कुंभकर्णी नीद में सो जाएंगे
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Purvanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited
@madhesiya @UPPCLLKO @aksharmaBharat महोदय, हम आप के मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं कर पा रहे है ,कृपया सोशल मीडिया सेल, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा प्राप्त होने वाली कॉल का उत्तर दें। #1912PuVVNL100326
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Rajesh Gupta
Rajesh Gupta@madhesiya·
स्मार्ट मीटर का कमाल 411 रु बिल बकाया पर लाइट बंद ऊपर कही भी ऑनलाइन बिल जमा भी नहीं हो रहा है इसका उपाय बताएं 2 दिन लाइट बंद है @PuVVNLHQ @UPPCLLKO @aksharmaBharat मो 8858888083
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